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Brij Bhushan Sharan Singh Acquitted: महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में बृज भूषण शरण सिंह को कोर्ट से मिली बड़ी राहत

Brij Bhushan Sharan Singh Acquitted: देश की राजधानी दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने चर्चित महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत का यह बड़ा फैसला लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे पक्षों के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पिछले काफी समय से सुनवाई चल रही थी और अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

जनवरी 2023 में जब यह पूरा मामला सार्वजनिक हुआ था, तब देश भर के खेल जगत और राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई थी। इस पूरे प्रकरण के दौरान लगभग ग्यारह सौ से अधिक दिनों में एक सौ से ज्यादा बार सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की गई। अदालत के इस ताजा फैसले के बाद बृज भूषण शरण सिंह को कानूनी मोर्चे पर बहुत बड़ी राहत हासिल हुई है।

इस मामले की शुरुआत तब हुई थी जब देश के कई नामचीन पहलवानों ने जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपनी जांच शुरू की और अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। पुलिस द्वारा दाखिल किए गए आरोपपत्र में कई गंभीर धाराएं लगाई गई थीं, जिसके तहत अदालत में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी। हालांकि, अदालती प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के बीच लंबी कानूनी बहस देखने को मिली। अब अदालत ने तमाम साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को बरी करने का आदेश जारी कर दिया है।

Brij Bhushan Sharan Singh Acquitted: अदालत के फैसले का पूरा घटनाक्रम और कानूनी पृष्ठभूमि

इस बहुचर्चित मामले में पिछले कुछ वर्षों से लगातार कानूनी कार्रवाई और सुनवाई का दौर जारी रहा है। अदालत ने पिछले महीने बहस पूरी होने के बाद अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया था जिसके बाद आज यह बड़ा फैसला सामने आया। मई के महीने में अदालत ने पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ प्रमुख बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ आपराधिक धमकी से जुड़े मामलों में आरोप तय करने का निर्देश दिया था। हालांकि, उस शुरुआती चरण में भी छह में से एक शिकायतकर्ता महिला पहलवान के मामले में उन्हें राहत दे दी गई थी। इसके साथ ही इस पूरे कानूनी सफर में सह-आरोपी और महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर की भूमिका पर भी अदालत में लंबी सुनवाई हुई थी।

विभिन्न कानूनी चरणों को पार करते हुए यह मामला देश के सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहने वाले मामलों में से एक बन गया था। अदालत के अंदर और बाहर दोनों जगह इस प्रकरण से जुड़ी हर गतिविधि पर मीडिया और आम जनता की पैनी नजर बनी हुई थी। दोनों पक्षों के वकीलों ने अपने-अपने तर्कों के समर्थन में कई दस्तावेज और साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए थे। न्यायपालिका की सुदृढ़ प्रक्रिया के तहत हर एक गवाही और सबूत का बारीकी से परीक्षण किया गया जिसके बाद यह अंतिम निर्णय आया है। इस फैसले से कानूनी लड़ाई के एक बड़े दौर का औपचारिक रूप से समापन हो गया है।

दिल्ली पुलिस की जांच और आरोपपत्र से जुड़े मुख्य बिंदु

दिल्ली पुलिस ने इस संवेदनशील मामले की गहन जांच पड़ताल के बाद अदालत के समक्ष अपना विस्तृत आरोपपत्र सौंपा था। पुलिस द्वारा दाखिल किए गए इस आरोपपत्र में महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने और यौन उत्पीड़न से जुड़ी विभिन्न कानूनी धाराओं का हवाला दिया गया था। इसके अलावा पीछा करने और आपराधिक धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी इस कानूनी दस्तावेज का हिस्सा बनाए गए थे। जांच के दौरान पुलिस ने कई गवाहों के बयान दर्ज किए और घटनाक्रम से जुड़े तमाम तकनीकी पहलुओं को भी खंगाला था। हालांकि, अदालत में चली लंबी सुनवाई के दौरान इन आरोपों की वैधता और साक्ष्यों की मजबूती पर लगातार बहस होती रही।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के मामलों में साक्ष्यों की सटीकता और गवाहों के बयान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अदालत ने पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों का गहन विश्लेषण किया। लंबे समय तक चली इन अदालती बैठकों के बाद न्यायपीठ इस नतीजे पर पहुंची कि उपलब्ध कराए गए सबूतों के आधार पर आरोप साबित नहीं होते हैं। इसी आधार पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए सभी पक्षों को इस मामले से मुक्त कर दिया।

Brij Bhushan Sharan Singh Acquitted: सह-आरोपी विनोद तोमर की स्थिति और वर्तमान कानूनी स्थिति

इस पूरे कानूनी प्रकरण में भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर भी मुख्य आरोपियों की सूची में शामिल थे। दिल्ली पुलिस की ओर से तैयार किए गए आरोपपत्र में उनके ऊपर भी विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए गए थे। अदालत ने सुनवाई के दौरान उनकी संलिप्तता और भूमिका की भी स्वतंत्र रूप से जांच की थी। फैसले के आने के बाद विनोद तोमर को भी बृज भूषण शरण सिंह के साथ ही सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया गया है।

अदालत के फैसले के बाद से दोनों आरोपियों को इस लंबे कानूनी तनाव से बड़ी राहत मिली है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान दोनों आरोपी लंबे समय तक जमानत पर रहे और नियमित रूप से अदालत की कार्यवाही में हिस्सा लेते रहे। खेल महासंघ के कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े इस विवाद ने भारतीय खेल जगत को एक नया मोड़ दिया था। अब अदालत के इस स्पष्ट निर्णय के बाद इस कानूनी अध्याय का समापन हो गया है, जिसके अपने दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।

महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा सुनाया गया यह फैसला भारतीय न्याय व्यवस्था और खेल प्रशासन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। वर्षों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया, अनगिनत सुनवाइयों और गहन छानबीन के बाद अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बृज भूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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