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Bhagyank 1: भाग्यांक 1 वाले जन्मजात लीडर होते हैं, जानें कैसे पता करें अपना डेस्टिनी नंबर

Bhagyank 1: भाग्यांक को डेस्टिनी नंबर भी कहा जाता है। यह जीवन की दिशा, अवसरों और भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को दर्शाता है। सरल शब्दों में भाग्यांक भाग्य और कर्म का दर्पण माना जाता है। इससे यह पता चल सकता है कि व्यक्ति किस क्षेत्र में सफल हो सकता है और जीवन की बाधाओं से कैसे निपट सकता है। ज्यादातर लोग मूलांक तो जानते हैं लेकिन भाग्यांक के बारे में अनजान रहते हैं। भाग्यांक 1 वाले लोगों में जन्म से ही नेतृत्व के गुण पाए जाते हैं।

Bhagyank 1: भाग्यांक कैसे निकाले?

पूरी जन्मतिथि के सभी अंकों को जोड़कर जो एकल संख्या निकलती है वही भाग्यांक होता है। उदाहरण के लिए अगर जन्मतिथि 15 अगस्त 1994 है तो गणना इस तरह करें। तारीख 1+5=6, महीना 0+8=8, साल 1+9+9+4=23 और 2+3=5। अब 6+8+5=19। फिर 1+9=10 और 1+0=1। इस तरह भाग्यांक 1 बनता है। अगर जन्मतिथि के सभी अंकों का योग अंत में 1 आता है तो भाग्यांक 1 माना जाता है।

सूर्य से जुड़ा है भाग्यांक 1

भाग्यांक 1 का संबंध सूर्य से माना जाता है। ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है। जैसे राजा अपनी प्रजा का नेतृत्व करता है वैसे ही भाग्यांक 1 वालों में लीडर बनने का गुण जन्मजात होता है। ये लोग स्वाभिमानी और आत्मविश्वासी होते हैं। किसी के आगे झुकना पसंद नहीं करते और काम अपने दम पर करना ज्यादा पसंद करते हैं। निर्णय लेने में माहिर होते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी तुरंत सटीक फैसला ले सकते हैं। अधीनस्थ काम करने के बजाय टीम की कमान संभालना इन्हें बेहतर लगता है।

करियर में सफलता के क्षेत्र

भाग्यांक 1 वाले प्रशासनिक सेवाओं, चिकित्सा क्षेत्र, सैन्य विभाग, राजनीति, बिजनेस मैनेजमेंट, उद्यमिता और मीडिया जैसे क्षेत्रों में ज्यादा सफल होते हैं। बिजनेस भी इन्हें खूब सूट करता है। नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास के कारण ये पदों पर पहुंचकर अच्छा प्रदर्शन करते हैं।

स्वभाव और गुण

ये लोग पैसों की बचत करने में माहिर होते हैं इसलिए धन का अभाव आमतौर पर नहीं रहता। जीवन में धन संग्रह के कई अवसर मिलते हैं। अनुशासनप्रिय होते हैं और हर काम नियमपूर्वक करते हैं। इनमें प्रेम भाव कूट-कूट कर भरा होता है और रिश्ते निभाने में भी माहिर माने जाते हैं। घर हो या कार्यक्षेत्र हर जगह लीडर की भूमिका में नजर आते हैं। अच्छे मार्गदर्शक भी बनते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

अत्यधिक आत्मविश्वास कभी-कभी घमंड में बदल सकता है जिससे बचना चाहिए। दूसरों की बातें सुनने की आदत डालनी चाहिए क्योंकि अच्छा लीडर वही होता है जो अपनी टीम के सुझाव सुने। सूर्य का प्रभाव होने के कारण गुस्सा जल्दी आता है। इस पर काबू पाना जरूरी है वरना नुकसान हो सकता है।

शुभ दिन और शुभ रंग
भाग्यांक 1 वालों के लिए रविवार और गुरुवार शुभ दिन माने जाते हैं। शुभ रंग लाल, नारंगी और पीला हैं। इन दिनों और रंगों का ध्यान रखकर काम करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलने की मान्यता है।

आस्था और सावधानी

ये सभी बातें धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अंकज्योतिष को रुचि और मार्गदर्शन के रूप में लिया जा सकता है। जीवन की सफलता मेहनत, सही निर्णय और सकारात्मक सोच पर ज्यादा निर्भर करती है।

भाग्यांक 1 सूर्य से जुड़ा डेस्टिनी नंबर है। ये लोग जन्मजात लीडर, स्वाभिमानी और आत्मविश्वासी होते हैं। प्रशासन, चिकित्सा, सेना, राजनीति और बिजनेस में इन्हें सफलता मिलती है। बचत, अनुशासन और नेतृत्व इनके प्रमुख गुण हैं। घमंड और गुस्से पर नियंत्रण रखना जरूरी है। रविवार-गुरुवार शुभ दिन तथा लाल-नारंगी-पीला शुभ रंग माने जाते हैं। भाग्यांक जानकर व्यक्ति अपनी शक्तियों को बेहतर दिशा दे सकता है।

Prashant Kishor: वोटिंग से ठीक एक दिन पहले जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के खिलाफ एफआईआर दर्ज, जानिए पूरा मामला

Prashant Kishor: बिहार की राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब बांकीपुर उपचुनाव की वोटिंग से ठीक एक दिन पहले जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। यह पूरा मामला पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक वायरल वीडियो को लेकर शुरू हुआ है, जिसे प्रशांत किशोर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से तैयार किया गया फर्जी वीडियो बताया था।

इस बयान के बाद जेडीयू आक्रामक हो गई और पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार ने पटना के शास्त्री नगर थाने पहुंचकर प्रशांत किशोर के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के शीर्ष नेता के खिलाफ इस तरह के झूठे दावे करना और उसे अपमानित करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इस घटना ने ऐन मतदान से पहले राज्य की राजनीति का पारा काफी बढ़ा दिया है, जिससे चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है।

Prashant Kishor: बांकीपुर उपचुनाव से पहले गरमाई बिहार की सियासत

बिहार में इन दिनों बांकीपुर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच घमासान मचा हुआ है और सभी दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इस उपचुनाव के लिए कल यानी 30 जुलाई को मतदान होना है, जिसके ठीक एक दिन पहले इस तरह का कानूनी विवाद सामने आना चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे रहा है। जन सुराज के संस्थापक और इस चुनाव में खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश कर रहे प्रशांत किशोर के खिलाफ इस कानूनी कार्रवाई से उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस छिड़ गई है।

चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में जहां सभी प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने में व्यस्त थे, वहीं अचानक थाने में शिकायत दर्ज होने से पूरा प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र सक्रिय हो गया है। चुनाव आयोग की नजर भी इस घटनाक्रम पर टिकी हुई है ताकि मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके और किसी भी तरह की अफवाहों से बचा जा सके।

जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार की थाने में कड़ी आपत्ति

जन सुराज के संस्थापक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ शास्त्री नगर थाने पहुंचे थे। थाने के बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के वीडियो को फर्जी बताना और उसे एआई जेनरेटेड करार देना सीधे तौर पर उनके नेता का अपमान है।

नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए विपक्ष इस तरह के अनर्गल और आधारहीन आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जेडीयू नेताओं का यह भी कहना है कि इस प्रकार के बयानों से न केवल राजनीतिक शुचिता को ठेस पहुंचती है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया को भी प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। इसी आधार पर पुलिस प्रशासन से यह मांग की गई है कि इस पूरे मामले में कानून के मुताबिक निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की बयानबाजी से बचा जा सके।

क्या था वह विवादित वीडियो और नीतीश कुमार का संदेश

पूरा विवाद उस वीडियो के इर्द-गिर्द घूम रहा है जिसे हाल ही में सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर साझा किया गया था। इस वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आगामी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नीरज सिन्हा के पक्ष में वोट की अपील करते हुए नजर आ रहे थे। वीडियो के संदेश में नीतीश कुमार ने कहा था कि सभी के सहयोग और विश्वास से पिछले दो दशकों के दौरान राज्य में न्याय के साथ विकास की गति को धरातल पर उतारा गया है।

इसमें आगे यह भी कहा गया था कि विकास की इस निरंतर गति को बनाए रखने और एक विकसित राज्य के संकल्प को पूरा करने के लिए जनता का एक-एक वोट बेहद महत्वपूर्ण है। एनडीए खेमे की तरफ से जारी किए गए इस प्रचार वीडियो को लेकर उस समय तक सब कुछ सामान्य चल रहा था, जब तक जन सुराज के प्रमुख ने इस पर सवालिया निशान नहीं खड़े कर दिए थे।

Prashant Kishor: प्रशांत किशोर के तीखे आरोप और फर्जी होने का दावा

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने एनडीए द्वारा जारी किए गए उस वीडियो को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से फर्जी करार दिया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया था कि सत्ता पक्ष की ओर से नीतीश कुमार का जो वीडियो अपील जारी किया गया है, उसका वास्तविकता से कोई दूर-दूर तक वास्ता नहीं है। उनका तर्क था कि इस वीडियो को आधुनिक तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दुरुपयोग करके तैयार किया गया है और वास्तव में नीतीश कुमार ने ऐसा कोई बयान कभी दिया ही नहीं है।

प्रशांत किशोर ने मीडिया के सामने यह भी कहा था कि यदि कोई व्यक्ति इस वीडियो को बहुत गौर से देखेगा तो उसे साफ तौर पर पता चल जाएगा कि इसे तकनीकी रूप से एडिट किया गया है। इस बयान के जरिए उन्होंने सीधे तौर पर सत्तारूढ़ दल पर डिजिटल धोखाधड़ी और जनता को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया था, जिससे राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया था।

Prashant Kishor: चुनावी सरगर्मी के बीच कानूनी लड़ाई का असर

वोटिंग से ठीक पहले दर्ज हुई इस एफआईआर ने चुनावी माहौल को और अधिक तीखा बना दिया है, जहां दोनों तरफ से बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। एक तरफ जहां जेडीयू नेता इसे अपने नेता के सम्मान की लड़ाई बता रहे हैं और कानूनी दायरे में कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक आरोपों को लेकर भी बहस छिड़ गई है।

इस तरह के कानूनी मामलों का असर अक्सर अंतिम समय के मतदाताओं की मानसिकता पर भी पड़ता है, जो यह तय करने की कोशिश करते हैं कि मैदान में कौन सा दल और नेता ज्यादा मजबूत स्थिति में है। पुलिस अब इस मामले की तकनीकी पहलुओं और वीडियो की प्रमाणिकता की जांच करने की तैयारी कर रही है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वीडियो असली था या वाकई इसमें किसी तकनीक का सहारा लिया गया था। आने वाले दिनों में यह कानूनी विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है, जिसका असर चुनाव परिणामों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।

Independence Day: स्वतंत्रता दिवस 2026 की परेड में शामिल नहीं होंगे स्कूली छात्र, पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

Independence Day: पश्चिम बंगाल में इस साल स्वतंत्रता दिवस 2026 के मुख्य समारोह और परेड के दौरान एक बड़ा और अहम बदलाव देखने को मिलने वाला है। राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सख्त और स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, इस बार स्वतंत्रता दिवस की परेड में स्कूली छात्रों को भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी, हालांकि कॉलेज के छात्र इस भव्य आयोजन में शामिल हो सकेंगे।

सरकार की तरफ से यह कड़ा निर्णय पिछले साल खराब मौसम और बारिश के कारण छोटे बच्चों के बीमार पड़ने की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को पूरी तरह से ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेज धूप, उमस या अचानक बारिश जैसी प्राकृतिक स्थितियों के बीच मासूम बच्चों के स्वास्थ्य पर किसी भी प्रकार का कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। राज्य सचिवालय नबन्ना में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान इस महत्वपूर्ण फैसले की आधिकारिक घोषणा की गई है, जिससे प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।

Independence Day: स्वतंत्रता दिवस परेड में बदलाव और प्रशासनिक निर्देश

राज्य के सचिवालय नबन्ना में आयोजित हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभागों के साथ स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के सूचना एवं संस्कृति विभाग को कड़े निर्देश देते हुए स्पष्ट किया है कि स्कूली छात्र कार्यक्रम देखने के लिए दर्शक के रूप में आ सकते हैं, लेकिन उन्हें किसी भी प्रकार की परेड या मार्च पास्ट में भाग लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।

इसके अलावा प्रशासनिक स्तर पर यह भी तय किया गया है कि स्वतंत्रता दिवस का मुख्य सांस्कृतिक और औपचारिक कार्यक्रम एक घंटे से अधिक लंबा बिल्कुल नहीं चलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि यदि 15 अगस्त के दिन बारिश हो जाती है और छोटे बच्चे भींग जाते हैं, तो उनके बीमार पड़ने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। बच्चों की सेहत से जुड़ा यह जोखिम किसी भी कीमत पर उचित नहीं माना जा सकता है, जिसके चलते इस बार नियमों में यह बदलाव किया गया है।

पिछले साल की घटनाओं से सबक और बच्चों की सुरक्षा

Independence Day
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प्रशासन द्वारा लिया गया यह निर्णय अचानक नहीं आया है, बल्कि इसके पीछे पिछले वर्षों का कड़वा अनुभव मुख्य वजह रहा है। पिछले साल स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर झमाझम बारिश के बीच परेड में शामिल होने के कारण कई स्कूली छात्र भींग गए थे और बाद में उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी। उससे पहले के वर्षों में भी स्वतंत्रता दिवस की रिहर्सल और अभ्यास के दौरान भीषण गर्मी और उमस की वजह से कई मासूम छात्र चक्कर खाकर बेहोश हो चुके थे।

इन तमाम पुरानी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने इस बार एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया है ताकि किसी भी छात्र को शारीरिक परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि कॉलेज के युवा छात्र और एनसीसी के सीनियर कैडेट्स कोविड और अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इस बार की परेड का हिस्सा जरूर बनेंगे, जिससे युवाओं की भागीदारी भी बनी रहेगी।

