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India Australia Relations: हिंद-प्रशांत में भारत की नई रणनीतिक पहल, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के साथ रक्षा सहयोग को मिली नई रफ्तार

India Australia Relations: नहिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन को लेकर भारत अब अपने कदमों को और तेजी से आगे बढ़ा रहा है। अमेरिका के नेतृत्व वाले क्वाड (QUAD) संगठन का एक सक्रिय सदस्य होने के बावजूद, भारत ने अब अपनी कूटनीति का दायरा बढ़ाते हुए ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाने का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया विदेश यात्राओं के दौरान हुए महत्वपूर्ण समझौतों ने इस क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव और उसकी दीर्घकालिक समुद्री नीति की स्पष्ट तस्वीर पेश की है।

India Australia Relations: रक्षा समझौतों का नया रोडमैप

मेलबर्न में संपन्न भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक सम्मेलन के बाद जारी घोषणापत्रों ने इन बदलती रणनीतिक प्राथमिकताओं को रेखांकित किया है। दोनों देशों ने न केवल रक्षा और सुरक्षा सहयोग के लिए एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया, बल्कि समुद्री सुरक्षा के लिए एक विस्तृत रोडमैप भी तैयार किया है। ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी भावी सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है।

ठीक इसी तरह, जकार्ता में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच तीन प्रमुख समझौते हुए हैं। ये समझौते दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा अभ्यासों में तालमेल और सूचनाओं के साझाकरण को एक मजबूत ढांचा प्रदान करते हैं। जानकारों का मानना है कि यह भारत द्वारा इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को जोड़कर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक व्यापक सुरक्षा तंत्र तैयार करने की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति है।

रक्षा सहयोग की गहराई

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए रक्षा सहयोग समझौते में कई ऐसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं जो भविष्य के रक्षा संबंधों की दिशा तय करेंगे:

  • विमानों की तैनाती: दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र में विमानों की तैनाती बढ़ाने पर सहमत हुए हैं, जिससे क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा गतिविधियों में तेजी आएगी।
  • रक्षा अभ्यास और प्रशिक्षण: रक्षा बलों के बीच तालमेल को बेहतर करने के लिए संयुक्त रक्षा अभ्यासों की संख्या और गुणवत्ता को बढ़ाया जाएगा। साथ ही, रक्षा कर्मियों का आदान-प्रदान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और अधिक गहरा किया जाएगा।
  • आतंकवाद विरोधी मोर्चा: दोनों देशों ने आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर चिंता जताई है। अब भारत और ऑस्ट्रेलिया आतंकवादियों द्वारा नई तकनीकों के इस्तेमाल, ऑनलाइन कट्टरवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों और उनके वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए संयुक्त रूप से काम करेंगे।

क्वाड से आगे की रणनीति

भारत की यह नीति केवल क्वाड तक सीमित रहने के बजाय, इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव के माध्यम से अन्य साझेदार देशों को भी साथ लाने की है। मेलबर्न में जारी संयुक्त घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया अमेरिका तथा जापान के साथ मिलकर एक खुला, स्थिर, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

कैनबरा में 24 जून 2025 को हुई त्रिपक्षीय समुद्री सुरक्षा वार्ता (Trilateral Maritime Security Dialogue) की अंतिम बैठक इसका प्रमाण है। इस बैठक में उत्तर-पूर्व हिंद महासागर में उभरती सुरक्षा चुनौतियों और संयुक्त अभियानों पर पहली बार विस्तार से बात हुई थी। यह दिखाता है कि भारत अब अपनी समुद्री सीमाओं और रणनीतिक हितों को लेकर बेहद सक्रिय है और अपने मित्र देशों के साथ मिलकर सुरक्षा की नई परतें तैयार कर रहा है।

India Australia Relations: इसका क्या अर्थ है?

भारत का यह कदम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपनी नौसेना की पहुंच और क्षमता निर्माण को बढ़ाकर भारत न केवल अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा कर रहा है, बल्कि क्षेत्र के छोटे-बड़े देशों के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में भी उभर रहा है। एक-दूसरे के क्षेत्र में विमानों की तैनाती और खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में इन देशों के बीच सैन्य सहयोग का स्तर और अधिक गहरा होगा।

आने वाले महीनों में इन तीनों देशों (भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया) की ओर से कई और घोषणाएं संभव हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इन यात्राओं और समझौतों के बाद, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा का एक नया समीकरण बनता हुआ दिखाई दे रहा है। भारत की यह ‘समुद्र नीति’ न केवल आर्थिक रूप से समृद्ध और सुरक्षित हिंद-प्रशांत का सपना देखती है, बल्कि उसे वास्तविकता में बदलने के लिए ठोस रक्षा ढांचे का निर्माण भी कर रही है। भारत का यह बहुआयामी दृष्टिकोण निश्चित रूप से वैश्विक कूटनीति के पटल पर उसकी बढ़ती धमक को दर्शाता है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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