https://whatsapp.com/channel/0029VajZKpiKWEKiaaMk4U3l

Top 5 This Week

Related Posts

बिहार में 17 हजार पूर्व सैनिकों की होगी सीधी भर्ती, CM नीतीश का बड़ा फैसला, अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी मिलेगा मौका

Bihar News: बिहार में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य सरकार बिहार स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस यानी एसएपी में करीब 17 हजार पदों पर पूर्व सैनिकों की सीधी भर्ती करने जा रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार पहली बार अर्धसैनिक बलों से सेवानिवृत्त हुए जवानों को भी इस भर्ती में शामिल किया जाएगा। कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है और अब गृह विभाग ने भर्ती प्रक्रिया तेज कर दी है। इस फैसले से न केवल पुलिस बल मजबूत होगा बल्कि हजारों पूर्व सैनिकों को रोजगार का अवसर भी मिलेगा। आइए विस्तार से जानते हैं इस योजना के हर पहलू के बारे में।

क्या है बिहार स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस?

Bihar News: Bihar CM Nitish Kumar
Bihar News: Bihar CM Nitish Kumar

बिहार स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस यानी एसएपी राज्य की एक विशेष पुलिस इकाई है जो मुख्य रूप से कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद करती है। यह इकाई खासतौर पर पूर्व सैनिकों को रोजगार देने और उनके अनुभव का फायदा उठाने के उद्देश्य से बनाई गई थी।

एसएपी के जवानों को संवैधानिक तरीके से कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर नियुक्त किया जाता है। ये जवान नियमित पुलिस बल के साथ मिलकर काम करते हैं और विशेष परिस्थितियों में तैनात किए जाते हैं। चुनाव के दौरान, धार्मिक आयोजनों में, बड़े कार्यक्रमों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था की चुनौतीपूर्ण स्थितियों में इन जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

इन जवानों को सैन्य प्रशिक्षण मिला हुआ होता है इसलिए ये अनुशासित और कुशल तरीके से काम करते हैं। उनकी उपस्थिति से नियमित पुलिस बल को भी मदद मिलती है।

पहले केवल सेना के जवानों को मिलता था मौका

अब तक बिहार स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस में केवल भारतीय सेना यानी आर्मी, नेवी और एयरफोर्स से रिटायर्ड या सेवामुक्त हुए जवानों को ही भर्ती किया जाता था। सेना में अपनी सेवाएं पूरी करने के बाद जब जवान रिटायर होते थे, तो उन्हें बिहार एसएपी में नौकरी का मौका मिलता था।

लेकिन अर्धसैनिक बलों जैसे सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी और आईटीबीपी में काम करने वाले जवानों को यह सुविधा नहीं मिलती थी। ये जवान भी देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं और इन्हें भी उतना ही प्रशिक्षण मिलता है जितना सेना के जवानों को।

अब पहली बार नीतीश सरकार ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया है कि अर्धसैनिक बलों से सेवानिवृत्त हुए कर्मियों को भी एसएपी में सीधे भर्ती का मौका दिया जाएगा। यह फैसला हजारों पूर्व अर्धसैनिक जवानों के लिए बड़ी राहत है जो रिटायरमेंट के बाद रोजगार की तलाश में रहते हैं।

17 हजार पदों पर होगी भर्ती

गृह विभाग के अनुसार इस बार कुल 17 हजार पदों पर भर्ती की जाएगी। यह बिहार पुलिस के इतिहास में पूर्व सैनिकों की एक साथ सबसे बड़ी भर्ती होगी। इन 17 हजार पदों में अलग-अलग रैंक के जवान शामिल होंगे।

विभाग की योजना के मुताबिक इनमें लगभग 150 अधिकारी रैंक के पद होंगे। ये जूनियर कमीशंड ऑफिसर यानी जेसीओ कैटेगरी के होंगे जिनमें सूबेदार, नायब सूबेदार जैसे रैंक के अनुभवी लोग शामिल होंगे।

करीब 16,300 पद सामान्य एसएपी जवानों के होंगे। ये वे लोग होंगे जो सेना या अर्धसैनिक बलों में सिपाही, लांस नायक, नायक जैसे पदों पर काम कर चुके हैं।

