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ITR भरने का आखिरी मौका, 31 जुलाई के बाद लग सकता है जुर्माना और ब्याज

नई दिल्ली: अगर आपने अभी तक वित्त वर्ष 2025-26 का इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया है, तो अब आपके पास केवल 31 जुलाई 2026 तक का समय बचा है। यह अंतिम तिथि उन व्यक्तिगत करदाताओं के लिए है जिनके खातों का ऑडिट नहीं होता और जो ट्रांसफर प्राइसिंग जैसी विशेष श्रेणियों में शामिल नहीं हैं। समय पर ITR दाखिल नहीं करने पर आपको लेट फीस के साथ ब्याज भी चुकाना पड़ सकता है।

हालांकि 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर कानून लागू हो चुका है, लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 का ITR अभी भी Income Tax Act, 1961 के प्रावधानों के तहत ही दाखिल किया जाएगा।

31 जुलाई के बाद क्या होगा?

अगर किसी कारणवश आप 31 जुलाई तक ITR दाखिल नहीं कर पाते हैं, तो भी आप बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

  • वार्षिक आय 5 लाख रुपये से अधिक होने पर अधिकतम 5,000 रुपये की लेट फीस लगेगी।
  • यदि कुल आय 5 लाख रुपये या उससे कम है, तो अधिकतम 1,000 रुपये की लेट फीस देनी होगी।
  • आकलन वर्ष (AY) 2026-27 के लिए बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक दाखिल किया जा सकता है, यदि सरकार समय सीमा में कोई बदलाव नहीं करती।

देर होने पर ब्याज भी देना पड़ सकता है

यदि एडवांस टैक्स, TDS और अन्य कर समायोजन के बाद भी टैक्स बकाया रहता है, तो आयकर अधिनियम की धारा 234A के तहत उस पर 1 प्रतिशत प्रति माह या महीने के हिस्से के हिसाब से ब्याज लगाया जा सकता है। यानी जितनी अधिक देरी होगी, उतना ही अधिक ब्याज देना पड़ेगा।

क्या बढ़ सकती है अंतिम तिथि?

फिलहाल केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की ओर से ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पोर्टल पर सूचना देने से डेडलाइन नहीं बढ़ती, इसके लिए CBDT की औपचारिक अधिसूचना आवश्यक होती है। इसलिए करदाताओं को समय सीमा बढ़ने की उम्मीद पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

समय पर ITR भरने के फायदे

समय पर ITR दाखिल करने से यदि बाद में किसी प्रकार की गलती या छूटी हुई जानकारी सामने आती है, तो उसे संशोधित (Revised Return) करना अपेक्षाकृत आसान होता है। इसके अलावा समय पर रिटर्न भरने से जुर्माने और ब्याज से बचाव होता है तथा टैक्स रिफंड भी जल्दी मिलने की संभावना रहती है।

ITR जमा करने से पहले अपनी आय, बैंक ब्याज, कैपिटल गेन, TDS, कर कटौतियों और अन्य सभी वित्तीय जानकारियों का सावधानीपूर्वक मिलान जरूर करें, ताकि भविष्य में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

Manpreet Singh
Author: Manpreet Singh

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