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Jharkhand News: गढ़वा की हर पंचायत में बनेगी दुग्ध समिति, पशुपालकों की बढ़ेगी आमदनी

Jharkhand News: झारखंड के गढ़वा जिले के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले पशुपालकों और किसानों की किस्मत बदलने के लिए प्रशासन ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। अब जिले की हर पंचायत में दुग्ध उत्पादक सहयोग समिति बनाई जाएगी, जिससे गांव के लोगों को दूध बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। उपायुक्त अनन्य मित्तल की अध्यक्षता में हुई जिला सहकारिता विकास समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया है, जिसका सीधा असर जिले के हजारों ग्रामीण परिवारों पर पड़ेगा और उन्हें रोजगार के नए साधन मिलेंगे।

Jharkhand News: गढ़वा के ग्रामीण इलाकों के लिए क्या है प्रशासन का नया प्लान

झारखंड का गढ़वा जिला अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण खेती और पशुपालन पर काफी हद तक निर्भर है। यहां के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों के पास आय के साधन सीमित हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक बड़ी योजना तैयार की है। समाहरणालय के सभागार में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में उपायुक्त अनन्य मित्तल ने जिले के विकास से जुड़े अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले की कोई भी पंचायत अब दुग्ध उत्पादक समिति के दायरे से बाहर नहीं रहनी चाहिए। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य यह है कि गांवों में दूध का उत्पादन बढ़े और पशुपालकों को उनके दूध की सही कीमत घर के पास ही मिल सके।

प्रशासन का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन सही बाजार और सरकारी मदद न मिलने के कारण छोटे पशुपालक इसका पूरा फायदा नहीं उठा पाते। नई योजना लागू होने के बाद हर पंचायत स्तर पर एक कलेक्शन सेंटर की तरह काम शुरू होगा। इससे न केवल पुरुषों बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी स्वरोजगार से जुड़ने का मौका मिलेगा। बैठक के दौरान प्रशासनिक महकमे में काम को लेकर काफी गंभीरता देखी गई और सभी संबंधित विभागों को आपसी तालमेल के साथ इस काम को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने के लिए कहा गया है।

जिले में डेयरी और सहकारिता की मौजूदा स्थिति क्या है

अगर गढ़वा जिले में डेयरी क्षेत्र की वर्तमान स्थिति को देखें, तो अभी यहां सहकारिता के क्षेत्र में बहुत ज्यादा काम होना बाकी है। गव्य विकास और डेयरी विभाग के अधिकारियों ने बैठक में जो आंकड़े पेश किए, उनके अनुसार अभी पूरे जिले में केवल 15 दुग्ध उत्पादक समितियां ही सही तरीके से काम कर रही हैं। इसके अलावा मेधा डेयरी के सहयोग से जिले में 75 मिल्क पोलिंग पॉइंट चलाए जा रहे हैं, जहां किसान अपना दूध लाकर बेचते हैं। लेकिन जिले की आबादी और पंचायतों की संख्या को देखते हुए यह व्यवस्था बहुत कम है। कई सुदूर गांवों के किसानों को अपना दूध बेचने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।

इसी कमी को दूर करने के लिए उपायुक्त ने मौजूदा दायरे को बढ़ाने का आदेश दिया है। इस योजना के तहत न सिर्फ नई समितियां बनाई जाएंगी, बल्कि जो समितियां पहले से बनी हैं और किसी वजह से बंद या निष्क्रिय पड़ी हैं, उन पर भी कड़ा एक्शन लिया जाएगा। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि काम न करने वाली समितियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत बंद कर दिया जाएगा और उनकी जगह पर नई और सक्रिय कमेटियां बनाई जाएंगी। इसके साथ ही मत्स्य पालन यानी मछली पालन से जुड़े लोगों के लिए भी एक नया डेटाबेस तैयार किया जा रहा है ताकि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके।

इस फैसले से आम किसानों और पशुपालकों पर क्या असर पड़ेगा

इस बड़े प्रशासनिक फैसले का सबसे ज्यादा फायदा गढ़वा के छोटे और सीमांत किसानों को होने वाला है। जब हर पंचायत में दुग्ध समिति बन जाएगी, तो किसानों को बिचौलियों के चंगुल से मुक्ति मिलेगी। अक्सर देखा जाता है कि गांवों में स्थानीय व्यापारी बहुत कम कीमत पर किसानों से दूध खरीद लेते हैं, जिससे पशुपालकों को मवेशियों के चारे और दवाइयों का खर्च निकालना भी भारी पड़ता है। नई व्यवस्था के तहत सीधे मेधा डेयरी और सरकारी तंत्र के माध्यम से दूध की खरीद होगी, जिससे पारदर्शी तरीके से पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचेगा।

इसके साथ ही गांवों में ही बैंकिंग और डिजिटल सेवाएं देने के लिए लैंप्स और पैक्स जैसी प्राथमिक सहकारी समितियों को अपग्रेड किया जा रहा है। इन सभी समितियों को झारसेवा आईडी दी जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि अब गांव के किसान को अपने छोटे-मोटे बैंकिंग कामों, सरकारी प्रमाणपत्रों या पैसों के लेन-देन के लिए ब्लॉक मुख्यालय या शहर की तरफ नहीं भागना पड़ेगा। डिजिटल सेवा केंद्र की तरह ये समितियां गांवों में ही काम करेंगी। नेशनल को-ऑपरेटिव डेटाबेस पर हर जानकारी को ऑनलाइन अपडेट रखा जाएगा, जिससे पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

Jharkhand News: बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे

प्रशासन केवल समितियां बनाने तक ही सीमित नहीं रह रहा है, बल्कि आने वाले दिनों के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करने की योजना पर भी काम शुरू हो गया है। बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के दौरान जिले में अनाज और अन्य उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए 100 और 500 मीट्रिक टन की क्षमता वाले बड़े गोदामों का निर्माण कराया जाएगा। इन गोदामों के बनने से किसानों की फसल खराब होने से बच सकेगी। उपायुक्त ने जमीन की पहचान करने के लिए एक संयुक्त टीम बनाने का निर्देश दिया है जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

इसके अलावा, खेतों की सेहत सुधारने के लिए मिनी मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, जहां किसान अपनी मिट्टी की जांच कराकर सही खाद का इस्तेमाल कर सकेंगे। मवेशियों की बीमारी की स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके, इसके लिए गांवों में पशु औषधि विक्रय केंद्र यानी जानवरों की दवा की दुकानें खोलने पर भी विचार किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला सहकारिता पदाधिकारी नीलम कुमारी, कृषि पदाधिकारी खुशबू पासवान और गव्य पदाधिकारी गिरीश कुमार सहित कई विभागों के बड़े अधिकारी मौजूद थे। उपायुक्त ने सभी को हिदायत दी है कि योजनाओं को समय पर पूरा किया जाए और अगली बैठक में प्रगति रिपोर्ट के साथ आएं।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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