Top 5 This Week

Related Posts

Shiv Mahapuran: भगवान शिव के षोडशोपचार पूजन और पार्थिव शिवलिंग निर्माण की संपूर्ण विधि

Shiv Mahapuran: सनातन धर्म में देवाधिदेव महादेव की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है, और शिव महापुराण में उनकी पूजा के कई विधि-विधान विस्तार से समझाए गए हैं। अगर आप भी देवाधिदेव की कृपा पाना चाहते हैं, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि भगवान शिव का षोडशोपचार पूजन क्या होता है और घर पर पार्थिव शिवलिंग कैसे बनाते हैं।

विशेषकर सावन के पवित्र महीने में या किसी भी प्रदोष व्रत के दिन शिव जी की विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव बहुत भोले हैं और वे सिर्फ सच्चे भाव से की गई पूजा से ही प्रसन्न हो जाते हैं। शिव महापुराण के अनुसार भगवान शिव की पूजा में सोलह प्रकार की सामग्रियों और चरणों का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें सोलह उपचार कहा जाता है।

Shiv Mahapuran: षोडशोपचार पूजन का अर्थ और सोलह चरणों की पूरी प्रक्रिया

भगवान शिव के षोडशोपचार पूजन का सीधा अर्थ होता है कि महादेव को प्रसन्न करने के लिए सोलह अलग-अलग चरणों और सामग्रियां अर्पित की जाती हैं। शिव महापुराण में इस बात का स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि पूजन की शुरुआत भगवान के आह्वान और उन्हें आसन देने से होती है। इसके बाद अर्घ्य देना, पाद्य देना, आचमन कराना और अभ्यंगपूर्वक स्नान कराना शामिल होता है।

स्नान के बाद भगवान को वस्त्र, गंध, और पुष्प अर्पित किए जाते हैं, जो पूजा की भव्यता को बढ़ाते हैं। इन चरणों के पश्चात धूप, दीप, नैवेद्य और ताम्बूल का समर्पण किया जाता है, जो पूजन को पूर्णता प्रदान करते हैं। अंत में नीराजन यानी आरती करना, नमस्कार करना और विसर्जन करना इन सभी को मिलाकर कुल सोलह उपचार कहा जाता है, जिनका पालन करना चाहिए।

घर पर या मंदिर में कहां करें सोलह उपचार से भगवान शिव की पूजा

अक्सर भक्तों के मन में यह सवाल रहता है कि षोडशोपचार पूजन घर पर करना चाहिए या किसी मंदिर में जाकर करना चाहिए। इस संबंध में शिव महापुराण में यह मार्गदर्शक बात बताई गई है कि आप मनुष्य द्वारा स्थापित शिवलिंग, ऋषियों या देवताओं द्वारा स्थापित शिवलिंग पर यह पूजा कर सकते हैं। इसके अलावा अपने आप प्रकट हुए स्वयंभू लिंग और अपने हाथों से बनाए गए पार्थिव शिवलिंग पर भी यह सोलह उपचार पूजन पूरी श्रद्धा के साथ किया जा सकता है।

आप अपने घर पर या किसी भी पवित्र मंदिर में इन नियमों का पालन करके पूजा संपन्न कर सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार यदि कोई भक्त पूरी नियम और निष्ठा के साथ सिर्फ शिवलिंग के दर्शन मात्र ही कर ले, तो उसे भी असीम कल्याण और पुण्य की प्राप्ति हो जाती है।

Shiv Mahapuran: पार्थिव शिवलिंग बनाने की विधि और इसके धार्मिक लाभ

सावन के महीने में भगवान शिव की पार्थिव शिवलिंग पूजा करने का विशेष विधान सनातन परंपरा में बताया गया है। पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए मिट्टी, आटा, गाय के गोबर, फूल, कनेर के पुष्प, गुड़, मक्खन, भस्म या फिर अन्न का उपयोग किया जा सकता है। आप अपनी रुचि और सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी सामग्री से शिवलिंग का निर्माण कर सकते हैं।

शिव महापुराण में यह भी वर्णन मिलता है कि लिंग का निर्माण करने के लिए किसी भी स्थान पर किसी प्रकार का कोई निषेध या बंधन नहीं होता है। भगवान शिव अपने भक्तों की भावना के अनुसार ही उन्हें मनचाहा फल प्रदान करते हैं। आप चाहें तो एक साथ कई संख्या में पार्थिव शिवलिंग बनाकर भी उनका रुद्राभिषेक कर सकते हैं और महादेव की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

भगवान शिव की आराधना में किसी प्रकार के दिखावे की कोई आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि महादेव के लिए केवल आपका सच्चा भाव ही सबसे प्रमुख होता है। यदि आप पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान शिव का पूजन करते हैं, तो आपके सभी मनोरथ अपने आप पूरे हो जाते हैं। शिव महापुराण के अनुसार ऐसे भक्तों पर भोलेनाथ की असीम अनुकंपा बनी रहती है और अंत में उन्हें शिवपद की प्राप्ति होती है। इसलिए जीवन में जब भी अवसर मिले, विधि-विधान से शिव आराधना अवश्य करें और अपने जीवन को धन्य बनाएं।

Read More Here:-

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles