Global Warming India: पूरी दुनिया जब भीषण गर्मी और टूटते तापमान के रिकॉर्ड्स से जूझ रही है, ठीक उसी वक्त भारत को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। नासा के शोध ने साफ कर दिया है कि भारत में ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार बाकी दुनिया के मुकाबले काफी धीमी बनी हुई है। लेकिन आखिर ऐसा क्यों हो रहा है, और क्या यह राहत हमेशा के लिए बनी रहेगी?
वैज्ञानिकों ने इस अनोखी प्राकृतिक घटना को एक खास नाम दिया है, ‘वार्मिंग होल’। यह घटना फिलहाल भारत को वैश्विक तापन के सबसे खतरनाक असर से बचाए हुए है। हालांकि इसके पीछे की वजहें जानकर हैरानी भी हो सकती है, क्योंकि यह राहत पूरी तरह प्राकृतिक नहीं, बल्कि इंसानी गतिविधियों से भी जुड़ी हुई है।
Global Warming India: नासा के आंकड़ों में सामने आया बड़ा अंतर
नासा के आंकड़ों के मुताबिक साल 1980 के बाद से अब तक पृथ्वी का औसत तापमान करीब 1.4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। यह आंकड़ा अपने आप में चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि दुनिया भर में गर्मी का यह स्तर लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है।
इसके ठीक उलट भारत की स्थिति काफी अलग नजर आती है। बीसवीं सदी की शुरुआत से लेकर अब तक देश में तापमान में बढ़ोतरी 0.9 डिग्री सेल्सियस से भी कम दर्ज की गई है। यानी वैश्विक औसत के मुकाबले भारत में यह बढ़ोतरी लगभग आधी से भी कम रही है।
नासा के नक्शे में भारत क्यों दिखा अलग रंग में
नासा की रिपोर्ट में तापमान को दर्शाने वाला नक्शा भी काफी कुछ बयां करता है। इस नक्शे में यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया के कई देश भीषण गर्मी को दर्शाने वाले गहरे लाल और नारंगी रंगों में तपते हुए नजर आते हैं। यह रंग सीधे तौर पर उन इलाकों में तापमान की गंभीरता को दिखाता है।
वहीं इसके उलट भारत का हिस्सा नक्शे में हल्के पीले और सफेद रंग में दिखाई देता है। देखने पर लगता है कि यह रंगों का यह फर्क खुद ही इस बात की गवाही दे रहा है कि भारत फिलहाल वैश्विक तापन के सबसे बुरे असर से किस तरह बचा हुआ है।
आखिर क्यों धीमी है भारत में गर्मी बढ़ने की रफ्तार, यहीं है असली टि्वस्ट
यहीं पर मामले का वह पहलू सामने आता है, जो सबसे दिलचस्प है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी एक बड़ी वजह उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बड़े पैमाने पर की जाने वाली सिंचाई है। जब खेतों की भारी सिंचाई होती है, तो हवा में नमी की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय स्तर पर तापमान स्वाभाविक रूप से कम रहता है।
इसके साथ ही एक और वजह भी सामने आई है, जो हैरान करने वाली है। हवा में मौजूद प्रदूषण के कण सूर्य की किरणों को वापस अंतरिक्ष की ओर परावर्तित कर देते हैं, जिससे धरातल पर पड़ने वाला गर्मी का दबाव काफी हद तक कम हो जाता है। जानकार बताते हैं कि यानी जिस प्रदूषण को हम आमतौर पर सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं, वही फिलहाल तापमान को नियंत्रित रखने में एक अप्रत्याशित भूमिका निभा रहा है।
क्या यह राहत हमेशा बनी रहेगी
मामला कुछ इस तरह से है कि यह वार्मिंग होल कोई स्थायी सुरक्षा कवच नहीं है। सिंचाई के पैटर्न में बदलाव या प्रदूषण के स्तर में कमी आने पर यह स्थिति बदल भी सकती है। ऐसे में भारत के लिए यह राहत फिलहाल भले ही राहत की खबर हो, लेकिन इसे स्थायी मानकर बेफिक्र हो जाना सही नहीं होगा।
यह जानकारी आम लोगों के लिए भी अहम है, क्योंकि तापमान से जुड़ा हर बदलाव सीधे खेती, पानी की उपलब्धता और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालता है। वैज्ञानिक लगातार इस पैटर्न पर नजर बनाए हुए हैं।
18 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, चिंता की एक और वजह
तापमान के मोर्चे पर भले ही कुछ राहत की खबर हो, लेकिन दूसरी तरफ मानसून की मार अभी भी जारी है। मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के लगभग 18 राज्यों में आने वाले दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है।
इन इलाकों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बादलों की गरज के साथ बिजली गिरने का भी खतरा बताया गया है। यह चेतावनी उन राज्यों के लिए खासतौर पर अहम है, जहां पहले से ही बारिश का असर देखा जा रहा है।
कई राज्यों में पहले से हो रही है तेज बारिश
हाल के दिनों में मध्य प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में पहले से ही तेज बारिश दर्ज की जा चुकी है। लगातार हो रही इस बारिश ने कई इलाकों में स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
इसी वजह से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के निचले और संवेदनशील इलाकों में अचानक बाढ़ आने का अलर्ट भी जारी किया गया है। यह स्थिति स्थानीय प्रशासन और वहां रहने वाले लोगों दोनों के लिए सतर्कता बरतने का स्पष्ट संकेत है।
Global Warming India: आम आदमी के लिए क्यों जरूरी है यह जानकारी
तापमान और बारिश से जुड़ी ये दोनों खबरें एक साथ देखी जाएं, तो साफ पता चलता है कि भारत की जलवायु में एक जटिल संतुलन बना हुआ है। एक तरफ जहां गर्मी की रफ्तार धीमी होना राहत की बात लगती है, वहीं दूसरी तरफ बारिश और बाढ़ का खतरा चिंता बढ़ाने वाला है।
आम लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और जरूरी सावधानियां बरतें, खासकर उन इलाकों में जहां भारी बारिश और बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है।
नासा की इस रिपोर्ट ने भारत की जलवायु को लेकर एक नया नजरिया दिया है, जो सिंचाई और प्रदूषण जैसे इंसानी कारकों के अप्रत्याशित असर को उजागर करता है। हालांकि यह राहत स्थायी नहीं मानी जा सकती, और साथ ही देश के कई हिस्सों में मानसून का खतरा भी बरकरार है। आने वाले दिनों में मौसम और जलवायु से जुड़ी स्थिति पर सबकी नजर बनी रहेगी।
Read More Here:-
Gurugram News: गुरुग्राम में CM नायब सिंह सैनी ने मौके पर निपटाए 14 मामले, हुड्डा पर भी कसा तंज


