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CWG 2026 में आज मुरली श्रीशंकर और पारुल चौधरी पर नजरें, भारत के मेडल तालिका में इजाफा संभव

CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के खाते में अब तक कुल 12 मेडल आ चुके हैं जिनमें दो गोल्ड शामिल हैं। 29 जुलाई को मेडल तालिका में और इजाफा होने की पूरी उम्मीद है। एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग, स्विमिंग, पैरा स्विमिंग, पैरा एथलेटिक्स और लॉन बॉल्स के कई इवेंट में भारतीय खिलाड़ी मैदान पर उतरेंगे। सबसे ज्यादा नजरें लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर और 3000 मीटर स्टीपलचेज फाइनल में पारुल चौधरी पर रहेंगी।

CWG 2026: बॉक्सिंग में छह मेडल पक्का करने का मौका

बॉक्सिंग और वेटलिफ्टिंग में अब तक भारत को अच्छी सफलता मिली है। 29 जुलाई को बॉक्सिंग के अलग-अलग वजन वर्गों में कुल छह खिलाड़ी क्वार्टर फाइनल में उतरेंगे। साक्षी चौधरी, जैसमीन लैम्बोरिया, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच, अंकुश यादव और नरेंद्र बरवाल अगर सेमीफाइनल में पहुंच गए तो कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लेंगे। महिलाओं के शॉट पुट फाइनल में मनप्रीत कौर भी एक्शन में नजर आएंगी।

वेटलिफ्टिंग में संजना का फाइनल

वेटलिफ्टिंग में महिलाओं के 77 किलोग्राम भार वर्ग में संजना फाइनल में उतरेंगी। यह मेडल इवेंट भारतीय समय के अनुसार दोपहर दो बजे से शुरू होगा। संजना पर मेडल की अच्छी उम्मीदें हैं।

आज का प्रमुख शेड्यूल

दोपहर दो बजे महिलाओं के 77 किलो वेटलिफ्टिंग फाइनल में संजना मैदान पर होंगी। दोपहर 3:12 बजे पुरुषों की 200 मीटर फ्रीस्टाइल हीट्स में साजन प्रकाश और अनीश एस गौड़ा शामिल होंगे। दोपहर 3:35 बजे पुरुषों के शॉट पुट क्वालिफाइंग में तेजिंदर पाल सिंह तूर और समरदीप सिंह गिल नजर आएंगे।

शाम के मुकाबले

शाम 4:02 बजे पुरुषों की 200 मीटर हीट्स में अनिमेष कुजूर उतरेंगे। इसके बाद बॉक्सिंग के क्वार्टर फाइनल शुरू होंगे। साक्षी चौधरी, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच, अंकुश यादव और नरेंद्र बरवाल अपने-अपने मुकाबलों में चुनौती देंगे। जैसमीन लैम्बोरिया भी रात में क्वार्टर फाइनल खेलेंगी।

रात के मेडल इवेंट

रात 11:54 बजे पुरुषों की लॉन्ग जंप फाइनल में मुरली श्रीशंकर और लोकेश सत्यनाथन उतरेंगे। यह दिन का सबसे महत्वपूर्ण मेडल इवेंट माना जा रहा है। देर रात 12:31 बजे महिलाओं के शॉट पुट फाइनल में मनप्रीत कौर हिस्सा लेंगी। रात 2:05 बजे महिलाओं के 3000 मीटर स्टीपलचेज फाइनल में पारुल चौधरी मेडल की दावेदार होंगी।

पैरा इवेंट्स में भी उम्मीद

पैरा स्विमिंग और पैरा एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ी मेडल इवेंट में शामिल हैं। सुयश नारायण जाधव, चैतन्य विश्वास कुलकर्णी, देवेंद्र कुमार, सागर थायत, मोहम्मद बासिल और दिलीप महादु गावित जैसे खिलाड़ी अपने-अपने फाइनल में उतर सकते हैं।

लॉन बॉल्स और स्विमिंग

लॉन बॉल्स में दिनेश कुमार, नवनीत सिंह और नयनमोनी सैकिया अपने मैच खेलेंगे। स्विमिंग में आर्यन नेहरा 1500 मीटर फ्रीस्टाइल फाइनल में मेडल की होड़ में रह सकते हैं।

मेडल तालिका में सुधार की उम्मीद

29 जुलाई को कई मेडल इवेंट होने के कारण भारत की मेडल संख्या 12 से आगे बढ़ने की पूरी संभावना है। बॉक्सिंग में सेमीफाइनल पहुंचने वाले खिलाड़ी कांस्य पक्का करेंगे जबकि एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग में रंग ला सकते हैं। मुरली श्रीशंकर और पारुल चौधरी पर सबसे ज्यादा फोकस रहेगा।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 29 जुलाई को भारतीय खिलाड़ियों के लिए व्यस्त दिन रहने वाला है। मुरली श्रीशंकर लॉन्ग जंप फाइनल और पारुल चौधरी 3000 मीटर स्टीपलचेज फाइनल में मेडल की मजबूत दावेदार हैं। बॉक्सिंग में छह खिलाड़ी क्वार्टर फाइनल खेलेंगे जिससे कम से कम कांस्य पदक पक्का हो सकते हैं। वेटलिफ्टिंग, स्विमिंग और पैरा इवेंट्स में भी मेडल की उम्मीद है। भारत की मेडल तालिका में आज इजाफा होने की पूरी संभावना है।

Lucknow News: लखनऊ में बनेगा भारत का पहला ‘लखनऊ आई’, 150 मीटर ऊंचे व्हील से दिखेगा पूरा शहर

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अपनी नवाबी विरासत के साथ आधुनिक विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है। लखनऊ विकास प्राधिकरण गोमती नदी के किनारे एडवेंचर सिटी और भारत के पहले लखनऊ आई जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लखनऊ पर्यटन और मनोरंजन के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।

Lucknow News: गोमती किनारे विकसित होगी एडवेंचर सिटी

लखनऊ विकास प्राधिकरण गोमती नदी के तट पर आधुनिक सुविधाओं से लैस एडवेंचर सिटी विकसित करने की योजना बना रहा है। यहां थीम पार्क, हाईटेक एडवेंचर राइड्स, वाटर स्पोर्ट्स और फैमिली एंटरटेनमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसका उद्देश्य लखनऊ को केवल प्रशासनिक राजधानी नहीं बल्कि पर्यटन और मनोरंजन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करना है।

150 मीटर ऊंचा होगा लखनऊ आई

इस परियोजना का मुख्य आकर्षण 150 मीटर ऊंचा लखनऊ आई होगा। इसे लंदन आई की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। विशाल जायंट व्हील पर बैठकर पर्यटक लखनऊ शहर की स्काईलाइन और गोमती नदी का खूबसूरत नजारा देख सकेंगे। यह देश में अपनी तरह की पहली परियोजना बताई जा रही है। ऊंचाई और व्यू पॉइंट के लिहाज से यह पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनेगा।

पर्यटन के साथ बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

एलडीए के अनुसार इस प्रोजेक्ट से राजधानी में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने से होटल, परिवहन, व्यापार और स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इससे शहर की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुलने की संभावना है।

