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पटना के शंभू हॉस्टल में थर्ड फ्लोर पर था अय्याशी का अड्डा, NEET छात्रा मामले में बड़ा खुलासा

Shambhu Hostel Case: कोचिंग हब पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत ने जहां पूरे शहर को झकझोर दिया है, वहीं जांच में हर दिन नए-नए चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस की जांच में पता चला है कि हॉस्टल की आड़ में यहां कई काले कारनामे चल रहे थे। गिरफ्तार हॉस्टल संचालक मनीष रंजन उर्फ मनीष चंद्रवंशी पर आरोप लगाया गया है कि वह हॉस्टल के तीसरे फ्लोर का इस्तेमाल अवैध और गंदे कामों के लिए करता था। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस हॉस्टल से रसूखदारों को लड़कियां सप्लाई की जाती थीं। फिलहाल हॉस्टल की मालकिन नीलम अग्रवाल और उसके दो बेटे फरार चल रहे हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

पटना के कंकड़बाग इलाके में स्थित इस हॉस्टल में 5 जनवरी को जहानाबाद की एक नीट छात्रा अपने घर से लौटी थी। अगले ही दिन 6 जनवरी को वह संदिग्ध परिस्थितियों में घायल पाई गई और लगभग पांच दिनों तक जीवन-मृत्यु से जूझने के बाद 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। शुरुआत में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताने की कोशिश की, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और छात्रा के शरीर पर मिले चोट के निशानों ने पूरी कहानी बदल दी। अब यह साफ हो गया है कि यह कोई आत्महत्या नहीं बल्कि एक गंभीर आपराधिक वारदात है।

मनीष रंजन का संदिग्ध इतिहास और तीसरे फ्लोर का राज

शंभू गर्ल्स हॉस्टल चलाने वाले मनीष रंजन उर्फ मनीष चंद्रवंशी के आपराधिक इतिहास और उसकी संदिग्ध गतिविधियों ने पुलिस जांच में नया मोड़ ला दिया है। जांच में पता चला है कि मनीष हॉस्टल की बिल्डिंग के ऊपरी तल्ले पर रहता था, जहां कथित तौर पर संदिग्ध गतिविधियां चलती थीं। हॉस्टल की मालकिन नीलम अग्रवाल अपने दो बेटों के साथ इसी मकान में रहती थीं।

नीलम के पति शंभू अग्रवाल का देहांत हो चुका है और उन्हीं के नाम पर यह हॉस्टल चलाया जा रहा था। नीलम ने केयरटेकर के रूप में नीतू नाम की एक महिला को नियुक्त कर रखा था। घटना के दिन बेहोशी की हालत में छात्रा को लेकर अस्पताल जाने वाली यही नीतू थी। घटना के बाद से नीलम अग्रवाल और उनके दोनों बेटों का कोई सुराग नहीं मिल रहा है।

पुलिस की जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। 5 जनवरी को जब छात्रा जहानाबाद से पटना आ रही थी, उसी समय मनीष रंजन का मोबाइल लोकेशन भी उसी रूट पर था। यह या तो किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है या फिर महज एक संयोग हो सकता है। पुलिस इस कोण से भी जांच कर रही है।

पुलिस की तलाश में मैडम अग्रवाल और उसके बेटे

घटना के दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी पुलिस नीलम अग्रवाल और उसके बेटों तक नहीं पहुंच सकी है। पुलिस ने कई जगहों पर छापेमारी की है लेकिन अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, नीलम और उसके बेटों के फरार होने से यह संदेह और गहरा हो गया है कि इस मामले में कुछ बड़ी साजिश है।

पुलिस ने उनके रिश्तेदारों और जानने वालों से भी पूछताछ की है। उनके बैंक खातों की निगरानी की जा रही है और उनके मोबाइल नंबरों की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश चल रही है। पुलिस का मानना है कि जल्द ही वे इन फरार आरोपियों तक पहुंच जाएंगे।

पटना के अवैध हॉस्टलों पर उठे सवाल

इस कांड ने पटना में अवैध रूप से चल रहे सैकड़ों गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्राओं ने बताया कि पिछले तीन सालों में किसी भी सरकारी एजेंसी ने हॉस्टल की सुरक्षा या सुविधाओं की जांच नहीं की। बिना किसी निश्चित प्रोटोकॉल के चल रहे इन हॉस्टलों में सुरक्षा गार्ड तक नहीं हैं।

हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों ने बताया कि बाहर असामाजिक तत्व उन्हें परेशान करते हैं और फब्तियां कसते हैं। लेकिन हॉस्टल प्रबंधन की ओर से कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। कई छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया है कि हॉस्टल में अजनबी लोगों का आना-जाना लगा रहता था, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक था।

पटना में नीट और आईआईटी की तैयारी करने वाले हजारों छात्र-छात्राएं रहते हैं। इनमें से अधिकतर बाहर के शहरों और राज्यों से आते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की बनती है, लेकिन यह मामला बताता है कि प्रशासन की ओर से कितनी लापरवाही बरती जा रही है।

SIT की जांच और अस्पतालों की पड़ताल

नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। एसआईटी की टीम राजेंद्रनगर स्थित प्रभात मेमोरियल हीरामती हॉस्पिटल पहुंची और छात्रा के भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज तक के सभी दस्तावेजों को जब्त कर लिया। पुलिस अब विशेषज्ञों के जरिए डॉक्टरों के इलाज के तरीकों की जांच कराएगी।

पूछताछ के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि 6 जनवरी को छात्रा को बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था। इससे पहले उसका प्रारंभिक उपचार सहज अस्पताल में हुआ था, जहां आईसीयू की सुविधा न होने के कारण उसे रेफर किया गया था। एसआईटी ने दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों से घंटों पूछताछ की है।

फोरेंसिक टीम (FSL) ने छात्रा के कमरे से महत्वपूर्ण साक्ष्य और नमूने एकत्र किए हैं। छात्रा के कपड़ों को विस्तृत जांच के लिए लैब भेजा गया है। पुलिस अब मृतका के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और छात्रा की मेडिकल रिपोर्ट के बीच कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

Shambhu Hostel Case: मानवाधिकार आयोग में याचिका

Shambhu Hostel Case: People taking out a candle march
Shambhu Hostel Case: People taking out a candle march

यह मामला अब राष्ट्रीय एवं बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। मुजफ्फरपुर के मानवाधिकार अधिवक्ता सुबोध कुमार झा ने इस संबंध में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। इसके साथ ही उन्होंने पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र लिखकर इस मामले में निष्पक्ष न्याय की गुहार लगाई है।

अधिवक्ता एसके झा का आरोप है कि छात्रा के शरीर पर मौजूद चोट के निशान और घटनास्थल की परिस्थितियां इस ओर इशारा करती हैं कि यह एक गंभीर अपराध है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि किसी रसूखदार आरोपी को बचाने के लिए इस आपराधिक वारदात को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई है।

याचिका में कहा गया है कि जांच में लापरवाही बरतना या सच्चाई को छुपाना एक दंडनीय अपराध है। अधिवक्ता ने जोर देकर कहा कि सभ्य समाज में बेटियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इस जघन्य मामले की तह तक जाकर दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

यह मामला अब राजनीतिक और सामाजिक रूप से काफी तूल पकड़ चुका है। विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर पटना जैसे शहर में कोचिंग हब के नाम पर कैसे अवैध गतिविधियां चल रही हैं। छात्राओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की लापरवाही पर कड़े सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पूरे मामले में न्याय मिलने तक जनता और मीडिया की नजर बनी रहेगी।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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