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Bareilly Anganwadi Bharti: 4000 की नौकरी के लिए बड़ा खेल, बरेली में अमीर महिलाएं भी कागजों पर बनीं गरीब, 38 आवेदन निरस्त

Bareilly Anganwadi Bharti: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। महज 4000 रुपये के मासिक मानदेय वाली इस नौकरी को पाने के लिए अमीर परिवारों की महिलाओं द्वारा भी कागजों पर खुद को गरीब दिखाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिला प्रशासन द्वारा जब आवेदकों के दस्तावेजों की जांच शुरू की गई, तो भारी संख्या में फर्जी आय और निवास प्रमाण पत्र पकड़े गए। शुरुआती जांच के बाद ही प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए अब तक कुल 38 महिला अभ्यर्थियों के आवेदनों को तुरंत निरस्त कर दिया है। इस खुलासे के बाद से बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और कलेक्ट्रेट से लेकर ब्लॉक मुख्यालयों तक प्रशासनिक सरगर्मी तेज हो गई है।

Bareilly Anganwadi Bharti: 705 पदों के लिए आए 5 हजार से ज्यादा आवेदन, वेरिफिकेशन में खुली पोल

बरेली जिले के शहरी क्षेत्र और सभी 16 ब्लॉकों में आंगनबाड़ी सहायिकाओं के कुल 705 रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती निकाली गई थी। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया पिछले साल 18 नवंबर 2025 से शुरू होकर 8 दिसंबर 2025 तक चली थी। कम मानदेय होने के बावजूद बेरोजगारी का आलम यह रहा कि इन पदों के लिए कुल 5376 महिला अभ्यर्थियों ने फॉर्म भरे।

जब विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी ने मेरिट लिस्ट तैयार करने से पहले जमा किए गए दस्तावेजों का मिलान और ऑनलाइन वेरिफिकेशन शुरू किया, तो संदिग्ध प्रमाण पत्रों की बाढ़ आ गई। स्थानीय स्तर पर तहसील और लेखपालों के माध्यम से जब इन दस्तावेजों की गहराई से तस्दीक कराई गई, तो पता चला कि संपन्न परिवारों की महिलाओं ने भी फर्जी तरीके से अत्यंत पिछड़ा या गरीब होने के दस्तावेज तैयार करवा लिए थे।

शादी के बाद भी मायके का पता और एपीएल कार्ड धारकों ने बनवाया बीपीएल

जांच टीम को सबसे बड़ी गड़बड़ी निवास और आय प्रमाण पत्रों में मिली है। नियमों के मुताबिक किसी भी विवाहित महिला अभ्यर्थी को अपने ससुराल पक्ष का निवास प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य होता है ताकि उसी ग्राम पंचायत या वार्ड में उसकी नियुक्ति हो सके। लेकिन दर्जनों महिलाओं ने शादी हो जाने के बाद भी अपने मायके के पते का निवास प्रमाण पत्र इस्तेमाल कर आवेदन कर दिया।

इससे भी बड़ा खेल आय प्रमाण पत्र में हुआ। जिले के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली कई सक्षम और एपीएल (गरीबी रेखा से ऊपर) कार्ड धारक महिलाओं ने खुद को बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) श्रेणी में शामिल दिखाने के लिए लेखपालों से सांठगांठ कर कम आय के फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिए। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि भर्ती नियमों के तहत बीपीएल श्रेणी की महिलाओं को चयन में सीधी वरीयता मिलती है।

Bareilly Anganwadi Bharti: मझगवां ब्लॉक में मिले सबसे ज्यादा फर्जी दस्तावेज, एमएससी पास भी लाइन में

प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा मझगवां ब्लॉक में देखने को मिला है, जहां अकेले इस ब्लॉक से 16 फर्जी प्रमाण पत्र पकड़े गए हैं। इसके बाद फरीदपुर और नवाबगंज ब्लॉक में 5-5 मामले, रामनगर में 3 मामले जबकि भुता, मीरगंज और आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक में 2-2 फर्जी आवेदन खारिज किए गए हैं। शेरगढ़ और भोजीपुरा ब्लॉक में भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जबकि बरेली शहरी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वार्डों की जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है।

इस भर्ती का एक और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि 4000 रुपये की इस संविदा नौकरी के लिए बड़ी संख्या में उच्च शिक्षित युवतियों ने भी आवेदन किया है। आवेदकों में एमएससी फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स जैसी डिग्रियां हासिल कर चुकीं युवतियां भी शामिल हैं। अधिकारियों ने काउंसलिंग के दौरान कुछ महिला अभ्यर्थियों को उनकी ऊंची योग्यता के अनुसार अन्य क्षेत्रों में बेहतर करियर बनाने की सलाह भी दी, लेकिन आवेदकों का तर्क है कि सरकारी व्यवस्था में एक बार प्रवेश मिलने के बाद भविष्य में मानदेय बढ़ने और पद स्थायी होने की उम्मीद रहती है।

Bareilly Anganwadi Bharti: मुख्य विकास अधिकारी ने दी कड़ी चेतावनी, जारी रहेगी गहन जांच

पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए बरेली की मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) देवयानी ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखने के लिए हर एक दस्तावेज की गहनता से स्क्रूटनी की जा रही है। उन्होंने पुष्टि की कि शादी के बाद भी मायके का पता इस्तेमाल करने और गलत तरीके से बीपीएल श्रेणी का लाभ लेने वाले 38 आवेदन अब तक निरस्त हो चुके हैं।

सीडीओ ने यह भी याद दिलाया कि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान भी आंगनबाड़ी भर्ती में अनियमितताओं को लेकर कुल 168 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें से जांच के बाद 21 शिकायतें सही पाई गई थीं और तब भी नियुक्तियां रद्द की गई थीं। प्रशासन का कहना है कि जो भी प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, उन्हें बनाने वाले संबंधित अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका की भी अंदरूनी जांच की जा सकती है ताकि भविष्य में ऐसे फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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