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TMC Bank Accounts Freezed: तृणमूल के बैंक खातों पर जांच का शिकंजा, 440 करोड़ फ्रीज, पांच साल के लेन-देन की पड़ताल शुरू

TMC Bank Accounts Freezed: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस इस वक्त एक बड़े वित्तीय विवाद में घिरती नजर आ रही है। पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा 440 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं और अब बिधाननगर साइबर पुलिस स्टेशन इन खातों की पांच साल पुरानी लेन-देन की जानकारी खंगाल रही है। जांचकर्ता यह समझना चाहते हैं कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई, किन खातों के जरिए जमा हुई और इसके पीछे क्या मकसद था। यह मामला अब सिर्फ पार्टी की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानूनी और जांच एजेंसियों के दायरे में आ चुका है।

TMC Bank Accounts Freezed: तीन खाते, 440 करोड़ और एक लंबी जांच

बिधाननगर पुलिस स्टेशन ने उन निजी बैंकों से पूरी जानकारी मांगी है जहां तृणमूल के ये तीनों खाते थे। पुलिस जानना चाहती है कि ये खाते कब खोले गए, खोलने के लिए कौन से कागजात लगाए गए और ये खाते किसके नाम पर दर्ज हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि पिछले पांच सालों में इन खातों में पैसा कहां से आया। क्योंकि आरोप है कि इन खातों में कई संदिग्ध लेन-देन हुए और कुछ ऐसी रकम भी जमा की गई जो किसी और जगह से निकाली गई थी।

मामला शुरू कहां से हुआ

इस पूरे मामले की शुरुआत जयनगर के एक विधायक की शिकायत से हुई। उनकी शिकायत के आधार पर ही एक निजी बैंक के तीन खाते फ्रीज करने की कार्रवाई हुई। इसके बाद यह मसला धीरे-धीरे बड़ा होता गया। 12 जून को तृणमूल के तत्कालीन कोषाध्यक्ष अरूप बिश्वास ने बैंक अधिकारियों को खुद चिट्ठी लिखकर अपना खाता फ्रीज करने को कहा। यह कदम सबको हैरान कर गया। लेकिन पार्टी ने इससे पहले ही 5 जून को अरूप बिश्वास की जगह सुभाषिश चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष बना दिया था। अब अरूप बिश्वास पर मुकदमा भी चल रहा है।

ममता की पार्टी अब कोर्ट का रास्ता अपनाएगी

कालीघाट तृणमूल यानी पार्टी का मुख्य गुट इस मामले में हाई कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों की मानें तो पार्टी अपने फ्रीज हुए फंड को बचाने के लिए कानूनी रास्ता अपनाएगी। पार्टी के अंदर इस समय हड़कंप मचा हुआ है। एक तरफ जांच चल रही है, दूसरी तरफ पार्टी की छवि पर असर पड़ रहा है। जो पैसा राजनीतिक कामों के लिए रखा गया था, वह अब अदालती लड़ाई में उलझ गया है।

अभिषेक बनर्जी की दिल्ली यात्रा और विवाद

जिस दिन तृणमूल सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी लोकसभा अध्यक्ष से मिलने दिल्ली गए, उसी दिन राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी ने उनकी यात्रा पर तंज कसा। विवाद का मुद्दा था चार्टर्ड विमान। रीतब्रत बनर्जी ने यह सवाल उठाया कि अभिषेक बनर्जी दिल्ली किस विमान से गए और उसका खर्च कहां से आया। इसी के साथ उन्होंने तृणमूल के पार्टी फंड के स्रोत पर भी सवाल खड़े किए। यह सब उसी दिन हुआ जब बैंक खातों के फ्रीज होने की खबर सामने आई।

आम लोगों के मन में एक सीधा सवाल है, जब एक राजनीतिक पार्टी के खाते में 440 करोड़ रुपये जमा हों और उनकी जांच हो, तो यह पैसा आखिर कहां से आया?तृणमूल जैसी पार्टी जो लंबे समय से पश्चिम बंगाल की सत्ता में है, उसके लिए यह सवाल सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक भी है। विपक्ष इस मौके को भुनाने में लगा है। भाजपा और वाम दलों ने भी इस मुद्दे पर तृणमूल को घेरना शुरू कर दिया है।

TMC Bank Accounts Freezed: बिधाननगर साइबर पुलिस की भूमिका

बिधाननगर साइबर पुलिस स्टेशन इस पूरे मामले की जांच का केंद्र बना हुआ है। साइबर पुलिस इसलिए इस मामले में शामिल है क्योंकि संदिग्ध लेन-देन में डिजिटल और ऑनलाइन तरीकों का इस्तेमाल हो सकता है। जांचकर्ता अब हर उस खाते तक पहुंचना चाहते हैं जहां से इन तीन बैंक खातों में पैसा आया। यह एक जटिल वित्तीय जांच है जिसमें बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेज और डिजिटल ट्रांजेक्शन सभी की पड़ताल होगी।

तृणमूल कांग्रेस यानी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की स्थापना 1998 में ममता बनर्जी ने की थी। 2011 से यह पार्टी पश्चिम बंगाल में सत्ता में है। 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने तीसरी बार बड़ी जीत हासिल की। पार्टी के पास इस वक्त राज्य में मजबूत जमीनी पकड़ है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पार्टी के कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी हुई है।

TMC Bank Accounts Freezed: आगे क्या होगा

अभी मामला कई दिशाओं में एक साथ आगे बढ़ रहा है। बिधाननगर पुलिस जांच कर रही है। बैंक अपने रिकॉर्ड पुलिस को सौंपेंगे। तृणमूल हाई कोर्ट में जाने की तैयारी कर रही है। और सियासी बहस विधानसभा से लेकर सोशल मीडिया तक जारी है। जब तक अदालत कोई फैसला नहीं सुनाती या जांच में कोई नई जानकारी सामने नहीं आती, 440 करोड़ रुपये का यह पैसा बैंक में ही बंद रहेगा। तृणमूल के लिए यह सिर्फ पैसे की लड़ाई नहीं है, यह पार्टी की साख की भी परीक्षा है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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