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ISRO Scientist Vacancy 2026: ISRO में साइंटिस्ट/इंजीनियर के 92 पदों पर भर्ती, गेट स्कोर से होगा चयन, सैलरी 1 लाख से ज्यादा

ISRO Scientist Vacancy 2026: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने Scientist/Engineer ‘SC’ पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। कुल 92 पदों पर यह भर्ती निकाली गई है। चयन गेट स्कोर और इंटरव्यू के आधार पर होगा। किसी अलग लिखित परीक्षा का आयोजन नहीं किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 17 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।

ISRO Scientist Vacancy 2026: किन शाखाओं में निकली भर्ती?

कुल 92 पद विभिन्न इंजीनियरिंग शाखाओं के लिए निकाले गए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स में 34 पद, मैकेनिकल में 26 पद, कंप्यूटर साइंस में 13 पद, सिविल में 10 पद, इलेक्ट्रिकल में 4 पद, रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग में 2 पद, आर्किटेक्चर में 2 पद और सिविल (पीआरएल) में 1 पद शामिल हैं। इन शाखाओं से संबंधित उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।

पात्रता शर्तें

आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में बीई/बीटेक या समकक्ष डिग्री होनी चाहिए। इसके साथ गेट 2025 या गेट 2026 का वैध स्कोर भी जरूरी है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 65 प्रतिशत अंक या 6.84 सीजीपीए निर्धारित है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार छूट मिल सकती है।

आयु सीमा

अधिकतम आयु 28 वर्ष निर्धारित की गई है। यह आयु 17 अगस्त 2026 तक मान्य होगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी।

चयन प्रक्रिया

इस भर्ती में कोई अलग लिखित परीक्षा नहीं होगी। उम्मीदवारों को पहले गेट स्कोर के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इसके बाद इंटरव्यू के जरिए अंतिम चयन किया जाएगा। गेट स्कोर की अहमियत ज्यादा होने के कारण अच्छा स्कोर वाले उम्मीदवारों को फायदा मिलेगा।

सैलरी और भत्ते

चुने गए उम्मीदवारों की नियुक्ति Scientist/Engineer ‘SC’ पद पर होगी। उन्हें पे मैट्रिक्स लेवल-10 के तहत 56,100 रुपये प्रति महीने का शुरुआती बेसिक वेतन मिलेगा। अधिकतम सैलरी एक लाख रुपये से ज्यादा हो सकती है। इसके अलावा महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य सरकारी सुविधाएं भी दी जाएंगी।

आवेदन कैसे करें?

उम्मीदवार इसरो की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करते समय दस्तावेज, गेट स्कोरकार्ड और अन्य जरूरी जानकारी अपलोड करनी होगी। आवेदन की अंतिम तिथि 17 अगस्त 2026 है। अंतिम समय का इंतजार न करें और समय रहते फॉर्म जमा कर दें।

तैयारी के लिए सुझाव

चूंकि चयन गेट स्कोर पर आधारित है इसलिए गेट परीक्षा की अच्छी तैयारी वाले उम्मीदवारों को बेहतर मौका मिलेगा। इंटरव्यू के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ सामान्य जागरूकता और व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान देना चाहिए। आधिकारिक नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें और सभी शर्तें पूरी होने के बाद ही आवेदन करें।

इस भर्ती का महत्व

इसरो जैसी प्रतिष्ठित संस्था में नौकरी मिलना कई इंजीनियरिंग स्नातकों का सपना होता है। अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में काम करने का मौका मिलने के साथ अच्छी सैलरी और सरकारी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। 92 पदों पर यह भर्ती योग्य उम्मीदवारों के लिए सुनहरा अवसर है।

इसरो ने Scientist/Engineer SC के 92 पदों पर भर्ती निकाली है। चयन गेट स्कोर और इंटरव्यू के आधार पर होगा। इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, कंप्यूटर साइंस समेत कई शाखाओं में पद उपलब्ध हैं। अधिकतम आयु 28 वर्ष और आवेदन की अंतिम तिथि 17 अगस्त 2026 है। शुरुआती बेसिक सैलरी 56,100 रुपये होगी जो भत्तों के साथ एक लाख से ऊपर पहुंच सकती है। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर समय रहते आवेदन करें।

Asian Games 2026: एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय हॉकी टीम का ऐलान, हरमनप्रीत सिंह फिर होंगे कप्तान

Asian Games 2026: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय मेन्स हॉकी टीम एक बार फिर गोल्ड मेडल बचाने के इरादे से मैदान में उतरेगी। हॉकी इंडिया ने 29 जुलाई को 20वें एशियन गेम्स के लिए 20 सदस्यीय भारतीय टीम की घोषणा कर दी। एशियन गेम्स 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान में आयोजित होगा। अनुभवी डिफेंडर और स्टार ड्रैग-फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह को लगातार दूसरी बार टीम की कप्तानी सौंपी गई है।

Asian Games 2026: गोल्ड बचाने की चुनौती

भारत ने 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में गोल्ड मेडल जीता था। अब जापान के आइची-नागोया में होने वाले इस टूर्नामेंट में टीम अपने खिताब की रक्षा करने उतरेगी। भारतीय टीम को पूल-ए में मेजबान जापान, साउथ कोरिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया के साथ रखा गया है।

टीम का स्वरूप

गोलकीपिंग की जिम्मेदारी मोहित एचएस और सूरज करकेरा संभालेंगे। डिफेंस में कप्तान हरमनप्रीत सिंह के साथ जरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच शामिल हैं। मिडफील्ड में राजिंदर सिंह, राज कुमार पाल, हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह, नीलकांत शर्मा और विवेक सागर प्रसाद टीम को संतुलन देंगे। अटैक की जिम्मेदारी दिलप्रीत सिंह, शिलानंद लकड़ा, सुखजीत सिंह, मनदीप सिंह और अभिषेक पर होगी।

