West Bengal News: भारत में नीपाह वायरस (Nipah Virus) की मौजूदगी को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। हाल ही प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ और नीपाह वायरस पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. नरेंद्र कुमार अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि केरल और पश्चिम बंगाल दोनों राज्य नीपाह वायरस के लिए एंडेमिक (स्थानीय रूप से मौजूद) हैं। डॉ. अरोड़ा ने बताया कि भारत में नीपाह वायरस पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है और यह समय-समय पर उभरकर सामने आता रहता है।
नीपाह वायरस क्या है और भारत में इसकी स्थिति

नीपाह वायरस एक जूनोटिक वायरस है, जो मुख्य रूप से चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है। यह वायरस हेनिपा वायरस परिवार का हिस्सा है और बेहद खतरनाक माना जाता है। संक्रमण होने पर इसके लक्षण बुखार, सिरदर्द, उल्टी, चक्कर आना, दौरे और कोमा तक पहुंच सकते हैं। मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक हो सकती है।
डॉ. नरेंद्र कुमार अरोड़ा ने बताया कि भारत में नीपाह वायरस की पहली बड़ी महामारी 2001 में सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) में आई थी। उसके बाद 2007 में फिर वही क्षेत्र प्रभावित हुआ। 2018 और 2021 में केरल में दो बड़े प्रकोप आए। 2023 में भी केरल में नीपाह के मामले सामने आए थे।
उन्होंने कहा, “केरल और पश्चिम बंगाल दोनों राज्य नीपाह वायरस के लिए एंडेमिक हैं। इसका मतलब है कि इन राज्यों में फ्रूट-ईटिंग चमगादड़ों में यह वायरस प्राकृतिक रूप से मौजूद है। ये चमगादड़ खजूर के रस, आधे खाए फलों या संक्रमित सतह से वायरस इंसानों तक पहुंचाते हैं।”
नीपाह वायरस फैलने के मुख्य रास्ते
डॉ. अरोड़ा ने नीपाह के प्रसार के प्रमुख तरीकों को विस्तार से समझाया:
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चमगादड़ों से सीधा संपर्क
खजूर का कच्चा रस पीने या आधे खाए फल खाने से सबसे ज्यादा खतरा होता है।
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इंसान से इंसान में संक्रमण
संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क, खांसने-छींकने या सांस के जरिए वायरस फैल सकता है।
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संक्रमित जानवरों से
सूअरों में भी नीपाह फैल सकता है, जिससे इंसानों में संक्रमण हो सकता है (हालांकि भारत में यह कम देखा गया है)।
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अस्पतालों में सुपर-स्प्रेडिंग
2018 के केरल प्रकोप में अस्पतालों में कई हेल्थकेयर वर्कर संक्रमित हुए थे।
लक्षण और पहचान
डॉ. अरोड़ा ने बताया कि नीपाह के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं:
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बुखार
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सिरदर्द
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गले में खराश
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उल्टी-दस्त
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सुस्ती
बाद में गंभीर लक्षण दिखते हैं:
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दौरे (Seizures)
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कोमा
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श्वसन तंत्र की विफलता (Respiratory Failure)
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एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन)
मृत्यु आमतौर पर 48 घंटे से 2 सप्ताह के भीतर हो जाती है।
भारत में नीपाह से निपटने की तैयारी
डॉ. अरोड़ा ने कहा कि भारत ने नीपाह से निपटने के लिए काफी तैयारी की है:
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राष्ट्रीय टास्क फोर्स: नीपाह के लिए विशेष टास्क फोर्स काम कर रही है।
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संक्रमण रोकथाम दिशानिर्देश: अस्पतालों में PPE, आइसोलेशन वार्ड और प्रोटोकॉल लागू।
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टेस्टिंग सुविधाएं: NIV पुणे और अन्य लैब में RT-PCR टेस्ट उपलब्ध।
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जागरूकता: खजूर का कच्चा रस न पीने, फलों को अच्छे से धोने की सलाह।
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चमगादड़ सर्विलांस: प्रभावित क्षेत्रों में चमगादड़ों की निगरानी।
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वैक्सीन रिसर्च: ICMR और अन्य संस्थान वैक्सीन पर काम कर रहे हैं।
नीपाह से बचाव के उपाय
डॉ. अरोड़ा ने आम लोगों के लिए बचाव के टिप्स दिए:
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कच्चा खजूर का रस (ताड़ी) न पिएं।
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आधे खाए फल या चमगादड़ों के संपर्क में आए फल न खाएं।
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फलों को अच्छे से धोकर छीलकर खाएं।
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चमगादड़ों वाली जगहों से दूर रहें।
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बुखार, सिरदर्द या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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अस्पताल में मरीजों के साथ PPE का इस्तेमाल करें।
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संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें।
West Bengal News: नीपाह का भविष्य और खतरा
डॉ. अरोड़ा ने चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन, जंगलों का कटना और इंसान-जानवर संपर्क बढ़ने से नीपाह जैसे वायरस के प्रकोप बढ़ सकते हैं। भारत में नीपाह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। केरल और पश्चिम बंगाल में यह साल भर मौजूद रह सकता है।
उन्होंने कहा, “हमें सतर्क रहना होगा। शुरुआती पहचान, तेज जांच और सख्त क्वारंटाइन से ही इसे काबू में रखा जा सकता है।” नीपाह वायरस से जुड़ी यह जानकारी लोगों को सतर्क रहने के लिए जरूरी है। अगर आपको या आपके आसपास किसी को संदिग्ध लक्षण दिखें तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग या अस्पताल से संपर्क करें।



