Kolkata Taratala Accident: कोलकाता के तारातला इलाके में एक निर्माणाधीन गोदाम की छत ढहने से मचे कोहराम के बाद अब राजनीति और मुआवजे का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में इस दर्दनाक हादसे का ब्यौरा देते हुए पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल मुआवजे का एलान किया है, बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर करने के लिए एक व्यापक ऑडिट के आदेश भी दे दिए हैं।
Kolkata Taratala Accident: मृतकों के स्वजनों को 10 लाख की सहायता
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा कि तारातला गोदाम हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को राज्य सरकार की ओर से 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अलावा, जो लोग इस दुर्घटना में घायल हुए हैं, उनके इलाज के लिए एक लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि बचाव दल दिन रात काम कर रहे हैं। अब तक मलबे से 29 लोगों को बाहर निकाला गया है, जिनमें से नौ लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो चुकी है। घायलों का इलाज शहर के प्रमुख सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में चल रहा है, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
पूर्व मेयर फिरहाद हकीम की भूमिका पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सीधे तौर पर पूर्व मेयर और मंत्री फिरहाद हकीम पर निशाना साधा है। उन्होंने सदन में दावा किया कि जिस गोदाम का नक्शा पास किया गया था, उस पर पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के हस्ताक्षर मौजूद हैं। सीएम ने कहा कि प्रारंभिक जांच और कोलकाता नगर निगम के इंजीनियरों की रिपोर्ट से पता चलता है कि गोदाम के निर्माण के लिए जो बिल्डिंग प्लान मंजूर किया गया था, उसमें गंभीर कमियां और तकनीकी खामियां थीं।
शुभेंदु ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि इस मामले में किसी को भी ढील नहीं दी जाएगी। सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर किसके इशारे पर नियमों को दरकिनार कर इस नक्शे को मंजूरी दी गई थी। हादसे के बाद से ही स्थानीय लोगों में खासा आक्रोश है और वे प्रशासन की ओर से की गई ढिलाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
निर्माणाधीन कमर्शियल प्रोजेक्ट्स पर लगी रोक
तारातला की इस दुखद घटना से सबक लेते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य भर में बड़े स्तर पर कार्रवाई का फैसला लिया है। पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान मंजूर किए गए सभी निर्माणाधीन कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के काम को 31 जुलाई तक के लिए रोक दिया गया है। मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि इन सभी परियोजनाओं का एक व्यापक ऑडिट किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सुरक्षा मानकों का पालन हुआ है या नहीं।
प्रशासनिक स्तर पर इस फैसले को एक बड़े सुधार के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री का कहना है कि कोलकाता जैसे घनी आबादी वाले शहर में सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गोदाम गिरने की घटना ने शहर की बिल्डिंग निर्माण प्रक्रिया की पोल खोल दी है, जिसके कारण अब हर प्रोजेक्ट की बारीकी से जांच की जाएगी।
Kolkata Taratala Accident: पांच आरोपियों की गिरफ्तारी से बढ़ेगी जांच की गति
हादसे के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गोदाम मालिक समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनसे निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई घटिया सामग्री और नियमों के उल्लंघन का पता चलता है। जांच अधिकारी यह देख रहे हैं कि क्या बिल्डिंग कोड का पूरी तरह पालन किया गया था या नहीं। घटनास्थल पर बचाव कार्य अभी भी जारी है क्योंकि ऐसी आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ और लोग दबे हो सकते हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से अवैध तरीके से निर्माण कार्य चल रहा था, जिसकी शिकायतें भी कई बार की गई थीं। लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि अगर प्रशासन ने समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया होता, तो शायद आज ये नौ जिंदगियां बच सकती थीं। मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि इस मामले में जो भी अधिकारी या व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून अपना काम करेगा।
Kolkata Taratala Accident: प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
कोलकाता का तारातला इलाका औद्योगिक और कमर्शियल गतिविधियों का केंद्र है। यहाँ हर दिन हजारों लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसी जगहों पर बिना सुरक्षा मानकों के निर्माण होना एक बड़ी लापरवाही है। अब राज्य सरकार के सामने चुनौती है कि वह न केवल इस मामले के दोषियों को सजा दिलाए, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक ठोस नीति भी तैयार करे।
विधानसभा में विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही यह भी मांग की है कि जांच निष्पक्ष हो और किसी भी बड़े रसूखदार को इसमें छूट न मिले। मुख्यमंत्री का यह कहना कि ‘किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा’, प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक सख्त संदेश है। अब देखना यह होगा कि 31 जुलाई तक होने वाला ऑडिट किस तरह के चौंकाने वाले खुलासे करता है और क्या वास्तव में शहर की निर्माण व्यवस्था में कोई स्थाई बदलाव आ पाता है या नहीं। फिलहाल पूरे शहर की नजरें एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती घायलों की रिकवरी और बचाव दल की आखिरी कोशिशों पर टिकी हैं।
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