डेस्क – ब्रिटेन के डर्बी शहर में 2023 में एक कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान बड़ी हिंसा हुई थी। यह खेल का आयोजन अल्वास्टन इलाके में हुआ था, जहां दो गुटों के बीच झड़प हो गई। हथियारों का इस्तेमाल हुआ, गोली चलने की खबरें आईं और कई लोग घायल हो गए। इस घटना ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया था। अब दो साल बाद, 19 दिसंबर 2025 को डर्बी क्राउन कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया। भारतीय मूल के तीन लोगों को हिंसक व्यवहार और हथियार रखने के आरोप में जेल की सजा दी गई। कुल मिलाकर उन्हें 11 साल से ज्यादा की सजा हुई। पहले 2024 में सात अन्य लोगों को भी सजा हो चुकी है। इस लेख में हम पूरी घटना, कोर्ट के फैसले और सबक की बात करेंगे। सरल भाषा में लिखा है, ताकि सभी आसानी से समझ सकें।
घटना क्या हुई थी?
20 अगस्त 2023 को डर्बी के अल्वास्टन में कबड्डी टूर्नामेंट चल रहा था। हजारों लोग, बच्चे और परिवार देखने आए थे। अचानक दो गुटों के बीच लड़ाई शुरू हो गई। पुलिस को शाम करीब 4 बजे कॉल आई कि गोली चली है और लोग हथियारों से लड़ रहे हैं। जांच में पता चला कि यह लड़ाई पहले से प्लान की गई थी। एक गुट ब्रंसविक स्ट्रीट पर मिला था। हथियारों में चाकू, माचेट (बड़ी तलवार जैसी), बंदूकें और बल्ले शामिल थे। कई लोग घायल हुए। पुलिस ने वीडियो फुटेज, ड्रोन इमेज और गवाहों से सबूत इकट्ठे किए। यह घटना ब्रिटेन की पंजाबी कम्युनिटी के लिए शर्मनाक थी, क्योंकि कबड्डी उनका पॉपुलर खेल है।
कोर्ट का फैसला और सजाएं
नवंबर 2025 में ट्रायल हुआ, जहां तीन लोग दोषी पाए गए। वे सभी आरोपों से इनकार कर रहे थे, लेकिन वीडियो सबूतों से बच नहीं सके। 19 दिसंबर को सजा सुनाई गई। कुल सजा 11 साल से ज्यादा। दो अन्य लोग ट्रायल में थे, लेकिन बरी हो गए। पुलिस ने कहा कि बूटा सिंह को घटना के समय हथियार नहीं दिखा, लेकिन उनकी कार से दो माचेट मिले। दमनजीत और राजविंदर को वीडियो में बड़े चाकू लहराते देखा गया।
पहले की सजाएं और जांच की बातें
यह पहला फैसला नहीं है। 2024 में इसी घटना से जुड़े सात अन्य भारतीय मूल के लोग जेल गए थे। वे भी हिंसक व्यवहार और हथियारों के आरोप में दोषी थे। कुल मिलाकर 10 लोग सजा पा चुके हैं। पुलिस जांच के प्रमुख डिटेक्टिव चीफ इंस्पेक्टर मैट क्रूम ने कहा, “यह एक खुशी का दिन होना चाहिए था, लेकिन हिंसा ने सब खराब कर दिया। कई लोग घायल हुए और समुदाय डरा हुआ था।” जांच में सैकड़ों पुलिसवालों ने काम किया। वजह का पता नहीं चला, लेकिन कुछ ने ‘इज्जत’ (सम्मान) का जिक्र किया।
घटना के बाद के प्रभाव
यह हिंसा सिर्फ टूर्नामेंट तक नहीं रुकी। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि इससे एक लंबी दुश्मनी चली, जो अगले दिन एक डीपीडी डिलीवरी ड्राइवर की हत्या तक पहुंची। लेकिन मुख्य केस कबड्डी हिंसा का है। ब्रिटेन की पंजाबी कम्युनिटी ने इस घटना से सबक लिया। अगले टूर्नामेंट बिना किसी समस्या के हुए। पुलिस ने कम्युनिटी से सहयोग की तारीफ की। यह घटना दिखाती है कि छोटी बातें कैसे बड़ी हिंसा बन जाती हैं। बच्चों और परिवारों के सामने ऐसा होना बहुत गलत था।
पुलिस और कोर्ट की टिप्पणी
जज ने कहा कि यह ‘मध्ययुगीन लड़ाई’ जैसा था। अभियोजक ने बताया कि सभी दोषी सक्रिय थे और प्री-मीटिंग में शामिल थे। पुलिस अधिकारी ने कहा, “ऐसे आयोजनों में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” दमनजीत सिंह को डिपोर्टेशन (देश निकाला) का भी सामना करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष :
डर्बी कबड्डी टूर्नामेंट की यह हिंसा एक दुखद घटना थी, जो दिखाती है कि खेल का मजा कैसे नफरत में बदल सकता है। कोर्ट ने सख्त सजा देकर सही संदेश दिया कि हिंसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। भारतीय मूल के लोगों के लिए यह शर्म की बात है, लेकिन ज्यादातर कम्युनिटी शांतिप्रिय है और अच्छा काम करती है। हमें सीखना चाहिए कि पुरानी दुश्मनी को खेल के मैदान पर न लाएं। समुदाय को एकजुट होकर ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए। कानून का सम्मान करें, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। न्याय मिलना अच्छी बात है, लेकिन पीड़ितों और घायलों के लिए दुख बना रहेगा। उम्मीद है, आगे कबड्डी सिर्फ खेल का मजा देगी।