स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहा लखनऊ

लखनऊ में पर्यटन परियोजनाओं के साथ-साथ ग्रीन पार्क, आधुनिक टाउनशिप, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य लखनऊ को आधुनिक सुविधाओं से लैस, बेहतर रहने योग्य और स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना है। गोमती किनारे की परियोजनाएं शहर के सौंदर्यीकरण में भी योगदान देंगी।

परियोजना का महत्व

लखनऊ आई और एडवेंचर सिटी जैसी परियोजनाएं शहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत करेंगी। नवाबी धरोहर के साथ आधुनिक मनोरंजन सुविधाओं का मेल पर्यटकों को ज्यादा आकर्षित करेगा। परिवार और युवा दोनों वर्गों के लिए यह जगह पसंदीदा गंतव्य बन सकती है।

आगे की तैयारी

लखनऊ विकास प्राधिकरण इन परियोजनाओं को लेकर गंभीरता से काम कर रहा है। भूमि और तकनीकी पहलुओं पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। पूरा होने के बाद ये परियोजनाएं लखनऊ की नई पहचान का प्रतीक बनेंगी।

लखनऊ में गोमती नदी के किनारे एडवेंचर सिटी और भारत का पहला 150 मीटर ऊंचा लखनऊ आई विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। इसमें थीम पार्क, एडवेंचर राइड्स और वाटर स्पोर्ट्स जैसी सुविधाएं होंगी। पर्यटन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह परियोजना लखनऊ को आधुनिक पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शहर स्मार्ट सिटी के रूप में और निखरेगा।

Assam Floods: असम में बाढ़ का तांडव, AASU की केंद्र से विशेष राहत पैकेज और शीर्ष नेतृत्व के दौरे की मांग

Assam Floods: असम में मानसून की दस्तक के साथ ही प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिलने लगा है, जहां ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से राज्य के कई जिले गंभीर रूप से जलमग्न हो चुके हैं। हाल ही में सिवसागर जिले समेत विभिन्न हिस्सों में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, हालांकि अब कुछ इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा है।

इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं और जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है। इस विकट परिस्थिति के बीच ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन यानी AASU ने केंद्र सरकार पर दबाव बनाते हुए एक बड़े विशेष राहत पैकेज की मांग उठाई है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से असम आएं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लें। स्थानीय लोगों का दर्द साझा करते हुए छात्र संगठन ने स्पष्ट किया है कि केवल राज्य सरकार के प्रयासों से इस पैमाने की तबाही से निपटना संभव नहीं है।

Assam Floods: असम में मानसून की तबाही और बिगड़ते हालात

असम बाढ़ की इस विभीषिका ने एक बार फिर पूर्वोत्तर के इस राज्य के बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन तंत्र की पोल खोल दी है। राज्य के भीतर सिवसागर जिला सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में से एक बनकर उभरा है, जहां न केवल रिहायशी इलाके बल्कि कृषि योग्य भूमि और पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव समीरन फुकन ने स्वयं सिवसागर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और जमीनी हालात का मुआयना किया।

इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह समय पूरे राज्य के लिए एक गंभीर संकट की घड़ी है और हजारों आम नागरिक भारी मुश्किलों के दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सिवसागर का बच्चा-बच्चा और हर एक परिवार इस आपदा से सीधे तौर पर पीड़ित है। संगठन की मांग है कि देश के शीर्ष नेतृत्व को खुद असम की इस धरती पर आकर यहां के लोगों के आंसू देखने चाहिए और उनके दर्द को महसूस करना चाहिए ताकि केंद्र स्तर पर त्वरित और बड़े नीतिगत फैसले लिए जा सकें।

केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की पुरजोर मांग

वर्तमान परिस्थितियों का आकलन करें तो असम सरकार अपनी क्षमता के अनुसार राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई है, लेकिन प्रशासनिक मशीनरी के प्रयास जमीनी जरूरतों के मुकाबले कम पड़ते नजर आ रहे हैं। इस बात को रेखांकित करते हुए AASU के नेतृत्व ने केंद्र सरकार से तत्काल प्रभाव से एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा करने की पुरजोर मांग की है। इस पैकेज का मुख्य उद्देश्य उन सभी परिवारों को पर्याप्त मुआवजा प्रदान करना होना चाहिए जिन्होंने इस कुदरती आपदा में अपने सिर की छत, जीवनभर की मेहनत की कमाई, खेत-खलिहान और मवेशी गंवा दिए हैं।

आपदा की इस मार से उबरने के लिए वित्तीय सहायता बेहद जरूरी है ताकि पीड़ित परिवार फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें और अपनी आजीविका की शुरुआत नए सिरे से कर सकें। संगठन का मानना है कि जब तक केंद्र सरकार सीधे तौर पर इस राहत अभियान में हस्तक्षेप नहीं करती, तब तक जमीनी स्तर पर पुनर्वास का यह महाअभियान अपनी गति नहीं पकड़ पाएगा।

राहत सामग्री और लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर गंभीर चुनौतियां

राहत सामग्री के वितरण और लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर भी असम बाढ़ के दौरान प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के सामने भारी चुनौतियां खड़ी हुई हैं। कई दूरदराज के इलाकों और गांवों में संपर्क मार्ग पूरी तरह से कट जाने के कारण राहत दल वहां तक पहुंचने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। समीरन फुकन ने इस बात को स्वीकार किया कि संगठन अपनी तरफ से हरसंभव कोशिश कर रहा है कि पीड़ितों तक सूखा राशन, पेयजल और दवाइयां पहुंचाई जाएं, लेकिन कई जगह न तो नावें समय पर पहुंच पा रही हैं और न ही सड़क मार्ग से कोई वाहन गुजर सकता है।

ग्रामीण इलाकों में स्थिति यह है कि प्रशासनिक सहायता पहुंचने से पहले ही स्थानीय स्वयंसेवी संगठन और जागरूक नागरिक आपसी सहयोग से लोगों की मदद कर रहे हैं। इस संकट काल में असम के भीतर आपसी भाईचारा और मानवीय संवेदनाएं मजबूती के साथ उभरकर सामने आई हैं, जहां आम लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार बाढ़ पीड़ितों की हरसंभव सहायता करने में जुटे हुए हैं।

सिवसागर और राजाबाड़ी गांव में जलभराव की मार

सिवसागर जिले के भीतर स्थिति थोड़ी बहुत सुधरने के संकेत दे रही है क्योंकि कुछ स्थानों पर बाढ़ का पानी उतरना शुरू हो गया है। इसके बावजूद कई आंतरिक इलाके ऐसे हैं जहां जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है और लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। डोरिका नदी के किनारे बसा राजाबाड़ी गांव आज भी पूरी तरह से पानी में डूबा हुआ है, जहां के निवासियों के लिए एक पल भी चैन से काटना मुश्किल हो गया है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ का पानी इतनी तेजी से और अचानक आवासीय बस्तियों में दाखिल हुआ कि किसी को भी संभलने का मौका तक नहीं मिला। लोगों को अपने घरों में रखी जरूरी घरेलू सामग्री, अनाज और दस्तावेज सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए मुश्किल से कुछ मिनटों का समय मिला, जिसके चलते अधिकांश संपत्ति पानी में डूबकर नष्ट हो गई।