ओलंपिक क्वालीफिकेशन का लक्ष्य

हेड कोच क्रेग फुल्टन ने टीम चयन पर कहा कि एशियन गेम्स के लिए चुनी गई भारतीय टीम बेहद अनुभवी है। उनके अनुसार जापान में होने वाली यह प्रतियोगिता चुनौतीपूर्ण होगी क्योंकि इस टूर्नामेंट का विजेता सीधे लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 के लिए क्वालिफाई करेगा। उन्होंने कहा कि यही भारतीय टीम का सबसे बड़ा लक्ष्य है।

कप्तान का भरोसा

कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने टीम पर भरोसा जताते हुए कहा कि युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का शानदार मिश्रण भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को दबाव लेने के बजाय अपने खेल का आनंद लेना चाहिए और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाना चाहिए।

मुकाबलों का शेड्यूल

एशियन गेम्स में कुल 12 टीमें दो पूल में बांटी गई हैं। सभी मुकाबले जापान के काकामिगहारा स्थित गिफू प्रीफेक्चरल ग्रीन स्टेडियम में खेले जाएंगे। भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत 20 सितंबर को इंडोनेशिया के खिलाफ करेगी। इसके बाद 22 सितंबर को श्रीलंका, 24 सितंबर को साउथ कोरिया, 26 सितंबर को जापान और 28 सितंबर को बांग्लादेश से मुकाबला होगा।

अनुभवी चेहरों का दबदबा

टीम में मनप्रीत सिंह जैसे अनुभवी मिडफील्डर की मौजूदगी संतुलन बनाएगी। हरमनप्रीत सिंह की ड्रैग-फ्लिक क्षमता और अमित रोहिदास जैसे डिफेंडर्स का अनुभव टीम की रक्षा को मजबूत करेगा। आगे की लाइन में दिलप्रीत सिंह और अभिषेक जैसे खिलाड़ी गोल करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

चुनौतियां और उम्मीदें

मेजबान जापान और साउथ कोरिया मजबूत प्रतिद्वंद्वी साबित होंगे। बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया के खिलाफ अच्छे नतीजे निकालकर सेमीफाइनल की राह आसान की जा सकती है। टीम का फोकस न सिर्फ गोल्ड बचाने बल्कि ओलंपिक क्वालीफिकेशन सुनिश्चित करने पर भी रहेगा।

हॉकी इंडिया ने एशियन गेम्स 2026 के लिए 20 सदस्यीय भारतीय मेन्स हॉकी टीम का ऐलान कर दिया है। हरमनप्रीत सिंह लगातार दूसरी बार कप्तान बनाए गए हैं। भारत पूल-ए में जापान, कोरिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया के साथ है। विजेता टीम लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 के लिए सीधे क्वालिफाई करेगी। हेड कोच क्रेग फुल्टन और कप्तान हरमनप्रीत ने टीम पर भरोसा जताया है। भारतीय टीम 20 सितंबर से अपना अभियान शुरू करेगी।

Delhi Street Food: मानसून में स्वाद और सेहत का बेजोड़ संगम, ट्राई करें दिल्ली के ये 5 मशहूर स्ट्रीट फूड

Delhi Street Food: दिल्ली में मानसून का मौसम आते ही शहर की फिजा पूरी तरह बदल जाती है। जैसे ही बारिश की ठंडी बूंदें तपती सड़कों पर गिरती हैं, मिट्टी की सोंधी खुशबू के साथ चाय और गरमा-गरम स्ट्रीट फूड की मनमोहक महक पूरे वातावरण में फैल जाती है। यही वजह है कि बारिश का यह सुहाना मौसम आते ही दिल्लीवासियों की सबसे पहली पसंद सड़क किनारे मिलने वाले स्वादिष्ट और चटपटे स्नैक्स बन जाते हैं। हालांकि इस मौसम में बाहर का खाना खाते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है, लेकिन किसी भरोसेमंद और लोकप्रिय दुकान से ताजा बना हुआ स्ट्रीट फूड खाने का आनंद ही कुछ अलग होता है। आइए आज बात करते हैं ऐसे पांच चुनिंदा स्ट्रीट फूड्स की, जो इस बारिश के मौसम में आपके स्वाद और सेहत दोनों का बखूबी ख्याल रखेंगे।

Delhi Street Food: मूंग दाल के पकौड़े और बारिश का अनोखा मेल

बारिश और पकौड़ों का रिश्ता दशकों पुराना है, लेकिन अगर सेहत और स्वाद दोनों का सही संतुलन चुनना हो तो मूंग दाल के पकौड़े सबसे बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं। सामान्य बेसन के पकौड़ों की तुलना में मूंग दाल प्रोटीन और फाइबर का एक बहुत अच्छा स्रोत होती है, जो इसे ज्यादा पौष्टिक बनाती है। बाहर से बेहद कुरकुरे और अंदर से मुलायम ये पकौड़े जब तीखी हरी चटनी और अदरक वाली मसाला चाय के साथ परोसे जाते हैं, तो खाने का मजा दोगुना हो जाता है। करोल बाग और उसके आसपास के इलाकों में जैसे ही बारिश की फुहारें शुरू होती हैं, इन पकौड़ों की दुकानों पर शौकीनों की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है।

जामुन की चाट से बढ़ाएं मानसून का स्वाद

यदि आप इस बारिश के मौसम में कुछ हटकर और पूरी तरह से हेल्दी ट्राई करना चाहते हैं, तो जामुन की चाट एक बेहतरीन और अनोखा विकल्प साबित हो सकती है। यह पूरी तरह से मानसून का मौसमी स्ट्रीट फूड है, जो साल में केवल कुछ ही हफ्तों के लिए बाजार में नजर आता है। ताजे और रसीले जामुनों में काला नमक, भुना हुआ जीरा, नींबू का रस और कुछ खास मसाले मिलाकर तैयार की जाने वाली यह चाट स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ख्याल रखती है। जामुन में प्राकृतिक रूप से एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार की कुछ प्रसिद्ध गलियों में यह खास चाट बारिश के दिनों में लोगों को खूब आकर्षित करती है।

