Skanda Purana: हिंदू धर्म में बारह महीने होते हैं और हर महीने का अपना एक अलग महत्व है। चैत्र से नववर्ष की शुरुआत होती है, लेकिन अगर भगवान शिव की बात करें, तो सावन का महीना उनके लिए सबसे खास और प्रिय माना जाता है। भक्त इस पूरे महीने में महादेव की भक्ति में लीन रहते हैं और शिवालयों में ‘ओम नमः शिवाय’ की गूंज सुनाई देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शिवजी को आखिर चैत्र, वैशाख या आषाढ़ क्यों नहीं भाते? आखिर सावन में ऐसा क्या है कि देवाधिदेव महादेव को यह ऋतु सबसे ज्यादा प्रिय है? इस सवाल का जवाब हमारे प्राचीन धर्मग्रंथों, विशेषकर स्कंद पुराण में विस्तार से दिया गया है।
Skanda Purana: स्कंद पुराण का श्लोक और महादेव का संदेश
शिवजी को सावन का महीना क्यों प्रिय है, इस पर स्कंद पुराण के श्रावणमास महात्मय में स्पष्ट उल्लेख मिलता है। इसमें एक श्लोक है जिसका अर्थ है कि बारह महीनों में श्रावण का महीना मुझे अत्यंत प्रिय है। इसी वजह से जो भी भक्त इस महीने में मेरी पूजा-अर्चना करता है, उसे विशेष फलों की प्राप्ति होती है और मैं उससे शीघ्र प्रसन्न हो जाता हूं। यह महीना शिव की कृपा पाने का सबसे सरल और सुलभ माध्यम माना गया है।
पुराणों के अनुसार, जब संतों ने भगवान शिव से सावन के प्रति उनके लगाव का कारण पूछा, तो महादेव ने इसके पीछे कई भावनात्मक और पौराणिक कारण बताए। यह महीना केवल प्रकृति के श्रृंगार का ही नहीं, बल्कि शिव के प्रति अटूट आस्था और समर्पण का भी समय है।
मां पार्वती की कठोर तपस्या और शिव का मिलन
सावन के महीने को प्रिय मानने के पीछे की सबसे बड़ी कथा मां पार्वती और भगवान शिव के मिलन से जुड़ी है। देवी सती द्वारा अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अपमानित होने के बाद देह त्यागने के बाद, उन्होंने पर्वतराज हिमाचल के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। अपनी युवावस्था में मां पार्वती ने यह संकल्प लिया कि वे भगवान शिव को ही अपने पति के रूप में प्राप्त करेंगी।
मान्यता है कि पार्वती माता ने सावन के महीने में ही कठोर तपस्या की थी। उन्होंने अन्न और जल का त्याग कर दिया था और निराहार रहकर महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास किया। पार्वती के इसी कठोर संकल्प और सावन में की गई कठिन साधना से प्रभावित होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था। तभी से महादेव को यह महीना इतना प्यारा है क्योंकि इसी महीने में उनकी शक्ति और उनका मिलन पूर्ण हुआ था।
ससुराल आते हैं महादेव: लोक परंपराओं का रंग
सावन के महीने को लेकर एक और बहुत ही रोचक और लोक प्रचलित मान्यता है। माना जाता है कि सावन के दौरान भगवान शिव धरती पर अवतरित होते हैं और अपने ससुराल जाते हैं। वहां उनका स्वागत बड़े ही विधि विधान से अर्घ्य देकर और जलाभिषेक के साथ किया जाता है। हिंदू घरों में भी सावन के महीने में मेहमानों के स्वागत की परंपरा है, और उसी तरह महादेव भी इस समय पृथ्वी लोक पर अपने भक्तों के बीच आते हैं। यह समय शिव और शक्ति के मिलन का उत्सव माना जाता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
मार्कंडेय ऋषि की कथा और यमराज पर विजय
सावन के महीने की महिमा का एक और बड़ा कारण मार्कंडेय ऋषि के पुत्र मार्कंडेय की कथा है। कथा के अनुसार, मार्कंडेय को बहुत कम आयु का वरदान प्राप्त था। अपनी अल्पायु के संकट को दूर करने और लंबी आयु की कामना के लिए उन्होंने सावन के महीने में ही भगवान शिव की घोर तपस्या की।
उनकी भक्ति इतनी गहरी थी कि उन्होंने महामृत्युंजय मंत्र की शक्ति हासिल कर ली। जब यमराज उनके प्राण लेने आए, तो वे सावन में शिव की कृपा से प्राप्त उन मंत्रों और साधना के आगे विवश हो गए। मार्कंडेय ने सावन में शिव को प्रसन्न कर मृत्यु को भी परास्त कर दिया था। इसी कारण सावन को आरोग्य और लंबी आयु देने वाला महीना भी कहा जाता है।
सावन का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक पक्ष
सावन के महीने में प्रकृति अपने पूरे यौवन पर होती है। चारों ओर हरियाली, फुहारें और झूला झूलते लोगों का दृश्य मन को शांति देता है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए, तो इस समय वातावरण में ऊर्जा का स्तर बहुत अधिक होता है। योग और साधना के लिए यह महीना अत्यंत उत्तम माना गया है। जब मन और शरीर शांत होते हैं, तो शिव की आराधना में ध्यान जल्दी लगता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी देखा जाए, तो सावन का महीना स्वास्थ्य के लिहाज से संवेदनशील होता है, इसलिए उपवास और संयम की परंपराएं मनुष्य को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करती हैं।
Skanda Purana: भक्तों के लिए सावन का विशेष महत्व
सावन में जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा और दूध से शिव की पूजा करने का विशेष महत्व है। जो भक्त साल भर शिव की पूजा नहीं कर पाते, वे भी सावन में सोमवार का व्रत रखकर महादेव को रिझा लेते हैं। शिव का अर्थ ही ‘कल्याण’ है। सावन का महीना यह सिखाता है कि किस प्रकार मनुष्य अपने अहम और विकारों को त्याग कर शिव के चरणों में खुद को समर्पित कर सकता है।
Skanda Purana: समापन
अंत में यही कहा जा सकता है कि सावन केवल एक महीना नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है। देवी पार्वती का तप, महादेव का अपनी शक्ति के साथ मिलन, और मार्कंडेय की साधना, ये सभी घटनाएं सावन के महीने को शिव का सबसे प्रिय समय बनाती हैं। महादेव सरल हैं और भाव के भूखे हैं। यदि आप सावन के इस पावन महीने में शुद्ध मन और श्रद्धा के साथ एक लोटा जल भी अर्पित करते हैं, तो महादेव अपने भक्त पर असीम कृपा बरसाते हैं। सावन का महीना हमें प्रेम, तपस्या और समर्पण के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
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