Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त सरगर्मी अपने चरम पर है। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने एक बार फिर विपक्षी खेमे को एकजुट होने का कड़ा संदेश दिया है। कोलकाता में आयोजित वार्षिक शहीद दिवस रैली के दौरान उन्होंने भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए तमाम राजनीतिक दलों से अपने पुराने गिले-शिकवे और मतभेद भुलाकर ‘इंडी’ गठबंधन के बैनर तले साथ आने की अपील की।
भले ही उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस या वामदलों का नाम नहीं लिया हो, लेकिन उनके इस रुख से राज्य के सियासी गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां वे विपक्षी एकता की वकालत कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर उठी बगावत के सुरों पर उनका तेवर बेहद सख्त नजर आया।
Mamata Banerjee: बगावत करने वाले नेताओं के लिए हमेशा के लिए बंद हुए दरवाजे
पार्टी के भीतर मचे घमासान और दिग्गजों के पाला बदलने से उपजे संकट के बीच ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि गद्दारों के लिए टीएमसी में अब कोई जगह नहीं बचेगी। बिड़ला तारामंडल के नजदीक हुई इस रैली में उन्होंने पार्टी से बगावत कर चुके नेताओं को सीधे तौर पर आड़े हाथों लिया। उनका कहना था कि जो लोग दल छोड़कर जा रहे हैं, वे असल में विपक्षी दल की परोक्ष रूप से मदद कर रहे हैं।
उन्होंने दो टूक शब्दों में चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी में हिम्मत है तो वह सीधे तौर पर उस दल में शामिल होकर चुनाव मैदान में उतरे। पार्टी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि जितने ज्यादा लोग बाहर का रास्ता नापेंगे, उन्हें उतनी ही कम चिंता होगी क्योंकि संगठन को संभालने के लिए युवाओं की एक फौज तैयार है।
संगठनात्मक संकट और समानांतर शक्ति प्रदर्शन की सियासत
वर्ष 1998 में अपनी स्थापना के बाद से लेकर आज तक तृणमूल कांग्रेस शायद अपने सबसे दौर के सबसे बड़े संगठनात्मक संकट से गुजर रही है। पार्टी के कई कद्दावर नेता और विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के पाले में जा चुके हैं। भीतरखाने सुलग रही इस आग का कारण पार्टी के भीतर बढ़ते संगठनात्मक प्रभाव को बताया जा रहा है।
इस आंतरिक कलह का असर अब संसद तक भी देखने को मिल रहा है, जहां कई लोकसभा सांसद आधिकारिक खेमे से किनारा कर चुके हैं। यही वजह है कि एक तरफ जहां आधिकारिक शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित हुआ, वहीं दूसरी तरफ मेयो रोड पर बागी गुट द्वारा समानांतर रैली का आयोजन किया गया, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
Mamata Banerjee: पार्टी का चुनाव चिह्न छीनने की कोशिश का दावा
विद्रोही खेमे पर तीखा प्रहार करते हुए ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाए कि विरोधी ताकतें चुनाव आयोग और अन्य माध्यमों से पार्टी के पारंपरिक जोड़े फूल वाले चुनाव चिह्न पर कब्जा जमाने की साजिश रच रही थीं। हालांकि, उनके रहते ऐसा होना नामुमकिन था क्योंकि वह खुद इस संगठन की संस्थापक और अध्यक्ष हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके इस कार्यक्रम को बाधित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए और पिछली पूरी रात उनके वफादार कार्यकर्ताओं को मंच की रक्षा के लिए पहरा देना पड़ा। प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चे पर मिल रही इन चुनौतियों के बीच उन्होंने ऐलान किया है कि वह जल्द ही राज्य के सभी जिलों का तूफानी दौरा शुरू करेंगी।
Mamata Banerjee: आने वाले दिनों में और तेज होगा सियासी संघर्ष
आगामी राजनीतिक रणनीतियों का जिक्र करते हुए पार्टी प्रमुख ने हुंकार भरी कि जिलों के दौरे के वक्त वह देखना चाहती हैं कि आखिर कौन उन्हें रोकने की ताकत रखता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की जमीन पर आगामी चुनावों से पहले यह आंतरिक उठापटक और बाहरी दलों के बीच का मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है।
एक तरफ जहां पार्टी अपने टूटे हुए कुनबे को एकजुट करने की कोशिश में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने की यह कवायद आने वाले दिनों की राजनीतिक दिशा तय करेगी।
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