Top 5 This Week

Related Posts

Kerala Assembly Election: केरल में तीन सीटों पर जीत के बाद भाजपा का बड़ा दांव, लोकसभा चुनाव के लिए 13 सूत्रीय एजेंडा जारी कर अल्पसंख्यकों पर बदली रणनीति

Kerala Assembly Election: केरल विधानसभा चुनाव में पहली बार तीन सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने दक्षिण के इस दुर्ग में अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए राज्य के लिए एक नया 13 सूत्रीय राजनीतिक एजेंडा जारी किया है। इस नए रणनीतिक दस्तावेज में पार्टी ने हिंदू पिछड़े वर्गों, विशेषकर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय के बीच अपना जनाधार बढ़ाने और अल्पसंख्यक समुदायों के साथ अपने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित करने पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित किया है। तिरुवनंतपुरम में आयोजित प्रदेश भाजपा कोर कमेटी की मैराथन बैठक में इस महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसकी कमान केंद्रीय मंत्री और केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर के हाथों में थी।

तिरुवनंतपुरम की कोर कमेटी बैठक से निकला नया सियासी फॉर्मूला

भाजपा की इस उच्च स्तरीय सांगठनिक बैठक में राज्य के बदलते राजनीतिक मिजाज और हालिया चुनावी नतीजों की गहन समीक्षा की गई। पार्टी मुख्यालय से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, इस 13 सूत्रीय एजेंडे में सबसे चौंकाने वाला बदलाव ईसाई समुदाय (क्रिश्चियन कम्युनिटी) को लेकर किया गया है। नए प्लान में ईसाइयों के लिए किसी भी तरह के विशेष आउटरीच प्रोग्राम या नीति का कोई जिक्र नहीं है। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने चर्च के पादरियों और ईसाई समाज के संभ्रांत लोगों के साथ रिश्ते सुधारने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी का यह नया दस्तावेज केरल की पारंपरिक राजनीति में एलडीएफ और यूडीएफ के द्विध्रुवीय गठबंधन को तोड़कर एक मजबूत त्रिकोणीय मुकाबला खड़ा करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

चर्च से दूरी बनाने के पीछे क्या रहे प्रमुख सांगठनिक कारण

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा ने ईसाई समुदाय से पूरी तरह नाता नहीं तोड़ा है, लेकिन चर्च के शीर्ष नेतृत्व के साथ संस्थागत स्तर पर गठबंधन या मंच साझा करने की रणनीति से वह साफ तौर पर पीछे हट गई है। इस रणनीतिक बदलाव के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण माने जा रहे हैं। पहला यह कि राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के साथ चर्च के बड़े पादरियों की राजनीतिक नजदीकियां हाल के दिनों में काफी ज्यादा बढ़ गई हैं। दूसरा और सबसे तात्कालिक कारण केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किया गया एफसीआरए (FCRA) संशोधन विधेयक 2026 बना। विदेशी चंदे से जुड़े इस कड़े कानून का केरल के लगभग सभी चर्च संगठनों ने पुरजोर विरोध किया था, जिससे भाजपा के स्थानीय नेताओं के लिए चुनावी रैलियों में जवाब देना काफी असहज हो गया था। इसी कड़वाहट को देखते हुए पार्टी ने अब अपनी लाइन बदल ली है।

धर्म आधारित आरक्षण का पुरजोर विरोध और ओबीसी कार्ड पर दांव

भाजपा ने अपने नए राजनीतिक घोषणापत्र में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को सबसे बड़ा हथियार बनाने का फैसला किया है। पार्टी ने केरल की वामपंथी सरकार पर हमला बोलते हुए साफ किया है कि आरक्षण का आधार कभी भी मजहब या धर्म नहीं होना चाहिए। नए एजेंडे के मुताबिक, आरक्षण की व्यवस्था केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) तक ही सीमित रहनी चाहिए। भाजपा का खुला आरोप है कि केरल में एक खास अल्पसंख्यक समुदाय का प्रभुत्वशाली वर्ग ओबीसी कोटे के तहत मिलने वाले आरक्षण का गलत तरीके से लाभ उठा रहा है, जिससे वास्तविक पिछड़े हिंदू समाज का हक मारा जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने साफ लहजे में कहा कि पिछड़े वर्ग के संवैधानिक अधिकारों को धार्मिक तुष्टिकरण की भेंट चढ़ाने की किसी भी कोशिश का पार्टी सड़कों पर उतरकर कड़ा विरोध करेगी।

तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ ‘सबके लिए न्याय’ का नारा

पार्टी ने साफ किया है कि केरल में उसकी भावी राजनीति का मूल मंत्र ‘सबके लिए न्याय, किसी का तुष्टिकरण नहीं’ होगा। भाजपा नेतृत्व ने सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि राज्य प्रशासन मुस्लिम लीग और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों के सियासी दबाव में आकर बहुसंख्यक समाज के हितों की अनदेखी करेगा, तो पार्टी चुप नहीं बैठेगी। इसके साथ ही, इस 13 सूत्रीय एजेंडे में राज्य के सबसे बड़े धार्मिक आस्था के केंद्र सबरीमला के मुद्दे को एक बार फिर से हवा दी गई है। भाजपा ने सबरीमला मंदिर के बहुचर्चित गोल्ड लूट मामले की जांच सीधे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है। साथ ही, पूर्व में महिलाओं के प्रवेश को लेकर हुए जन आंदोलनों के दौरान पुलिस द्वारा दर्ज किए गए हजारों मुकदमों को तुरंत वापस लेने की वकालत भी की गई है।

मंदिरों की संपत्तियों का ऑडिट और कट्टरपंथ के खिलाफ कड़े कदम

हिंदू मतदाताओं को लामबंद करने के लिए भाजपा ने केरल के सरकारी नियंत्रण वाले देवस्वम बोर्डों के तहत आने वाले सभी मंदिरों की चल-अचल संपत्तियों और परिसंपत्तियों का एक स्वतंत्र और निष्पक्ष ऑडिट कराने की मांग उठाई है। इसके अलावा, राज्य के शैक्षणिक परिदृश्य में व्यापक सुधार और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया है। एजेंडे में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि राज्य के युवा तेजी से धार्मिक कट्टरपंथी संगठनों, प्रतिबंधित या संदिग्ध आतंकवादी नेटवर्कों और नशीले पदार्थों के जाल में फंस रहे हैं। भाजपा ने मांग की है कि स्कूलों और कॉलेजों के स्तर पर ही बच्चों को इन सामाजिक बुराइयों से बचाने के लिए राज्य सरकार को एक विशेष सुरक्षा टास्क फोर्स का गठन करना चाहिए।

Kerala Assembly Election: 20 प्रतिशत वोट शेयर का बड़ा लक्ष्य और मौजूदा जमीनी आंकड़े क्या कहते हैं

चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो केरल में भाजपा की सांगठनिक स्थिति में सुधार तो हुआ है, लेकिन वोट प्रतिशत के मामले में वह अभी भी अपने तय लक्ष्य से काफी दूर नजर आ रही है। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का कुल वोट शेयर 11.42 प्रतिशत रहा, जो कि साल 2021 के विधानसभा चुनाव में मिले 11.30 प्रतिशत वोट शेयर से महज मामूली रूप से अधिक है। केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य इकाई को आगामी लोकसभा चुनाव तक इस आंकड़े को हर हाल में 20 प्रतिशत तक ले जाने का कड़ा टास्क दिया है ताकि सीटों को सीधे जीत में बदला जा सके। हालांकि, इस चुनौती के बीच पार्टी अपने लिए एक सकारात्मक उम्मीद भी देख रही है। राजीव चंद्रशेखर के मुताबिक, केरल की कम से कम 21 विधानसभा सीटें ऐसी रही हैं जहां भाजपा ने 20 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए हैं, जबकि 10 सीटें ऐसी हैं जहां कमल के निशान पर 30 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ है। पार्टी इन्हीं मजबूत गढ़ों को आधार बनाकर अपनी आगे की चुनावी बिसात बिछाने की तैयारी में है।

Read More Here:- 

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles