नई दिल्ली: भारतीय सरकार ने बैंक में मौजूद फर्जी खातों पर नियंत्रण पाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेने का निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ‘म्यूलहंटर डॉट एआई’ सहित AI उपकरणों का उपयोग करने के लिए कहा है, जिससे फर्जी खातों की पहचान तेजी से हो सकेगी और वित्तीय धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।
म्यूलहंटर डॉट एआई का महत्व
आरबीआई द्वारा विकसित म्यूलहंटर डॉट एआई टूल फर्जी खातों की पहचान करने और उन्हें हटाने में मदद करेगा। यह टूल मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले म्यूल खातों की पहचान में सहायता करता है। वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू की अध्यक्षता में हुई बैठक में बैंकों से सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने, अत्याधुनिक उपकरणों का लाभ उठाने और म्यूल (फर्जी) खातों से निपटने के लिए बैंकों के बीच सहयोग बढ़ाने को कहा गया।
फर्जी खातों का उपयोग
फर्जी बैंक खातों का उपयोग अपराधी अवैध तरीके से धन लूटने के लिए करते हैं। गुमनाम व्यक्ति इन खातों को खोलकर ठगी के पैसे जमा करवाते हैं, जिससे धन हस्तांतरण का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। ये खाते अक्सर यूपीआई जैसे माध्यमों से तेजी से धन ट्रांसफर करने में इस्तेमाल होते हैं।
वित्तीय धोखाधड़ी पर नियंत्रण
वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने एक्स पर पोस्ट किया, “नागरिकों की मेहनत की कमाई की सुरक्षा के लिए सक्रिय उपाय किए जाने चाहिए।” उन्होंने कहा कि यह हमारी साझा जिम्मेदारी है। आरबीआई ने पहले ही दो प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा इस टूल को अपनाने की पुष्टि की है, और दस अन्य बैंकों के साथ चर्चा चल रही है।
इस पहल से उम्मीद है कि वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जाएगा और फर्जी खातों की संख्या में कमी आएगी। सरकार की यह रणनीति न केवल बैंकों की सुरक्षा को बढ़ाएगी, बल्कि आम नागरिकों की वित्तीय सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगी।

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