Petrol Diesel Price Hike: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उछाल के बाद घरेलू तेल कंपनियों ने शनिवार को पेट्रोल और डीजल के दामों में 91 पैसे प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई देश के सबसे महंगे शहरों की सूची में टॉप पर पहुंच गए हैं। पिछले दस दिनों के भीतर ईंधन की दरों में यह तीसरी बड़ी वृद्धि है, जिसके कारण आम उपभोक्ताओं की जेब पर प्रति लीटर लगभग 5 रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
Petrol Diesel Price Hike: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इस अचानक उछाल की मुख्य वजह क्या है
शनिवार सुबह जैसे ही देश भर के पेट्रोल पंपों पर नई दरें लागू हुईं, वाहन चालकों को एक बड़ा झटका लगा। सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल के बढ़ते दामों का सीधा बोझ आम जनता की जेब पर डाल दिया है। तेल कंपनियों की इस समीक्षा के बाद देश भर में पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 91 पैसे प्रति लीटर तक का इजाफा देखा गया है। सुबह से ही विभिन्न शहरों के मुख्य फिलिंग स्टेशनों पर पहुंचे लोगों के बीच इस मूल्य वृद्धि को लेकर खासी नाराजगी और चिंता देखी गई। दफ्तर जाने वाले दोपहिया वाहन चालकों से लेकर भारी कमर्शियल ट्रक ऑपरेटरों तक, हर कोई इस बात से परेशान है कि पिछले दस दिनों में लगातार हो रही बढ़ोतरी उनके मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ रही है।
पेट्रोलियम बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक हालातों और तेल उत्पादक देशों द्वारा सप्लाई में की जा रही कटौती के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार ऊंचे बने हुए हैं। भारतीय तेल कंपनियां काफी समय से इन कीमतों को खुद संभाल रही थीं, लेकिन अब घाटे से बचने के लिए उन्होंने रिटेल रेट में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू कर दिया है। इसका सीधा असर देश के सभी छोटे-बड़े राज्यों में देखा जा रहा है, जहां स्थानीय टैक्स और वैट की दरों के हिसाब से कीमतें अलग-अलग स्तर पर पहुंच गई हैं। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में सुबह से ही इस फैसले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और परिवहन संगठनों ने भी इस पर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।
Petrol Diesel Price Hike: प्रमुख महानगरों में ताजा बढ़ोतरी के बाद तेल के दाम किस स्तर पर पहुंचे
दक्षिण और पश्चिम भारत के शहरों में बढ़ी मुश्किलें
इस ताजा मूल्य वृद्धि के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में ईंधन की कीमतों में काफी बड़ा अंतर आ गया है। इस समय आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद देश का सबसे महंगा शहर बनकर उभरा है। हैदराबाद में शनिवार को पेट्रोल की कीमत 112.81 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई, जबकि डीजल का दाम 100.94 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया, जिसने वहां के मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। पश्चिम भारत की बात करें तो देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल के दामों में 90 पैसे की बढ़ोतरी के बाद यह 108.49 रुपये प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में अब डीजल भी 94 पैसे महंगा होकर 95.02 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।
उत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों का क्या है हाल
पूर्वी भारत के सबसे बड़े महानगर कोलकाता में भी कीमतें आसमान छू रही हैं। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में 94 पैसे का उछाल आया है और यह 110.64 रुपये प्रति लीटर के स्तर को पार कर गया है। वहीं डीजल भी 95 पैसे की छलांग लगाकर 97.02 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। आईटी हब बेंगलुरु में पेट्रोल की कीमत 93 पैसे की वृद्धि के साथ 108.05 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95 पैसे बढ़कर 95.99 रुपये प्रति लीटर हो गया है। देश की राजधानी दिल्ली की स्थिति पर नजर डालें तो यहां पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 99.51 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है, जो 100 रुपये के बेहद करीब है। दिल्ली में डीजल की नई कीमत 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गई है। दक्षिण के शहर चेन्नई में पेट्रोल 82 पैसे की तेजी के साथ 105.31 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87 पैसे बढ़कर 96.98 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल 99.28 रुपये प्रति लीटर हो चुका है, जबकि डीजल 92.64 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। राजस्थान के जयपुर में पेट्रोल 94 पैसे बढ़कर 108.91 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92 पैसे चढ़कर 94.15 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
लगातार महंगे होते ईंधन का आम जनता और माल ढुलाई व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा
ईंधन की कीमतों में दस दिनों के भीतर करीब 5 रुपये प्रति लीटर की यह कुल वृद्धि केवल वाहन चलाने वालों तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। इसका सबसे बड़ा और खतरनाक असर देश की रसद प्रणाली यानी लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई पर पड़ने जा रहा है। ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 91 पैसे की बढ़ोतरी से ट्रकों को एक शहर से दूसरे शहर भेजने की लागत में हजारों रुपये का इजाफा हो जाएगा। जब माल ढुलाई महंगी होती है, तो उसका सीधा असर मंडियों में आने वाली हरी सब्जियों, फलों, दूध और राशन जैसी जरूरी रोजमर्रा की चीजों पर पड़ता है। आने वाले दिनों में खुदरा बाजारों में महंगाई की एक नई लहर देखने को मिल सकती है, जिससे आम थाली का बजट और महंगा हो जाएगा।
परिवहन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस मूल्य वृद्धि से सबसे ज्यादा प्रभावित वे लोग हो रहे हैं जो अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह से वाहनों पर निर्भर हैं, जैसे ऑटो चालक, टैक्सी ऑपरेटर और डिलीवरी बॉयज। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण उनका मुनाफा लगातार घट रहा है, जबकि वे किराया तुरंत नहीं बढ़ा सकते। सोशल मीडिया पर भी सुबह से हैशटैग पेट्रोल-डीजल प्राइस के साथ लोग अपने-अपने शहरों के बिल शेयर कर रहे हैं। मध्यम वर्गीय परिवारों का कहना है कि एक तरफ चिलचिलाती गर्मी से बचने के लिए बिजली का खर्च बढ़ रहा है और दूसरी तरफ गाड़ियों में तेल डलवाना अब किसी बड़ी चुनौती जैसा होता जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में भी किसानों पर इसका सीधा असर पड़ेगा क्योंकि खेतों की जुताई और सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर और पंपसेट पूरी तरह डीजल से ही चलते हैं।
Petrol Diesel Price Hike: आने वाले दिनों में तेल की कीमतों को लेकर सरकार का क्या रुख हो सकता है
इस लगातार होती बढ़ोतरी के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार टैक्स में कटौती करके आम जनता को कोई राहत देगी। भारत अपनी जरूरत का करीब पचासी फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली हर हलचल का सीधा असर यहां दिखता है। केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों के वैट के कारण ही तेल की कीमतें इतनी ऊंची बनी हुई हैं। विपक्षी दलों और विभिन्न उपभोक्ता मंचों की तरफ से यह मांग लगातार उठाई जा रही है कि पेट्रोल और डीजल को भी माल एवं सेवा कर यानी जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए ताकि पूरे देश में इसकी कीमतें एक समान और नियंत्रित हो सकें।
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