June 2026 Festival Calendar: धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से साल 2026 का छठा महीना यानी जून बेहद खास और पवित्र होने वाला है। आज यानी 27 मई 2026 को हम आपको बताने जा रहे हैं कि आने वाले जून के महीने में कौन-कौन से बड़े व्रत और त्योहार आने वाले हैं। इस महीने ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा से लेकर आषाढ़ मास की शुरुआत तक कई प्रमुख व्रत, त्योहार और महत्वपूर्ण जयंतियां पड़ रही हैं। इस बार जून के महीने में ही ‘अधिक मास’ (पुरुषोत्तम मास) की समाप्ति भी हो रही है, जिसके कारण इस पूरे महीने का महत्व हिंदू धर्म में कई गुना बढ़ गया है। इस महीने में जहां एक तरफ साल का सबसे कठिन माना जाने वाला ‘निर्जला एकादशी’ का व्रत रखा जाएगा, वहीं दूसरी तरफ सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए ‘ज्येष्ठ वट पूर्णिमा’ का उपवास रखेंगी।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जून 2026 में कई बड़े ग्रहों के गोचर और नक्षत्रों के खास संयोग से अद्भुत शुभ फल मिलने की पूरी संभावना बन रही है। ऐसे में व्रत-उपवास और पूजा-पाठ करने वाले श्रद्धालुओं के लिए इन सभी तिथियों को नोट करना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि जून 2026 में कब-कब कौन से मुख्य व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे, उनका क्या महत्व है और पूजा से जुड़े कौन से खास नियम आपको अपनाने चाहिए।
June 2026 Festival Calendar: जून 2026 की शुरुआत और पहले हफ्ते के मुख्य व्रत-त्योहार (3 जून से 8 जून)
जून महीने की शुरुआत बेहद कल्याणकारी ‘विभुवन संकष्टी व्रत’ से हो रही है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु के संकटमोचन रूप की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरी निष्ठा से उपवास रखने और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से जीवन में चल रहे तमाम बड़े संकट चुटकियों में दूर हो जाते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से यह तिथि कुंडली के ग्रह दोषों को शांत करने के लिए बहुत शुभ मानी गई है।
इसके बाद महीने के पहले हफ्ते के अंत में यानी 7 जून को ‘अधिक भानु सप्तमी’ मनाई जाएगी। इस दिन साक्षात देवता सूर्य देव की उपासना और उन्हें अर्घ्य देने का विधान है। इसके ठीक अगले दिन, यानी 8 जून को एक बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन ‘अधिक कालाष्टमी’ के साथ-साथ ‘मासिक कृष्ण जन्माष्टमी’ भी मनाई जाएगी। कालाष्टमी पर भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा होती है, वहीं कृष्ण जन्माष्टमी पर बाल-गोपाल का विशेष अभिषेक किया जाता है। इन तिथियों पर व्रत रखने से जीवन के सारे पाप नष्ट होते हैं।
मोक्षदायिनी परमा एकादशी और प्रदोष व्रत का महासंयोग (11 जून से 14 जून)
जून महीने की पहली और सबसे बड़ी एकादशी ‘परमा एकादशी’ 11 जून 2026 को पड़ रही है। हिंदू शास्त्रों में इस एकादशी को अत्यंत मंगलकारी और दुर्लभ माना गया है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु की विधिवत पूजा करने और व्रत रखने से मनुष्य के लिए मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुल जाता है। कहा जाता है कि इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार किया गया दान-पुण्य सीधे भगवान विष्णु को स्वीकार होता है।
इसके अगले ही दिन, यानी 12 जून को ‘शुक्र प्रदोष व्रत’ और ‘अधिक कृष्ण रामलक्ष्मण द्वादशी’ का व्रत रखा जाएगा। प्रदोष व्रत पूरी तरह से देवों के देव महादेव को समर्पित है। इस दिन शाम के समय शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाने और रुद्राभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके बाद 13 जून को ‘मासिक शिवरात्रि’ और ‘कार्तिगाई व्रत’ रहेगा, जबकि 14 जून को ‘रोहिणी व्रत’ और ‘अधिक दर्श अमावस्या’ की पुण्य तिथि है, जो पितरों के तर्पण के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
अधिक मास की समाप्ति, मिथुन संक्रांति और वीरता के प्रतीक की जयंती (15 जून से 23 जून)
15 जून 2026 का दिन इस महीने का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है, क्योंकि इस दिन ‘मिथुन संक्रांति’ होने के साथ-साथ ‘ज्येष्ठ अधिकमास’ की पूरी तरह से समाप्ति हो रही है। इस संक्रांति के पावन अवसर पर किसी पवित्र नदी में स्नान करने और गरीबों को अनाज व वस्त्र दान करने का अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। अधिक मास के समाप्त होते ही नियमित धार्मिक कार्यों में एक नई और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है।
इसके बाद 17 जून को अदम्य साहस, देशभक्ति और वीरता के अप्रतिम प्रतीक ‘वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती’ पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाई जाएगी। इस दिन इतिहास को याद करते हुए विभिन्न शैक्षणिक और सार्वजनिक स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 18 जून से 23 जून के बीच कई महत्वपूर्ण तिथियां पड़ेंगी, जिसमें 18 जून को प्रद्युम्न चतुर्थी, 19 जून को स्कंद षष्ठी, 20 जून को जमाई षष्ठी, 21 जून को भानु सप्तमी, 22 जून को धूमावती जयंती और 23 जून को महेश नवमी शामिल हैं।
साल का सबसे कठिन व्रत ‘निर्जला एकादशी’ और गायत्री जयंती (25 जून)
जून महीने का सबसे मुख्य और महत्वपूर्ण दिन 25 जून 2026 है। इस दिन ‘निर्जला एकादशी’ का महाव्रत रखा जाएगा। जैसा कि इसके नाम से ही साफ है, इस व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक बिना अन्न और बिना जल (पानी की एक बूंद भी ग्रहण किए बिना) के रहना पड़ता है। महाभारत काल में भीम ने भी इसी एकमात्र व्रत को रखकर सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त किया था, इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं।
इसी पावन दिन पर ‘गायत्री जयंती’ भी मनाई जाएगी। इस दिन माता गायत्री की आराधना करने और गायत्री मंत्र का मानसिक रूप से जाप करने से बुद्धि का तीव्र विकास होता है, मानसिक तनाव दूर होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। इसके अगले दिनों में, यानी 26 जून को रामलक्ष्मण द्वादशी और 27 जून को ‘शनि प्रदोष व्रत’ का अत्यंत फलदायी संयोग रहेगा।
सुहागिनों का महाव्रत ‘ज्येष्ठ वट पूर्णिमा’ और आषाढ़ मास की शुरुआत (29 और 30 जून)
महीने के अंत में 29 जून 2026 को ‘ज्येष्ठ पूर्णिमा’ और ‘वट पूर्णिमा व्रत’ का पावन उत्सव मनाया जाएगा। उत्तर और मध्य भारत में यह त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद मायने रखता है। इस दिन महिलाएं पूरे सोलह श्रृंगार करके वट (बरगद) के वृक्ष की पूजा करती हैं, उसमें सूत का धागा लपेटती हैं और सत्यवान-सावित्री की कथा सुनकर अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। इसी दिन ‘बटुक भैरवी जयंती’ भी मनाई जाएगी।
इसके ठीक अगले दिन, यानी 30 जून 2026 से हिंदू पंचांग के अनुसार ‘आषाढ़ मास’ का आधिकारिक आरंभ हो जाएगा। आषाढ़ का महीना शुरू होते ही मौसम में बदलाव के साथ-साथ आगामी सावन (श्रावण) मास की और कांवड़ यात्रा की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं।
June 2026 Festival Calendar: जीवन में इन व्रतों का महत्व और कुछ जरूरी सावधानियां
आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में ये व्रत और त्योहार हमें न सिर्फ मानसिक शांति देते हैं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी हमारे शरीर को पूरी तरह से डिटॉक्स और हील करने का काम करते हैं। उपवास रखने से हमारा पाचन तंत्र सुधरता है। हालांकि, ध्यान रहे कि निर्जला एकादशी जैसा कठिन व्रत रखने से पहले अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को बिना पानी के रहने वाले कठिन व्रतों से बचना चाहिए और केवल फलाहार कर भगवान की भक्ति करनी चाहिए।
जून 2026 का यह पूरा महीना अध्यात्म और सेवा भाव का महीना है। इस महीने में प्यासे लोगों को पानी पिलाना, शर्बत का वितरण करना और जरूरतमंदों को छतरी या जूते-चप्पल दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। इन त्योहारों को अपने परिवार और बच्चों के साथ मिलकर मनाएं ताकि युवा पीढ़ी भी अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं को करीब से समझ सके और उनसे जुड़ी रह सके।
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