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Up Panchayat Election 2027: 2011 की जनगणना से तय होगा ग्राम प्रधान सीटों का आरक्षण, बदलेजेंगे कई गांवों के सियासी समीकरण

Up Panchayat Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2026 के पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। गांवों में चुनावी चर्चाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल ग्राम प्रधानों के आरक्षण व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। राज्य सरकार इस बार ग्राम प्रधान की सीटों का आरक्षण तय करने के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को मुख्य आधार बनाने जा रही है। पंचायती राज विभाग की इस योजना के सामने आते ही कई वर्तमान ग्राम प्रधानों के समीकरण बिगड़ने तय माने जा रहे हैं।
पुराने आरक्षण फार्मूले और रोटेशन प्रणाली के तहत इस बार सीटों का पुनर्गठन होना है। इसका सीधा मतलब यह है कि साल 2021 के पिछले पंचायत चुनाव में जो सीट जिस वर्ग के लिए आरक्षित थी, जरूरी नहीं कि 2026 में भी उसकी श्रेणी वही रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या के सामाजिक ढांचे और रोटेशन नियम के चलते सीटों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसके चलते वर्तमान जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ नए चुनावी दावेदार भी संभावित आरक्षण सूची की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

Up Panchayat Election 2027: 2011 की जनगणना और सीटों का नया गणित

पंचायती राज नियमावली के तहत जब भी चुनावों में नए सिरे से आरक्षण का निर्धारण होता है, तो आबादी के आधिकारिक आंकड़ों को देखा जाता है। वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार भले ही वर्तमान में गांवों की आबादी बढ़ चुकी है, लेकिन आधिकारिक तौर पर अंतिम जनगणना 2011 के आंकड़ों को ही माना जाएगा। उसी समय दर्ज अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग की आबादी के अनुपात से आरक्षण का नया ढांचा तैयार होगा।
जिन ग्राम पंचायतों में 2011 के आंकड़ों के अनुसार सामाजिक संरचना में अंतर दर्ज है, वहां सीटों की श्रेणी बदलना तय माना जा रहा है। सरकार पहले जिले स्तर पर कुल पदों के सापेक्ष आरक्षित सीटों की संख्या तय करेगी। इसके बाद अलग-अलग पंचायतों में जनसंख्या के घटते क्रम में सीटों का आवंटन किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में 2021 की पुरानी आरक्षण स्थिति को ध्यान में रखते हुए रोटेशन का नियम भी सख्ती से लागू होगा।

रोटेशन प्रणाली से क्यों परेशान हैं मौजूदा प्रधान

रोटेशन व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी ग्राम पंचायत में एक ही वर्ग का लंबे समय तक वर्चस्व न रहे। हर चुनाव चक्र में आरक्षण की श्रेणी बदली जाती है ताकि समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व का समान अवसर मिल सके। इस वजह से 2021 में सामान्य रही सीट 2026 में आरक्षित वर्ग में जा सकती है। इसी तरह अनुसूचित जाति या पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित रही सीटें इस बार किसी अन्य श्रेणी में परिवर्तित हो सकती हैं।
यदि किसी गांव की सीट सामान्य से बदलकर अनुसूचित जाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो जाती है, तो वर्तमान सामान्य वर्ग का प्रधान वहां से दोबारा चुनाव नहीं लड़ पाएगा। यही नियम आरक्षित सीटों के सामान्य होने पर भी लागू होता है। केवल वही मौजूदा प्रतिनिधि मैदान में उतर सकेंगे जो नई आरक्षित श्रेणी की पात्रता शर्तों को पूरी तरह से पूरा करते हैं। यही कारण है कि रोटेशन के इस चक्र ने गांव-गांव की प्रधानी के दावेदारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

Up Panchayat Election 2027: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग का कोटा

उत्तर प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायत प्रणाली में अन्य पिछड़े वर्ग के लिए नियमानुसार 27 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का आरक्षण उनकी संबंधित आबादी के अनुपात के आधार पर तय किया जाता है। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के दिशा-निर्देशों और रोटेशन चक्र के तालमेल से ही अंतिम आरक्षण सूची को रूप दिया जाएगा।
परिसीमन और पुनर्गठन के चलते प्रदेश में ग्राम पंचायतों की कुल संख्या में भी बदलाव आया है। नए पुनर्गठन के बाद राज्य में ग्राम पंचायतों की संख्या घटकर लगभग 57,695 हो गई है। जिन पंचायतों की सीमाओं का विस्तार हुआ है या जहां कई बस्तियों को जोड़ा गया है, वहां पुराना आरक्षण फॉर्मूला सीधे लागू नहीं किया जा सकता। ऐसी जगहों पर नए सिरे से आबादी की गणना और परिसीमन के आधार पर श्रेणी तय होगी।

महिला आरक्षण चक्र और बदलता चुनावी समीकरण

पंचायती राज अधिनियम के तहत पंचायतों में महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई यानी 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखना अनिवार्य है। यह व्यवस्था केवल सामान्य श्रेणी तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की सीटों के भीतर भी 33 फीसदी महिला कोटे का नियम लागू होता है।
यदि किसी ग्राम पंचायत की सीट पिछड़ा वर्ग से बदलकर पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित हो जाती है, तो वर्तमान पुरुष प्रधान चुनाव लड़ने की दौड़ से बाहर हो जाएगा। भले ही वह उसी पिछड़ा वर्ग से संबंध क्यों न रखता हो। इसी तरह 2021 में महिला के लिए आरक्षित रही सीट इस बार पुरुष या अन्य किसी वर्ग के लिए मुक्त हो सकती है। इस रोटेशन के कारण गांवों में महिला प्रत्याशियों की नई भूमिकाएं सामने आ सकती हैं।

Up Panchayat Election 2027: आबादी का अनुपात और आरक्षण का सटीक फॉर्मूला

ग्रामीण इलाकों में अक्सर यह माना जाता है कि जिस गांव में किसी विशेष वर्ग की आबादी अधिक है, वहां की सीट हमेशा उसी वर्ग के लिए आरक्षित होगी। हालांकि कानून के मुताबिक सिर्फ किसी एक गांव की आबादी ज्यादा होना आरक्षण की गारंटी नहीं है। पूरे विकासखंड और जिले की कुल आरक्षित सीटों और रोटेशन की स्थिति को मिलाकर ही अंतिम निर्णय लिया जाता है।
आरक्षण का पूरा गणित 2011 की जनगणना में दर्ज SC, ST और OBC आबादी, कुल आरक्षित सीटों का अनुपात, 2021 की आरक्षण स्थिति और रोटेशन चक्र पर टिका है। इन सभी बिंदुओं के मूल्यांकन के बाद ही आधिकारिक ड्राफ्ट जारी किया जाता है। स्थानीय प्रशासन की ओर से अंतिम आरक्षण सूची और आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही उम्मीदवारों को अपनी उम्मीदवारी का स्पष्ट पता चल सकेगा।
उत्तर प्रदेश में 2026 के पंचायत चुनाव को लेकर गांव-गांव में सियासी माहौल गरमाने लगा है। 2011 की जनगणना, रोटेशन नियम और महिला कोटा मिलकर इस बार कई दिग्गजों के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। पंचायती राज विभाग और राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से आरक्षण की आधिकारिक सूची जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस गांव में कौन सा प्रत्याशी प्रधानी के चुनावी मैदान में ताल ठोक सकेगा।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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