वाराणसी – अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे इंसान की याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता छीन लेती है। दुनिया भर में लाखों लोग इससे पीड़ित हैं, और भारत में भी यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। अब तक इस बीमारी का पता लगाना बहुत मुश्किल और महंगा था। लेकिन हाल की वैज्ञानिक खोजों ने नई उम्मीद जगाई है। अब एक साधारण खून की जांच से दिमाग में छिपे उन ‘टॉक्सिक प्रोटीन’ का पता लगाया जा सकता है जो अल्जाइमर का मुख्य कारण हैं। यह खोज मरीजों के लिए जल्दी इलाज शुरू करने का रास्ता खोल रही है।
अल्जाइमर बीमारी क्या है?
अल्जाइमर दिमाग की एक गंभीर बीमारी है जो ज्यादातर बुजुर्गों को होती है। इसमें दिमाग की कोशिकाएं धीरे-धीरे खराब होने लगती हैं। शुरुआत में व्यक्ति छोटी-छोटी बातें भूलने लगता है, जैसे चाबी कहां रखी या किसी का नाम। धीरे-धीरे यह याददाश्त पूरी तरह प्रभावित करती है और रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है।इस बीमारी का मुख्य कारण दिमाग में दो तरह के टॉक्सिक प्रोटीन का जमा होना है। पहला है बीटा-एमिलॉइड (beta-amyloid), जो प्लेक बनाकर दिमाग की कोशिकाओं के बीच जमा हो जाता है। दूसरा है टाऊ प्रोटीन (tau protein), जो दिमाग की कोशिकाओं के अंदर उलझकर टैंगल्स बना लेता है। ये दोनों प्रोटीन दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और बीमारी को बढ़ाते हैं।
पुरानी जांच विधियां और उनकी मुश्किलें
पहले अल्जाइमर का पता लगाने के लिए महंगे और जटिल टेस्ट होते थे। जैसे:
पीईटी स्कैन (PET scan): यह दिमाग की तस्वीरें लेकर प्लेक दिखाता है, लेकिन बहुत महंगा है और हर जगह उपलब्ध नहीं।
स्पाइनल टैप (lumbar puncture): रीढ़ से तरल पदार्थ निकालकर जांच की जाती है, जो दर्दनाक और जोखिम भरी है।
इन टेस्ट की वजह से ज्यादातर मरीजों का पता देर से चलता था, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। अब नई खोज से यह बदलने वाला है।
नई खोज: खून की जांच से टॉक्सिक प्रोटीन का पता
2025 में अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने पहली बार एक खून टेस्ट को मंजूरी दी है। इसका नाम है Lumipulse G pTau217/β-Amyloid 1-42 Plasma Ratio। यह टेस्ट खून में दो प्रोटीन की मात्रा मापता है:
. pTau217 (फॉस्फोराइलेटेड टाऊ 217) , β-Amyloid 1-42
इन दोनों का अनुपात बताता है कि दिमाग में एमिलॉइड प्लेक हैं या नहीं। यह टेस्ट 90% से ज्यादा सटीक है और ब्रेन स्कैन से मिलते-जुलते नतीजे देता है।इसके अलावा, हाल की रिसर्च में MTBR-tau243 नामक प्रोटीन की जांच से टाऊ टैंगल्स की मात्रा और बीमारी की गंभीरता का पता चल रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह टेस्ट न सिर्फ अल्जाइमर का पता लगाता है, बल्कि यह भी बताता है कि बीमारी कितनी आगे बढ़ चुकी है।ये टेस्ट सस्ते, आसान और कम समय लेने वाले हैं। अब छोटे क्लीनिकों में भी अल्जाइमर की जांच संभव हो सकेगी।
इस खोज के फायदे
. जल्दी पता चलना: बीमारी के शुरुआती लक्षण आने से पहले ही टॉक्सिक प्रोटीन का पता लग सकता है। इससे इलाज जल्दी शुरू हो सकेगा।
. सस्ता और आसान: पीईटी स्कैन की तुलना में बहुत कम खर्च और कोई रेडिएशन का खतरा नहीं।
. नई दवाओं का फायदा: हाल में आई दवाएं जैसे लेकेनेमैब और डोनानेमैब प्लेक को साफ करती हैं। अगर जल्दी पता चले तो ये दवाएं ज्यादा असरदार होंगी।
. भारत के लिए उम्मीद: भारत में अल्जाइमर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। यह टेस्ट यहां भी आने से लाखों लोगों को फायदा होगा।
चुनौतियां अभी भी बाकी
यह टेस्ट परफेक्ट नहीं है। कभी गलत नतीजे आ सकते हैं – जैसे बीमारी न होने पर हां कह दे या बीमारी होने पर ना। इसलिए डॉक्टर इसे अन्य लक्षणों और टेस्ट के साथ मिलाकर इस्तेमाल करेंगे। अभी यह टेस्ट हर जगह उपलब्ध नहीं है और भारत में आने में समय लग सकता है।
निष्कर्ष :
यह नई खून जांच अल्जाइमर के मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। दिमाग में छिपे टॉक्सिक प्रोटीन का पता लगना अब आसान हो गया है, जिससे बीमारी को शुरुआती में पकड़ा जा सकेगा। वैज्ञानिकों की मेहनत से उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में अल्जाइमर को नियंत्रित करना या रोकना संभव हो जाएगा। अगर आप या आपके परिवार में कोई भूलने की शिकायत है, तो डॉक्टर से सलाह लें। स्वस्थ जीवनशैली – व्यायाम, अच्छा खाना और दिमागी कसरत – से भी इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है। यह खोज साबित करती है कि विज्ञान इंसानियत की सेवा में लगा है।



