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Kitchen Vastu Tips: किचन वास्तु के अनुसार सही है या नहीं, इन बातों से करें जांच

Kitchen Vastu Tips: घर का किचन सिर्फ खाना बनाने की जगह नहीं बल्कि पूरे परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि से जुड़ा माना जाता है। वास्तु शास्त्र में रसोईघर को अग्नि तत्व का स्थान बताया गया है। सही दिशा और उचित निर्माण से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। अगर आप नया किचन बनवा रहे हैं या मौजूदा किचन की जांच करना चाहते हैं तो इन वास्तु नियमों पर ध्यान दें।

Kitchen Vastu Tips: रसोई की सबसे शुभ दिशा

वास्तु के अनुसार रसोईघर के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्रेय कोण सबसे शुभ मानी जाती है। इस दिशा का सीधा संबंध अग्नि तत्व से है। यहां किचन होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। गैस चूल्हे को भी इसी दिशा में रखना शुभ माना जाता है।

चूल्हे की सही स्थिति

गैस चूल्हे की स्थिति ऐसी होनी चाहिए कि खाना बनाने वाले व्यक्ति का चेहरा पूर्व दिशा की ओर रहे। चूल्हे को ऐसी जगह न रखें जहां वह सीधे घर के मुख्य दरवाजे से दिखाई दे। इससे वास्तु दोष की मान्यता जुड़ी हुई है।

सिंक और चूल्हे में दूरी जरूरी

वास्तु में जल और अग्नि तत्व को एक-दूसरे का विरोधी माना जाता है। इसलिए किचन में सिंक और गैस चूल्हे के बीच पर्याप्त दूरी रखें। सिंक और वाटर प्यूरिफायर के लिए उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा बेहतर मानी जाती है। दोनों को एक-दूसरे के करीब रखने से ऊर्जा असंतुलित हो सकती है।

वेंटिलेशन का ध्यान रखें

रसोईघर की खिड़कियां पूर्व या दक्षिण दिशा में होना शुभ माना जाता है। अगर किचन में दो खिड़कियां हैं तो क्रॉस वेंटिलेशन के लिए छोटी खिड़की को बड़ी खिड़की के सामने बनाया जा सकता है। अच्छी हवा और रोशनी से किचन सकारात्मक बना रहता है।

दरवाजे की दिशा

किचन का दरवाजा दक्षिणावर्त यानी घड़ी की सुई की दिशा में खुलना शुभ माना जाता है। अगर रसोई में दो दरवाजे हैं तो उत्तर या पश्चिम दिशा वाले दरवाजे को खुला रखना बेहतर है। एक-दूसरे के आमने-सामने दो दरवाजे बनाने से बचें।

किचन को व्यवस्थित रखें

रसोई में जरूरत से ज्यादा सामान रखने से बचें। अव्यवस्थित किचन नकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकता है। साफ-सुथरा और व्यवस्थित किचन सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। नियमित सफाई का विशेष ध्यान रखें।

बाथरूम और किचन साथ न हों

वास्तु अनुसार बाथरूम और किचन को एक साथ या पास-पास नहीं बनाना चाहिए। जल और अग्नि तत्व के टकराव से घर की ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। दोनों के बीच उचित दूरी रखना जरूरी माना जाता है।

इन दिशाओं से करें परहेज

उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और घर के बिल्कुल मध्य भाग में किचन बनाना सही नहीं माना जाता। इन स्थानों पर किचन होने से वास्तु दोष उत्पन्न होने की मान्यता है। संभव हो तो इन दिशाओं से बचें।

नया किचन बनाते समय सावधानी

अगर नया किचन बनवा रहे हैं तो शुरुआत से ही इन बातों का ध्यान रखें। आर्किटेक्ट या वास्तु सलाहकार से बात करके प्लान बनाएं। मौजूदा किचन में अगर बड़े बदलाव संभव न हों तो छोटी-छोटी व्यवस्थाओं से दोष कम किए जा सकते हैं जैसे चूल्हे की दिशा बदलना या सिंक की जगह समायोजित करना।

सकारात्मक ऊर्जा के लिए अतिरिक्त टिप्स

किचन में हरे या पीले रंग का इस्तेमाल शुभ माना जाता है। ताजे फूल या तुलसी का पौधा रखना भी अच्छा माना जाता है। खाना बनाते समय सकारात्मक सोच रखें क्योंकि यह परिवार के स्वास्थ्य से जुड़ा है।

ये मान्यताएं धार्मिक आस्था और लोक विश्वास पर आधारित हैं। वैज्ञानिक प्रमाण नहीं होने के बावजूद कई लोग इन्हें अपनाते हैं। अपने घर की सुविधा और व्यावहारिकता को ध्यान में रखकर इन सुझावों को अपनाया जा सकता है।

वास्तु शास्त्र में किचन को अग्नि तत्व का स्थान माना जाता है। दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्रेय कोण रसोई के लिए सबसे शुभ है। चूल्हे का मुख पूर्व की ओर हो, सिंक और चूल्हे में दूरी रखें, खिड़कियां पूर्व या दक्षिण में हों। बाथरूम और किचन पास न बनाएं। उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और घर के मध्य में किचन से बचें। किचन को साफ और व्यवस्थित रखें। ये बातें घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मददगार मानी जाती हैं। नया किचन बनाते या पुराने को सुधारते समय इन बिंदुओं का ध्यान रखें।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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