Sanae Takaichi India Visit: वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी बाधा बने आतंकवाद और हिंसक अतिवाद के खिलाफ भारत और जापान ने एक बार फिर एकजुट होकर हुंकार भरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाची ने 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान आतंकवाद के हर स्वरूप की कड़ी निंदा की है। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि आतंकवाद के न केवल पोषक तत्वों बल्कि उसे वित्तपोषित करने वाले तंत्र को भी पूरी तरह से ध्वस्त किया जाए। इस बैठक में सीमा पार से हो रहे आतंकवाद और वैश्विक अस्थिरता पर विशेष चिंता जताई गई।
Sanae Takaichi India Visit: श्रीनगर और दिल्ली हमलों का जिक्र: न्याय की मांग
दोनों नेताओं ने बीते समय में हुई आतंकी घटनाओं पर गहरी संवेदना और आक्रोश प्रकट किया। भारत और जापान ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। इसके साथ ही, पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले को लेकर भी दोनों प्रधानमंत्रियों ने कड़ा रुख अपनाया। प्रधानमंत्री मोदी और जापानी पीएम ताकाची ने इन घटनाओं को अंजाम देने वालों और इसके पीछे छिपे षड्यंत्रकारियों, समर्थकों और आर्थिक मदद पहुंचाने वाले तत्वों को बिना किसी देरी के कानून के दायरे में लाने की पुरजोर मांग की है। यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
वैश्विक सुरक्षा के लिए संकल्प: पाकिस्तान का नाम लेकर संदेश
भारत और जापान ने संयुक्त बयान में पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाकर अपनी प्रतिबद्धता साफ कर दी है। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी समूहों, जिनमें अल-कायदा, आईएसआईएस (दाएश), लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद शामिल हैं, के खिलाफ समन्वित और निर्णायक कार्रवाई का आह्वान किया है। भारत और जापान की यह साझेदारी इस बात का प्रमाण है कि दोनों देश आतंकवाद की सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने और आतंकी फंडिंग नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए एकमत हैं। उनका मानना है कि आतंकी गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय अपराधों के बीच के गठजोड़ को तोड़ना वैश्विक शांति के लिए अत्यंत आवश्यक है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और क्वाड की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाची ने एक सुरक्षित और समृद्ध इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र के साझा लक्ष्य को दोहराया है। क्वाड (Quad) फ्रेमवर्क के तहत हो रही प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए दोनों नेताओं ने इस सहयोग को और अधिक व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया है। इस साझेदारी के चार प्रमुख स्तंभ हैं, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि, महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा और उभरती हुई तकनीकें।
दोनों नेताओं ने माना कि समुद्री सुरक्षा और ट्रांसनेशनल सुरक्षा के क्षेत्रों में आपसी सहयोग न केवल भारत और जापान के बीच के संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि क्वाड देशों के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाएगा। साथ ही, आसियान सदस्य देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया है।
Sanae Takaichi India Visit: मानवीय सहायता और भविष्य की कार्ययोजना
बैठक के दौरान मानवीय सहायता और आपातकालीन प्रतिक्रिया (HEER) के महत्व पर भी चर्चा की गई। भारत और जापान के बीच बढ़ती यह द्विपक्षीय मित्रता केवल रक्षा और सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और तकनीकी विकास के नए द्वार भी खोल रही है। दोनों देशों ने यह स्वीकार किया कि भविष्य में महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना और नई तकनीकों में साझा निवेश करना दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए अनिवार्य है।
Sanae Takaichi India Visit: आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई
प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री का यह संयुक्त बयान इस बात का संकेत है कि भारत और जापान अब आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को और अधिक आक्रामक तरीके से लागू करेंगे। आतंकवाद के खिलाफ यह साझा स्टैंड न केवल क्षेत्र के देशों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है। जब लोकतांत्रिक और आर्थिक रूप से संपन्न देश एक साथ आते हैं, तो वे दुनिया के सबसे बड़े खतरों को भी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।
यह स्पष्ट है कि भारत और जापान न केवल सामरिक साझेदार हैं, बल्कि वे एक ऐसी दुनिया की परिकल्पना कर रहे हैं जहां आतंकवाद के लिए कोई जगह न हो। यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को नई ऊंचाई पर ले गया है, जिसका असर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साफ दिखाई देगा। आतंकवाद के खिलाफ इस निर्णायक लड़ाई में अब भारत और जापान मिलकर भविष्य की चुनौतियों के लिए कमर कस चुके हैं।
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