Independence Day: आयुष्मान भारत दिवस और नई स्वास्थ्य बीमा योजना का शुभारंभ

पश्चिम बंगाल सरकार केवल स्वतंत्रता दिवस समारोह तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके अगले ही दिन यानी 16 अगस्त को एक और बड़े कार्यक्रम की तैयारी कर रही है। कोलकाता के प्रसिद्ध नेताजी इंडोर स्टेडियम में 16 अगस्त को बड़े पैमाने पर आयुष्मान भारत दिवस मनाया जाएगा, जिसमें राज्य सरकार अपनी एक नई महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत करेगी। इसी विशेष अवसर पर राज्य में ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’ का औपचारिक शुभारंभ भी किया जाएगा, जिसे सरकार की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान इस बात की भी घोषणा की कि राज्य के भीतर जिन नागरिकों को केंद्र की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, उन्हें इस नई योजना के दायरे में लाया जाएगा। सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि बंगाल में अब किसी भी जरूरतमंद नागरिक को अपनी बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल के दरवाजे पर किसी के आगे हाथ फैलाने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

Independence Day: आम जनता तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर

राज्य सरकार का यह प्रयास है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा हर लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के पहुंचे। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल के सभी प्रशासनिक विभागों को यह सख्त निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि राज्य की जनता को सरकार की तरफ से मिलने वाली सभी कल्याणकारी सेवाएं पूरी पारदर्शिता और सुगमता के साथ प्राप्त हों। स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों को जमीनी स्तर पर निगरानी रखने के आदेश दिए गए हैं, ताकि कागजी प्रक्रिया के फेर में किसी जरूरतमंद का इलाज न रुके।

स्वतंत्रता दिवस के जश्न की तैयारियों के साथ-साथ इस तरह की जनकल्याणकारी योजनाओं का ऐलान यह साबित करता है कि सरकार प्रशासनिक प्राथमिकताओं के साथ आम जनता के बुनियादी अधिकारों को लेकर पूरी तरह गंभीर है। आने वाले दिनों में इन योजनाओं के जरिए राज्य के लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

New Fielding Coach Of The Indian Team: टीम इंडिया के फील्डिंग कोच टी दिलीप की विदाई तय, बीसीसीआई ने नहीं बढ़ाया कॉन्ट्रैक्ट

New Fielding Coach Of The Indian Team: भारतीय क्रिकेट टीम के सपोर्ट स्टाफ में एक और बड़ा बदलाव होने जा रहा है। लंबे समय से टीम इंडिया के फील्डिंग कोच की जिम्मेदारी संभाल रहे टी दिलीप का कार्यकाल अब खत्म होने वाला है। रिपोर्ट्स के अनुसार बीसीसीआई ने उनका अनुबंध आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। इससे उनकी विदाई लगभग तय मानी जा रही है। इससे पहले असिस्टेंट कोच रायन टेन डेस्काथे भी अपना पद छोड़ चुके हैं।

New Fielding Coach Of The Indian Team: 2021 से संभाल रहे थे जिम्मेदारी

टी दिलीप ने साल 2021 में आर श्रीधर की जगह भारतीय टीम के फील्डिंग कोच का पद संभाला था। उस समय उन्हें मुख्य कोच राहुल द्रविड़ के नेतृत्व वाले सपोर्ट स्टाफ का हिस्सा बनाया गया था। उनके साथ गेंदबाजी कोच पारस म्हाम्ब्रे और बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर भी टीम से जुड़े थे। दिलीप ने पिछले पांच वर्षों में टीम की फील्डिंग को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अनुबंध का सफर

क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक दिलीप का कार्यकाल शुरुआत में मई 2025 तक निर्धारित था। हालांकि पिछले साल बीसीसीआई ने उनका कॉन्ट्रैक्ट अस्थायी रूप से बढ़ा दिया था। इसके बाद वह इंग्लैंड दौरे पर भी भारतीय टीम के साथ गए थे। अब बोर्ड ने उनके अनुबंध को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है।

फील्डिंग में सुधार का योगदान

टी दिलीप के कार्यकाल में भारतीय टीम की फील्डिंग में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। खिलाड़ियों की फिटनेस, कैचिंग और ग्राउंड फील्डिंग के स्तर को बेहतर बनाने में उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के लिए फील्डिंग मेडल जैसी पहल भी शुरू की थी जिसे टीम के भीतर काफी सराहना मिली थी। मैदान पर ऊर्जा और एकाग्रता बढ़ाने में उनका योगदान याद रखा जाएगा।

अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं

बीसीसीआई की ओर से अभी तक टी दिलीप के जाने या उनके संभावित उत्तराधिकारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन कॉन्ट्रैक्ट न बढ़ाए जाने की खबर के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ में जल्द ही नया फील्डिंग कोच देखने को मिलेगा। असिस्टेंट कोच के पद पर भी जल्द बड़ा ऐलान हो सकता है।

आगे की चुनौती

भारतीय टीम फिलहाल एक्शन से दूर है। टीम इंडिया 15 अगस्त से श्रीलंका दौरे पर दो मैचों की टेस्ट सीरीज का आगाज करेगी। नए फील्डिंग कोच के आने से पहले टीम को तैयारियों में निरंतरता बनाए रखनी होगी। सपोर्ट स्टाफ में बदलाव के बीच खिलाड़ियों का फोकस आने वाले मुकाबलों पर बनाए रखना चुनौती भरा हो सकता है।

सपोर्ट स्टाफ में बदलाव का सिलसिला

रायन टेन डेस्काथे के जाने और अब टी दिलीप के संभावित प्रस्थान से टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। बीसीसीआई नई टीम के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है। नए चेहरों के आने से टीम को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

टीम इंडिया के फील्डिंग कोच टी दिलीप का अनुबंध बीसीसीआई ने आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। 2021 से पद संभाल रहे दिलीप के कार्यकाल में टीम की फील्डिंग में सुधार आया था। उनकी विदाई लगभग तय मानी जा रही है। असिस्टेंट कोच रायन टेन डेस्काथे भी पहले जा चुके हैं। बीसीसीआई जल्द नए फील्डिंग कोच का ऐलान कर सकता है। टीम 15 अगस्त से श्रीलंका टेस्ट सीरीज खेलने जा रही है।

Johnson & Johnson: जॉनसन एंड जॉनसन का 5.5 अरब डॉलर का ऐतिहासिक समझौता और 10 साल की कानूनी जंग की पूरी कहानी

Johnson & Johnson: एक सफेद खुशबूदार पाउडर पिछले कई दशकों से दुनिया भर के घरों में शिशुओं की नाजुक त्वचा की देखभाल और सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद प्रतीक रहा है। लेकिन इसे बनाने वाली कंपनी एक दिन दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे लंबी अदालती लड़ाइयों में से एक के केंद्र में आ गई, जिसके बाद अब इस मामले को निपटाने के लिए उसे एक भारी-भरकम समझौता करना पड़ा है।