राहत शिविरों में शरण लेने को विवश बेघर परिवार

राजाबाड़ी गांव के एक स्थानीय निवासी मंगल ग्वाला ने उस डरावने अनुभव को याद करते हुए बताया कि कैसे उनकी आंखों के सामने सब कुछ जलमग्न हो गया। उन्होंने बताया कि महज साठ मिनट के भीतर उफनती नदी का पानी उनके घरों के भीतर घुस आज की तारीख में भी हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। पानी का स्तर थोड़ा सा कम जरूर हुआ है, लेकिन उनके घर के कमरों के भीतर आज भी घुटनों तक गंदा पानी भरा हुआ है, जिससे वहां रहना असंभव हो गया है। मजबूरन ऐसे तमाम परिवार अपना घर छोड़कर सड़क के किनारे बनाए गए अस्थायी राहत शिविरों में शरण लेने को विवश हैं।

सिर पर छत न होने और भविष्य की अनिश्चितता के बीच इन शिविरों में रह रहे लोगों की मानसिक स्थिति पर भी गहरा असर पड़ रहा है, जिन्हें अब शासन और प्रशासन से केवल एक ही उम्मीद है कि उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित पुनर्वास मिले।

Assam Floods: किसानों और दुकानदारों के सामने आजीविका का बड़ा संकट

राहत शिविरों में जीवन बिता रहे इन बेघर नागरिकों के लिए सामाजिक संगठनों और स्थानीय दानदाताओं द्वारा उपलब्ध कराई जा रही राहत सामग्री ही जीने का एकमात्र सहारा बनी हुई है। हालांकि सरकार की तरफ से भी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन प्रभावितों की विशाल संख्या के आगे ये इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। आपदा की इस विभीषिका के बीच लोगों के भीतर इस बात का संतोष जरूर है कि समाज के विभिन्न वर्गों से आने वाले लोग उनकी सुध ले रहे हैं और समय पर भोजन तथा अन्य जरूरत का सामान पहुंचा रहे हैं। लेकिन यह स्थिति केवल कुछ हफ्तों या महीनों की राहत से संभलने वाली नहीं है, क्योंकि जिन किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और जिन दुकानदारों की दुकानें तबाह हो गई हैं, उनके सामने आने वाले दिनों में आजीविका का गंभीर संकट खड़ा होने वाला है।

Assam Floods: बाढ़ की स्थाई समस्या और दीर्घकालिक पुनर्वास की जरूरत

असम में हर साल आने वाली बाढ़ अब एक स्थाई समस्या का रूप लेती जा रही है, जिससे निपटने के लिए केवल तात्कालिक राहत उपायों से काम नहीं चलने वाला है। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने सरकार के सामने यह मांग भी रखी है कि केवल मुआवजे तक सीमित न रहकर एक दीर्घकालिक और पुख्ता पुनर्वास योजना धरातल पर उतारी जानी चाहिए। नदियों के तटबंधों की मजबूती, जल निकास की आधुनिक व्यवस्था और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए वैज्ञानिक प्लानिंग ही भविष्य में इस तरह के बड़े जान-माल के नुकसान को रोक सकती है। जब तक केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कोई ठोस दीर्घकालिक नीति नहीं बनातीं, तब तक असम के इन इलाकों के लोगों का जीवन हर साल मानसून के मौसम में इसी तरह संकट के भंवर में फंसता रहेगा।

FMCG Price Hike: हिंदुस्तान यूनिलीवर बढ़ाएगा कीमतें, साबुन-शैंपू-टूथपेस्ट सहित रोजमर्रा की चीजें 5% तक महंगी होंगी

FMCG Price Hike: रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी होने वाली है। दिग्गज एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड सितंबर तिमाही में कई प्रॉडक्ट कैटेगरी में कीमतें 2 से 5 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। कंपनी के टॉप मैनेजमेंट ने मंगलवार को यह बात कही। कंपनी का अनुमान है कि अप्रैल-जून 2026 की तुलना में चालू तिमाही में कीमतों में इतनी बढ़ोतरी हो सकती है।

FMCG Price Hike: किन उत्पादों पर पड़ेगा असर?

हिंदुस्तान यूनिलीवर देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में से एक है। यह डिटर्जेंट, चाय, कॉफी, फ्लोर क्लीनर, शैंपू, टूथपेस्ट, फेस क्रीम, साबुन, जैम, सूप, हेल्थ ड्रिंक पाउडर और ब्यूटी प्रॉडक्ट्स जैसी कई चीजें बेचती है। व्हील, बूस्ट, हॉरलिक्स, रेड लेबल, ताज महल, ब्रू, क्लोजअप, क्लिनिक प्लस, डव, हमाम, इंदूलेखा, किसान जैम, नॉर सूप, लक्स, लैक्मे, लाइफबॉय, पॉन्ड्स, पीयर्स, पेप्सोडेंट, रिन, रेक्सॉना, विम, वैसलीन, सनसिल्क और सर्फ एक्सेल इसके प्रमुख ब्रांड हैं। इन उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम घरों के बजट पर पड़ेगा।

पहली तिमाही में भी बढ़ी थीं कीमतें

कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भी कीमतों में 2 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। हिंदुस्तान यूनिलीवर की चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रिया नायर ने तिमाही नतीजों के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि कंपनी मात्रा आधारित बढ़ोतरी को सुरक्षित रखते हुए चालू तिमाही में संतुलित और चरणबद्ध तरीके से कीमत निर्धारण की कार्रवाई जारी रखेगी।

महंगाई के कारण

प्रिया नायर ने कहा कि कुल मिलाकर स्थिति लगातार अस्थिर बनी हुई है। पश्चिम एशिया का संकट हो या मानसून और अल नीनो का प्रभाव, कंपनी इन सभी पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि कंपनी को सितंबर तिमाही में क्रमिक रूप से महंगाई बढ़ने की उम्मीद है। कच्चे माल की लागत में वृद्धि और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण कंपनी को कीमतें समायोजित करनी पड़ रही हैं।

मात्रा आधारित वृद्धि पर जोर

सीईओ प्रिया नायर ने जोर देकर कहा कि हिंदुस्तान यूनिलीवर की प्राथमिकता मात्रा आधारित राजस्व वृद्धि ही बनी हुई है। कंपनी वॉल्यूम बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मुख्य वित्त अधिकारी निरंजन गुप्ता ने बताया कि कंपनी ने जून तिमाही में मूल्य निर्धारण के जरिए सिर्फ आधी महंगाई का ही बोझ ग्राहकों पर डाला था। यानी कंपनी ने पूरी लागत वृद्धि को उपभोक्ताओं पर नहीं डाला।

उपभोक्ताओं पर असर

साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, डिटर्जेंट जैसी रोजमर्रा की चीजें हर घर की जरूरत हैं। इनकी कीमतों में 2 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी से मध्यम वर्ग के परिवारों के मासिक खर्च में मामूली वृद्धि हो सकती है। हालांकि कंपनी चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ाएगी इसलिए एक साथ बड़ा झटका नहीं लगेगा।

