CG News: छत्तीसगढ़ में स्कूलों के शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए लागू किए गए वीएसके ऐप को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि अब इसी डिजिटल अटेंडेंस के आधार पर वेतन का भुगतान होगा। लेकिन शिक्षकों का आरोप है कि ऐप में लोकेशन सही नहीं दिखती, टाइमिंग गलत दर्ज होती है और कई जगहों पर नेटवर्क की समस्या के कारण उपस्थिति ही दर्ज नहीं हो पाती। शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐप के आधार पर वेतन कटौती की गई तो 7 अगस्त को प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।
CG News: नई व्यवस्था क्या है?
सरकार ने स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति के लिए वीएसके ऐप के जरिए पंच-इन और पंच-आउट की व्यवस्था लागू की है। शिक्षक को स्कूल पहुंचते ही ऐप पर चेक-इन और छुट्टी के समय चेक-आउट करना होगा। विभाग का कहना है कि जिस दिन अटेंडेंस ऐप में दर्ज नहीं होगी उस दिन के वेतन पर असर पड़ सकता है। विभाग का दावा है कि करीब 83 प्रतिशत शिक्षक ऐप के जरिए अटेंडेंस दर्ज कर रहे हैं।
शिक्षकों की शिकायतें
शिक्षकों का कहना है कि ऐप तकनीकी रूप से ठीक से काम नहीं कर रहा। कई जगह स्कूल की लोकेशन और ऐप पर दिखने वाली लोकेशन अलग-अलग आ रही है। कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों में लॉगिन करने में दिक्कत हो रही है। ऐप हैंग हो जाता है या समय सही दर्ज नहीं होता। दो पाली वाले स्कूलों में भी यही समस्या बनी हुई है। कुछ शिक्षकों ने स्क्रीनशॉट शेयर कर बताया कि शाम चार बजे चेक-आउट का समय होने के बावजूद चेक-इन दिख रहा है।
संगठनों का रुख
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा और छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि शिक्षक रोज स्कूल पहुंचकर पढ़ाई करा रहे हैं लेकिन ऐप की तकनीकी दिक्कतों के कारण उनकी पूरी अटेंडेंस रिकॉर्ड नहीं हो रही। गलती सिस्टम की है शिक्षक की नहीं। केवल ऐप के रिकॉर्ड के आधार पर वेतन रोकना या कटौती करना उचित नहीं होगा।
मैनुअल रजिस्टर को मान्यता देने की मांग
दोनों संगठनों ने मांग की है कि जब तक वीएसके ऐप पूरी तरह ठीक से काम नहीं करने लगता तब तक स्कूलों में प्राचार्य और प्रधान पाठक द्वारा रखे जाने वाले उपस्थिति रजिस्टर को भी मान्य रिकॉर्ड माना जाए। अगर शिक्षक स्कूल में मौजूद रहा है और उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर किए हैं तो केवल ऐप में रिकॉर्ड नहीं बनने की वजह से उसका वेतन नहीं रोका जाना चाहिए।
बायोमेट्रिक सिस्टम की मांग
संगठनों का कहना है कि यदि विभाग पूरी तरह डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लागू करना चाहता है तो सभी स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए। केवल मोबाइल ऐप के भरोसे उपस्थिति दर्ज करना दूरस्थ और कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों में व्यावहारिक नहीं है। कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक से वायरल हुए एक वीडियो में शिक्षक उफनती नदी पार करके स्कूल पहुंचते दिख रहे हैं। ऐसे में ऐप आधारित व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आंदोलन की चेतावनी
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर ऐप के आधार पर वेतन कटौती की गई तो 7 अगस्त को प्रदेशभर में डीडीओ कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। शालेय शिक्षक संघ ने भी कहा है कि यदि शिक्षकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हुई तो सीएम हाउस घेराव समेत बड़े आंदोलन की रणनीति अपनाई जाएगी।
विभाग के सामने चुनौती
शिक्षा विभाग के सामने अब ऐप की तकनीकी खामियों को दूर करने और शिक्षकों के भरोसे को जीतने की चुनौती है। डिजिटल व्यवस्था लाने का मकसद पारदर्शिता बढ़ाना है लेकिन अगर सिस्टम सही से काम नहीं करता तो इसका उल्टा असर पड़ता है। दूरस्थ अंचलों में नेटवर्क की समस्या लंबे समय से चली आ रही है।
पढ़ाई पर असर की चिंता
शिक्षकों पर पहले से ही कई ऐप्स और गैर-शैक्षणिक कामों का बोझ है। प्रदेश में हजारों शिक्षक पद खाली होने के बावजूद मौजूदा शिक्षकों को पढ़ाई के साथ डिजिटल काम भी निपटाने पड़ रहे हैं। ऐसे में अटेंडेंस ऐप की दिक्कतें पढ़ाई के समय को और प्रभावित कर सकती हैं।
आगे क्या होगा?
शिक्षक संगठनों की मांग साफ है कि वीएसके ऐप की तकनीकी खामियां दूर होने तक केवल ऐप को वेतन का आधार न बनाया जाए। स्कूलों के मैनुअल अटेंडेंस रजिस्टर को भी मान्यता दी जाए। अब फैसला शिक्षा विभाग के पाले में है। अगर विभाग जल्द समाधान नहीं निकालता तो 7 अगस्त को आंदोलन की स्थिति बन सकती है।
छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की डिजिटल अटेंडेंस के लिए लागू वीएसके ऐप विवादों में घिर गया है। शिक्षकों का आरोप है कि ऐप में लोकेशन और टाइमिंग सही नहीं आती तथा नेटवर्क समस्या के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। शिक्षा विभाग वेतन को ऐप से जोड़ चुका है। शिक्षक संगठनों ने कहा है कि सिस्टम की गलती का खामियाजा शिक्षकों को न भुगतना पड़े। उन्होंने मैनुअल रजिस्टर को मान्यता देने और बायोमेट्रिक सिस्टम लगाने की मांग की है। अगर वेतन कटौती हुई तो 7 अगस्त को डीडीओ कार्यालयों और सीएम हाउस घेराव की चेतावनी दी गई है। विभाग को तकनीकी खामियां दूर कर विश्वास बहाल करने की जरूरत है।
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