वैश्विक फार्मा और एफएमसीजी मार्केट की दिग्गज कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन के उत्पादों पर गर्भाशय कैंसर होने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके चलते कंपनी को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। आखिरकार, एक दशक से अधिक समय से चल रहे इस विवाद को खत्म करने के लिए कंपनी ने 5.5 अरब डॉलर के एक बड़े समझौते की घोषणा की है। इस फैसले ने पूरे वैश्विक कॉरपोरेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर मुकदमों का निपटारा कॉर्पोरेट इतिहास में एक दुर्लभ घटना मानी जा रही है।

Johnson & Johnson: दशकों पुरानी कानूनी लड़ाई और टैलकम पाउडर के गंभीर आरोप

Johnson & Johnson
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इस पूरे विवाद की जड़ में कंपनी का सबसे लोकप्रिय उत्पाद बेबी पाउडर और अन्य टैल्क आधारित उत्पाद हैं। पिछले एक दशक से कंपनी अमेरिका और दुनिया भर में हजारों मुकदमों का सामना कर रही थी, जहां अदालतों में लंबी सुनवाई चल रही थी। इन मुकदमों में शिकायतकर्ताओं का मुख्य आरोप था कि कंपनी के टैलकम पाउडर उत्पादों के नियमित इस्तेमाल के कारण महिलाओं को डिम्बग्रंथि यानी ओवेरियन कैंसर का सामना करना पड़ा।

वादियों का दावा था कि टैलकम पाउडर में कैंसरकारी तत्व मौजूद थे, जिससे उनके स्वास्थ्य को अपूरणीय क्षति हुई और उनका जीवन संकट में पड़ गया। हालांकि, कंपनी शुरू से ही इन सभी दावों को पूरी तरह से खारिज करती रही है और अपने उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित बताती आई है। इस कानूनी खींचतान ने न केवल कंपनी की ब्रांड वैल्यू को प्रभावित किया, बल्कि वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता उत्पादों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस भी छेड़ दी।

5.5 अरब डॉलर के समझौते में शामिल मुकदमों का दायरा

कंपनी द्वारा घोषित इस हालिया समझौते के तहत कानूनी दावों के एक बहुत बड़े और जटिल हिस्से को पूरी तरह से सुलझा लिया गया है। यह नया समझौता न्यू जर्सी की संघीय अदालत और विभिन्न राज्य अदालतों में लंबे समय से लंबित लगभग 76,000 दावों को कवर करता है। इसके साथ ही यह समझौता कंपनी के खिलाफ वर्तमान में बचे हुए लगभग सभी टैल्क से जुड़े दावों का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे अनिश्चितता का दौर कुछ हद तक कम हुआ है।

इससे पहले कंपनी ने अपने टैल्क उत्पादों में एस्बेस्टस और मेसोथेलियोमा के आरोपों वाले अधिकांश मामलों को अलग से कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए निपटाया था। जे एंड जे की लीगल टीम के उपाध्यक्ष एरिक हास ने कैंसर से जुड़े सभी दावों को पूरी तरह से निराधार बताया है। उनका कहना है कि कंपनी को पूरा विश्वास था कि वह आगे की अदालती लड़ाई में भी जीत हासिल कर लेती, लेकिन इस पुराने विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए वे समझौता करने को तैयार हुए हैं।

वित्तीय संरचना और भविष्य में संभावित भुगतान का गणित

इस समझौते की वित्तीय संरचना कुछ इस तरह तैयार की गई है कि भविष्य में भुगतान की जाने वाली कुल राशि में इजाफा हो सकता है। समझौते के तहत जे एंड जे को वर्ष 2027 में तीन अरब डॉलर का भुगतान करने की उम्मीद है, जिसके बाद 2028 और उसके आगे भी किस्तों में भुगतान किए जाएंगे। टैल्क दावों वाले लगभग 2,500 ग्राहकों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रसिद्ध वकील क्रिस सीगर के अनुसार, इस समझौते में भाग लेने वाले लोगों की वास्तविक संख्या के आधार पर अंतिम राशि और बढ़ सकती है।

सीगर का अनुमान है कि जे एंड जे को 7 अरब डॉलर या उससे अधिक का भारी भुगतान करना पड़ सकता है। यह समझौता योग्य डिम्बग्रंथि कैंसर दावों के लिए एक विशिष्ट मूल्य तो तय करता है, लेकिन यह कंपनी द्वारा किए जाने वाले कुल भुगतान पर कोई अधिकतम सीमा यानी कैप नहीं लगाता है। इस समझौते को पूरी तरह से लागू और अंतिम रूप देने के लिए डिम्बग्रंथि कैंसर के कम से कम 95 फीसदी दावेदारों की लिखित स्वीकृति मिलना अनिवार्य शर्त है।

Johnson & Johnson: अदालतों में जीत के बावजूद समझौता करने के रणनीतिक कारण

यह बड़ा समझौता ऐसे समय में सामने आया है जब जे एंड जे ने अदालतों में व्यक्तिगत मुकदमों की एक श्रृंखला में जीत हासिल की थी और वादी के वकीलों को मुकदमेबाजी से अयोग्य ठहराने में भी सफलता पाई थी। पिछले ही सप्ताह एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने भी इस बात पर गहरा संदेह व्यक्त किया था कि क्या व्यक्तिगत वादी अदालत में यह ठोस रूप से साबित कर सकते हैं कि टैल्क उत्पादों ने ही उनके कैंसर का कारण बना। इसके बावजूद कंपनी ने कानूनी लड़ाई को लंबा खींचने के बजाय आपसी सहमति से समझौता करने का कड़ा फैसला किया।

इसके पीछे दो प्रमुख कारण थे जिनमें पहला मुख्य व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करना और दूसरा अनिश्चितता से बचना था। मुकदमेबाजी के इस लंबे दौर को पीछे छोड़कर कंपनी अब अपना पूरा ध्यान जीवन रक्षक दवाओं और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण विकसित करने पर केंद्रित करना चाहती है। इसके अलावा कंपनी ने बहुत पहले ही वर्ष 2020 में अमेरिका में टैल्क-आधारित बेबी पाउडर का उत्पादन और बिक्री बंद कर दी थी।

Johnson & Johnson: दिवालियापन के पुराने असफल प्रयासों से कितना अलग है नया समझौता

यह नया समझौता मार्च 2025 में कानूनी लड़ाई के दोबारा शुरू होने के बाद प्रकाश में आया है। इससे पहले जे एंड जे ने मुकदमों से बचने के लिए एक बहुत ही चर्चित और विवादित कॉरपोरेट रणनीति अपनाई थी जिसे टेक्सास टू स्टेप कहा जाता था। इसके तहत कंपनी ने अपनी एक विशेष सहायक इकाई यानी शेल-कंपनी बनाई और उसके माध्यम से तीन बार दिवालियापन की याचिकाएं दायर कीं, ताकि अदालती मुकदमों को टाला जा सके। हालांकि, अमेरिकी अदालतों ने कंपनी को दिवालिया घोषित करने से जुड़े इन तमाम प्रयासों को सिरे से खारिज कर दिया था।