एफएमसीजी सेक्टर में रुझान

हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी बड़ी कंपनियों द्वारा कीमतें बढ़ाने का फैसला पूरे एफएमसीजी सेक्टर में महंगाई के दबाव को दर्शाता है। कच्चे माल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से कई कंपनियां इसी रास्ते पर चल रही हैं। उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में अन्य ब्रांड्स की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

कंपनी का रुख

हिंदुस्तान यूनिलीवर का प्रयास है कि कीमत वृद्धि के बावजूद बिक्री की मात्रा बनी रहे। इसलिए वह संतुलित और चरणबद्ध रणनीति अपना रही है। कंपनी वैश्विक और घरेलू दोनों तरह की अनिश्चितताओं पर नजर रखे हुए है ताकि समय पर सही फैसला ले सके।

हिंदुस्तान यूनिलीवर सितंबर तिमाही में साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, डिटर्जेंट समेत कई रोजमर्रा के उत्पादों की कीमतें 2 से 5 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। कंपनी ने पहली तिमाही में भी इसी दायरे में वृद्धि की थी। सीईओ प्रिया नायर ने कहा कि महंगाई क्रमिक रूप से बढ़ने की उम्मीद है लेकिन मात्रा आधारित वृद्धि कंपनी की प्राथमिकता बनी रहेगी। उपभोक्ताओं को चरणबद्ध तरीके से कीमत वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है।

Petrol – Diesel & CNG Price: 29 जुलाई को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं, दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये पर स्थिर

Petrol – Diesel & CNG Price: देशभर में बुधवार 29 जुलाई 2026 को पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेल विपणन कंपनियों ने सुबह छह बजे जारी नई दरों में पिछले दिन की तुलना में कोई संशोधन नहीं किया। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और अन्य प्रमुख शहरों में भी भाव जस के तस बने हुए हैं।

Petrol – Diesel & CNG Price: दिल्ली और एनसीआर के ताजा भाव

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर तय है। गुरुग्राम में पेट्रोल 102.77 रुपये और डीजल 95.44 रुपये प्रति लीटर है। नोएडा में पेट्रोल 102.12 रुपये तथा डीजल 95.56 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। लखनऊ में पेट्रोल 102.05 रुपये और डीजल 95.55 रुपये प्रति लीटर है। इन शहरों में पिछले कई दिनों से दरें स्थिर चल रही हैं।

मुंबई और अन्य महानगरों के रेट

मुंबई में पेट्रोल 111.18 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 113.47 रुपये तथा डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध है। बेंगलुरु में पेट्रोल 110.93 रुपये तथा डीजल 98.80 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।

सबसे महंगे और सस्ते शहर

पेट्रोल की कीमत हैदराबाद में सबसे ज्यादा 115.69 रुपये प्रति लीटर है। इसके बाद तिरुवनंतपुरम में 115.49 रुपये प्रति लीटर है। चंडीगढ़ में पेट्रोल सबसे सस्ता 98.10 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध है। डीजल की कीमत तिरुवनंतपुरम में सबसे ऊंची 104.40 रुपये प्रति लीटर है जबकि चंडीगढ़ में सबसे कम 86.09 रुपये प्रति लीटर है।

सीएनजी के ताजा भाव

दिल्ली में सीएनजी 83.09 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रही है। मुंबई में 86 रुपये, अहमदाबाद में 82.25 रुपये, गुरुग्राम और नोएडा में 91.70 रुपये प्रति किलोग्राम है। बेंगलुरु में 90 रुपये, जयपुर में 90.91 रुपये, चेन्नई में 91.50 रुपये, पुणे में 92.50 रुपये, कोलकाता में 93.50 रुपये, लखनऊ में 95.75 रुपये और हैदराबाद में 97 रुपये प्रति किलोग्राम सीएनजी उपलब्ध है।

कीमतें क्यों स्थिर हैं?

तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की विनिमय दर और घरेलू मांग को ध्यान में रखकर रोजाना दरें तय करती हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण पहले कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी लेकिन फिलहाल कंपनियों ने दरें स्थिर रखी हुई हैं। सरकार ने डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क बढ़ाया था जबकि पेट्रोल पर इसे जस का तस रखा गया।

राज्यों में अलग-अलग भाव की वजह

पेट्रोल और डीजल की कीमतें हर राज्य में वैट और स्थानीय करों के कारण अलग-अलग होती हैं। दिल्ली में वैट कम होने से कीमतें अपेक्षाकृत सस्ती हैं जबकि महाराष्ट्र, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में कर ज्यादा होने से भाव ऊंचे हैं। परिवहन लागत भी अंतर का एक कारण है।

उपभोक्ताओं पर असर

स्थिर कीमतों से आम उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है। अगर दरें बढ़तीं तो परिवहन लागत और महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ता। लंबे समय से स्थिर रहने के कारण कई उपभोक्ता कटौती की उम्मीद लगाए बैठे हैं। खासकर ट्रक और बस ऑपरेटर डीजल की कीमतों में कमी की मांग कर रहे हैं।

आगे का रुख

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल पर आगे की कीमतें निर्भर करेंगी। अगर कच्चा तेल नीचे जाता है और रुपये की स्थिति मजबूत रहती है तो आने वाले दिनों में कटौती की संभावना बन सकती है। फिलहाल तेल कंपनियां इंतजार की रणनीति पर काम कर रही दिख रही हैं। हर सुबह छह बजे नई दरें जारी की जाती हैं इसलिए रोजाना अपडेट चेक करना जरूरी है।

29 जुलाई 2026 को देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। हैदराबाद में पेट्रोल सबसे महंगा और चंडीगढ़ में सबसे सस्ता है। राज्य करों की वजह से अलग-अलग शहरों में भाव में अंतर बना हुआ है। उपभोक्ताओं को सलाह है कि वे अपने शहर के ताजा रेट नजदीकी पंप या आधिकारिक स्रोतों से जरूर जांच लें।

Leg cramps: रात में सोते समय पैर की नस चढ़ना और ऐंठन इस गंभीर पोषण की कमी का है स्पष्ट संकेत, जानें बचाव के उपाय

Leg cramps: अक्सर ऐसा देखा गया है कि लोग रात को चैन की नींद सो रहे होते हैं, लेकिन अचानक तेज दर्द के साथ उनकी आंख खुल जाती है। इस दौरान पैर की नस चढ़ जाती है और बहुत कोशिश करने के बाद भी दर्द कम नहीं होता और पैर सीधा करना भी मुश्किल हो जाता है। ज्यादातर लोग इसे केवल सोने के गलत तरीके या थकान का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रात में पैर की नस चढ़ना केवल सामान्य बात नहीं है, बल्कि यह शरीर में पोषण की कमी का एक बड़ा संकेत Leg Cramps  सोते समय अचानक पैरों में तेज ऐंठन और दर्द है पोषण की कमी का गंभीर संकेत, जानिए इसके कारण और बचाव

