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Siliguri Corridor: चिकन नेक कॉरिडोर पर केंद्र का बड़ा एक्शन, पश्चिम बंगाल ने सौंपे 7 नेशनल हाईवे स्ट्रेच, बांग्लादेश सीमा तक अभेद्य होगी सुरक्षा

Siliguri Corridor: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है, जिसके तहत सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ के आसपास कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने सात प्रमुख नेशनल हाईवे स्ट्रेच का नियंत्रण पूरी तरह केंद्र सरकार को सौंप दिया है। इस फैसले के बाद भारत के इस सबसे संवेदनशील गलियारे में बुनियादी ढांचे के विकास और सेना की आवाजाही को सुगम बनाने का रास्ता साफ हो गया है, जो बांग्लादेश में हालिया तख्तापलट और कट्टरपंथी ताकतों के उभार के बाद से लगातार सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर था।

Siliguri Corridor: सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर क्यों अचानक बढ़ी केंद्र की सक्रियता

Siliguri Corridor

भारत के नक्शे को देखें तो उत्तर-पूर्व के राज्यों को जोड़ने वाला महज 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा हिस्सा दिखाई देता है जिसे सामरिक भाषा में सिलीगुड़ी कॉरिडोर या ‘चिकन नेक कॉरिडोर’ कहा जाता है। पश्चिम बंगाल की नई सरकार और केंद्र के बीच प्रशासनिक सहमति बनने के बाद अब इस पूरे क्षेत्र में सड़कों के चौड़ीकरण और नए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में तेजी आएगी। यह मामला बीते करीब एक साल से सियासी खींचतान और प्रशासनिक फाइलों में अटका हुआ था। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए कई बार राज्य सरकार से पत्राचार किया था, लेकिन आखिरकार 16 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव कार्यालय से जारी एक प्रेस नोट के बाद इन सात हाईवे स्ट्रेच को औपचारिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) के हवाले कर दिया गया।

कोलकाता के प्रशासनिक गलियारों में इस फैसले को लेकर सरगर्मी तेज है। राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ के अधिकारियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए विकास कार्यों में देरी देश के लिए ठीक नहीं थी। इस फैसले से न केवल सामरिक मोर्चे पर बढ़त मिलेगी, बल्कि उत्तर बंगाल के जिलों में स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

बांग्लादेश के समीकरण और भारत की आंतरिक सुरक्षा की चुनौती

बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के आने के बाद से ही सीमा पार की राजनीतिक परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, बांग्लादेश में सक्रिय कुछ कट्टरपंथी इस्लामी तत्वों ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर अतीत में विवादास्पद और उकसावे वाले बयान दिए थे। इसके साथ ही, इस क्षेत्र से सटे इलाकों में चीन की बढ़ती कूटनीतिक और ढांचागत गतिविधियों के संकेतों ने नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ा दी थीं। भारत-भूटान और चीन के त्रिकोणीय जंक्शन पर स्थित डोकलाम में साल 2017 में हुए सैन्य गतिरोध को भारत भूला नहीं है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर डोकलाम से बेहद नजदीक है, इसलिए इस पूरे क्षेत्र को किसी भी आपात स्थिति के लिए चौबीसों घंटे तैयार रखना सेना की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में मचे सियासी घमासान के बाद सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया था। पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय विपक्षी दलों द्वारा यह आरोप लगातार लगाए जाते रहे कि उत्तर बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में अवैध घुसपैठ के कारण जनसांख्यिकीय बदलाव हो रहा है, जिससे इस संवेदनशील कॉरिडोर की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। अब हाईवे का सीधा नियंत्रण केंद्र के पास जाने से इन इलाकों में सीमा सुरक्षा बल (BSF) और सेना की रणनीतिक पहुंच कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी।

किन सात हाईवे प्रोजेक्ट्स पर अब सीधा काम करेंगी केंद्रीय एजेंसियां

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जो हिस्से केंद्र को सौंपे गए हैं, वे बेहद रणनीतिक लोकेशंस पर स्थित हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण एनएच 312 का लगभग 330 किलोमीटर लंबा हिस्सा है, जो जंगीपुर, उमरपुर, कृष्णानगर, बनगांव और बशीरहाट से होते हुए सीधे भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित घोजाडांगा तक जाता है। इसके अलावा, बिहार और पश्चिम बंगाल की सीमा से गाजोल तक एनएच 31 का हिस्सा और फरक्का तक एनएच 33 का क्षेत्र भी अब केंद्र के अधीन आ गया है।

