Delhi Mayor Election 2026: दिल्ली नगर निगम (MCD) के आगामी मेयर चुनाव को लेकर राजधानी की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी ने मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने इस बार चुनाव न लड़ने का चौंकाने वाला फैसला लिया है। भाजपा ने महापौर पद के लिए प्रवेश वाही और उप-महापौर के लिए मोनिका पंत को मैदान में उतारा है। आप के इस कदम के बाद अब भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।
भाजपा ने अनुभवी चेहरों पर लगाया दांव
बीजेपी ने इस बार बहुत सोच-समझकर अपने उम्मीदवारों का चयन किया है। महापौर पद के उम्मीदवार प्रवेश वाही वर्तमान में सदन के नेता हैं और निगम के कामकाज पर उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। उनकी स्वच्छ छवि और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। वहीं मोनिका पंत को डिप्टी मेयर का उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने संगठन में महिलाओं की भागीदारी और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है। नामांकन के आखिरी दिन इन नामों की घोषणा के साथ ही भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है।
Delhi Mayor Election 2026: आम आदमी पार्टी ने क्यों छोड़ा चुनावी मैदान

आम आदमी पार्टी का चुनाव से पीछे हटना राजनीतिक जानकारों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस बार मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए उम्मीदवार नहीं उतारेगी। भारद्वाज का तर्क है कि भाजपा के पास केंद्र की सत्ता और उपराज्यपाल का समर्थन है, इसलिए पार्टी उन्हें पूरी छूट देना चाहती है। आप का कहना है कि वे भाजपा को ‘एक्सपोज़’ करना चाहते हैं ताकि आने वाले समय में कूड़ा, सड़कों की बदहाली और जलभराव जैसी समस्याओं के लिए भाजपा किसी और को जिम्मेदार न ठहरा सके। हालांकि, आप ने स्थायी समिति की रिक्त सीटों के लिए जलज चौधरी को उम्मीदवार बनाकर यह संकेत दिया है कि वे निगम के वित्तीय फैसलों पर अपनी नजर बनाए रखेंगे।
Delhi Mayor Election 2026: सदन का समीकरण और निर्विरोध चुनाव की आहट
दिल्ली नगर निगम के 250 सदस्यीय सदन में इस वक्त जो समीकरण बन रहे हैं, वे पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में नजर आ रहे हैं। आम आदमी पार्टी के चुनाव न लड़ने के फैसले के बाद यदि कांग्रेस भी अपना उम्मीदवार नहीं उतारती है, तो 29 अप्रैल को प्रवेश वाही और मोनिका पंत की निर्विरोध ताजपोशी तय है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दिल्ली की राजनीति में एक नया मोड़ है, जहां विपक्ष सत्ता पक्ष को काम करने का पूरा मौका देकर उसे जनता की अदालत में घेरने की रणनीति अपना रहा है।
दिल्ली की जनता और जवाबदेही की नई जंग
जैसे ही नए महापौर अपना कार्यभार संभालेंगे, उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा होगा। दिल्ली की जनता लंबे समय से सफाई और नागरिक सुविधाओं को लेकर परेशान है। भाजपा के लिए यह चुनाव जहां एक नैतिक जीत है, वहीं यह एक बड़ी परीक्षा भी है। अब जब पूरी जिम्मेदारी भाजपा की टीम पर होगी, तो उन्हें यह साबित करना होगा कि वे दिल्ली की बुनियादी समस्याओं का समाधान निकालने में सक्षम हैं। 29 अप्रैल के बाद दिल्ली नगर निगम की राजनीति में जवाबदेही का एक नया दौर शुरू होने वाला है।
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