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Body Tapping: क्या सुबह उठते ही आपको भी रहता है तनाव और शरीर में दर्द? ‘बॉडी टैपिंग’ तकनीक से मिनटों में पाएं राहत

Body Tapping: भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह की शुरुआत अक्सर तनाव, थकान और बदन दर्द के साथ होती है। अलार्म बजते ही मन में दिन भर की जिम्मेदारियों का बोझ आ जाता है, जिसका असर हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। अगर आप भी हर सुबह ऐसी ही सुस्ती और बेचैनी से जूझते हैं, तो अब आपको किसी दवा की नहीं, बल्कि एक बेहद आसान और कारगर घरेलू तकनीक की जरूरत है, जिसे ‘बॉडी टैपिंग’ या इमोशनल फ्रीडम टेक्निक (EFT) कहा जाता है। महज पांच मिनट की यह प्रक्रिया आपके हैप्पी हार्मोन को बूस्ट कर आपको दिन भर के लिए तरोताजा कर सकती है।

बॉडी टैपिंग यानी इमोशनल फ्रीडम टेक्निक का मतलब है अपनी उंगलियों या हथेलियों से शरीर के खास बिंदुओं पर हल्की थपथपी मारना। यह सुनने में भले ही बहुत सरल लगे, लेकिन इसके पीछे एक गहरा वैज्ञानिक और ऊर्जा का तर्क है। इस प्रक्रिया से न केवल मांसपेशियों का तनाव दूर होता है, बल्कि शरीर की ऊर्जा प्रणाली जागृत होकर नकारात्मक भावनाओं को बाहर निकालने में मदद करती है। आइए जानते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है और इसे आप अपने दिनचर्या में कैसे शामिल कर सकते हैं।

Body Tapping: क्या है बॉडी टैपिंग और यह कैसे काम करती है?

इमोशनल फ्रीडम टेक्निक मूल रूप से एक पश्चिमी थेरेपी है, जो अब भारत में भी काफी लोकप्रिय हो रही है। इस तकनीक का मुख्य आधार शरीर के ऊर्जा केंद्रों पर दबाव डालना है, जो एक्यूप्रेशर के सिद्धांतों से काफी मिलता-जुलता है। जब हम अपने शरीर के अलग-अलग अंगों पर थपथपी मारते हैं, तो शरीर को एक सकारात्मक संकेत मिलता है कि हम सुरक्षित और स्वस्थ हैं। इससे दिमाग के भीतर मौजूद तनाव का हार्मोन, जिसे कोर्टिसोल कहते हैं, उसका स्तर तेजी से नीचे गिरने लगता है।

जैसे ही कोर्टिसोल कम होता है, शरीर के भीतर एंडोर्फिन और सेरोटोनिन जैसे ‘हैप्पी हार्मोन’ रिलीज होने शुरू हो जाते हैं। इससे न केवल मूड बेहतर होता है, बल्कि एंग्जाइटी और बेचैनी भी गायब होने लगती है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि हमारा शरीर अक्सर दबी हुई नकारात्मक भावनाओं को प्रोसेस नहीं कर पाता, जिसका असर शारीरिक दर्द के रूप में सामने आता है। टैपिंग के जरिए हम अपने नर्वस सिस्टम को एक तरह से ‘रीबूट’ करते हैं।

कैसे करें बॉडी टैपिंग का अभ्यास?

बॉडी टैपिंग करने के लिए किसी खास उपकरण या बड़ी जगह की जरूरत नहीं है। आप अपने बिस्तर पर बैठे-बैठे भी इसे शुरू कर सकते हैं। सबसे पहले, जिस हिस्से में आपको दर्द या तनाव महसूस हो रहा है, उस पर ध्यान केंद्रित करें। अपनी उंगलियों के पोरों से उस स्थान पर हल्की लेकिन ठोस थपथपी मारें। ऐसा करते समय गहरी और लंबी सांस लें।

टैपिंग करते समय सकारात्मक सोच का बहुत महत्व है। आप खुद से बोल सकते हैं कि “भले ही मैं तनाव में हूं, लेकिन मैं इसे स्वीकार करता हूं और खुद को शांत रखता हूं।” इस तरह की सकारात्मक बातें आपके दिमाग को बहुत जल्दी शांत करने में मदद करती हैं। आप सिर, गर्दन, पीठ, हाथ या पैर, जहां भी आपको भारीपन या दर्द महसूस हो, वहां पांच से दस मिनट तक थपथपाएं। थपथपाते समय वहां एक हल्का एहसास होना जरूरी है, ताकि ऊर्जा का संचार हो सके।

क्या इसके कोई प्रमाणित फायदे हैं?

नियमित बॉडी टैपिंग करने से आपको कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप इसे एक दिनचर्या बना लें और कम से कम एक महीने तक रोजाना अभ्यास करें, तो आपको आश्चर्यजनक परिणाम देखने को मिलेंगे। यह थेरेपी पोस्टट्रामेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD), अस्थमा, मांसपेशियों में जकड़न और फाइब्रोमायल्जिया जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मददगार हो सकती है।

इतना ही नहीं, यह शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है और मांसपेशियों को आराम देता है। जो लोग रात में ठीक से सो नहीं पाते, उनके लिए यह तकनीक नींद की गुणवत्ता को सुधारने में भी कारगर है। चूंकि यह पूरी तरह प्राकृतिक है, इसलिए इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। योग और प्राणायाम करने वाले लोग भी इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर अपनी मानसिक एकाग्रता को बढ़ा सकते हैं।

Body Tapping: विशेषज्ञों की राय और सावधानियां

मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर जयसूर्या के अनुसार, बॉडी टैपिंग को मेडिकल क्षेत्र में एक वैक्लपिक उपचार के रूप में देखा जाता है। हालांकि इसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में पूरी तरह से मान्यता नहीं मिली है, लेकिन इसके फायदों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह प्राचीन चीनी चिकित्सा पद्धति का आधुनिक रूप है, जिसे हम एक्यूप्रेशर के साथ जोड़कर देख सकते हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि बॉडी टैपिंग किसी गंभीर बीमारी का एकमात्र इलाज नहीं है, बल्कि यह एक पूरक प्रक्रिया है। यदि आपको कोई बड़ी मेडिकल समस्या है, तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इसे रोजाना के व्यायाम की तरह करें। जैसे आप शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योगाभ्यास करते हैं, वैसे ही मानसिक शांति और दर्द से मुक्ति के लिए इसे हर रोज कुछ समय देना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।

Body Tapping: निष्कर्ष

तनाव और दर्द हमारे शरीर के उन अनकहे संकेतों को दर्शाते हैं जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। बॉडी टैपिंग न केवल आपके शरीर को शारीरिक राहत देती है, बल्कि यह मन के उन कोनों को भी साफ करती है जहां नकारात्मकता जमी होती है। मात्र पांच से दस मिनट का यह अभ्यास आपके दिन को खुशनुमा बना सकता है। तो अगली बार जब सुबह उठते ही आपको बेचैनी महसूस हो, तो दवाओं की ओर भागने के बजाय अपनी उंगलियों का उपयोग करें और खुद को शांत करने का यह सरल तरीका अपनाएं। आपका मन और शरीर, दोनों ही आपको इसके लिए शुक्रिया कहेंगे।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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