पहाड़ी रास्तों की बात करें तो एनएच 10 का पश्चिम बंगाल और सिक्किम को जोड़ने वाला रूट सबसे अहम है। इसमें सेवोक आर्मी कैंटोनमेंट, ऐतिहासिक कोरोनेशन ब्रिज और कलिम्पोंग का इलाका शामिल है। यह रूट हर साल भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से हफ्तों तक बंद रहता था, जिससे सिक्किम में तैनात भारतीय सेना की चौकियों तक रसद पहुंचाना मुश्किल हो जाता था। अब केंद्रीय एजेंसियां इस मार्ग को ऑल वेदर रोड में तब्दील करने के लिए आधुनिक तकनीकों और सुरंगों के निर्माण पर काम शुरू कर सकेंगी। इसी तरह, भारत-भूटान सीमा तक जाने वाले हासिमारा-जयगांव खंड, बांग्लादेश सीमा तक बारादिघी-मैनागुड़ी-चांगराबांधा रूट और सिलीगुड़ी-कर्सियांग-दार्जिलिंग हिल रोड को भी इस सूची में शामिल किया गया है।

सामरिक मोर्चे पर भारतीय सेना और लॉजिस्टिक्स को कैसे मिलेगा फायदा

इन हाईवे स्ट्रेच के चौड़ीकरण और आधुनिक रखरखाव से भारतीय सेना के डिफेंस लॉजिस्टिक्स को जबरदस्त मजबूती मिलेगी। अब तक सड़कों की खराब स्थिति और प्रशासनिक मंजूरियों में देरी के कारण भारी सैन्य वाहनों, टैंकों और मिसाइल सिस्टम को चीन या बांग्लादेश की सीमाओं के करीब तैनात करने में वक्त लगता था। सिलीगुड़ी के एक सैन्य ठिकाने से जुड़े रिटायर्ड कर्नल स्तर के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आधुनिक युद्ध में समय ही सबसे बड़ा हथियार होता है। अगर हमारे पास फोर-लेन या सिक्स-लेन हाईवे होंगे, तो हम किसी भी चीनी हिमाकत का जवाब देने के लिए कुछ ही घंटों में असम, सिक्किम या अरुणाचल प्रदेश तक कुमुक भेज सकते हैं।

चिकन नेक कॉरिडोर के संकरे भौगोलिक स्वरूप के कारण सेना लंबे समय से यहां भूमिगत सुरंगें और वैकल्पिक संपर्क मार्ग बनाने की योजना पर विचार कर रही थी। अब जमीन अधिग्रहण और सड़कों के विकास का काम बिना किसी राज्य स्तरीय राजनीतिक अड़ंगे के सीधे केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के तहत होगा, जिससे इन परियोजनाओं की रफ्तार दोगुनी होना तय है। मालदा और मुर्शिदाबाद के रास्ते बिहार और पश्चिम बंगाल की कनेक्टिविटी सुधरने से देश के बाकी हिस्सों से पूर्वोत्तर का संपर्क कभी नहीं टूटेगा।

सीमावर्ती जिलों में व्यापार और आम जनता पर क्या होगा असर

इस बड़े प्रशासनिक फैसले का असर केवल सैन्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन पर भी दिखने लगा है। उत्तर 24 परगना, नदिया, मालदा और दार्जिलिंग जैसे जिलों में रहने वाले लोगों को उम्मीद है कि बेहतर सड़कों से उनके व्यापार को पंख लगेंगे। भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित व्यापारिक केंद्रों तक ट्रकों की आवाजाही आसान होगी, जिससे दोनों देशों के बीच वैध व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी। सिलीगुड़ी के स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सिलीगुड़ी पूरे उत्तर-पूर्व का प्रवेश द्वार है। यहां सड़कों की हालत सुधरने से असम, मेघालय और मणिपुर तक माल भेजना सस्ता और सुरक्षित हो जाएगा।

इसके साथ ही, दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जैसी पर्यटन वाली जगहों पर जाने वाले सैलानियों को भी अब जाम और खराब रास्तों से निजात मिलेगी। सिक्किम और दार्जिलिंग की पहाड़ियों में पर्यटन ही आजीविका का मुख्य साधन है, और सड़कों का विकास सीधे तौर पर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।

Siliguri Corridor: राष्ट्रीय सुरक्षा के नए दौर में भारत के अगले रणनीतिक कदम

पश्चिम बंगाल के इस हाईवे ट्रांसफर को केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियों की सुरक्षा ढाल को मजबूत करने जैसा है। केंद्र सरकार अब बिना किसी देरी के इन सभी सात रूटों पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने वाली है। सीमा पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ इन हाईवे के किनारे आधुनिक सीसीटीवी नेटवर्क, सेना के लिए विशेष ग्रीन कॉरिडोर और आपातकालीन लैंडिंग स्ट्रिप्स विकसित करने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। यह कदम साफ संदेश देता है कि भारत अपनी संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा के मामले में किसी भी आंतरिक या बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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