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TMBU Recruitment: TMBU के 10 नए डिग्री कॉलेजों में होगी 100 से ज्यादा पार्ट-टाइम शिक्षकों की नियुक्ति, काउंसलिंग के लिए बनीं चार कमेटियां

TMBU Recruitment: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय यानी टीएमबीयू के अधीन संचालित भागलपुर और बांका के 10 नवस्थापित डिग्री कॉलेजों में लंबे समय से चली आ रही शिक्षकों की कमी अब दूर होने जा रही है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा चयनित सौ से अधिक अंशकालिक शिक्षकों की जल्द ही इन कॉलेजों में तैनाती की जाएगी। यह नियुक्ति उन कॉलेजों के लिए खासतौर पर राहत लेकर आएगी, जहां अब तक विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति पर भेजकर किसी तरह पढ़ाई चलाई जा रही थी। नई नियुक्तियों के बाद विश्वविद्यालय की शिक्षण व्यवस्था में एक नया और स्पष्ट ढांचा देखने को मिलेगा।

आयोग से चयन के बाद अब तैनाती की तैयारी

बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से चयनित इन अंशकालिक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इन शिक्षकों के योगदान के साथ ही टीएमबीयू में शिक्षकों की तीन अलग-अलग श्रेणियां अस्तित्व में आ जाएंगी। पहली श्रेणी नियमित रूप से कार्यरत शिक्षकों की होगी, दूसरी पहले से पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों की, जबकि तीसरी श्रेणी में आयोग से नए चयनित अंशकालिक शिक्षक शामिल होंगे। इस बदलाव से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढांचे में नई गतिशीलता आने की उम्मीद है।

प्रतिनियुक्ति पर गए शिक्षकों की वापसी की उम्मीद

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि नए अंशकालिक शिक्षकों के योगदान देने के बाद वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए शिक्षकों को उनके मूल विभागों में वापस बुलाए जाने की संभावना काफी बढ़ गई है। दरअसल, नए कॉलेजों में पठन-पाठन चलाने के लिए विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों और अंगीभूत महाविद्यालयों से कई शिक्षकों को प्रतिनियुक्त किया गया था, जिसके चलते मूल विभागों में शिक्षकों की कमी होने लगी थी। नई भर्ती के बाद इस असंतुलन को दूर किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे विश्वविद्यालय परिसर के विभागों में भी शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य ढंग से चल सकेंगी।

प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए बनाई गईं चार कमेटियां

नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए टीएमबीयू ने संविदा के आधार पर चयनित सहायक प्राध्यापकों के मूल प्रमाणपत्रों और शैक्षणिक अभिलेखों के सत्यापन के लिए चार अलग-अलग काउंसलिंग कमेटियों का गठन किया है। इस संबंध में विश्वविद्यालय की ओर से बुधवार को औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई। गठित समितियों में विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्षों, विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापकों तथा प्रशासनिक अधिकारियों को संयोजक और सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, ताकि सत्यापन प्रक्रिया व्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से पूरी हो सके।

सात अगस्त से शुरू होगी काउंसलिंग प्रक्रिया

विश्वविद्यालय की अधिसूचना के अनुसार हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, इतिहास और राजनीति विज्ञान विषयों के चयनित अभ्यर्थियों की काउंसलिंग 7 अगस्त को सुबह साढ़े ग्यारह बजे से विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में आयोजित की जाएगी। इस दौरान अभ्यर्थियों के मूल प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जाएगा, जो नियुक्ति प्रक्रिया की एक अनिवार्य कड़ी है। सत्यापन पूरा होने के बाद ही चयनित शिक्षकों को संबंधित कॉलेजों में औपचारिक रूप से योगदान देने का अवसर मिलेगा।

नई नियुक्तियों से शिक्षण गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नए डिग्री कॉलेजों में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता न होना विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सीधा असर डालता है। ऐसे में सौ से अधिक अंशकालिक शिक्षकों की नियुक्ति से इन कॉलेजों में शिक्षण कार्य नियमित और सुचारू ढंग से चल सकेगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों को भी विषय विशेषज्ञों से पढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा, जिससे समग्र शैक्षणिक माहौल में सुधार आने की संभावना है।

TMBU Recruitment: बिहार में शिक्षक भर्ती को लेकर चल रहीं अन्य प्रक्रियाएं

गौरतलब है कि बिहार में इन दिनों शिक्षकों की भर्ती को लेकर कई स्तरों पर प्रक्रियाएं चल रही हैं। राज्य में बीपीएससी टीआरई-4 के तहत भी बड़े पैमाने पर शिक्षकों की बहाली प्रस्तावित है, जिसमें प्लस-टू स्कूलों के लिए सबसे अधिक पद रखे गए हैं। इसके अलावा अरबी और फारसी विषयों के शिक्षकों के पद शामिल किए जाने की मांग भी उठाई जा रही है। इन तमाम प्रयासों से यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन दोनों ही उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

टीएमबीयू द्वारा उठाया गया यह कदम भागलपुर और बांका क्षेत्र के नवस्थापित डिग्री कॉलेजों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। सौ से अधिक अंशकालिक शिक्षकों की नियुक्ति से जहां इन कॉलेजों में शिक्षकों की पुरानी कमी दूर होगी, वहीं प्रतिनियुक्ति पर गए शिक्षकों की मूल विभागों में वापसी से विश्वविद्यालय परिसर की शैक्षणिक गतिविधियां भी पटरी पर लौट सकेंगी। सात अगस्त से शुरू होने वाली काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इन कॉलेजों में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण व्यवस्था का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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