Leg cramps: सोते समय अचानक पैरों में तेज ऐंठन खोल देती है नींद

अक्सर लोगों के साथ ऐसा होता है कि रात को गहरी नींद में सो रहे होते हैं, लेकिन अचानक पैर की मांसपेशियां इस तरह खिंच जाती हैं कि तेज दर्द से आंख खुल जाती है। इस स्थिति को आम भाषा में नस पर नस चढ़ना कहा जाता है। बहुत कोशिश के बाद भी यह दर्द तुरंत दूर नहीं होता और पैर को सीधा करना भी मुश्किल हो जाता है। लोग इसे महज दिनभर की थकान या गलत तरीके से सोने का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या शरीर के अंदरूनी संकेतों को समझने का एक बड़ा मौका होती है। रात के समय होने वाली यह ऐंठन मुख्य रूप से शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दर्शाती है। आधुनिक जीवनशैली और खानपान की अनियमिताओं के कारण यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का रूप ले सकती है।

विटामिन डी की कमी और मांसपेशियों का सीधा संबंध

शरीर की हड्डियों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन डी की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। यह पोषक तत्व शरीर में कैल्शियम के अवशोषण और संतुलन को बनाए रखने का काम करता है। जब शरीर में इसकी मात्रा कम होने लगती है, तो मांसपेशियां अंदर से कमजोर होने लगती हैं। इसी कमजोरी के परिणामस्वरूप रात के समय पैरों में तेज ऐंठन, जकड़न और असहनीय दर्द की शिकायत पैदा होती है। लंबे समय तक विटामिन डी की कमी बने रहने से हड्डियां भी कमजोर हो सकती हैं, जिससे उठने-बैठने में भी परेशानी होने लगती है। धूप के संपर्क में कम आने और बंद कमरों में काम करने वाले लोगों में यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। इसलिए शरीर में इस विटामिन के स्तर को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

मिनरल्स की कमी से सिकुड़ने लगती हैं मांसपेशियां

केवल विटामिन डी ही नहीं, बल्कि अन्य जरूरी खनिजों की कमी भी इस दर्दनाक स्थिति को जन्म देती है। शरीर में मैग्नीशियम, कैल्शियम और पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स मांसपेशियों और नसों के सुचारू संचालन के लिए अनिवार्य माने जाते हैं। जब रक्त में इन मिनरल्स का स्तर गिरता है, तो तंत्रिका तंत्रिकाएं ठीक से संकेत नहीं भेज पाती हैं। इसके कारण मांसपेशियां अचानक और अनियंत्रित रूप से सिकुड़ने लगती हैं, जिससे तीव्र ऐंठन महसूस होती है। गर्मियों के मौसम में या ज्यादा पसीना आने पर शरीर से पानी और लवण तेजी से बाहर निकल जाते हैं। इस स्थिति में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाता है और सोते वक्त पैरों में दर्द की शिकायत आम हो जाती है। संतुलित आहार की कमी इस समस्या को और अधिक गंभीर बना देती है।

किन लोगों को सबसे ज्यादा होती है यह परेशानी

यह समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ खास वर्ग के लोगों में इसका जोखिम बहुत अधिक रहता है। जिन लोगों के शरीर में विटामिन डी या अन्य पोषक तत्वों की भारी कमी होती है, वे इसकी चपेट में जल्दी आते हैं। इसके अलावा जो लोग पूरे दिन शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहते और एक ही जगह पर लंबे समय तक बैठे रहते हैं, उनकी मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं। अत्यधिक शारीरिक श्रम करने वाले एथलीट या मजदूर वर्ग के लोगों को भी मांसपेशियों के खिंचाव का सामना करना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं में हार्मोनल बदलाव और पोषक तत्वों की अतिरिक्त मांग के कारण पैरों में ऐंठन आम बात है। बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों और मांसपेशियों का घनत्व घटने लगता है, जिससे बुजुर्ग इस समस्या से ज्यादा प्रभावित होते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने वाले लोग भी इसके आसान शिकार बन जाते हैं।

Leg cramps: रात में ऐंठन होने पर तुरंत अपनाएं ये राहत के उपाय

यदि रात को सोते समय अचानक पैर की नस चढ़ जाए और तेज दर्द उठे, तो घबराने की जरूरत नहीं होती है। सबसे पहले जिस पैर में ऐंठन हुई है, उसे धीरे-धीरे सीधा करने का प्रयास करना चाहिए। प्रभावित मांसपेशी को हल्का सा स्ट्रेच करने से जकड़न में तुरंत राहत मिलने लगती है। इसके अलावा हल्के हाथों से उस हिस्से की मालिश करना और गुनगुनी सिकाई करना बेहद फायदेमंद साबित होता है। इस तरह की परेशानी से बचने के लिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और हल्का व्यायाम करना जरूरी है। नियमित रूप से स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियां लचीली बनी रहती हैं और रात में अचानक खिंचाव की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है।

Leg cramps: खानपान और जीवनशैली में बदलाव से मिलेगा स्थायी समाधान

शरीर में पोषक तत्वों की इस कमी को दूर करने के लिए प्राकृतिक स्रोतों और संतुलित आहार का सहारा लेना चाहिए। रोजाना सुबह कुछ समय धूप में बिताना विटामिन डी प्राप्त करने का सबसे सुलभ और असरदार तरीका माना जाता है। इसके अलावा अपने दैनिक भोजन में दूध, दही, अंडे, मशरूम और पौष्टिक अनाजों को शामिल करना चाहिए। यदि खानपान से सुधार न हो और समस्या लगातार बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही सप्लीमेंट्स का सेवन करना उचित रहता है। बिना चिकित्सीय परामर्श के किसी भी तरह की दवा खुद से शुरू करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। खानपान में सुधार और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर इस दर्दनाक समस्या से हमेशा के लिए निजात पाई जा सकती है।

Una News: बरसात में सब्जियों के दाम बढ़ने से बिगड़ा रसोई का बजट

Nandpur,UNA, 28 जुलाई 2026: बरसात के मौसम में सब्जियों के दामों में लगातार उछाल से आम लोगों की रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। रोजमर्रा की सब्जियां अब गरीब और मध्यम वर्ग की पहुंच से दूर होती जा रही हैं।

बाजार में टमाटर, शिमला मिर्च, भिंडी जैसी सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे गृहिणियों को घर का खर्च चलाने में काफी दिक्कतें आ रही हैं।

आसमान छू रहे सब्जियों के भाव

स्थानीय बाजार में आज सब्जियों के दाम इस प्रकार हैं:

  • टमाटर: 60 से 70 रुपये प्रति किलो
  • शिमला मिर्च: 120 रुपये प्रति किलो
  • भिंडी, बैंगन: 60 रुपये प्रति किलो तक
  • प्याज: 40 से 45 रुपये प्रति किलो

महंगाई के कारण लोग अब पहले की तरह एक साथ कई तरह की सब्जियां नहीं खरीद पा रहे। अब जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी हो रही है।

 “सीमित आय में खर्च चलाना मुश्किल” – गृहिणियां

नंदपुर की रजना देवी ने कहा, “सब्जियों के लगातार बढ़ते दामों ने रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। महंगाई को देखते हुए अब जरूरत के हिसाब से ही सब्जियां खरीदनी पड़ रही हैं।”स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात में हर साल सब्जियां महंगी होती हैं

लेकिन इस बार दाम इतने बढ़ गए हैं कि गरीब परिवारों के लिए रसोई चलाना मुश्किल हो गया है। अधिकतर लोग दाम सुनकर ही खरीदारी करने से कतराने लगे हैं।

दाम बढ़ने के पीछे क्या है वजह?

