Health News: इस साल अप्रैल-मई में उत्तर भारत समेत पूरे देश में भीषण गर्मी पड़ रही है। दिल्ली-एनसीआर में तापमान लगातार 42 से 45 डिग्री के पार जा रहा है। ऐसे मौसम में केवल पानी पीना शरीर के लिए पर्याप्त नहीं होता। डॉक्टरों का कहना है कि अधिक पसीना आने पर शरीर से पानी के साथ-साथ जरूरी खनिज भी बाहर निकल जाते हैं। इस स्थिति को इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन कहते हैं। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह दिल की धड़कन अनियमित होने, दौरे पड़ने और बेहोशी जैसी गंभीर स्थितियों तक पहुंच सकता है।
क्या होते हैं इलेक्ट्रोलाइट्स और शरीर में क्या है इनका काम
इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में पाए जाने वाले वे खनिज हैं जो पानी में घुलकर बिजली जैसा चार्ज पैदा करते हैं। इनमें सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, क्लोराइड, फॉस्फेट और बाइकार्बोनेट शामिल हैं। इन सभी का शरीर में एक अलग और जरूरी काम होता है।
सोडियम शरीर में पानी का स्तर नियंत्रित करता है और नसों के संकेतों को आगे पहुंचाता है। पोटेशियम मांसपेशियों और दिल की धड़कन को नियमित रखता है। कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ मांसपेशियों के सिकुड़ने और फैलने में सहायक है। मैग्नीशियम शरीर में ऊर्जा बनाने और नसों को शांत रखने के लिए जरूरी है। क्लोराइड पाचन और खून की अम्लता को संतुलित रखता है।
डॉक्टरों का कहना है कि इलेक्ट्रोलाइट्स बिना पानी के अकेले काम नहीं करते और पानी बिना इलेक्ट्रोलाइट्स के बेकार है। दोनों का सही अनुपात होना जरूरी है। अगर केवल पानी अधिक पिया जाए और खनिज न लिए जाएं तो हाइपोनेट्रेमिया नामक स्थिति पैदा हो जाती है जो भी खतरनाक है।
Health News: गर्मी में क्यों बिगड़ता है इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस
भीषण गर्मी में पसीना सबसे बड़ा कारण है। शरीर 2 से 3 लीटर तक पानी और खनिज पसीने के रूप में बाहर निकाल देता है। भारत में अप्रैल से जून के बीच यह समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है।
इसके अलावा उल्टी और दस्त होने पर भी शरीर से तरल पदार्थ तेजी से बाहर जाते हैं। जो लोग भारी व्यायाम करते हैं या खेतों और निर्माण स्थलों पर काम करते हैं, उन्हें यह खतरा ज्यादा रहता है। किडनी की बीमारी, टाइप-1 मधुमेह और कुछ दवाओं जैसे ब्लड प्रेशर की गोलियां, लैक्सेटिव या कीमोथेरेपी भी इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का कारण बन सकती हैं।
बुजुर्गों और बच्चों में इस स्थिति का खतरा सबसे अधिक रहता है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता और शरीर का स्वाभाविक संतुलन कमजोर होता है। जो लोग एसी से अचानक गर्मी में बाहर निकलते हैं, उन पर भी तापमान का तेज असर होता है।
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के लक्षण: इन्हें न करें नजरअंदाज
शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं जिन्हें लोग सामान्य थकान समझ लेते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बन जाती है। मांसपेशियों में ऐंठन और खिंचाव, अत्यधिक थकान, सिरदर्द, बहुत अधिक प्यास लगना और मुंह सूखना इसके शुरुआती संकेत हैं।
आगे बढ़ने पर दिल की धड़कन अनियमित या तेज हो जाती है। कुछ लोगों को उल्टी और मिचली का अनुभव होता है। गंभीर स्थिति में भ्रम होना, सुस्ती छाना, रक्तचाप में उतार-चढ़ाव और यहां तक कि दौरे भी पड़ सकते हैं।
बच्चों में रोना बंद न होना, आंखें धंसना और पेशाब कम आना इसके संकेत हो सकते हैं। बुजुर्गों में याददाश्त कमजोर होना और बहुत थका हुआ महसूस करना भी इसी का लक्षण हो सकता है। ऐसे किसी भी लक्षण को देखते ही तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