पिछले दिवालियापन प्रस्तावों के विपरीत, यह नया समझौता केवल वर्तमान में लंबित दावों पर ही लागू होता है और इसमें भविष्य के मुकदमों को शामिल नहीं किया गया है। भविष्य के दावों को अलग रखने से वर्तमान वादियों के लिए अधिक धन राशि उपलब्ध हो पाई है और भुगतान की गति भी काफी तेज हो गई है। अब सभी योग्य दावों का भुगतान एक दशक तक खिंचने के बजाय अगले 18 महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

CWG 2026 में आज मुरली श्रीशंकर और पारुल चौधरी पर नजरें, भारत के मेडल तालिका में इजाफा संभव

CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के खाते में अब तक कुल 12 मेडल आ चुके हैं जिनमें दो गोल्ड शामिल हैं। 29 जुलाई को मेडल तालिका में और इजाफा होने की पूरी उम्मीद है। एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग, स्विमिंग, पैरा स्विमिंग, पैरा एथलेटिक्स और लॉन बॉल्स के कई इवेंट में भारतीय खिलाड़ी मैदान पर उतरेंगे। सबसे ज्यादा नजरें लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर और 3000 मीटर स्टीपलचेज फाइनल में पारुल चौधरी पर रहेंगी।

CWG 2026: बॉक्सिंग में छह मेडल पक्का करने का मौका

बॉक्सिंग और वेटलिफ्टिंग में अब तक भारत को अच्छी सफलता मिली है। 29 जुलाई को बॉक्सिंग के अलग-अलग वजन वर्गों में कुल छह खिलाड़ी क्वार्टर फाइनल में उतरेंगे। साक्षी चौधरी, जैसमीन लैम्बोरिया, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच, अंकुश यादव और नरेंद्र बरवाल अगर सेमीफाइनल में पहुंच गए तो कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लेंगे। महिलाओं के शॉट पुट फाइनल में मनप्रीत कौर भी एक्शन में नजर आएंगी।

वेटलिफ्टिंग में संजना का फाइनल

वेटलिफ्टिंग में महिलाओं के 77 किलोग्राम भार वर्ग में संजना फाइनल में उतरेंगी। यह मेडल इवेंट भारतीय समय के अनुसार दोपहर दो बजे से शुरू होगा। संजना पर मेडल की अच्छी उम्मीदें हैं।

आज का प्रमुख शेड्यूल

दोपहर दो बजे महिलाओं के 77 किलो वेटलिफ्टिंग फाइनल में संजना मैदान पर होंगी। दोपहर 3:12 बजे पुरुषों की 200 मीटर फ्रीस्टाइल हीट्स में साजन प्रकाश और अनीश एस गौड़ा शामिल होंगे। दोपहर 3:35 बजे पुरुषों के शॉट पुट क्वालिफाइंग में तेजिंदर पाल सिंह तूर और समरदीप सिंह गिल नजर आएंगे।

शाम के मुकाबले

शाम 4:02 बजे पुरुषों की 200 मीटर हीट्स में अनिमेष कुजूर उतरेंगे। इसके बाद बॉक्सिंग के क्वार्टर फाइनल शुरू होंगे। साक्षी चौधरी, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच, अंकुश यादव और नरेंद्र बरवाल अपने-अपने मुकाबलों में चुनौती देंगे। जैसमीन लैम्बोरिया भी रात में क्वार्टर फाइनल खेलेंगी।

रात के मेडल इवेंट

रात 11:54 बजे पुरुषों की लॉन्ग जंप फाइनल में मुरली श्रीशंकर और लोकेश सत्यनाथन उतरेंगे। यह दिन का सबसे महत्वपूर्ण मेडल इवेंट माना जा रहा है। देर रात 12:31 बजे महिलाओं के शॉट पुट फाइनल में मनप्रीत कौर हिस्सा लेंगी। रात 2:05 बजे महिलाओं के 3000 मीटर स्टीपलचेज फाइनल में पारुल चौधरी मेडल की दावेदार होंगी।

पैरा इवेंट्स में भी उम्मीद

पैरा स्विमिंग और पैरा एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ी मेडल इवेंट में शामिल हैं। सुयश नारायण जाधव, चैतन्य विश्वास कुलकर्णी, देवेंद्र कुमार, सागर थायत, मोहम्मद बासिल और दिलीप महादु गावित जैसे खिलाड़ी अपने-अपने फाइनल में उतर सकते हैं।

लॉन बॉल्स और स्विमिंग

लॉन बॉल्स में दिनेश कुमार, नवनीत सिंह और नयनमोनी सैकिया अपने मैच खेलेंगे। स्विमिंग में आर्यन नेहरा 1500 मीटर फ्रीस्टाइल फाइनल में मेडल की होड़ में रह सकते हैं।

मेडल तालिका में सुधार की उम्मीद

29 जुलाई को कई मेडल इवेंट होने के कारण भारत की मेडल संख्या 12 से आगे बढ़ने की पूरी संभावना है। बॉक्सिंग में सेमीफाइनल पहुंचने वाले खिलाड़ी कांस्य पक्का करेंगे जबकि एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग में रंग ला सकते हैं। मुरली श्रीशंकर और पारुल चौधरी पर सबसे ज्यादा फोकस रहेगा।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 29 जुलाई को भारतीय खिलाड़ियों के लिए व्यस्त दिन रहने वाला है। मुरली श्रीशंकर लॉन्ग जंप फाइनल और पारुल चौधरी 3000 मीटर स्टीपलचेज फाइनल में मेडल की मजबूत दावेदार हैं। बॉक्सिंग में छह खिलाड़ी क्वार्टर फाइनल खेलेंगे जिससे कम से कम कांस्य पदक पक्का हो सकते हैं। वेटलिफ्टिंग, स्विमिंग और पैरा इवेंट्स में भी मेडल की उम्मीद है। भारत की मेडल तालिका में आज इजाफा होने की पूरी संभावना है।

Lucknow News: लखनऊ में बनेगा भारत का पहला ‘लखनऊ आई’, 150 मीटर ऊंचे व्हील से दिखेगा पूरा शहर

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अपनी नवाबी विरासत के साथ आधुनिक विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है। लखनऊ विकास प्राधिकरण गोमती नदी के किनारे एडवेंचर सिटी और भारत के पहले लखनऊ आई जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लखनऊ पर्यटन और मनोरंजन के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।

Lucknow News: गोमती किनारे विकसित होगी एडवेंचर सिटी

लखनऊ विकास प्राधिकरण गोमती नदी के तट पर आधुनिक सुविधाओं से लैस एडवेंचर सिटी विकसित करने की योजना बना रहा है। यहां थीम पार्क, हाईटेक एडवेंचर राइड्स, वाटर स्पोर्ट्स और फैमिली एंटरटेनमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसका उद्देश्य लखनऊ को केवल प्रशासनिक राजधानी नहीं बल्कि पर्यटन और मनोरंजन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करना है।

150 मीटर ऊंचा होगा लखनऊ आई

इस परियोजना का मुख्य आकर्षण 150 मीटर ऊंचा लखनऊ आई होगा। इसे लंदन आई की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। विशाल जायंट व्हील पर बैठकर पर्यटक लखनऊ शहर की स्काईलाइन और गोमती नदी का खूबसूरत नजारा देख सकेंगे। यह देश में अपनी तरह की पहली परियोजना बताई जा रही है। ऊंचाई और व्यू पॉइंट के लिहाज से यह पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनेगा।

पर्यटन के साथ बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

एलडीए के अनुसार इस प्रोजेक्ट से राजधानी में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने से होटल, परिवहन, व्यापार और स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इससे शहर की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुलने की संभावना है।

स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहा लखनऊ

लखनऊ में पर्यटन परियोजनाओं के साथ-साथ ग्रीन पार्क, आधुनिक टाउनशिप, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य लखनऊ को आधुनिक सुविधाओं से लैस, बेहतर रहने योग्य और स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना है। गोमती किनारे की परियोजनाएं शहर के सौंदर्यीकरण में भी योगदान देंगी।

परियोजना का महत्व

लखनऊ आई और एडवेंचर सिटी जैसी परियोजनाएं शहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत करेंगी। नवाबी धरोहर के साथ आधुनिक मनोरंजन सुविधाओं का मेल पर्यटकों को ज्यादा आकर्षित करेगा। परिवार और युवा दोनों वर्गों के लिए यह जगह पसंदीदा गंतव्य बन सकती है।

आगे की तैयारी

लखनऊ विकास प्राधिकरण इन परियोजनाओं को लेकर गंभीरता से काम कर रहा है। भूमि और तकनीकी पहलुओं पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। पूरा होने के बाद ये परियोजनाएं लखनऊ की नई पहचान का प्रतीक बनेंगी।

लखनऊ में गोमती नदी के किनारे एडवेंचर सिटी और भारत का पहला 150 मीटर ऊंचा लखनऊ आई विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। इसमें थीम पार्क, एडवेंचर राइड्स और वाटर स्पोर्ट्स जैसी सुविधाएं होंगी। पर्यटन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह परियोजना लखनऊ को आधुनिक पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शहर स्मार्ट सिटी के रूप में और निखरेगा।

Assam Floods: असम में बाढ़ का तांडव, AASU की केंद्र से विशेष राहत पैकेज और शीर्ष नेतृत्व के दौरे की मांग

Assam Floods: असम में मानसून की दस्तक के साथ ही प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिलने लगा है, जहां ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से राज्य के कई जिले गंभीर रूप से जलमग्न हो चुके हैं। हाल ही में सिवसागर जिले समेत विभिन्न हिस्सों में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, हालांकि अब कुछ इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा है।

इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं और जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है। इस विकट परिस्थिति के बीच ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन यानी AASU ने केंद्र सरकार पर दबाव बनाते हुए एक बड़े विशेष राहत पैकेज की मांग उठाई है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से असम आएं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लें। स्थानीय लोगों का दर्द साझा करते हुए छात्र संगठन ने स्पष्ट किया है कि केवल राज्य सरकार के प्रयासों से इस पैमाने की तबाही से निपटना संभव नहीं है।

Assam Floods: असम में मानसून की तबाही और बिगड़ते हालात

असम बाढ़ की इस विभीषिका ने एक बार फिर पूर्वोत्तर के इस राज्य के बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन तंत्र की पोल खोल दी है। राज्य के भीतर सिवसागर जिला सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में से एक बनकर उभरा है, जहां न केवल रिहायशी इलाके बल्कि कृषि योग्य भूमि और पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव समीरन फुकन ने स्वयं सिवसागर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और जमीनी हालात का मुआयना किया।

इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह समय पूरे राज्य के लिए एक गंभीर संकट की घड़ी है और हजारों आम नागरिक भारी मुश्किलों के दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सिवसागर का बच्चा-बच्चा और हर एक परिवार इस आपदा से सीधे तौर पर पीड़ित है। संगठन की मांग है कि देश के शीर्ष नेतृत्व को खुद असम की इस धरती पर आकर यहां के लोगों के आंसू देखने चाहिए और उनके दर्द को महसूस करना चाहिए ताकि केंद्र स्तर पर त्वरित और बड़े नीतिगत फैसले लिए जा सकें।

केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की पुरजोर मांग

वर्तमान परिस्थितियों का आकलन करें तो असम सरकार अपनी क्षमता के अनुसार राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई है, लेकिन प्रशासनिक मशीनरी के प्रयास जमीनी जरूरतों के मुकाबले कम पड़ते नजर आ रहे हैं। इस बात को रेखांकित करते हुए AASU के नेतृत्व ने केंद्र सरकार से तत्काल प्रभाव से एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा करने की पुरजोर मांग की है। इस पैकेज का मुख्य उद्देश्य उन सभी परिवारों को पर्याप्त मुआवजा प्रदान करना होना चाहिए जिन्होंने इस कुदरती आपदा में अपने सिर की छत, जीवनभर की मेहनत की कमाई, खेत-खलिहान और मवेशी गंवा दिए हैं।

आपदा की इस मार से उबरने के लिए वित्तीय सहायता बेहद जरूरी है ताकि पीड़ित परिवार फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें और अपनी आजीविका की शुरुआत नए सिरे से कर सकें। संगठन का मानना है कि जब तक केंद्र सरकार सीधे तौर पर इस राहत अभियान में हस्तक्षेप नहीं करती, तब तक जमीनी स्तर पर पुनर्वास का यह महाअभियान अपनी गति नहीं पकड़ पाएगा।

राहत सामग्री और लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर गंभीर चुनौतियां

राहत सामग्री के वितरण और लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर भी असम बाढ़ के दौरान प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के सामने भारी चुनौतियां खड़ी हुई हैं। कई दूरदराज के इलाकों और गांवों में संपर्क मार्ग पूरी तरह से कट जाने के कारण राहत दल वहां तक पहुंचने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। समीरन फुकन ने इस बात को स्वीकार किया कि संगठन अपनी तरफ से हरसंभव कोशिश कर रहा है कि पीड़ितों तक सूखा राशन, पेयजल और दवाइयां पहुंचाई जाएं, लेकिन कई जगह न तो नावें समय पर पहुंच पा रही हैं और न ही सड़क मार्ग से कोई वाहन गुजर सकता है।

ग्रामीण इलाकों में स्थिति यह है कि प्रशासनिक सहायता पहुंचने से पहले ही स्थानीय स्वयंसेवी संगठन और जागरूक नागरिक आपसी सहयोग से लोगों की मदद कर रहे हैं। इस संकट काल में असम के भीतर आपसी भाईचारा और मानवीय संवेदनाएं मजबूती के साथ उभरकर सामने आई हैं, जहां आम लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार बाढ़ पीड़ितों की हरसंभव सहायता करने में जुटे हुए हैं।