सब्जी विक्रेताओं के अनुसार दाम बढ़ने के मुख्य कारण हैं:
1. बरसात से फसलों को नुकसान*
2. मंडियों में कम आवक
3. परिवहन लागत में बढ़ोतरी

विक्रेताओं का कहना है कि अगर जल्द स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

Married life remedies: पति-पत्नी के रिश्ते में क्लेश का कारण बनते हैं ये ग्रह, दांपत्य जीवन सुधारने के लिए अपनाएं ये ज्योतिषीय उपाय

Married life remedies: पति-पत्नी का पवित्र रिश्ता केवल विश्वास, आपसी सम्मान और प्रेम की मजबूत नींव पर टिका होता है, लेकिन कई बार बिना किसी बड़ी वजह के भी जीवनसाथी के बीच दूरियां बढ़ने लगती हैं। छोटी-छोटी बातें भी बड़े विवादों का रूप ले लेती हैं और घर का माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस प्रकार की समस्याओं के पीछे कई बार कुंडली में बैठे कुछ ग्रहों की अशुभ स्थिति और उनकी चाल का बड़ा हाथ होता है। जब ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव वैवाहिक भाव पर पड़ता है, तो आपसी समझ कमजोर होने लगती है। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर कौन से ग्रह पति-पत्नी के रिश्ते में क्लेश करवाते हैं और किन उपायों को अपनाकर जीवन में फिर से प्रेम और मधुरता लाई जा सकती है।

Married life remedies: शुक्र ग्रह की स्थिति और वैवाहिक सुख पर इसका प्रभाव

ज्योतिष में शुक्र ग्रह को प्रेम, आकर्षण, भौतिक सुख और मुख्य रूप से दांपत्य जीवन का कारक माना गया है। यदि किसी जातक की कुंडली में शुक्र कमजोर या पीड़ित अवस्था में हो, तो पति-पत्नी के बीच आकर्षण कम होने लगता है और आपसी तालमेल बिगड़ने लगता है। कमजोर शुक्र के प्रभाव से रिश्ते में तनाव और दूरियां बढ़ने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। इसके विपरीत, एक मजबूत और शुभ शुक्र वैवाहिक जीवन में प्रेम, मधुरता और सुख-शांति बनाए रखने में बहुत बड़ा सहायक साबित होता है। शुक्र की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए जीवनसाथी को ज्योतिषीय नियमों के अनुसार विशेष उपाय करने की सलाह दी जाती है ताकि रिश्तों की मिठास हमेशा बरकरार रह सके।

मंगल और अन्य ग्रहों का रिश्तों पर पड़ने वाला नकारात्मक असर

मंगल ग्रह ऊर्जा, पराक्रम और साहस का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इसकी अशुभ स्थिति व्यक्ति में क्रोध, अहंकार और आक्रामक स्वभाव को बहुत अधिक बढ़ा देती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि कुंडली में मंगल दोष मौजूद हो या मंगल प्रतिकूल स्थिति में हो, तो पति-पत्नी के बीच बार-बार विवाद और मतभेद पैदा होने लगते हैं। यही कारण है कि विवाह से पहले कुंडली मिलान के समय मंगल दोष को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है। इसके अलावा यदि शनि या राहु का प्रभाव भी दांपत्य भाव पर पड़ जाए, तो रिश्तों में गंभीर गलतफहमियां, मानसिक दूरियां और संवादहीनता जैसी स्थितियां उत्पन्न होने लगती हैं। ऐसे कठिन समय में धैर्य और संयम से काम लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है।

Married life remedies: वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ाने के अचूक उपाय

ज्योतिष शास्त्र में कमजोर शुक्र को मजबूत करने और आपसी प्रेम को बढ़ाने के लिए कई प्रभावी उपाय बताए गए हैं। इसके लिए शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन सफेद वस्त्र धारण करना, सुगंधित इत्र का प्रयोग करना और जरूरतमंदों को सफेद वस्तुएं जैसे चावल, दूध या मिश्री का दान करना बेहद लाभकारी होता है। इसके अलावा पति-पत्नी यदि साथ बैठकर भगवान शिव और माता पार्वती की नियमित रूप से पूजा करें, तो उनके दांपत्य जीवन में प्रेम और अटूट विश्वास हमेशा के लिए बढ़ने की मान्यता है। इन छोटे-छोटे धार्मिक और ज्योतिषीय उपायों से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होने लगता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

Married life remedies: भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का विशेष महत्व

हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं में भगवान शिव और माता पार्वती को सबसे आदर्श दंपति माना गया है। इसलिए वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और प्रेम की स्थापना के लिए प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करना और शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करना अत्यंत फलदायी होता है। मंदिर जाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का नियमित जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और आपसी मनमुटाव दूर होते हैं। कई लोग अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली को स्थायी बनाने के लिए गौरी-शंकर रुद्राक्ष भी धारण करते हैं, जिससे पति-पत्नी के बीच का बंधन और अधिक मजबूत होता है। देवी-देवताओं की ऐसी कृपा से पारिवारिक जीवन में आ रही तमाम बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।

ग्रहों की चाल और ज्योतिषीय उपाय अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी भी रिश्ते को हमेशा जीवंत और मजबूत बनाए रखने के लिए सबसे बड़ी जरूरत आपसी विश्वास और सम्मान की होती है। यदि पति-पत्नी एक-दूसरे की भावनाओं को पूरी गहराई से समझें, कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखें और समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए खोजें, तो रिश्ते में आने वाली हर परेशानी खुद-ब-खुद दूर हो जाती है। ज्योतिषीय अनुकूलता के साथ-साथ सकारात्मक सोच, अच्छा व्यवहार और एक-दूसरे के प्रति समर्पण ही वैवाहिक जीवन को खुशहाल और दीर्घायु बनाने की सबसे मजबूत नींव मानी जाती है। इन मानवीय मूल्यों को अपनाकर हर जोड़ा अपने रिश्ते में हमेशा प्रेम और मिठास बनाए रख सकता है।

Aaj Ka Rashifal 29 July: मेष और सिंह राशि वालों को मिलेगी नई ऊर्जा, जानें सभी 12 राशियों का आज का राशिफल

Aaj Ka Rashifal 29 July: 29 जुलाई 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए नए अवसर लेकर आ रहा है। किसी के लिए यह धैर्य और सही रणनीति का फल मिलने का दिन है, तो किसी के लिए परिवार का सहयोग सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आएगा। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए आज का दिन करियर, धन, परिवार और स्वास्थ्य के लिहाज से कैसा रहने वाला है।