दिल्ली के मशहूर राम लड्डू का लाजवाब स्वाद

राजधानी के स्ट्रीट फूड की बात हो और राम लड्डू का जिक्र न किया जाए, ऐसा तो शायद ही कभी संभव हो सके। मूंग दाल के पेस्ट से तैयार किए जाने वाले इन छोटे-छोटे और सुनहरे लड्डुओं को ऊपर से कद्दूकस की हुई ताजी मूली और खट्टी-मीठी हरी चटनी के साथ परोसा जाता है। यह स्नैक खाने में बेहद हल्का होता है और इसका अनूठा स्वाद हर किसी को अपना दीवाना बना लेता है। लाजपत नगर और उसके आसपास के बाजारों में मिलने वाले ये राम लड्डू बारिश के मौसम में लोगों की पहली पसंद बन जाते हैं। दाल से बने होने के कारण इसमें भरपूर प्रोटीन होता है, जबकि साथ में मिलने वाली मूली पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करती है।

Delhi Street Food: गरमा-गरम ब्रेड पकौड़ा और चांदनी चौक का मजा

बरसात के सुहाने मौसम में एक कप कड़क चाय के साथ गरमा-गरम ब्रेड पकौड़ा खाने का आनंद ही कुछ और होता है। तीखे मसालों से तैयार उबले आलू की स्टफिंग को ब्रेड के बीच भरकर बेसन के गाढ़े घोल में लपेटा जाता है और फिर सुनहरे रंग में त्रेता तक तला जाता है। इसके साथ सर्व की जाने वाली तीखी हरी चटनी और तली हुई मिर्च इस पूरे व्यंजन के स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है। चांदनी चौक और शहर के अन्य ऐतिहासिक बाजारों में यह मानसून के दौरान खाया जाने वाला सबसे लोकप्रिय स्नैक माना जाता है। हालांकि यह एक तला हुआ खाद्य पदार्थ है, इसलिए संतुलित मात्रा में इसका सेवन करने से स्वाद का आनंद भी मिलता है और सेहत पर भी असर नहीं पड़ता है।

Delhi Street Food: छोले भटूरे का क्लासिक और दमदार कॉम्बिनेशन

छोले भटूरे को हमेशा से ही दिल्ली की सांस्कृतिक और खानपान की पहचान माना जाता है और हल्की ठंडक वाले बारिश के मौसम में इसका क्रेज और अधिक बढ़ जाता है। गरमा-गरम मसालेदार छोले, फूले हुए नरम भटूरे और साथ में नींबू का अचार या हरी मिर्च का मेल हर फूडी के दिल को खुश कर देता है। छोले शरीर के लिए प्रोटीन और फाइबर का एक बेहतरीन स्रोत हैं, जबकि भटूरे एक संपूर्ण और पेट भरने वाला आहार बनाते हैं। यदि आप किसी साफ-सुथरे और प्रतिष्ठित रेस्तरां या फूड स्टॉल से इसका लुत्फ उठाते हैं, तो यह मानसून के दिनों में एक बेहद शानदार और यादगार फूड अनुभव साबित हो सकता है।

Rahul Gandhi: लोकसभा में राहुल गांधी का बड़ा हमला, कहा- आरएसएस ने हाईजैक की शिक्षा व्यवस्था और इसके दोषी हैं अमित शाह

Rahul Gandhi: संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में उस समय राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों को लेकर तीखा हमला बोला। एंटी पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस ने पूरी शिक्षा व्यवस्था को अपने कब्जे में कर लिया है और देश के हर विश्वविद्यालय के कुलपति इसी संगठन से जुड़े हुए हैं।

अपने भाषण के दौरान उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी सीधा निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा देखने को मिला। इस तीखी बहस और हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही काफी प्रभावित हुई, जहां दोनों ओर के दिग्गजों ने अपने-अपने अंदाज में सदन की गरिमा और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बातें रखीं।

Rahul Gandhi: शिक्षा व्यवस्था के निजीकरण और आरएसएस के कब्जे पर बयान

संसद में अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त की और इसके लिए सीधे तौर पर एक वैचारिक संगठन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली का बड़े पैमाने पर निजीकरण किया जा रहा है और एक विशेष संगठन यानी आरएसएस ने इस पर पूरी तरह से कब्जा जमा लिया है।

उनका यह भी कहना था कि देश के हर प्रमुख विश्वविद्यालय के कुलपति का संबंध उसी संगठन से है, जिसे एक सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया जा रहा है। विपक्ष के नेता ने दावा किया कि इस पूरी साजिश के खिलाफ देश के युवाओं और छात्रों ने जो आवाज उठाई है, वह बिल्कुल जायज है और सभी राजनीतिक दलों को इस जन-भावना का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर सत्ता पक्ष के लोग अपने घरों में बच्चों से बात करें, तो उन्हें भी युवाओं के इस दर्द और संघर्ष में सच्चाई नजर आएगी।

छात्रों के आंदोलन का समर्थन और युवा पीढ़ी की अभिव्यक्ति

एंटी पेपर लीक कानून और परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ देश भर में हुए छात्र आंदोलनों का समर्थन करते हुए राहुल गांधी ने इसे एक स्वाभाविक जन-अभिव्यक्ति करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सड़कों पर उतरा छात्रों का यह गुस्सा कोई हिंसा, नफरत या उपद्रव नहीं था, बल्कि यह देश की आने वाली पीढ़ी की एक गहरी और सच्ची अभिव्यक्ति थी। उनके अनुसार इस प्रकार की आवाज को दबाने के बजाय राजनीतिक नेतृत्व को इसे गंभीरता से सुनना चाहिए और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने सदन में विश्वास जताया कि जो कुछ भी युवा कर रहे हैं, उसमें कुछ भी गलत नहीं है और हर भारतीय नागरिक को इस युवा पीढ़ी की सजगता पर गर्व होना चाहिए। इस तरह के बयानों के जरिए विपक्ष ने युवाओं के मुद्दों को सीधे तौर पर राजनीतिक मंच पर लाकर सरकार को घेरने की एक बड़ी कोशिश की है।

गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला और सदन में हंगामा

भाषण के दौरान जब राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र किया, तो राजनीतिक पारा और अधिक गर्म हो गया। विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री, जो उस समय सदन में मौजूद नहीं थे, उन्होंने छात्रों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे और उनमें इतनी ताकत नहीं है कि वे सदन में इस बहस के दौरान सामने आकर बैठ सकें। इस तीखे बयान के आते ही सत्ता पक्ष के सांसदों ने अपनी सीटों पर खड़े होकर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया और राहुल गांधी से अपने शब्दों के लिए तुरंत माफी मांगने की मांग की।

सत्ता पक्ष की ओर से मोर्चा संभालते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि विपक्ष के एक जिम्मेदार नेता को सदन के भीतर इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना और आधारहीन टिप्पणियों से बचना चाहिए। इस आमने-सामने की टकराहट से संसद का माहौल कुछ समय के लिए काफी तनावपूर्ण हो गया था।

सत्ता पक्ष और विपक्ष की तीखी नोंकझोक के बीच रक्षा मंत्री की अपील

हंगामे और शोरगराबे के बीच जब सदन की स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हस्तक्षेप किया और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। राहुल गांधी ने अपनी बात रखते हुए यह भी शिकायत की कि जब भी वे सदन में कुछ बोलने के लिए खड़े होते हैं, तो सत्ता पक्ष के लोग तुरंत चिल्लाना शुरू कर देते हैं।

दोनों पक्षों के बीच लगातार बढ़ रही तनातनी को शांत करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेहद विनम्रता से यह बात रखी कि विपक्ष के नेता द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को असंसदीय मानते हुए रिकॉर्ड से हटा दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ट्रेजरी बेंच के सभी सदस्यों से भी आग्रह किया कि वे संयम रखें और पूरी शांति के साथ विपक्ष के नेता की बात को सुनें। इस प्रकार वरिष्ठ मंत्रियों के हस्तक्षेप से सदन के भीतर बढ़ते तनाव को कम करने और कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने का प्रयास किया गया।

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 100 करोड़ का बजट, सीएम ने ट्राइबल गेम्स विजेताओं को सम्मानित किया

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में खिलाड़ियों को बेहतर संसाधन और विश्वस्तरीय प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से राज्य सरकार जल्द नई खेल नीति लागू करने जा रही है। राजधानी रायपुर में आयोजित पहली स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव के दौरान इस महत्वाकांक्षी नीति के ड्राफ्ट पर देशभर से आए खेल प्रशासकों, विशेषज्ञों और वरिष्ठ कोचों ने गहन चर्चा की। समापन सत्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उत्कृष्ट खेल मिशन के तहत इस वर्ष के बजट में 100 करोड़ रुपये के विशेष प्रावधान की घोषणा की।

Chhattisgarh News: 100 करोड़ का होगा इस्तेमाल

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस राशि का उपयोग राज्यभर में आधुनिक खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित करने के लिए किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य दूरदराज इलाकों से छिपी खेल प्रतिभाओं को तराशकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना है।

नई खेल नीति की तैयारी

स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव में प्रतिभा खोज, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, हाई-परफॉर्मेंस मॉडल और अत्याधुनिक खेल विकास के लिए पारदर्शी रोडमैप तैयार किया गया। खेल संचालक तनुजा सलाम ने बताया कि सम्मेलन से मिले व्यावहारिक सुझावों को राज्य की नई खेल नीति और विभागीय कार्ययोजना में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री का आश्वासन

उप मुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव ने आश्वस्त किया कि विशेषज्ञों के सुझाव केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेंगे। उनकी प्रभावी और धरातलीय कार्ययोजना बनाकर तुरंत क्रियान्वित किया जाएगा। सरकार ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

156 खिलाड़ियों को मिलेगा लाभ

राज्य सरकार ने 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची को मंजूरी दे दी है। इन खिलाड़ियों को शासकीय नौकरियों में प्राथमिकता और नियमानुसार सीधा लाभ प्रदान किया जाएगा। यह कदम खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

ट्राइबल गेम्स विजेताओं को सम्मान

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के 19 पदक विजेताओं को मंच से सम्मानित कर प्रोत्साहन राशि के चेक वितरित किए। वेटलिफ्टिंग में निकिता को स्वर्ण और ऋषिका को रजत पदक मिला। तैराकी में अनुष्का भगत तथा एथलेटिक्स में लक्ष्मण सोढ़ी, अभिषेक, डमरू कुमार, गजेंद्र ठाकुर और तिलक बारसे ने रजत पदक जीते। एथलेटिक्स में मनीष कुमार, तैराकी में निखिल खलको और भारोत्तोलन में लक्की बाबू ने कांस्य पदक प्राप्त किया।

प्रोत्साहन राशि का विवरण

सरकार ने स्वर्ण पदक विजेताओं को दो लाख, रजत पदक विजेताओं को डेढ़ लाख और कांस्य पदक विजेताओं को एक लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की। इसके अलावा राज्य की महिला फुटबॉल टीम को 22 लाख रुपये, पुरुष फुटबॉल टीम को 16.50 लाख रुपये और पुरुष हॉकी टीम को नौ लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई।

खेल विकास की दिशा

स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव और बजट घोषणा से छत्तीसगढ़ में खेल संस्कृति को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। आधुनिक सुविधाओं और वैज्ञानिक प्रशिक्षण से खिलाड़ियों का स्तर सुधरेगा। आदिवासी क्षेत्रों की प्रतिभाओं को मुख्यधारा में लाने का प्रयास सराहनीय है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 100 करोड़ रुपये का विशेष बजट प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई खेल नीति जल्द लागू करने और 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को नौकरी में प्राथमिकता देने की घोषणा की। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के 19 विजेताओं को सम्मानित कर प्रोत्साहन राशि दी गई। राज्य में खेलों के विकास और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

Patna Tibbi College: 100 साल बाद बदल जाएगी पहचान, पटना के ऐतिहासिक राजकीय तिब्बी कॉलेज को मिलेगी 245.5 करोड़ की सौगात

Patna Tibbi College: बिहार की राजधानी पटना में स्थित सदियों पुराना और ऐतिहासिक राजकीय तिब्बी कॉलेज एवं अस्पताल जल्द ही एक नए और आधुनिक स्वरूप में नजर आने वाला है। अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूरे कर चुके इस प्रतिष्ठित संस्थान को वर्ष 2027 तक 245.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक अत्याधुनिक नया परिसर मिलने जा रहा है। इस नए परिसर के निर्माण से न केवल कॉलेज का गौरवशाली इतिहास आगे बढ़ेगा, बल्कि अस्पताल की मौजूदा क्षमता 120 बेड से बढ़कर सीधे 200 बेड की हो जाएगी।

हाल ही में आयोजित संस्थान के भव्य शताब्दी समारोह के दौरान इस बात की आधिकारिक घोषणा की गई, जहां नए भवन की मनमोहक रूपरेखा भी प्रदर्शित की गई। इस ऐतिहासिक सौगात के मिलने से प्रदेशभर से यूनानी चिकित्सा पद्धति से इलाज कराने आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और आधुनिक तकनीक का लाभ मिल सकेगा।

Patna Tibbi College: शताब्दी समारोह और ऐतिहासिक संस्थान का गौरवशाली सफर

राजकीय तिब्बी कॉलेज एवं अस्पताल ने हाल ही में अपनी स्थापना के सौ वर्षों का एक लंबा और गौरवशाली सफर पूरा कर लिया है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। इस विशेष अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह का भव्य उद्घाटन राज्य के योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह राजकीय तिब्बी कॉलेज एवं अस्पताल पूरे प्रदेश की एक अमूल्य धरोहर है, जिसे सहेजना और आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संस्थान की हर जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार हमेशा हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है।

समारोह में उपस्थित मेघालय के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इस संस्थान से उनका गहरा भावनात्मक जुड़ाव रहा है और यूनानी चिकित्सा पद्धति आज भी आम जनता के बीच उतनी ही लोकप्रिय है।

कम संसाधनों से शुरू हुआ सफर और वर्तमान स्थिति

इस प्रतिष्ठित संस्थान की नींव 28 जुलाई 1926 को रखी गई थी, जिसके बाद से इसने चिकित्सा शिक्षा और जनसेवा के क्षेत्र में लंबी यात्रा तय की है। शुरुआती दौर में भिखना पहाड़ी क्षेत्र में बने एक छोटे से परिसर में मात्र 10 छात्रों के साथ इस कॉलेज की पढ़ाई शुरू की गई थी। समय के साथ संस्थान का विस्तार होता गया और यह पहले रमना रोड तथा बाद में अंटा घाट परिसर में संचालित हुआ, जिसके बाद वर्तमान में यह कदमकुआं स्थित परिसर में अपनी सेवाएं दे रहा है।

वर्तमान समय में इस कॉलेज के भीतर स्नातक स्तर पर 125 और स्नातकोत्तर स्तर पर 31 सीटों पर हर वर्ष नए छात्रों का नामांकन किया जाता है। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन पांच सौ से अधिक मरीज अपनी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर पहुंचते हैं, जिन्हें अनुभवी डॉक्टरों द्वारा परामर्श और दवाइयां दी जाती हैं।

नए परिसर की रूपरेखा और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं

वर्तमान कदमकुआं परिसर से इस ऐतिहासिक कॉलेज और अस्पताल को वर्ष 2027 तक पूरी तरह से अगमकुआं स्थित एनएमसीएच परिसर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। एनएमसीएच परिसर के भीतर लगभग 10 एकड़ विशाल भूमि पर 245.5 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नए भवन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस नए और भव्य परिसर के तैयार हो जाने के बाद मरीजों को न सिर्फ अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक का लाभ मिलेगा, बल्कि भर्ती होने की क्षमता में भी भारी इजाफा होगा।

अस्पताल के अधीक्षक प्रो. शहनवाज अख्तर ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में मरीजों की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है, जिसके कारण कई बार बेड की कमी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में ओपीडी के साथ-साथ सभी आवश्यक चिकित्सीय जांच और दवाइयां पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिलती है।

Patna Tibbi College: बेड की क्षमता बढ़ने से मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

राजकीय तिब्बी कॉलेज एवं अस्पताल के नए भवन के निर्माण के बाद यहाँ भर्ती होने वाले मरीजों की परेशानियों का काफी हद तक समाधान हो जाएगा। वर्तमान समय में अस्पताल के पास कुल 120 बेड की क्षमता उपलब्ध है, जो रोजाना आने वाले मरीजों की भारी भीड़ के सामने नाकाफी साबित होती है। कई बार गंभीर रूप से बीमार मरीजों को भी बेड की अनुपलब्धता के कारण मायूस होकर लौटना पड़ता है या अन्यत्र रेफर करना पड़ता है।

नए परिसर के शुरू होने से अस्पताल की क्षमता में 80 नए बेड सीधे तौर पर जुड़ जाएंगे, जिससे कुल बेड की संख्या बढ़कर 200 हो जाएगी। इसके बाद प्रदेश के दूरदराज इलाकों से आने वाले रोगियों को बेहतर इलाज के साथ-साथ अस्पताल में भर्ती होने की पक्की सुविधा भी आसानी से मिल सकेगी। इस विस्तार से यूनानी चिकित्सा शिक्षा ले रहे छात्र-छात्राओं को भी व्यावहारिक प्रशिक्षण के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

