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 रात के खाने के बाद क्या करें, आयुर्वेद के ये 5 ‘अचूक’ नियम हैं अद्भुत, तुरंत दूर होगी बदहजमी और नींद की समस्या

Health Tips: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, ज्यादातर लोग रात में पेट फूलने, गैस, एसिडिटी (अम्लता) और खराब नींद की शिकायत करते हैं। हम अक्सर इस बात पर तो ध्यान देते हैं कि हमें रात में क्या खाना चाहिए, लेकिन हम इस बात को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं कि रात के खाने के बाद क्या करें। आयुर्वेद के अनुसार, आपकी रात की सेहत का पूरा रहस्य इसी बात में छिपा है कि आप भोजन के बाद अगले दो घंटे कैसे बिताते हैं।

हमारी कुछ छोटी-छोटी गलतियां, जैसे खाते ही बिस्तर पर लेट जाना, ढेर सारा पानी पी लेना या मोबाइल चलाना, हमारी पाचन अग्नि (‘जठराग्नि’) को मंद कर देती हैं। इससे भोजन पचने की बजाय सड़ने लगता है, जो ‘आम’ यानी विषाक्त पदार्थों को जन्म देता है। यही ‘आम’ मोटापे से लेकर गंभीर बीमारियों तक की जड़ है। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं, आयुर्वेद में रात के खाने के बाद क्या करें, इसके लिए कुछ बेहद सरल और ‘अचूक’ नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं उन 5 आदतों के बारे में, जिन्हें अपनाकर आप अपनी जिंदगी बदल सकते हैं।

1. वज्रासन: 5 मिनट का ‘अद्भुत’ अभ्यास

Health Tips
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यह एकमात्र ऐसा आसन है जिसे आयुर्वेद और योग, दोनों ही खाने के तुरंत बाद करने की सलाह देते हैं। जब आप रात का भोजन समाप्त करें, तो 5 से 10 मिनट के लिए वज्रासन में बैठ जाएं। इस आसन में बैठने से पेट और आंतों की ओर रक्त का प्रवाह (Blood Flow) बढ़ जाता है, जिससे पाचन क्रिया तेज और सुगम हो जाती है। यह गैस, भारीपन और एसिडिटी को रोकने में रामबाण उपाय है। जो लोग नियमित रूप से वज्रासन करते हैं, उन्हें पेट संबंधी समस्याएं लगभग न के बराबर होती हैं।

2. शतपावली: 100 कदमों की धीमी सैर

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भोजन के बाद दूसरा महत्वपूर्ण कदम है ‘शतपावली’, जिसका अर्थ है 100 कदम चलना। ध्यान रहे, यह एक बहुत धीमी और आरामदायक सैर होनी चाहिए, न कि तेज चलना या दौड़ना। खाने के तुरंत बाद तेज चलने या व्यायाम करने से पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। रात के खाने के बाद क्या करें इस सवाल का यह एक बेहतरीन जवाब है। 100 कदम की यह धीमी सैर भोजन को पेट में सही जगह व्यवस्थित करने में मदद करती है और मेटाबॉलिज्म को हल्का सा बूस्ट देती है।

3. वामकुक्षी: बाईं करवट सोने का विज्ञान

वामकुक्षी
वामकुक्षी

आयुर्वेद में रात को बाईं करवट सोने (वामकुक्षी) को स्वास्थ्य के लिए वरदान माना गया है। हमारे पेट की संरचना ऐसी है कि बाईं ओर लेटने से भोजन पेट में सही तरीके से रहता है और गैस्ट्रिक जूस अपना काम प्रभावी ढंग से कर पाते हैं। इससे भोजन को छोटी आंत में जाने में आसानी होती है। इसके विपरीत, दाईं ओर लेटने से भोजन वापस भोजन नली (Esophagus) में आ सकता है, जिससे एसिड रिफ्लक्स और सीने में जलन की समस्या होती है।

4. पानी पर संयम: अग्नि को बुझाएं नहीं

यह एक आम गलती है जो ज्यादातर लोग करते हैं। रात के खाने के बाद क्या करें और क्या न करें, इसमें पानी का नियम सबसे अहम है। भोजन के तुरंत बाद एक-दो गिलास भर के पानी पी लेना, जलती हुई पाचन अग्नि पर पानी डालने जैसा है। इससे पाचक रस पतले हो जाते हैं और भोजन ठीक से पच नहीं पाता। आयुर्वेद के अनुसार, भोजन के दौरान आप जरूरत पड़ने पर एक-दो घूंट गुनगुना पानी पी सकते हैं, लेकिन भोजन के कम से कम 45 मिनट से एक घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए।

5. सोने और खाने में 2-3 घंटे का अंतर

यह अच्छी सेहत का सबसे बड़ा और ‘शॉकिंग’ रूप से नजरअंदाज किया जाने वाला नियम है। आयुर्वेद स्पष्ट कहता है कि आपके रात के खाने और सोने के बीच कम से कम 2 से 3 घंटे का अंतर होना ही चाहिए। जब आप खाते ही लेट जाते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण के अभाव में पाचन क्रिया लगभग ठप हो जाती है। यह न केवल मोटापे का, बल्कि डायबिटीज और हृदय रोगों का भी बड़ा कारण है। इसलिए, हमेशा सोने से 2-3 घंटे पहले हल्का भोजन करें ताकि शरीर को उसे पचाने का पूरा समय मिल सके।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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