Top 5 This Week

Related Posts

Unnao rape case: पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की बढ़ीं मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी राहत

Unnao rape case: देश के सबसे चर्चित और विवादित मामलों में से एक उन्नाव दुष्कर्म कांड में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया गया था। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद अब कुलदीप सिंह सेंगर को फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने न केवल हाई कोर्ट के फैसले को पलटा है बल्कि इस मामले को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की है। कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इस पूरे प्रकरण पर दो महीने के भीतर नए सिरे से सुनवाई कर अपना फैसला सुनाए। यह मामला 2017 का है जिसने पूरे देश की राजनीति और न्याय व्यवस्था को हिलाकर रख दिया था।

Unnao rape case: सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनाया कड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने की। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई द्वारा दायर की गई अपील पर विचार करने के बाद यह आदेश पारित किया। दरअसल सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें सजायाफ्ता कुलदीप सिंह सेंगर को राहत देते हुए उसकी सजा पर रोक लगा दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि हाई कोर्ट का पिछला आदेश कानूनी मानदंडों पर टिकने योग्य नहीं है। अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट को मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दो महीने की समय सीमा दी है। साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि हाई कोर्ट जब इस मामले पर दोबारा विचार करेगा तो उसे सुप्रीम कोर्ट के इस मौजूदा आदेश से प्रभावित होने की आवश्यकता नहीं है बल्कि तथ्यों और कानून के आधार पर स्वतंत्र फैसला लेना होगा।

क्या था पूरा विवाद और क्यों पलटा गया फैसला

साल 2017 में उन्नाव जिले में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए इस जघन्य अपराध ने उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे भारत को शर्मसार किया था। कुलदीप सिंह सेंगर जो उस समय सत्ताधारी दल के विधायक थे उन पर आरोप था कि उन्होंने नौकरी का झांसा देकर किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। लंबे समय तक पुलिस की चुप्पी और राजनीतिक दबाव के बाद जब मामला तूल पकड़ा तो पीड़ित परिवार को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। सजा निलंबन के खिलाफ सीबीआई की दलील थी कि ऐसे गंभीर अपराधों में जहां दोषी एक प्रभावशाली व्यक्ति रहा हो सजा पर रोक लगाना पीड़ित पक्ष के साथ अन्याय होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कानून के इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए सजा निलंबन के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट का मानना है कि जघन्य अपराधों के मामले में सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाने के लिए बहुत ठोस आधार होने चाहिए जो इस मामले में नजर नहीं आ रहे थे।

उन्नाव रेप कांड का लंबा और दर्दनाक सफर

इस मामले की शुरुआत जून 2017 में हुई थी जब पीड़िता ने आरोप लगाया था कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने अपने आवास पर उसके साथ गलत काम किया। इसके बाद की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से भी अधिक खौफनाक रही। पीड़िता और उसके परिवार को लगातार धमकियां मिलती रहीं। न्याय न मिलने से परेशान होकर पीड़िता ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश की थी। इसके बाद ही मामला राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आया और पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। जांच के दौरान पीड़िता के पिता को पुलिस हिरासत में ले लिया गया जहां उनके साथ मारपीट की गई और जेल में उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे जिसके बाद जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया और सेंगर को गिरफ्तार किया गया।

रायबरेली सड़क हादसा और कोर्ट का दखल

मामले में एक और भयानक मोड़ तब आया जब जुलाई 2019 में पीड़िता अपने वकील और परिजनों के साथ रायबरेली जा रही थी। रास्ते में एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस संदिग्ध हादसे में पीड़िता की दो महिला रिश्तेदारों की मौत हो गई जबकि पीड़िता और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पीड़िता के परिवार ने इसे विधायक द्वारा रची गई एक गहरी साजिश करार दिया था। इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश से पूरे ट्रायल को दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। शीर्ष अदालत का उद्देश्य था कि पीड़िता को उत्तर प्रदेश के राजनीतिक प्रभाव से मुक्त वातावरण में न्याय मिल सके।

Unnao rape case: दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

दिसंबर 2019 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया था। विशेष अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का दोषी मानते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही अदालत ने उस पर 25 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया था। इसके अलावा पीड़िता के पिता की कस्टोडियल डेथ यानी जेल में हुई मौत के मामले में भी सेंगर को अलग से 10 साल की सजा सुनाई गई थी। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी की थी कि सेंगर ने अपने पद और प्रभाव का गलत इस्तेमाल करते हुए एक मासूम की जिंदगी बर्बाद कर दी। इसी सजा के खिलाफ सेंगर ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जहां से उसे सजा निलंबन के रूप में अस्थायी राहत मिली थी जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिया है।

Unnao rape case: न्याय व्यवस्था के प्रति बढ़ेगा जनता का भरोसा

सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा फैसले को न्याय की जीत के रूप में देखा जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब उच्च पदों पर बैठे लोग जघन्य अपराधों में शामिल होते हैं तो आम जनता की नजरें अदालतों पर टिकी होती हैं। सजा निलंबन के फैसले को पलटने से यह संदेश गया है कि कानून के सामने सब बराबर हैं और अपराध की गंभीरता को देखते हुए राहत नहीं दी जा सकती। खासकर महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में सुप्रीम कोर्ट का यह रुख भविष्य के लिए एक नजीर साबित होगा। अब सबकी नजरें दिल्ली हाई कोर्ट की दोबारा होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं क्योंकि उसे दो महीने के भीतर अपनी राय स्पष्ट करनी होगी। फिलहाल कुलदीप सिंह सेंगर के लिए कानूनी रास्ते बंद होते नजर आ रहे हैं और उन्हें अपनी सजा काटनी ही होगी।

Raad More Here:- 

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles