Top 5 This Week

Related Posts

Haryana News: हरियाणा के सरकारी भवनों में अब दिव्यांगों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को मिलेगी खास सुविधा

Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी सरकारी भवनों को दिव्यांगजनों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के अनुकूल बनाने का फैसला किया है। लोक निर्माण विभाग और वास्तुकला विभाग अब हर नई और पुरानी सरकारी इमारत में सुलभता के मानकों का पालन सुनिश्चित करेंगे। रैंप, लिफ्ट, सुलभ शौचालय, हैंड्रेल्स और स्पर्श पथ जैसी सुविधाएं अब अनिवार्य रूप से शामिल की जाएंगी। इस कदम से राज्य के मिनी सचिवालय, तहसील कार्यालय और सरकारी आवासीय परिसरों में आने वाले हजारों लोगों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

Haryana News: अब हर सरकारी दफ्तर बनेगा सबके लिए सुलभ

चंडीगढ़ से जारी आदेश के मुताबिक हरियाणा सरकार ने तय किया है कि राज्य की सभी सरकारी इमारतें अब दिव्यांगजनों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए पूरी तरह सुलभ बनाई जाएंगी। यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिन्हें अक्सर सरकारी दफ्तरों की सीढ़ियां चढ़ने, संकरे दरवाजों से गुजरने या शौचालय तक पहुंचने में परेशानी होती थी। अब लोक निर्माण विभाग और वास्तुकला विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि हर नई इमारत के डिजाइन में और पुरानी इमारतों की मरम्मत के दौरान भी सुलभता से जुड़े मानकों का पूरी तरह पालन हो।

किन भवनों पर होगा इस फैसले का असर

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ सुमिता मिश्रा ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में सार्वजनिक ढांचे का एक बड़ा नेटवर्क मौजूद है। इसमें मिनी सचिवालय भवन, तहसील और उप तहसील कार्यालय परिसर, सरकारी आवासीय क्वार्टर और पारगमन फ्लैट जैसी कई तरह की इमारतें शामिल हैं। इन सभी जगहों पर रोजाना बड़ी संख्या में आम लोग अपने काम के सिलसिले में आते हैं, जिनमें बुजुर्ग, दिव्यांग और गर्भवती महिलाएं भी शामिल होती हैं। अब इन सभी परियोजनाओं में सुलभता से जुड़े मानकों को अनिवार्य रूप से शामिल करने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों को सौंपी गई है।

किस तरह की सुविधाएं होंगी अनिवार्य

इस फैसले के तहत सरकारी भवनों में रैंप, सुलभ प्रवेश द्वार, लिफ्ट, स्पर्श पथ, हैंड्रेल्स, सुलभ शौचालय और सही जगह पर लगे साइनबोर्ड जैसी सुविधाएं अनिवार्य रूप से मौजूद होंगी। रैंप की मदद से व्हीलचेयर पर आने वाले लोग आसानी से इमारत में प्रवेश कर सकेंगे, जबकि लिफ्ट की सुविधा बुजुर्गों और चलने में असमर्थ लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। स्पर्श पथ यानी टेक्टाइल पाथ खासतौर पर दृष्टिबाधित लोगों के लिए मददगार रहेगा, जिससे वे बिना किसी सहारे के भवन के भीतर आसानी से आ जा सकेंगे। सुलभ शौचालय की व्यवस्था उन लोगों के लिए खास तौर पर जरूरी है, जिन्हें सामान्य शौचालय इस्तेमाल करने में दिक्कत होती है।

यह कदम क्यों माना जा रहा है जरूरी

देश में विकलांगता अधिकार से जुड़े कानून के तहत भी सार्वजनिक भवनों को सुलभ बनाना सरकार की जिम्मेदारी मानी जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर अक्सर इसका पूरी तरह पालन नहीं हो पाता। कई सरकारी दफ्तरों में आज भी न रैंप की सुविधा है और न ही सुलभ शौचालय, जिसके चलते दिव्यांग और बुजुर्ग नागरिकों को अपने ही सरकारी दफ्तर में काम कराने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग लंबे समय से मांग करते रहे हैं कि सरकारी इमारतों को सबके लिए सुलभ बनाया जाए, ताकि किसी को भी अपनी शारीरिक स्थिति के कारण सरकारी सेवाओं से वंचित न रहना पड़े। हरियाणा सरकार का यह ताजा फैसला उसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

दिव्यांगजनों और बुजुर्गों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला

राज्य में दिव्यांगजनों और बुजुर्ग नागरिकों की तादाद अच्छी खासी है और इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को किसी न किसी सरकारी काम के लिए तहसील या सचिवालय जाना ही पड़ता है। अभी तक सीढ़ियां चढ़ने या संकरे रास्तों से गुजरने की मजबूरी के चलते कई लोग अपने काम के लिए परिवार के सदस्यों या मददगारों पर निर्भर रहते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि ऐसे नागरिक अपने काम खुद कर सकेंगे और उन्हें बार बार दूसरों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह सुविधा राहत भरी साबित होगी, क्योंकि उन्हें भी अक्सर सीढ़ियां चढ़ने या लंबी दूरी तक पैदल चलने में परेशानी होती है।

Haryana News: विभागों की क्या रहेगी जिम्मेदारी

लोक निर्माण विभाग और वास्तुकला विभाग को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे हर नई परियोजना के डिजाइन चरण से ही सुलभता के मानकों को शामिल करें, न कि इमारत बनने के बाद अलग से बदलाव किए जाएं। इससे न केवल लागत में बचत होगी, बल्कि सुविधाएं भी बेहतर तरीके से इमारत के ढांचे में समाहित हो सकेंगी। मरम्मत और नवीनीकरण से जुड़ी परियोजनाओं में भी इन मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है, जिसका मतलब है कि पुरानी इमारतों को भी धीरे धीरे सुलभ बनाया जाएगा। यह प्रक्रिया एक साथ पूरे राज्य में लागू होने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की उम्मीद है।

Haryana News: आगे क्या होगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले सिर्फ कागजों तक सीमित न रहकर अगर सही तरीके से लागू किए जाएं, तो इनका असर लाखों नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। सरकारी दफ्तरों में सुलभता की कमी लंबे समय से एक बड़ी समस्या रही है और इसे दूर करने की दिशा में उठाया गया यह कदम राज्य के अन्य विभागों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि नई और पुरानी इमारतों में यह बदलाव किस रफ्तार से लागू होता है और आम नागरिकों को इसका वास्तविक फायदा कब तक मिलना शुरू होता है। फिलहाल इस घोषणा का स्वागत उन तमाम लोगों ने किया है जो लंबे समय से सरकारी भवनों में बेहतर सुविधाओं की मांग करते आ रहे थे।

Read More Here:- 

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles