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India China Relation: भारत-चीन संबंधों में नई पहल? 99वीं वर्षगांठ पर चीन ने केरल रेस्क्यू ऑपरेशन को बताया भरोसे की मिसाल

India China Relation: कूटनीतिक गलियारों में अक्सर शब्दों की नूराकुश्ती देखने को मिलती है, लेकिन जब कभी मानवीय संवेदनाओं और पेशेवर फर्ज की बात आती है, तो सरहदें और कड़े राजनीतिक समीकरण भी कुछ पलों के लिए पीछे छूट जाते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा मंगलवार, 21 जुलाई को राजधानी दिल्ली में उस वक्त देखने को मिला, जब भारत और चीन के बीच के तल्ख रिश्तों के बीच से एक ऐसी खबर बाहर आई, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मौका था पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी चीनी सेना की स्थापना की 99वीं वर्षगांठ का। इस गरिमामयी और महत्वपूर्ण अवसर पर आयोजित समारोह में चीन की ओर से कुछ ऐसा कहा गया, जिसकी शायद किसी ने फौरी तौर पर उम्मीद नहीं की होगी।

भारत में चीन के डिफेंस अताशे रियर एडमिरल यू जियान ने इस मंच से खुलकर उस घटना को याद किया, जिसने पिछले दिनों दोनों देशों के बीच मानवीय आधार पर एक नया सेतु बनाया था। उन्होंने न सिर्फ भारतीय सेना की पेशेवर दक्षता की खुले दिल से सराहना की, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि बीजिंग उस संकट की घड़ी को भूला नहीं है जब केरल के समुद्री तट पर उनके नागरिकों की जान पर आफत आन पड़ी थी। कूटनीति के जानकारों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान महज औपचारिक आभार तक सीमित नहीं होते, बल्कि यह बदलते क्षेत्रीय समीकरणों और कूटनीतिक रुख में नरमी के स्पष्ट संकेत होते हैं।

India China Relation: क्या थी वह घटना जिसे ड्रैगन ने नहीं भुलाया?

यह वाकया बीते साल जून के महीने का है। केरल के समुद्री तट के करीब हिंद महासागर के उस हिस्से में एक कार्गो शिप अचानक बड़े हादसे का शिकार हो गया था। उस पोत पर भयानक आग लग गई थी और उसके बाद एक जोरदार धमाका भी हुआ था। जहाज पर सवार चालक दल के सदस्यों की जान सांसट में थी, और मदद दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही थी। उस विकट परिस्थिति में भारतीय सेना और तट रक्षक बलों ने बिना एक पल गंवाए मोर्चा संभाला था।

समुद्र की ऊंची उठती लपटों और जानलेवा खतरे के बीच भारतीय जवानों ने ऑपरेशन को अंजाम दिया और उस पोत पर फंसे सभी 12 चीनी क्रू मेंबरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। समंदर के उस खौफनाक मंजर में जब अपने की जान बचाना ही सबसे बड़ी चुनौती थी, तब भारतीय सेना ने इंसानी जिंदगी को सबसे ऊपर रखा। चीनी डिफेंस अताशे ने इसी वाकया का जिक्र करते हुए मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में कहा कि संकट के उन क्षणों में भारतीय सेना द्वारा दिखाई गई तत्परता और जांबाजी को उनका देश कभी नहीं भुला पाएगा।

राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट और बदलती बयार

बीते कुछ सालों से भारत और चीन के बीच सरहद पर उपजे तनाव और कूटनीतिक गतिरोध के चलते द्विपक्षीय रिश्ते अपने सबसे निचले पायदान पर पहुंच गए थे। पूर्वी लद्दाख के कई इलाकों में सैन्य जमावड़े और झड़पों ने दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच भरोसे की बड़ी दीवार खड़ी कर दी थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों से हालात में बदलाव की सुगबुगाहट तेज हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हालिया उच्च स्तरीय मुलाकातों और उसके बाद दोनों देशों के वरिष्ठ राजनयिकों एवं सैन्य कमांडरों के स्तर पर हुई बैठकों ने बर्फ पिघलाने का काम किया है।

रियर एडमिरल यू जियान का यह बयान इसी बदली हुई राजनीतिक बयार की एक और बानगी है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि दोनों देशों के बीच जो शीर्ष स्तर का रणनीतिक मार्गदर्शन मिला है, उसी का नतीजा है कि द्विपक्षीय संबंध एक बार फिर सुधार और विकास के रास्ते पर लौट रहे हैं। चीनी अधिकारी का यह स्वीकार करना कि मतभेदों के मुकाबले साझा हित कहीं अधिक बड़े और अहम हैं, आने वाले दिनों में दोनों मुल्कों के बीच और संवाद बढ़ने के संकेत दे रहा है।

India China Relation: शांति अभियानों और भविष्य के सहयोग की बात

कार्यक्रम के दौरान चीनी सैन्य प्रतिनिधि ने केवल एक पुरानी घटना का शुक्रिया अदा करके ही बात खत्म नहीं की, बल्कि भविष्य के रोडमैप पर भी खुलकर बात रखी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना अभियानों में भारतीय और चीनी सैनिकों के संयुक्त योगदान को याद करते हुए कहा कि दोनों देशों ने वैश्विक शांति के लिए बड़े त्याग किए हैं। दुनिया के इन दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों की सेनाएं यदि वैश्वीकरण और शांति के मंच पर एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ता है।

आगे की रणनीति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बीजिंग पूरी तरह तैयार है कि वह नई दिल्ली के साथ मिलकर राजनयिक और सैन्य माध्यमों से संवाद की डोर को मजबूत रखे। आपसी अविश्वास की खाई को पाटने के लिए लगातार बैठकों का दौर जारी रहना चाहिए ताकि दोनों देशों की आम अवाम के हितों को साधा जा सके। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वे भारत के साथ अपने सैन्य सहयोग को और अधिक गहराई देना चाहते हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिल सके।

India China Relation: कूटनीतिक मोर्चे पर आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान दोनों तरफ से रणनीतिक संकेत देने का काम करते हैं। सीमा विवाद के मसले पर अभी भी जमीनी स्तर पर कई पेचीदगियां बाकी हैं और पूरी तरह से सामान्य स्थिति बहाल होने में वक्त लग सकता है, लेकिन इस तरह की सकारात्मक बयानबाजी माहौल को हल्का करने का काम जरूर करती है। बीजिंग की तरफ से भारतीय सेना के मानवीय सेवा भाव की सार्वजनिक सराहना इस बात का सुबूत है कि कूटनीति के बंद कमरों से बाहर अब रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिशें तेजी से परवान चढ़ रही हैं।

आने वाले हफ्तों और महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह जुबानी नरमी जमीन पर भी ठोस समझौतों और शांति के रूप में तब्दील हो पाती है या नहीं। फिलहाल, केरल तट पर बचाई गई उन 12 जिंदगियों की कहानी एक बार फिर कूटनीतिक मंचों के केंद्र में आ गई है, और यह साबित हो गया है कि इंसानियत की जीत अक्सर सरहदों की बंदिशों को पार कर ही जाती है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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