Patna Tibbi College: यूनानी चिकित्सा शिक्षा और प्रशासनिक प्रतिबद्धता

सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मो. इरशादुल्लाह ने शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में राजकीय तिब्बी कॉलेज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। सरकार और संबंधित प्रशासनिक विभाग आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और तकनीक के साथ यूनानी चिकित्सा शिक्षा को और अधिक सशक्त बनाने पर लगातार बल दे रहे हैं।

कॉलेज के प्राचार्य प्रो. मो. महफुजूर रहमान ने नए भवन के निर्माण से जुड़ी तकनीकी और संरचनात्मक रूपरेखा को सबके सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि तय समयसीमा यानी वर्ष 2027 तक निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा और संस्थान को नए परिसर में शिफ्ट कर दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कॉलेज की शैक्षणिक गतिविधियों या मरीजों के इलाज पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े, इसके लिए विशेष प्रशासनिक योजना तैयार की गई है।

Exam Preparation: रातभर जागकर पढ़ाई करने की आदत सेहत और नंबर दोनों पर पड़ सकती है भारी

Exam Preparation: परीक्षा नजदीक आते ही छात्रों पर पूरे सिलेबस को खत्म करने और ज्यादा से ज्यादा रिवीजन करने का भारी दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में कई छात्र परीक्षा की तैयारी के लिए रातभर जागकर पढ़ाई करना शुरू कर देते हैं। उन्हें लगता है कि नींद के कुछ घंटे कम करके पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय निकाला जा सकता है, खासकर जब सिलेबस अधूरा हो तो पूरी रात जागना आसान विकल्प लगता है।

लेकिन यह आदत फायदे की जगह सेहत और पढ़ाई दोनों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। नींद पूरी न होने पर याददाश्त, एकाग्रता और तार्किक तरीके से सोचने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। इसका परिणाम यह होता है कि छात्र परीक्षा के दौरान उन सवालों के जवाब भी भूल जाते हैं, जिन्हें उन्होंने पहले अच्छी तरह याद किया था। इसलिए सही रणनीति के साथ समय प्रबंधन करना बेहद जरूरी है।

Exam Preparation: परीक्षा के दिनों में क्यों जागते हैं छात्र और क्या है भ्रम

परीक्षा के समय अक्सर छात्र ज्यादा चैप्टर कवर करने, चीजों को याद करने और रिवीजन पूरा करने के लिए अपनी रातों की नींद कुर्बान कर देते हैं। पहली नजर में ऐसा लगता है कि इससे पढ़ाई के लिए कुछ अतिरिक्त घंटे मिल रहे हैं और सिलेबस तेजी से पूरा हो रहा है। लेकिन नींद की कमी का सीधा असर दिमाग के काम करने के तरीके पर पड़ता है जो परीक्षाओं में भारी पड़ता है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, विज्ञान में बार-बार यह बात सामने आई है कि नींद की कमी से नई चीजें सीखने की क्षमता कम हो जाती है। पर्याप्त नींद न लेने से याददाश्त कमजोर होती है और एकाग्रता घट जाती है। छात्र रात में भले ही ज्यादा घंटे किताब लेकर बैठ जाएं, लेकिन थके हुए दिमाग की नई जानकारी को समझने और उसे याद रखने की क्षमता बेहद कमजोर हो जाती है।

दिमाग की क्षमता और याददाश्त पर पड़ता है गहरा असर

केवल ज्यादा समय तक किताब लेकर बैठने का मतलब यह कतई नहीं है कि छात्र ने ज्यादा सीख लिया है या वह परीक्षा में बेहतर अंक हासिल कर लेगा। नींद पूरी न होने पर परीक्षा देते समय पहले से याद की गई जानकारी को सही समय पर याद करने में भारी परेशानी हो सकती है। परीक्षा के दौरान पढ़ाई के लिए नींद छोड़ना बिल्कुल सही रणनीति नहीं है।

इससे छात्रों की दिनभर की मेहनत का उल्टा असर परीक्षा हॉल में देखने को मिलता है। जब दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो वह दबाव की स्थिति में ठीक से काम करना बंद कर देता है और पढ़ी हुई चीजें भी दिमाग से फिसलने लगती हैं।

परीक्षा हॉल में सवाल समझने और हल करने की चुनौती

नींद की कमी का बुरा असर केवल याददाश्त तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि इसके दायरे बहुत व्यापक होते हैं। कमजोर एकाग्रता और थकान के कारण छात्रों के लिए परीक्षा के प्रश्नपत्र के सवालों को ठीक तरह से समझना भी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा उत्तर को सही तरीके से लिखने और सिली मिस्टेक यानी छोटी-छोटी गलतियों से बचने में भी परेशानी आती है।

तार्किक सोच प्रभावित होने से केस आधारित या व्यावहारिक यानी प्रैक्टिकल सवालों को हल करना छात्रों के लिए कठिन हो जाता है। छात्र ने स्कूल या क्लास में जो अवधारणाएं पढ़ी हैं, उन्हें किसी नए प्रश्न या समस्या से जोड़ने में भी भारी दिक्कत महसूस होती है। ऐसे में रातभर जागकर छात्र भले ही कुछ अतिरिक्त पन्ने पढ़ ले, लेकिन परीक्षा हॉल में अपनी तैयारी को सही ढंग से पेश नहीं कर पाता।

Exam Preparation: शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए नींद क्यों है अनिवार्य

नींद केवल शरीर को सुस्ती भगाने या आराम देने का समय नहीं है, बल्कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रिया है। विशेषज्ञ इसे शरीर और मस्तिष्क के स्वस्थ तरीके से काम करने के लिए अनिवार्य प्रक्रिया मानती हैं। अच्छी और पर्याप्त नींद के दौरान दिमाग खुद को रिकवर करता है जिससे याददाश्त मजबूत होती है और मानसिक एकाग्रता बेहतर होती है।

नींद के चक्र के दौरान शरीर में हार्मोन का संतुलन भी पूरी तरह बहाल होता है और कोशिकाओं की मरम्मत यानी सेलुलर रिपेयर का काम चलता है। पर्याप्त नींद छात्रों को बेहतर निर्णय लेने, सही तरीके से सोचने और भावनात्मक रूप से स्थिर रहने में भी बहुत मदद करती है। जो छात्र नियमित रूप से सोते हैं, उनका बौद्धिक विकास और तनाव प्रबंधन बेहतर होता है।

Exam Preparation: लगातार नींद की कमी से बढ़ती हैं कई गंभीर परेशानियां

लंबे समय तक पर्याप्त नींद न लेने का सिलसिला शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के कई हिस्सों पर बहुत भारी पड़ सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार नींद की कमी से छात्रों में एंग्जायटी, सिरदर्द और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी भी तेजी से कमजोर होने लगती है।

परीक्षा के तनावपूर्ण समय में इन समस्याओं के लक्षण और ज्यादा आक्रामक रूप से सामने आते हैं। एंग्जायटी के कारण छात्र परीक्षा से पहले खुद को मानसिक रूप से शांत नहीं रख पाते हैं। लगातार सिरदर्द बने रहने पर परीक्षा के दौरान लंबे समय तक ध्यान लगाकर लिख पाना असंभव सा हो जाता है। वहीं कमजोर इम्युनिटी के कारण परीक्षा के आसपास छात्रों के बीमार पड़ने की आशंका भी कई गुना बढ़ जाती है।

Skin Care Correct Order: पहले क्रीम लगाएं या सनस्क्रीन? स्किनकेयर का सही क्रम जानिए

Skin Care Correct Order: आजकल त्वचा को स्वस्थ और ग्लोइंग बनाए रखने के लिए लोग मॉइश्चराइजर, फेस क्रीम और सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कई लोगों को यह समझ नहीं आता कि इन प्रॉडक्ट्स को लगाने का सही क्रम क्या होना चाहिए। गलत तरीके से लगाने से उनका पूरा फायदा नहीं मिल पाता। इसलिए यह जानना जरूरी है कि चेहरे पर पहले क्रीम लगानी चाहिए या सनस्क्रीन।

Skin Care Correct Order: सबसे पहले चेहरे को साफ करें

स्किनकेयर रूटीन की शुरुआत हमेशा चेहरे की सफाई से करनी चाहिए। इसके लिए किसी माइल्ड फेस वॉश का इस्तेमाल करें। इससे चेहरे पर जमा धूल, पसीना और अतिरिक्त तेल साफ हो जाता है। साफ त्वचा पर लगाए गए प्रॉडक्ट्स ज्यादा बेहतर तरीके से काम करते हैं। गंदगी रहने पर क्रीम या सनस्क्रीन ठीक से अवशोषित नहीं होते।

मॉइश्चराइजर या फेस क्रीम लगाएं

चेहरा धोने के बाद अपनी त्वचा के अनुसार मॉइश्चराइजर या फेस क्रीम लगाएं। अगर त्वचा ड्राई है तो ऐसा मॉइश्चराइजर चुनें जो अच्छी तरह हाइड्रेट रखे। ऑयली स्किन वालों के लिए हल्का और जेल बेस्ड मॉइश्चराइजर बेहतर रहता है। लगाने के बाद कुछ मिनट इंतजार करें ताकि वह त्वचा में अच्छी तरह समा जाए।

सनस्क्रीन हमेशा सबसे आखिर में

स्किन एक्सपर्ट्स के अनुसार मॉइश्चराइजर के बाद सनस्क्रीन लगानी चाहिए। सनस्क्रीन त्वचा पर एक सुरक्षा परत बनाती है जो सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से बचाने में मदद करती है। अगर सनस्क्रीन लगाने के बाद ऊपर से क्रीम या कोई दूसरा प्रॉडक्ट लगाया जाता है तो इसका असर कम हो सकता है। इसलिए सनस्क्रीन को हमेशा स्किनकेयर रूटीन का आखिरी स्टेप रखना चाहिए।

कैसी सनस्क्रीन चुनें?

रोजाना इस्तेमाल के लिए एसपीएफ 30 या उससे ज्यादा वाली ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का चुनाव करना बेहतर माना जाता है। अगर आप ज्यादा समय धूप में रहते हैं तो हर दो से तीन घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाएं। पसीना आने या चेहरा धोने के बाद भी इसे फिर से लगाना जरूरी होता है। सही सनस्क्रीन त्वचा को झुर्रियों और दाग-धब्बों से बचाती है।

मेकअप से पहले सही तरीका

अगर आप मेकअप करती हैं तो पहले चेहरे को साफ करें। इसके बाद मॉइश्चराइजर लगाएं और फिर सनस्क्रीन लगाएं। सनस्क्रीन लगाने के कुछ मिनट बाद प्राइमर और मेकअप करें। इससे त्वचा को सुरक्षा भी मिलेगी और मेकअप भी लंबे समय तक टिका रहेगा। गलत क्रम से मेकअप जल्दी खराब हो सकता है।

सही क्रम का महत्व

अच्छी स्किन के लिए सिर्फ महंगे प्रॉडक्ट्स खरीदना ही काफी नहीं है बल्कि उन्हें सही तरीके से लगाना भी जरूरी है। हमेशा पहले चेहरा साफ करें फिर मॉइश्चराइजर या फेस क्रीम लगाएं और अंत में सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। यह आसान तरीका त्वचा को मुलायम रखने के साथ धूप से बचाने में मदद करेगा। रोजाना इस क्रम को अपनाने से त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है।