इसके अलावा लगभग 550 अन्य पद भी होंगे जिनमें तकनीकी और सहायक कर्मचारी शामिल होंगे। ये सभी मिलाकर कुल 17 हजार के आसपास पद बनते हैं।

यह भर्ती बिहार में पुलिस बल को काफी मजबूत करेगी। राज्य की आबादी करीब 13 करोड़ है और इसके मुकाबले पुलिस बल की संख्या हमेशा से कम मानी जाती रही है। इतने बड़े पैमाने पर भर्ती से यह अनुपात बेहतर होगा।

वेतन में भी होगी बढ़ोतरी

नीतीश सरकार ने सिर्फ भर्ती की संख्या ही नहीं बढ़ाई है बल्कि एसएपी जवानों के मानदेय यानी वेतन में भी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। यह कदम पूर्व सैनिकों को और अधिक आकर्षित करेगा।

गृह विभाग के प्रस्ताव के अनुसार जूनियर कमीशंड ऑफिसर का मासिक मानदेय अभी 35 हजार रुपये है जिसे बढ़ाकर 40 हजार रुपये प्रति माह करने की योजना है। यह 5 हजार रुपये की बढ़ोतरी होगी।

वहीं सामान्य एसएपी जवानों का वर्तमान मानदेय 25 हजार रुपये प्रति माह है। इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये महीना करने का प्रस्ताव है। इनके लिए भी 5 हजार रुपये की वृद्धि होगी।

यह वेतन वृद्धि महंगाई और बढ़ती जीवन लागत को देखते हुए उचित कदम है। साथ ही इससे ज्यादा से ज्यादा योग्य और अनुभवी पूर्व सैनिक इस भर्ती में आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

सरकारी खजाने पर कितना पड़ेगा बोझ

इतने बड़े पैमाने पर भर्ती और वेतन वृद्धि से स्वाभाविक रूप से राज्य सरकार के खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। गृह विभाग ने इसका विस्तृत आकलन किया है।

सरकार के अनुमान के अनुसार 17 हजार पदों पर बढ़े हुए वेतन के साथ भर्ती करने पर राज्य के खजाने पर हर साल लगभग 642 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। यह एक बड़ी रकम है लेकिन सरकार का मानना है कि कानून व्यवस्था और जनता की सुरक्षा के लिए यह खर्च जरूरी है।

इस राशि में 150 अधिकारियों, 16,300 जवानों और 550 अन्य कर्मचारियों का वेतन शामिल है। इसके अलावा इन जवानों के प्रशिक्षण, वर्दी, हथियार और अन्य सुविधाओं का भी खर्च होगा।

हालांकि सरकार को उम्मीद है कि बेहतर कानून व्यवस्था से राज्य में निवेश बढ़ेगा और आर्थिक विकास तेज होगा। लंबे समय में यह खर्च राज्य के लिए फायदेमंद साबित होगा।

क्यों जरूरी है यह फैसला

बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर हमेशा चुनौतियां रही हैं। राज्य की विशाल आबादी और बड़े भौगोलिक क्षेत्र के मुकाबले पुलिस बल की संख्या कम है। राष्ट्रीय औसत के अनुसार प्रति लाख आबादी पर जितने पुलिसकर्मी होने चाहिए, बिहार में उससे काफी कम हैं।

इस कमी के कारण अपराध नियंत्रण में मुश्किल होती है। पुलिस थानों में कर्मियों की कमी रहती है और मौजूदा पुलिसकर्मियों पर काम का बोझ बढ़ जाता है। इससे पुलिसिंग की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।

पूर्व सैनिकों की भर्ती से यह समस्या काफी हद तक हल होगी। ये जवान पहले से प्रशिक्षित और अनुशासित होते हैं। इन्हें सेना या अर्धसैनिक बलों में कठिन परिस्थितियों में काम करने का अनुभव होता है।

इनकी फिटनेस भी बेहतर होती है और ये तनावपूर्ण स्थितियों को संभालने में माहिर होते हैं। ऐसे अनुभवी लोगों की तैनाती से बिहार पुलिस की क्षमता में निश्चित रूप से इजाफा होगा।

पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार का अवसर

यह योजना पूर्व सैनिकों के लिए भी बेहद फायदेमंद है। सेना या अर्धसैनिक बलों में ज्यादातर जवान 35 से 40 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं। इसके बाद उनके सामने रोजगार की समस्या आती है।

हालांकि उन्हें पेंशन मिलती है लेकिन कई लोग सक्रिय रूप से काम करना चाहते हैं। उनके पास स्किल और अनुभव है लेकिन अवसर नहीं मिल पाते। खासकर अर्धसैनिक बलों के जवानों के लिए रिटायरमेंट के बाद के विकल्प सीमित होते हैं।

एसएपी में भर्ती उनके लिए सम्मानजनक रोजगार का मौका है। वे अपने अनुभव का उपयोग कर सकते हैं और समाज की सेवा जारी रख सकते हैं। 30 से 40 हजार रुपये का मासिक मानदेय पेंशन के अलावा मिलेगा जो उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा।

भर्ती प्रक्रिया कैसे होगी

गृह विभाग ने भर्ती प्रक्रिया की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक विस्तृत दिशानिर्देश जारी नहीं हुए हैं लेकिन जल्द ही आधिकारिक अधिसूचना आने की उम्मीद है।

संभावना है कि भर्ती में सेना या अर्धसैनिक बलों में सेवा का अनुभव, रैंक, आयु सीमा और फिटनेस जैसे मानदंड होंगे। बिहार के मूल निवासियों को प्राथमिकता मिल सकती है लेकिन अन्य राज्यों से रिटायर्ड हुए जवान भी आवेदन कर सकेंगे।

चयन प्रक्रिया में शारीरिक फिटनेस टेस्ट, दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार शामिल हो सकते हैं। चूंकि ये पूर्व सैनिक पहले से प्रशिक्षित होते हैं इसलिए लंबी परीक्षा प्रक्रिया की जरूरत नहीं होगी।

राज्य सरकार का दृष्टिकोण

नीतीश सरकार का मानना है कि कानून व्यवस्था राज्य के विकास की नींव है। जब तक लोग सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, निवेश नहीं आएगा और विकास नहीं होगा। इसलिए पुलिस बल को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।

पूर्व सैनिकों की भर्ती से एक साथ कई उद्देश्य पूरे होंगे। पुलिस बल मजबूत होगा, अनुभवी लोगों को रोजगार मिलेगा और राज्य में सुरक्षा का माहौल बेहतर होगा।

सरकार ने बजट में भी इस योजना के लिए पर्याप्त प्रावधान रखने का निर्णय लिया है। वित्त विभाग को गृह विभाग का प्रस्ताव भेज दिया गया है और जल्द ही वित्तीय स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।

आम लोगों को क्या फायदा होगा

इस पूरी योजना का अंतिम लाभ राज्य की आम जनता को ही मिलेगा। जब पुलिस बल मजबूत होगा तो अपराध पर नियंत्रण बेहतर होगा। अनुभवी और प्रशिक्षित जवानों की मौजूदगी से अपराधियों में भय का माहौल बनेगा।

चुनाव, त्योहार और बड़े आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। ग्रामीण इलाकों में भी पुलिसिंग बेहतर हो सकेगी। महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा सकेगा।

साथ ही बेहतर कानून व्यवस्था से राज्य की छवि सुधरेगी। निवेशक बिहार में पैसा लगाने के लिए आकर्षित होंगे। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य का समग्र विकास होगा।

Bihar News: निष्कर्ष

बिहार में 17 हजार पूर्व सैनिकों की भर्ती नीतीश सरकार का एक दूरदर्शी फैसला है। यह न केवल राज्य की कानून व्यवस्था को मजबूत करेगा बल्कि हजारों रिटायर्ड जवानों को सम्मानजनक रोजगार भी देगा। अर्धसैनिक बलों के जवानों को पहली बार मौका मिलना एक स्वागत योग्य कदम है। हालांकि इस पर सालाना 642 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, लेकिन सुरक्षा और विकास के लिए यह निवेश जरूरी है। जल्द ही भर्ती अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है और हजारों पूर्व सैनिकों को नई जिंदगी शुरू करने का मौका मिलेगा।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles