नई दिल्ली: सरकारी तेल विपणन कंपनियों Indian Oil Corporation (IOC), Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL) और Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) को घरेलू सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर पर होने वाले नुकसान में कुछ राहत मिली है। कंपनियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में नरमी आने से जुलाई के दौरान प्रति सिलेंडर होने वाली अंडर-रिकवरी (नुकसान) पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। हालांकि, कंपनियों का कहना है कि उन पर अब भी हजारों करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ बना हुआ है।
जुलाई में कितना घटा नुकसान?
तेल कंपनियों के मुताबिक, जुलाई 2026 में एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर होने वाला नुकसान घटकर लगभग 475 से 490 रुपये प्रति सिलेंडर रह गया। इसकी प्रमुख वजह सऊदी अरब के एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi CP) में आई गिरावट है।
अगस्त 2026 के लिए सऊदी अरब ने एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस 592 डॉलर प्रति टन तय किया है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो कंपनियों का अनुमान है कि प्रति सिलेंडर नुकसान घटकर करीब 210 रुपये तक आ सकता है।
IOC ने क्या कहा?
इंडियन ऑयल का कहना है कि यदि मौजूदा सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस जारी रहती है, तो चालू तिमाही में औसत एलपीजी अंडर-रिकवरी करीब 250 रुपये प्रति सिलेंडर रह सकती है। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वैश्विक बाजार में एलपीजी की कीमतें बढ़ने पर नुकसान दोबारा बढ़ सकता है।
अब भी बना हुआ है भारी वित्तीय बोझ
हालांकि जुलाई में अंडर-रिकवरी में कमी आई है, लेकिन पहले से जमा वित्तीय बोझ अभी भी काफी बड़ा है।
| कंपनी | जून 2026 के अंत तक एलपीजी अंडर-रिकवरी |
|---|---|
| Indian Oil (IOC) | ₹29,700 करोड़ |
| HPCL | ₹16,400 करोड़ |
| BPCL | ₹15,800 करोड़ |
बीपीसीएल को सरकार से करीब 19,000 करोड़ रुपये का मुआवजा मिल चुका है, लेकिन इसके बावजूद कंपनी पर बकाया नुकसान का दबाव बना हुआ है। तीनों सरकारी कंपनियों में सबसे अधिक एलपीजी अंडर-रिकवरी का बोझ अभी भी इंडियन ऑयल पर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में घरेलू एलपीजी पर होने वाला नुकसान पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों और कच्चे तेल के रुख पर निर्भर करेगा। यदि वैश्विक बाजार में कीमतें स्थिर रहती हैं, तो तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति में और सुधार देखने को मिल सकता है।
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