दिन और रात का फर्क

सुबह के रूटीन में सनस्क्रीन जरूरी है क्योंकि दिन में यूवी किरणों का असर ज्यादा होता है। रात में मॉइश्चराइजर या नाइट क्रीम पर्याप्त है। दोनों समय चेहरा साफ करके ही आगे के स्टेप्स अपनाएं। त्वचा के प्रकार के अनुसार प्रॉडक्ट चुनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

स्किनकेयर रूटीन में सही क्रम बहुत मायने रखता है। पहले चेहरा साफ करें फिर मॉइश्चराइजर या फेस क्रीम लगाएं और सबसे आखिर में सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। एसपीएफ 30 या उससे ज्यादा वाली ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन चुनें और जरूरत पड़ने पर दोबारा लगाएं। मेकअप से पहले भी यही क्रम अपनाएं। सही तरीके से लगाने पर ही प्रॉडक्ट्स का पूरा फायदा मिलता है और त्वचा स्वस्थ रहती है।

Odisha News: केन्दुझर में मौसम सुधरा लेकिन बाढ़ का संकट जारी, एनएच-49 का हिस्सा जलमग्न

Odisha News: ओडिशा में बुधवार को बारिश की तीव्रता कम होने के बावजूद केन्दुझर जिले में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मंगलवार की भारी बारिश के बाद नदियां और नाले उफान पर आ गए थे जिससे कई जगहों पर आवागमन प्रभावित हो गया। मौसम सुधरने के बाद भी जलभराव और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्ग जिले के कई इलाकों में समस्या बने हुए हैं।

Odisha News: एनएच-49 का हिस्सा जलमग्न

जनसनपुर हाथी कॉरिडोर पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 49 का करीब 100 मीटर हिस्सा पानी में डूबा रहा। इस वजह से मंगलवार से ही भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है। यात्री और वाहन चालक लंबी कतारों में फंसे रहे जिससे आम लोगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा। कुछ जगहों पर परिवहन फिर से शुरू होने के बावजूद कई मार्ग अभी भी प्रभावित हैं।

बाढ़ का असर जारी

बारिश की गतिविधि कमजोर पड़ने के बाद भी बाढ़ की स्थिति का प्रभाव जिले में बना हुआ है। उफनती नदियों और नालों ने कई स्थानों पर संपर्क सूत्र बाधित कर दिए हैं। जलभराव की समस्या कई इलाकों में बनी हुई है। प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है और सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास जारी हैं।

जनजीवन पर प्रभाव

बाढ़ और जलभराव के कारण स्थानीय लोगों का रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। सड़कें क्षतिग्रस्त होने और पानी भरने से स्कूल, बाजार और दैनिक आवागमन में दिक्कतें आ रही हैं। कई गांवों में संपर्क मार्ग कट जाने से राहत सामग्री पहुंचाने में भी चुनौतियां बनी हुई हैं।

प्रशासन की निगरानी

जिला प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं। जलमग्न सड़कों को ठीक करने और यातायात बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में बारिश कम हुई है लेकिन निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।

अन्य जिलों की स्थिति

ओडिशा के कुछ अन्य जिलों में भी हाल की बारिश का असर देखा गया। जाजपुर में बैतरणी नदी के कारण कई गांव पानी में डूब गए थे जहां बचाव अभियान चलाया जा रहा है। केन्दुझर में मुख्य समस्या सड़क संपर्क और जलभराव की बनी हुई है।

आगे की सतर्कता जरूरी

मौसम सुधरने के बावजूद लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। नदियों के जलस्तर पर नजर रखने और जलभराव वाले इलाकों में अनावश्यक आवागमन से बचने को कहा गया है। प्रशासन राहत और मरम्मत के काम को तेज करने पर जोर दे रहा है ताकि जल्द सामान्य स्थिति लौटे।

ओडिशा के केन्दुझर जिले में बारिश कम होने के बावजूद बाढ़ का असर जारी है। राष्ट्रीय राजमार्ग 49 का करीब 100 मीटर हिस्सा जलमग्न रहने से यातायात बाधित है। नदियों और नालों के उफान से कई जगह संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है और सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास जारी हैं। लोगों को सतर्क रहने की अपील की गई है।

जेआरडी टाटा जयंती 2026 पर नमन

न्यूज मीडिया किरण, 29 जुलाई 2026: आज टाटा समूह के सबसे युवा चेयरमैन, युगद्रष्टा उद्योगपति और देश में नागरिक उड्डयन के पितामह, भारत रत्न जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा यानी जेआरडी टाटा की जयंती है। इस अवसर पर राष्ट्र उन्हें शत-शत नमन कर रहा है।

व्यापार से आगे – राष्ट्र निर्माण की सोच

जेआरडी टाटा ने टाटा समूह को केवल एक व्यापारिक संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा का माध्यम बनाया। उनके नेतृत्व में टाटा ने एविएशन, स्टील, ऑटोमोबाइल और आईटी जैसे क्षेत्रों में भारत को नई ऊंचाइयां दीं।

भारत की पहली एयरलाइन Tata Airlines की स्थापना कर उन्होंने देश में नागरिक उड्डयन की नींव रखी। बाद में यही Air India बनी।

ईमानदारी और नवाचार की मिसाल

ईमानदारी, उत्कृष्टता और नवाचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी करोड़ों युवाओं और उद्योगपतियों के लिए प्रेरणा है। 1992 में उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

जेआरडी टाटा मानते थे कि “उद्योग का उद्देश्य सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि समाज का जीवन स्तर बेहतर बनाना है”। इसी सोच ने टाटा ट्रस्ट्स के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास में बड़े बदलाव लाए।

न्यूज मीडिया किरण की ओर से श्रद्धांजलि

न्यूज मीडिया किरण परिवार की ओर से भारत रत्न जेआरडी टाटा को जयंती पर कोटि-कोटि नमन।”उनके विचार और मूल्य आज भी हमें सिखाते हैं कि व्यवसाय के साथ मानवता जरूरी है।”

टीम NewsMediaKiran.com