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Vande Mataram Bill: संसद के दोनों सदनों में पास हुआ वंदे मातरम् बिल, विपक्ष के भारी हंगामे के बीच लोकसभा से मिली मंजूरी

Vande Mataram Bill: संसद के मानसून सत्र के दौरान विधायी कार्यों की सूची में एक बेहद अहम और चर्चित कदम उठाते हुए, राज्यसभा के बाद अब लोकसभा से भी वंदे मातरम् बिल को औपचारिक रूप से पारित कर दिया गया है। संसद के दोनों सदनों में इस विधायी प्रस्ताव को लेकर विपक्षी दलों की ओर से भारी विरोध प्रदर्शन और जोरदार हंगामा देखने को मिला, लेकिन तमाम गतिरोधों को दरकिनार करते हुए सत्ता पक्ष ने इसे बहुमत के साथ पास कराने में सफलता हासिल कर ली। बुधवार, उनतीस जुलाई को उच्च सदन से हरी झंडी मिलने के बाद, गुरुवार, तीस जुलाई को निचले सदन यानी लोकसभा से भी इस बिल को मंजूरी मिल गई। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बाद अब इस विधेयक को देश के राष्ट्रपति के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून का रूप ले लेगा।

Vande Mataram Bill: दोनों सदनों में हंगामे के बीच विधायी प्रक्रिया का पूरा होना

संसदीय इतिहास में कई ऐसे मौके आते हैं जब किसी बड़े नीतिगत या वैचारिक मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिलता है। वंदे मातरम् बिल के मामले में भी ठीक ऐसा ही नजारा संसद के दोनों सदनों में नजर आया, जहां विपक्षी सांसदों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सदन के भीतर जमकर हंगामा किया। इसके बावजूद सरकार ने अपनी रणनीति पर अडिग रहते हुए विधायी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और उच्च सदन के बाद निचले सदन में भी इस बिल को सफलतापूर्वक ध्वनिमत से पारित करा लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के विधेयकों का संसद से पास होना देश की राजनीतिक और वैचारिक दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है, जिस पर आने वाले दिनों में देश भर में व्यापक चर्चा होने की पूरी संभावना है।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बनने की ओर बढ़ता कदम

राज्यसभा और लोकसभा दोनों ही प्रमुख मंचों से इस महत्वपूर्ण विधेयक को पास किए जाने के बाद अब यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। दोनों सदनों की मुहर लगने के बाद अब इस वंदे मातरम् बिल को आधिकारिक रूप से देश की महामहिम राष्ट्रपति के पास भेजा जा रहा है, जहां से अंतिम हस्ताक्षर होने के बाद यह औपचारिक रूप से देश का नया कानून बन जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक और विधायी तंत्र ने जिस तत्परता का परिचय दिया है, उससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस विषय को लेकर कितनी गंभीर थी। कानून बनने के बाद इसके प्रावधानों को देश भर में किस प्रकार लागू किया जाएगा और इसका सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन पर क्या दूरगामी प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाला समय ही तय करेगा।

Vande Mataram Bill: विपक्षी दलों की आपत्तियां और राजनीतिक गलियारों में गरमाई सियासत

संसद के भीतर इस बिल के पारित होने के दौरान विपक्षी दलों ने तीखा विरोध दर्ज कराते हुए सरकार पर लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया। विपक्षी नेताओं का कहना था कि ऐसे संवेदनशील और वैचारिक रूप से महत्वपूर्ण विधेयकों पर सदन के भीतर व्यापक चर्चा और आम सहमति की आवश्यकता होती है, जिसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के नेताओं ने विपक्ष के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर इस प्रकार का विरोध केवल राजनीति से प्रेरित है। इस गरमागरम बहस और राजनीतिक खींचतान के बीच संसद परिसर से लेकर बाहर तक का सियासी माहौल पूरी तरह गरमाया रहा, जिसने राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है।

Vande Mataram Bill: देश की संसदीय व्यवस्था और नीतिगत फैसलों का भविष्य

संसद के इस सत्र में जिस प्रकार एक के बाद एक महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया गया है, वह देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और विधायी कार्यकुशलता को भली-भांति दर्शाता है। वंदे मातरम् बिल का दोनों सदनों से पास होना यह साबित करता है कि मजबूत इच्छाशक्ति के साथ सरकार अपने वैचारिक और नीतिगत एजेंडे को आगे बढ़ाने में पूरी तरह सक्षम है। हालांकि, जिस स्तर पर विपक्ष का विरोध देखने को मिला है, उससे यह भी साफ है कि आने वाले दिनों में सड़क से लेकर संसद तक इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक संघर्ष और अधिक तेज हो सकता है। देश के आम नागरिक भी अब इस बात पर टकटकी लगाए बैठे हैं कि इन बड़े विधायी कदमों का उनके दैनिक जीवन और देश के भविष्य पर किस प्रकार का सकारात्मक या नकारात्मक असर देखने को मिलता है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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