क्या खाएं-पिएं: इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई के लिए सबसे अच्छे खाद्य पदार्थ
गर्मी में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने के लिए घरेलू और प्राकृतिक चीजें सबसे कारगर हैं। नारियल पानी सबसे बेहतर विकल्प है। इसमें सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम तीनों एक साथ मिलते हैं। एक गिलास नारियल पानी गर्मी में शरीर को जल्दी राहत देता है।
नींबू पानी में एक चुटकी नमक और थोड़ा शहद मिलाकर पीने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और सोडियम की भरपाई होती है। केला खाएं क्योंकि इसमें पोटेशियम की मात्रा बहुत अधिक होती है और यह मांसपेशियों की ऐंठन को दूर करता है।
दही, छाछ और लस्सी में न सिर्फ इलेक्ट्रोलाइट्स हैं बल्कि इनसे पाचन भी ठीक रहता है। तरबूज, खरबूज, संतरा और मौसमी फल खाएं क्योंकि इनमें पानी और खनिज दोनों होते हैं। पालक, टमाटर और आलू जैसी सब्जियां भी इलेक्ट्रोलाइट्स का अच्छा स्रोत हैं।
घरेलू उपाय: रोजाना की दिनचर्या में करें ये बदलाव
सुबह उठते ही एक गिलास नमक और नींबू वाला पानी पिएं। दोपहर में छाछ या नारियल पानी लें। शाम को दही के साथ केला खाएं। खाने में नमक का संतुलित इस्तेमाल करें, न बहुत ज्यादा और न बहुत कम।
भारी व्यायाम या मेहनत के बाद इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय जरूर लें। बाहर जाने से पहले पानी और कोई फल साथ रखें। शराब और चाय-कॉफी से दूरी बनाएं क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ाते हैं।
रोजाना कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पिएं, लेकिन एक साथ बहुत अधिक पानी पीने से बचें। हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें और दोपहर 12 से 4 बजे के बीच धूप में जाने से बचें।
डॉक्टर से कब मिलें: इन हालातों में न करें देरी
अगर घरेलू उपायों के बाद भी मांसपेशियों में ऐंठन लगातार बनी रहे, दिल की धड़कन बहुत तेज या अनियमित हो, बेहोशी आए, उल्टी-दस्त के साथ बहुत कमजोरी महसूस हो या भ्रम की स्थिति बने तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
डॉक्टर खून की जांच के जरिए इलेक्ट्रोलाइट का स्तर मापते हैं। जरूरत पड़ने पर ओरल रिहाइड्रेशन घोल या नस में तरल पदार्थ दिया जाता है। किडनी या दिल की बीमारी वाले मरीजों को अपने मन से कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए।
विशेषज्ञों की सलाह: गर्मी में ऐसे रखें खुद को स्वस्थ
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में फल और सब्जियों का सेवन बढ़ाना जरूरी है। खाने में प्रोसेस्ड और बाहरी खाने से बचें। फिटनेस विशेषज्ञ कहते हैं कि व्यायाम से पहले और बाद में इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय लेना चाहिए। अगर नियमित रूप से बाहर काम करना पड़ता है तो हर घंटे कुछ न कुछ जरूर खाएं-पिएं।
60 साल से अधिक उम्र के लोग और पांच साल से छोटे बच्चे इस खतरे में सबसे ऊपर हैं। इन लोगों पर परिवार के सदस्यों को विशेष ध्यान देना चाहिए। गर्मी में नियमित स्वास्थ्य जांच करवाते रहें ताकि कोई गंभीर समस्या पहले ही पकड़ में आ जाए।
Health News: सावधानी और सही खान-पान ही है गर्मी से बचाव का सबसे अच्छा तरीका
भीषण गर्मी में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन एक गंभीर लेकिन आसानी से रोके जा सकने वाली समस्या है। सही खान-पान, पर्याप्त पानी, घरेलू उपाय और थोड़ी सावधानी से इससे बचा जा सकता है। नारियल पानी, छाछ, केला, नींबू पानी और मौसमी फलों को अपनी रोजाना की दिनचर्या में शामिल करें। लक्षण दिखने पर देर न करें और डॉक्टर की सलाह लें। शरीर के संकेतों को समझें और समय रहते कदम उठाएं। इस गर्मी में स्वस्थ और सुरक्षित रहना आपके हाथ में है।
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