सिवसागर और राजाबाड़ी गांव में जलभराव की मार

सिवसागर जिले के भीतर स्थिति थोड़ी बहुत सुधरने के संकेत दे रही है क्योंकि कुछ स्थानों पर बाढ़ का पानी उतरना शुरू हो गया है। इसके बावजूद कई आंतरिक इलाके ऐसे हैं जहां जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है और लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। डोरिका नदी के किनारे बसा राजाबाड़ी गांव आज भी पूरी तरह से पानी में डूबा हुआ है, जहां के निवासियों के लिए एक पल भी चैन से काटना मुश्किल हो गया है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ का पानी इतनी तेजी से और अचानक आवासीय बस्तियों में दाखिल हुआ कि किसी को भी संभलने का मौका तक नहीं मिला। लोगों को अपने घरों में रखी जरूरी घरेलू सामग्री, अनाज और दस्तावेज सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए मुश्किल से कुछ मिनटों का समय मिला, जिसके चलते अधिकांश संपत्ति पानी में डूबकर नष्ट हो गई।

राहत शिविरों में शरण लेने को विवश बेघर परिवार

राजाबाड़ी गांव के एक स्थानीय निवासी मंगल ग्वाला ने उस डरावने अनुभव को याद करते हुए बताया कि कैसे उनकी आंखों के सामने सब कुछ जलमग्न हो गया। उन्होंने बताया कि महज साठ मिनट के भीतर उफनती नदी का पानी उनके घरों के भीतर घुस आज की तारीख में भी हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। पानी का स्तर थोड़ा सा कम जरूर हुआ है, लेकिन उनके घर के कमरों के भीतर आज भी घुटनों तक गंदा पानी भरा हुआ है, जिससे वहां रहना असंभव हो गया है। मजबूरन ऐसे तमाम परिवार अपना घर छोड़कर सड़क के किनारे बनाए गए अस्थायी राहत शिविरों में शरण लेने को विवश हैं।

सिर पर छत न होने और भविष्य की अनिश्चितता के बीच इन शिविरों में रह रहे लोगों की मानसिक स्थिति पर भी गहरा असर पड़ रहा है, जिन्हें अब शासन और प्रशासन से केवल एक ही उम्मीद है कि उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित पुनर्वास मिले।

Assam Floods: किसानों और दुकानदारों के सामने आजीविका का बड़ा संकट

राहत शिविरों में जीवन बिता रहे इन बेघर नागरिकों के लिए सामाजिक संगठनों और स्थानीय दानदाताओं द्वारा उपलब्ध कराई जा रही राहत सामग्री ही जीने का एकमात्र सहारा बनी हुई है। हालांकि सरकार की तरफ से भी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन प्रभावितों की विशाल संख्या के आगे ये इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। आपदा की इस विभीषिका के बीच लोगों के भीतर इस बात का संतोष जरूर है कि समाज के विभिन्न वर्गों से आने वाले लोग उनकी सुध ले रहे हैं और समय पर भोजन तथा अन्य जरूरत का सामान पहुंचा रहे हैं। लेकिन यह स्थिति केवल कुछ हफ्तों या महीनों की राहत से संभलने वाली नहीं है, क्योंकि जिन किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और जिन दुकानदारों की दुकानें तबाह हो गई हैं, उनके सामने आने वाले दिनों में आजीविका का गंभीर संकट खड़ा होने वाला है।

Assam Floods: बाढ़ की स्थाई समस्या और दीर्घकालिक पुनर्वास की जरूरत

असम में हर साल आने वाली बाढ़ अब एक स्थाई समस्या का रूप लेती जा रही है, जिससे निपटने के लिए केवल तात्कालिक राहत उपायों से काम नहीं चलने वाला है। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने सरकार के सामने यह मांग भी रखी है कि केवल मुआवजे तक सीमित न रहकर एक दीर्घकालिक और पुख्ता पुनर्वास योजना धरातल पर उतारी जानी चाहिए। नदियों के तटबंधों की मजबूती, जल निकास की आधुनिक व्यवस्था और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए वैज्ञानिक प्लानिंग ही भविष्य में इस तरह के बड़े जान-माल के नुकसान को रोक सकती है। जब तक केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कोई ठोस दीर्घकालिक नीति नहीं बनातीं, तब तक असम के इन इलाकों के लोगों का जीवन हर साल मानसून के मौसम में इसी तरह संकट के भंवर में फंसता रहेगा।

FMCG Price Hike: हिंदुस्तान यूनिलीवर बढ़ाएगा कीमतें, साबुन-शैंपू-टूथपेस्ट सहित रोजमर्रा की चीजें 5% तक महंगी होंगी

FMCG Price Hike: रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी होने वाली है। दिग्गज एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड सितंबर तिमाही में कई प्रॉडक्ट कैटेगरी में कीमतें 2 से 5 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। कंपनी के टॉप मैनेजमेंट ने मंगलवार को यह बात कही। कंपनी का अनुमान है कि अप्रैल-जून 2026 की तुलना में चालू तिमाही में कीमतों में इतनी बढ़ोतरी हो सकती है।

FMCG Price Hike: किन उत्पादों पर पड़ेगा असर?

हिंदुस्तान यूनिलीवर देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में से एक है। यह डिटर्जेंट, चाय, कॉफी, फ्लोर क्लीनर, शैंपू, टूथपेस्ट, फेस क्रीम, साबुन, जैम, सूप, हेल्थ ड्रिंक पाउडर और ब्यूटी प्रॉडक्ट्स जैसी कई चीजें बेचती है। व्हील, बूस्ट, हॉरलिक्स, रेड लेबल, ताज महल, ब्रू, क्लोजअप, क्लिनिक प्लस, डव, हमाम, इंदूलेखा, किसान जैम, नॉर सूप, लक्स, लैक्मे, लाइफबॉय, पॉन्ड्स, पीयर्स, पेप्सोडेंट, रिन, रेक्सॉना, विम, वैसलीन, सनसिल्क और सर्फ एक्सेल इसके प्रमुख ब्रांड हैं। इन उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम घरों के बजट पर पड़ेगा।

पहली तिमाही में भी बढ़ी थीं कीमतें

कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भी कीमतों में 2 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। हिंदुस्तान यूनिलीवर की चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रिया नायर ने तिमाही नतीजों के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि कंपनी मात्रा आधारित बढ़ोतरी को सुरक्षित रखते हुए चालू तिमाही में संतुलित और चरणबद्ध तरीके से कीमत निर्धारण की कार्रवाई जारी रखेगी।

महंगाई के कारण

प्रिया नायर ने कहा कि कुल मिलाकर स्थिति लगातार अस्थिर बनी हुई है। पश्चिम एशिया का संकट हो या मानसून और अल नीनो का प्रभाव, कंपनी इन सभी पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि कंपनी को सितंबर तिमाही में क्रमिक रूप से महंगाई बढ़ने की उम्मीद है। कच्चे माल की लागत में वृद्धि और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण कंपनी को कीमतें समायोजित करनी पड़ रही हैं।

