Mumbai | 30 जुलाई 2026: महाराष्ट्र सरकार ने CJP समर्थित हालिया प्रदर्शनों में शामिल छात्रों, युवाओं और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
DGP को जारी हुए औपचारिक निर्देश
राज्य सरकार ने पुलिस महानिदेशक DGP को निर्देश जारी किए हैं कि इन मामलों को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया तत्काल पूरी की जाए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनीषा म्हैस्कर को मामलों की वापसी की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन युवाओं के नाम इन मामलों में दर्ज हैं, उनके खिलाफ फिलहाल किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
गृह विभाग जुटाएगा सभी मामलों का विवरण
गृह विभाग अब राज्यभर में CJP समर्थित प्रदर्शनों से जुड़े सभी मामलों का विवरण एकत्र करेगा। इसके बाद अलग से आदेश जारी कर अदालत के जरिए कानूनी प्रक्रिया के तहत इन मामलों को वापस लेने की कार्रवाई होगी।
ध्यान दें: कानूनी प्रावधानों के अनुसार सरकार सीधे केस वापस नहीं ले सकती। इसके लिए पहले पुलिस को चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट अदालत में देनी होगी। इसके बाद न्यायालय की अनुमति से ही मामले वापस लिए जा सकेंगे।
आदित्य ठाकरे ने मांगी स्पष्टता
इस बीच शिवसेना UBT विधायक आदित्य ठाकरे ने फैसले पर स्पष्टता मांगी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि अधिसूचना जारी होने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रक्रिया कैसे लागू होगी।
उन्होंने DGP को पत्र लिखकर राज्यभर में एक समान SOP जारी करने की मांग की, ताकि सभी मामलों में एक जैसी प्रक्रिया हो और किसी के साथ भेदभाव न हो।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि यह SOP उन सभी पर लागू होनी चाहिए जिन्होंने भारत के समर्थन में, सोनम वांगचुक के अनशन और अन्य शांतिपूर्ण आंदोलनों के समर्थन में प्रदर्शन किया था।
राजनीतिक चर्चा तेज
सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। एक तरफ इसे प्रदर्शनकारियों को राहत देने वाला कदम माना जा रहा है, वहीं विपक्ष प्रक्रिया की पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग कर रहा है।


