Nutrition Tips: खाने की थाली में जब तक मिर्च का तीखापन न हो, तब तक कई लोगों को भोजन का असली आनंद ही नहीं मिलता है। हालांकि, चटपटे और तेज मसालेदार भोजन को लेकर अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग टोकते नजर आते हैं कि यह पेट के लिए नुकसानदेह हो सकता है। लेकिन अगर आपको भी तीखा खाना पसंद है, तो आपके लिए एक राहत भरी और दिलचस्प जानकारी सामने आई है।
हाल ही में सामने आए कुछ वैज्ञानिक अनुसंधानों से यह पता चलता है कि सीमित मात्रा में तीखा भोजन करना केवल स्वाद को ही नहीं बढ़ाता, बल्कि यह लंबी उम्र और स्वस्थ हृदय से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं कि विज्ञान इस बारे में क्या कहता है और मिर्च खाने से शरीर को वास्तव में क्या लाभ मिलते हैं।
Nutrition Tips: चीन और अमेरिका की बड़ी स्टडी में सामने आए आंकड़े
क्या तीखा खाने वाले लोग वास्तव में अधिक समय तक जीते हैं? इस सवाल का सटीक उत्तर पाने के लिए साल 2015 में चीन में एक व्यापक स्तर पर शोध किया गया था। इस वैज्ञानिक अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने दो हजार चार से दो हजार आठ के बीच लगभग पांच लाख लोगों की खानपान की आदतों और जीवनशैली का बारीकी से अध्ययन किया।
इस शोध के परिणाम बेहद चौंकाने वाले थे। अध्ययन में पाया गया कि जो लोग सप्ताह में छह से सात दिन मसालेदार और तीखा भोजन करते थे, उनमें किसी भी वजह से होने वाली मौत का खतरा उन लोगों के मुकाबले चौदह प्रतिशत कम था जो हफ्ते में बमुश्किल एक बार ही तीखा खाते थे।
इसके ठीक दो साल बाद अमेरिका में भी इसी तरह का एक और अध्ययन किया गया। उस अमेरिकी शोध में भी यह बात सामने आई कि लाल मिर्च का नियमित सेवन करने वाले लोगों में मृत्यु का जोखिम तेरह प्रतिशत तक कम हो जाता है। इन आंकड़ों ने पूरी दुनिया के शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
दिल की सेहत और बीमारियों से बचाव का कनेक्शन
चीनी वैज्ञानिकों के इस व्यापक शोध में यह भी देखा गया कि जो लोग नियमित रूप से तीखा खाते हैं, उनमें हृदय संबंधी बीमारियां, फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं और कैंसर के कारण होने वाली मौतों का जोखिम काफी कम दर्ज किया गया। सबसे खास बात यह रही कि यह सकारात्मक परिणाम तब भी बने रहे जब वैज्ञानिकों ने धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि और मांसाहार जैसी अन्य जीवनशैली की आदतों का भी मूल्यांकन किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि तीखे भोजन का असर सीधे तौर पर हमारे रक्तचाप और दिल की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। हालांकि, इसका यह कतई मतलब नहीं है कि कोई व्यक्ति कल से ही अत्यधिक मात्रा में मिर्च खाना शुरू कर दे, लेकिन संतुलित आहार में इसका होना फायदेमंद माना गया है।
मिर्च में मौजूद ‘कैपसेसिन’ तत्व का कमाल
इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक मुख्य रासायनिक तत्व काम करता है, जिसे ‘कैपसेसिन’ कहा जाता है। यह वही सक्रिय घटक है जो मिर्च में तीखापन पैदा करता है। जब हम तीखा खाते हैं, तो यह तत्व हमारे शरीर के ‘TRPV1 रिसेप्टर्स’ पर प्रभाव डालता है। ये खास रिसेप्टर्स हमारे शरीर में गर्मी और तीखेपन दोनों का अहसास कराते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि ये रिसेप्टर्स केवल मुंह तक सीमित नहीं होते, बल्कि हमारी त्वचा, आंतों और रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी कोशिकाओं में भी मौजूद होते हैं। यही कारण है कि कैपसेसिन हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करने और अतिरिक्त कैलोरी को तेजी से बर्न करने में मदद करता है।
Nutrition Tips: कोलेस्ट्रॉल और नमक के सेवन पर असर
दिल की सेहत को दुरुस्त रखने में तीखे भोजन की भूमिका यहीं खत्म नहीं होती है। कई चिकित्सा अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि कैपसेसिन शरीर के भीतर ‘गुड कोलेस्ट्रॉल’ यानी एचडीएल के स्तर को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है। शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना दिल के दौरे के खतरे को सीधे तौर पर कम करता है।
इसके अलावा, दो हजार सत्रह में चीन में हुए एक अन्य शोध में यह तथ्य उजागर हुआ कि जो लोग तीखा भोजन पसंद करते हैं, वे खाने में नमक का इस्तेमाल कम करते हैं। इसकी वजह यह है कि कैपसेसिन हमारे मस्तिष्क में स्वाद की क्षमता को इस तरह प्रभावित करता है कि कम नमक होने पर भी खाना स्वादिष्ट लगने लगता है। नमक का सेवन कम होने से अपने आप ही ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
Nutrition Tips: हर किसी के शरीर पर अलग होता है असर
भले ही विज्ञान ने तीखे खाने के कई फायदे गिनाए हैं, लेकिन यह हर इंसान के शरीर पर एक जैसा प्रभाव डाले, ऐसा जरूरी नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को मिर्च खाने के बाद पेट में जलन, एसिडिटी या पाचन से जुड़ी कोई अन्य समस्या महसूस होती है, तो उसे जबरदस्ती तीखा खाने से बचना चाहिए। हर व्यक्ति के शरीर की सहनशीलता अलग होती है, इसलिए किसी भी खाद्य पदार्थ को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाते समय अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी होता है।
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