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Sawan Putrada Ekadashi 2026 Date: श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 कब है, जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Sawan Putrada Ekadashi 2026 Date: पवित्र श्रावण मास की शुरुआत हो चुकी है। भगवान शिव की भक्ति का यह महीना 30 जुलाई 2026 से प्रारंभ हुआ है। सावन में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं जिनमें शिवरात्रि, सोमवारी व्रत, मंगला गौरी, नाग पंचमी, कजरी तीज और श्रावण पुत्रदा एकादशी प्रमुख हैं। इनमें से पुत्रदा एकादशी संतान सुख की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

Sawan Putrada Ekadashi 2026 Date: श्रावण पुत्रदा एकादशी की तारीख

इस वर्ष श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 23 अगस्त को रात 2:00 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त को सुबह 4:18 बजे तक रहेगी। व्रत का पारण 24 अगस्त को दोपहर 1:41 से 4:16 बजे के बीच करना शुभ माना गया है।

व्रत का धार्मिक महत्व

पुत्रदा एकादशी को पवित्रोपना एकादशी या पवित्र एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में इसका विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। जो दंपति संतान की इच्छा रखते हैं वे इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। व्रत से न केवल योग्य संतान मिलती है बल्कि वह संतान दीर्घायु, बुद्धिमान और धार्मिक प्रवृत्ति की होती है। इसके अलावा जीवन के रोग, दरिद्रता और विभिन्न संकट भी दूर होते हैं। इस व्रत को वाजपेय यज्ञ के समान पुण्यदायी माना गया है। सभी पापों का नाश होने की भी मान्यता है।

पूजा विधि

इस दिन पीले वस्त्र पहनकर श्रीहरि विष्णु भगवान की पूजा करनी चाहिए। सुबह स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य अवश्य दें। पूजा के दौरान पुत्रदा एकादशी की कथा का पाठ करें। विष्णु सहस्रनाम का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। व्रत में अन्न का सेवन पूर्णतः वर्जित है। विशेष रूप से चावल का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। फल, दूध या फलाहार का सेवन किया जा सकता है। पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद निर्धारित मुहूर्त में ही करें।

व्रत रखने वाले के लिए नियम

व्रतधारी को दिन भर संयम रखना चाहिए। सत्य बोलना, किसी को कष्ट न देना और मन को शुद्ध रखना जरूरी है। शाम को भगवान विष्णु की आरती करें और दीप जलाएं। रात को भगवद कथा सुनें या पढ़ें। सुबह पारण से पहले स्नान कर पूजा करें और फिर अन्न ग्रहण करें।

संतान सुख की कामना वाले दंपति

जो दंपति लंबे समय से संतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं वे इस व्रत को विशेष श्रद्धा से रखें। निरंतर विश्वास और नियमित पूजा से मनोकामना पूरी होने की मान्यता है। कई परिवार पीढ़ियों से इस व्रत को रखते आए हैं।

सावन मास का महत्व

सावन का पूरा महीना शिव भक्ति के लिए समर्पित है। इस महीने में शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र चढ़ाना और सोमवार व्रत रखने का विशेष फल मिलता है। पुत्रदा एकादशी भी इसी पावन माह में आती है इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।

व्रत की तैयारी

व्रत से एक दिन पहले घर की सफाई कर लें। पूजा सामग्री जैसे पीले फूल, चंदन, धूप, दीप, फल और मिठाई पहले से व्यवस्थित रखें। कथा की पुस्तक या ऑनलाइन उपलब्ध सामग्री तैयार रखें।

पारण का सही समय

पारण समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। गलत समय पर पारण करने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। इसलिए पंचांग या विश्वसनीय स्रोत से समय की पुष्टि कर लें।

सामान्य सावधानियां

गर्भवती महिलाएं, बीमार व्यक्ति या वृद्धजन चिकित्सक की सलाह लेकर ही व्रत रखें। स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। बच्चों को जबरन व्रत न रखने दें।

आस्था और विश्वास

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत ऊंचा स्थान है। हर महीने दो एकादशी आती हैं लेकिन श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी संतान संबंधी मनोकामनाओं के लिए विशेष मानी जाती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया व्रत फलदायी होता है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी इस वर्ष 23 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। व्रत का पारण 24 अगस्त को दोपहर 1:41 से 4:16 बजे के बीच करना है। संतान सुख की इच्छा रखने वाले दंपति इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करें, कथा पढ़ें और नियमों का पालन करें। सावन मास में यह व्रत और भी पुण्यदायी माना जाता है। सही विधि और श्रद्धा से व्रत रखने पर मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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