डेस्क – तेलंगाना में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने महबूबनगर के डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर मूड किशन नायक के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति मिली है, जो उनकी सैलरी से बहुत ज्यादा है। यह खुलासा लोगों को हैरान कर रहा है कि एक सरकारी अधिकारी कैसे इतना अमीर बन गया।
ACB की रेड: कैसे शुरू हुई जांच?
23 दिसंबर 2025 को ACB की टीमों ने एक साथ 12 जगहों पर छापा मारा। इनमें किशन का सिकंदराबाद में घर, उनके रिश्तेदारों के ठिकाने और सहयोगियों के जगह शामिल थे। जगहें हैदराबाद, महबूबनगर, संगारेड्डी, निजामाबाद और रंगा रेड्डी जिलों में थीं। ACB को पहले से शिकायतें मिली थीं कि किशन नौकरी के दौरान गलत तरीकों से पैसा कमा रहे हैं। उनकी सैलरी महज 1 से 1.25 लाख रुपये महीना है, लेकिन संपत्ति करोड़ों में है। जांच के बाद ACB ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत केस दर्ज किया और छापे मारे।
क्या-क्या मिला छापे में?
छापेमारी में ACB को बहुत सी संपत्तियां मिलीं। दस्तावेजों के हिसाब से इनकी कीमत 12.72 करोड़ रुपये है, लेकिन बाजार मूल्य 100 करोड़ से ज्यादा बताया जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में तो 250 करोड़ तक का अनुमान लगाया गया है। खास तौर पर संगारेड्डी जिले में 31 एकड़ कृषि जमीन की कीमत ही 60-62 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
मुख्य संपत्तियां इस प्रकार हैं:
. निजामाबाद में लाहारी इंटरनेशनल होटल में 50% हिस्सा।
. 3,000 स्क्वायर यार्ड कमर्शियल जगह, जो रॉयल ओक फर्नीचर को लीज पर दी गई है।
. निजामाबाद में दो लग्जरी फ्लैट।
. संगारेड्डी में 31 एकड़ कृषि जमीन और निजामाबाद में 10 एकड़ कमर्शियल जमीन।
. 4,000 स्क्वायर फुट का पॉलीहाउस और शेड।
. बैंक में 1.37 करोड़ रुपये का बैलेंस।
. 1 किलो से ज्यादा सोने के गहने।
. दो महंगी गाड़ियां: इनोवा क्रिस्टा और होंडा सिटी।
ये संपत्तियां ज्यादातर रिश्तेदारों या बेनामी लोगों के नाम पर थीं। ACB को संदेह है कि किशन का ड्राइवर एनुगु शिवशंकर बेनामी था, जिसके नाम पर कुछ गाड़ियां और संपत्तियां थीं। छापे के बाद शिवशंकर गायब हो गया है।
अधिकारी की सैलरी और वैभव में बड़ा फर्क
मूड किशन पहले मेडचल और मेहदीपट्नम में RTO थे, फिर महबूबनगर में डिप्टी कमिश्नर बने। उनकी सरकारी सैलरी से इतनी संपत्ति बनाना नामुमकिन लगता है। ACB का कहना है कि उन्होंने नौकरी के दौरान रिश्वत और गलत तरीकों से पैसा कमाया। सूत्र बताते हैं कि छापे की खबर मिलते ही किशन ने सोना और दस्तावेज छिपाने की कोशिश की। वे घंटों बाथरूम में रहे, लेकिन ACB ने सब बरामद कर लिया। यह दिखाता है कि भ्रष्टाचार कितनी गहराई तक फैला है।
जांच आगे क्या होगी?
ACB की डायरेक्टर जनरल चारु सिन्हा ने कहा कि जांच जारी है। और संपत्तियां मिल सकती हैं। सभी दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। किशन को गिरफ्तार किया जा सकता है। उनके सहयोगियों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ होगी। यह मामला ट्रांसपोर्ट विभाग में भ्रष्टाचार की बड़ी मिसाल है। यहां वाहन रजिस्ट्रेशन, परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट जैसे कामों में रिश्वत आम बात मानी जाती है।
निष्कर्ष:
यह खुलासा बताता है कि सरकारी नौकरी में कुछ लोग जनता की सेवा के बजाय अपना साम्राज्य बना रहे हैं। एक साधारण सैलरी वाला अधिकारी करोड़पति कैसे बन जाता है? यह सवाल पूरे सिस्टम पर उठता है। ACB की इस कार्रवाई से उम्मीद है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। आम लोग भी सतर्क रहें और रिश्वत की शिकायत करें। ACB का टोल फ्री नंबर 1064 है, जहां गोपनीय शिकायत की जा सकती है। अगर सिस्टम साफ होगा, तभी देश आगे बढ़ेगा। ऐसे मामलों से सबक लेकर ईमानदारी को बढ़ावा देना चाहिए।