मात्रा आधारित वृद्धि पर जोर

सीईओ प्रिया नायर ने जोर देकर कहा कि हिंदुस्तान यूनिलीवर की प्राथमिकता मात्रा आधारित राजस्व वृद्धि ही बनी हुई है। कंपनी वॉल्यूम बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मुख्य वित्त अधिकारी निरंजन गुप्ता ने बताया कि कंपनी ने जून तिमाही में मूल्य निर्धारण के जरिए सिर्फ आधी महंगाई का ही बोझ ग्राहकों पर डाला था। यानी कंपनी ने पूरी लागत वृद्धि को उपभोक्ताओं पर नहीं डाला।

उपभोक्ताओं पर असर

साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, डिटर्जेंट जैसी रोजमर्रा की चीजें हर घर की जरूरत हैं। इनकी कीमतों में 2 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी से मध्यम वर्ग के परिवारों के मासिक खर्च में मामूली वृद्धि हो सकती है। हालांकि कंपनी चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ाएगी इसलिए एक साथ बड़ा झटका नहीं लगेगा।

एफएमसीजी सेक्टर में रुझान

हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी बड़ी कंपनियों द्वारा कीमतें बढ़ाने का फैसला पूरे एफएमसीजी सेक्टर में महंगाई के दबाव को दर्शाता है। कच्चे माल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से कई कंपनियां इसी रास्ते पर चल रही हैं। उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में अन्य ब्रांड्स की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

कंपनी का रुख

हिंदुस्तान यूनिलीवर का प्रयास है कि कीमत वृद्धि के बावजूद बिक्री की मात्रा बनी रहे। इसलिए वह संतुलित और चरणबद्ध रणनीति अपना रही है। कंपनी वैश्विक और घरेलू दोनों तरह की अनिश्चितताओं पर नजर रखे हुए है ताकि समय पर सही फैसला ले सके।

हिंदुस्तान यूनिलीवर सितंबर तिमाही में साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, डिटर्जेंट समेत कई रोजमर्रा के उत्पादों की कीमतें 2 से 5 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। कंपनी ने पहली तिमाही में भी इसी दायरे में वृद्धि की थी। सीईओ प्रिया नायर ने कहा कि महंगाई क्रमिक रूप से बढ़ने की उम्मीद है लेकिन मात्रा आधारित वृद्धि कंपनी की प्राथमिकता बनी रहेगी। उपभोक्ताओं को चरणबद्ध तरीके से कीमत वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है।

Petrol – Diesel & CNG Price: 29 जुलाई को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं, दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये पर स्थिर

Petrol – Diesel & CNG Price: देशभर में बुधवार 29 जुलाई 2026 को पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेल विपणन कंपनियों ने सुबह छह बजे जारी नई दरों में पिछले दिन की तुलना में कोई संशोधन नहीं किया। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और अन्य प्रमुख शहरों में भी भाव जस के तस बने हुए हैं।

Petrol – Diesel & CNG Price: दिल्ली और एनसीआर के ताजा भाव

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर तय है। गुरुग्राम में पेट्रोल 102.77 रुपये और डीजल 95.44 रुपये प्रति लीटर है। नोएडा में पेट्रोल 102.12 रुपये तथा डीजल 95.56 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। लखनऊ में पेट्रोल 102.05 रुपये और डीजल 95.55 रुपये प्रति लीटर है। इन शहरों में पिछले कई दिनों से दरें स्थिर चल रही हैं।

मुंबई और अन्य महानगरों के रेट

मुंबई में पेट्रोल 111.18 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 113.47 रुपये तथा डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध है। बेंगलुरु में पेट्रोल 110.93 रुपये तथा डीजल 98.80 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।

सबसे महंगे और सस्ते शहर

पेट्रोल की कीमत हैदराबाद में सबसे ज्यादा 115.69 रुपये प्रति लीटर है। इसके बाद तिरुवनंतपुरम में 115.49 रुपये प्रति लीटर है। चंडीगढ़ में पेट्रोल सबसे सस्ता 98.10 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध है। डीजल की कीमत तिरुवनंतपुरम में सबसे ऊंची 104.40 रुपये प्रति लीटर है जबकि चंडीगढ़ में सबसे कम 86.09 रुपये प्रति लीटर है।

सीएनजी के ताजा भाव

दिल्ली में सीएनजी 83.09 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रही है। मुंबई में 86 रुपये, अहमदाबाद में 82.25 रुपये, गुरुग्राम और नोएडा में 91.70 रुपये प्रति किलोग्राम है। बेंगलुरु में 90 रुपये, जयपुर में 90.91 रुपये, चेन्नई में 91.50 रुपये, पुणे में 92.50 रुपये, कोलकाता में 93.50 रुपये, लखनऊ में 95.75 रुपये और हैदराबाद में 97 रुपये प्रति किलोग्राम सीएनजी उपलब्ध है।

कीमतें क्यों स्थिर हैं?

तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की विनिमय दर और घरेलू मांग को ध्यान में रखकर रोजाना दरें तय करती हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण पहले कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी लेकिन फिलहाल कंपनियों ने दरें स्थिर रखी हुई हैं। सरकार ने डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क बढ़ाया था जबकि पेट्रोल पर इसे जस का तस रखा गया।

राज्यों में अलग-अलग भाव की वजह

पेट्रोल और डीजल की कीमतें हर राज्य में वैट और स्थानीय करों के कारण अलग-अलग होती हैं। दिल्ली में वैट कम होने से कीमतें अपेक्षाकृत सस्ती हैं जबकि महाराष्ट्र, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में कर ज्यादा होने से भाव ऊंचे हैं। परिवहन लागत भी अंतर का एक कारण है।

उपभोक्ताओं पर असर

स्थिर कीमतों से आम उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है। अगर दरें बढ़तीं तो परिवहन लागत और महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ता। लंबे समय से स्थिर रहने के कारण कई उपभोक्ता कटौती की उम्मीद लगाए बैठे हैं। खासकर ट्रक और बस ऑपरेटर डीजल की कीमतों में कमी की मांग कर रहे हैं।

आगे का रुख

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल पर आगे की कीमतें निर्भर करेंगी। अगर कच्चा तेल नीचे जाता है और रुपये की स्थिति मजबूत रहती है तो आने वाले दिनों में कटौती की संभावना बन सकती है। फिलहाल तेल कंपनियां इंतजार की रणनीति पर काम कर रही दिख रही हैं। हर सुबह छह बजे नई दरें जारी की जाती हैं इसलिए रोजाना अपडेट चेक करना जरूरी है।

29 जुलाई 2026 को देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। हैदराबाद में पेट्रोल सबसे महंगा और चंडीगढ़ में सबसे सस्ता है। राज्य करों की वजह से अलग-अलग शहरों में भाव में अंतर बना हुआ है। उपभोक्ताओं को सलाह है कि वे अपने शहर के ताजा रेट नजदीकी पंप या आधिकारिक स्रोतों से जरूर जांच लें।