Aaj Ka Rashifal 29 July, मेष राशि: धैर्य और रणनीति लाएंगे सफलता

मेष राशि वालों को आज धैर्य और सही रणनीति का लाभ मिलेगा। कार्यक्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से किए गए प्रयास सफल होंगे। प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी और आर्थिक स्थिति स्थिर रहने की उम्मीद है। दूसरों की सलाह और सहयोग स्वीकार करना फायदेमंद रहेगा। शुभ अंक 5 और शुभ रंग गहरा लाल रहेगा।

वृषभ राशि: छोटे प्रयासों का मिलेगा बड़ा फल

वृषभ राशि के जातकों के लिए छोटे-छोटे कदम सफलता की नींव बनेंगे। नौकरी और व्यापार में धैर्य के साथ काम करना बेहतर रहेगा। परिवार का सहयोग मिलेगा और आर्थिक मामलों में स्पष्टता आएगी। शुभ अंक 6 और शुभ रंग हल्का हरा रहेगा।

मिथुन राशि: आत्मविश्वास से बढ़ेगी प्रगति

मिथुन राशि वालों का आत्मविश्वास कल नई उपलब्धियां दिला सकता है। करियर में नए अवसर मिलेंगे, और विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल रहेगा। भावनाओं पर नियंत्रण रखकर निर्णय लेना जरूरी होगा। शुभ अंक 3 और शुभ रंग आसमानी नीला रहेगा।

कर्क राशि: परिवार बनेगा सबसे बड़ी ताकत

कर्क राशि वालों के लिए परिवार का सहयोग आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र में किए गए प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिलेगा, और घरेलू जिम्मेदारियां आसानी से पूरी होंगी। शुभ अंक 7 और शुभ रंग मोती सफेद रहेगा।

सिंह राशि: खर्चों पर रखें नियंत्रण

सिंह राशि वालों को कल अनावश्यक खर्च से बचना चाहिए और जोखिम भरे फैसले टालने चाहिए। स्वास्थ्य के लिए आराम और संतुलित भोजन जरूरी रहेगा। कार्यक्षेत्र में संयम बरतने से सफलता मिलेगी। शुभ अंक 1 और शुभ रंग सुनहरा पीला रहेगा।

कन्या राशि: नए अवसरों का मिलेगा लाभ

कन्या राशि वालों के रिश्तों में मजबूती आएगी, और कार्यक्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी। आर्थिक मामलों में सतर्कता फायदेमंद रहेगी। प्रभावी संवाद सफलता के नए रास्ते बनाएगा। शुभ अंक 4 और शुभ रंग पन्ना हरा रहेगा।

तुला राशि: नई शुरुआत का दिन

तुला राशि वालों के लिए दोस्तों और सहकर्मियों के साथ सहयोग बढ़ेगा। नए विचारों पर काम करने का मौका मिलेगा, और सकारात्मक सोच आगे बढ़ने में मदद करेगी। शुभ अंक 6 और शुभ रंग गुलाबी रहेगा।

वृश्चिक राशि: धैर्य से मिलेगी सफलता

वृश्चिक राशि वालों के लिए छोटे-छोटे प्रयास और सही निर्णय बड़ी उपलब्धि की ओर ले जाएंगे। कार्यक्षेत्र में प्रगति होगी, और रिश्तों में विश्वास बढ़ेगा। शुभ अंक 9 और शुभ रंग मैरून रहेगा।

धनु राशि: निरंतर प्रयास देंगे सफलता

धनु राशि वालों के सामने नई संभावनाएं आएंगी। करियर और व्यापार में प्रगति होगी। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी और स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। शुभ अंक 2 और शुभ रंग केसरिया रहेगा।

मकर राशि: ईमानदारी से बढ़ेगा विश्वास

मकर राशि वालों के लिए ईमानदार बातचीत रिश्तों को मजबूत बनाएगी। आर्थिक मामलों में बचत पर ध्यान देना बेहतर रहेगा। नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली फायदेमंद साबित होगी। शुभ अंक 8 और शुभ रंग स्लेटी रहेगा।

Aaj Ka Rashifal 29 July: कुंभ राशि: सोच-समझकर बढ़ाएं कदम

कुंभ राशि वालों को दोस्तों का सहयोग मिलेगा, और कार्यों में धीरे-धीरे सफलता मिलेगी। खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा, साथ ही स्वास्थ्य संबंधी अच्छी आदतें अपनानी चाहिए। शुभ अंक 7 और शुभ रंग फिरोजी रहेगा।

Aaj Ka Rashifal 29 July: मीन राशि: सीखने से मिलेगी नई दिशा

मीन राशि वालों के लिए कल नई चीजें सीखने और नए प्रयोग करने का दिन रहेगा। अनुभवी लोगों की सलाह लाभदायक साबित होगी। योजनाओं में लचीलापन बनाए रखना बेहतर रहेगा। शुभ अंक 9 और शुभ रंग बैंगनी रहेगा।

कुल मिलाकर 29 जुलाई का दिन ज्यादातर राशियों के लिए संतुलन और मेहनत का फल देने वाला रहने वाला है। जहां कुछ राशियों को धैर्य और सतर्कता बरतने की जरूरत होगी, वहीं कुछ के लिए यह परिवार, प्रेम और करियर में नई शुरुआत का समय साबित हो सकता है।

Delhi Travel: सिर्फ 48 घंटे में घूमें पूरी दिल्ली, जानें परफेक्ट 2-दिन का ट्रैवल प्लान

Delhi Travel: दिल्ली सिर्फ भारत की राजधानी भर नहीं है, यह एक ऐसा शहर है जहां हर कुछ किलोमीटर पर इतिहास और आधुनिकता का अलग ही रंग दिखता है। कहीं सदियों पुरानी इमारतें अतीत की कहानी सुनाती हैं, तो कहीं चौड़ी सड़कें, मॉल और कैफे शहर के मॉडर्न चेहरे को दिखाते हैं। अगर सिर्फ दो दिन के लिए दिल्ली आने का प्लान बन रहा है, तो थोड़ी सी सही प्लानिंग से इतिहास, स्वाद, शॉपिंग और नाइटलाइफ, सब कुछ इन 48 घंटों में समेटा जा सकता है।

Delhi Travel: दिल्ली पहुंचते ही करें होटल में चेक-इन

दिल्ली पहुंचने के बाद सबसे पहला काम होटल में चेक-इन करना होता है। हर बजट के हिसाब से यहां ठहरने के विकल्प मौजूद हैं बड़े लग्जरी होटल भी हैं और कम बजट में अच्छे गेस्ट हाउस भी आसानी से मिल जाते हैं। अगर सुबह जल्दी पहुंचने का प्लान है, तो बुकिंग के समय ही अर्ली चेक-इन के बारे में होटल से बात कर लेना बेहतर रहता है।

पहला दिन: इतिहास और स्वाद से शुरुआत

चेक-इन के बाद फ्रेश होकर सुबह जल्दी निकलना सबसे सही रहता है, क्योंकि इस वक्त ट्रैफिक कम रहता है। शुरुआत राष्ट्रपति भवन से की जा सकती है, जो नई दिल्ली की सबसे पहचानी जगहों में से एक है और सुबह के वक्त यहां की तस्वीरें भी बेहतर आती हैं।

इसके बाद बारी आती है चांदनी चौक की, जहां का नाश्ता किए बिना दिल्ली की ट्रिप अधूरी मानी जाती है। छोले भटूरे, पराठे, चाट और आलू कचौड़ी जैसी चीजें यहां आसानी से मिल जाती हैं। नाश्ते के बाद जामा मस्जिद और पुराना किला जैसी ऐतिहासिक जगहें देखी जा सकती हैं, साथ ही आसपास के बाजारों में खरीदारी का भी मौका मिलता है।

दोपहर के लिए लाल किला जरूर लिस्ट में होना चाहिए। मुगल बादशाह शाहजहां ने इसे अपनी राजधानी शाहजहानाबाद के किले के तौर पर बनवाया था, और यह यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में भी शामिल है। अगर समय हो तो शाम को यहां होने वाला साउंड एंड लाइट शो भी देखा जा सकता है, जिसमें मुगल काल की कहानी रोशनी और संगीत के जरिए दिखाई जाती है और जिसकी आवाज अमिताभ बच्चन ने दी है।

लाल किले से करीब 15 मिनट की दूरी पर कनॉट प्लेस है, जहां लंच के साथ-साथ शॉपिंग भी की जा सकती है। ब्रांडेड सामान के लिए यहां कई बड़े स्टोर हैं, जबकि कम बजट में खरीदारी के लिए जनपथ और पालिका बाजार बेहतर विकल्प हैं।

शाम में जंतर-मंतर जाया जा सकता है, जिसे जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने बनवाया था। यहां 13 खगोलीय यंत्र मौजूद हैं, जिनसे कभी सूरज, चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति का पता लगाया जाता था। सम्राट यंत्र, मिश्र यंत्र और जयप्रकाश यंत्र इनमें सबसे मशहूर हैं। हालांकि यहां जाने से पहले मौजूदा हालात के बारे में जानकारी ले लेना बेहतर रहता है।

इसके बाद कुछ सुकून भरे पल लोधी गार्डन में बिताए जा सकते हैं, जहां हरियाली के साथ-साथ बड़ा गुंबद, शीशा गुंबद, और मोहम्मद शाह व सिकंदर लोदी के मकबरे जैसी ऐतिहासिक इमारतें भी देखने को मिलती हैं।

रात के वक्त स्ट्रीट शॉपिंग के लिए लाजपत नगर, सरोजिनी नगर और साउथ एक्स जैसी जगहें बेहतरीन विकल्प हैं। ब्रांडेड शॉपिंग के लिए साउथ एक्स और ट्रेंडी सस्ते कपड़ों के लिए सरोजिनी नगर खासतौर पर जाना जाता है, और यहां स्ट्रीट फूड का भी भरपूर मजा लिया जा सकता है। अगर देर रात कुछ समय बचता है, तो खान मार्केट के कैफे, रेस्टोरेंट और लाउंज में समय बिताया जा सकता है।

Delhi Travel, दूसरा दिन: कुछ और ऐतिहासिक और मॉडर्न जगहें

अगर ट्रिप अगले दिन की सुबह और दोपहर तक बढ़ती है, तो दूसरे दिन की शुरुआत कुतुब मीनार से की जा सकती है। यह दुनिया की सबसे ऊंची ईंटों से बनी मीनार है और यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल है। इसके पास कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद है, जिसे कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनवाया था। यहीं मौजूद है मशहूर लौह स्तंभ, जो करीब 24 फीट ऊंचा और छह टन से ज्यादा वजनी है, और चौथी शताब्दी का माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें कभी जंग नहीं लगती।

कुतुब परिसर में ही अलाई दरवाजा है, जो लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बना है और जिसे अलाउद्दीन खिलजी ने बनवाया था। पास में अलाई मीनार भी है, जिसे खिलजी कुतुब मीनार से दोगुना ऊंचा बनवाना चाहते थे, लेकिन 1316 में उनकी मौत के चलते इसका निर्माण अधूरा रह गया।

इसके बाद मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क जाया जा सकता है, जहां दिल्ली सल्तनत के शासक गयासुद्दीन बलबन का मकबरा है, साथ ही जमाली-कमाली मस्जिद और एक सूफी संत की दरगाह भी मौजूद है।

दोपहर में हौज खास की सैर की जा सकती है, जो अपने इतिहास और मॉडर्न माहौल दोनों के लिए जाना जाता है। यहां हौज खास लेक के साथ-साथ लोदी काल की मस्जिद और मकबरा है, जबकि हौज खास विलेज अपने कैफे और अलग माहौल के लिए युवाओं में खासा लोकप्रिय है।

इसके बाद लोटस टेंपल देखा जा सकता है, जो कमल के फूल के आकार में बना बहाई धर्म का उपासना स्थल है, जहां किसी भी धर्म का व्यक्ति जा सकता है। इसमें सफेद संगमरमर की 27 पंखुड़ियां और नौ एंट्री गेट हैं, जो करीब 40 मीटर ऊंचे हॉल तक जाते हैं, जहां एक साथ करीब 2,500 लोग बैठ सकते हैं।

शाम को हुमायूं के मकबरे पर जाया जा सकता है, जिसे मुगल सम्राट हुमायूं की याद में उनकी पत्नी हाजी बेगम ने बनवाया था। इसके बाद दिल्ली हाट का रुख किया जा सकता है, जहां देश के अलग-अलग राज्यों के हस्तशिल्प, कपड़े और पारंपरिक चीजें मिलती हैं, साथ ही यहां विभिन्न राज्यों का खाना चखने और कई बार लोक संगीत या सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने का भी मौका मिलता है। ट्रिप का आखिरी पड़ाव इंडिया गेट हो सकता है, जो रात के वक्त रोशनी में जगमगाता हुआ बेहद खूबसूरत नजर आता है।

Delhi Travel: ट्रिप के लिए कुछ जरूरी टिप्स

सुबह जल्दी निकलने से ट्रैफिक से बचा जा सकता है, और मेट्रो का इस्तेमाल समय और पैसे दोनों की बचत करता है। लंबी पैदल यात्रा को देखते हुए आरामदायक फुटवियर पहनना बेहतर रहता है, और गर्मियों में पानी की बॉटल साथ रखना जरूरी है। किसी भी ऐतिहासिक जगह पर जाते समय वहां के नियमों का पालन करना चाहिए, और भीड़भाड़ वाले बाजारों में अपने सामान का खास ध्यान रखना जरूरी है।

दिल्ली पहुंचने के लिए फ्लाइट, ट्रेन, बस और प्राइवेट कार, सभी विकल्प आसानी से उपलब्ध हैं। घूमने के लिए मार्च से अक्टूबर का समय सबसे बेहतर माना जाता है। इस तरह सही प्लानिंग के साथ महज दो दिनों में दिल्ली के इतिहास, स्वाद, शॉपिंग और नाइटलाइफ का भरपूर अनुभव लिया जा सकता है।