Solan: हिमाचल प्रदेश में रसभरी की एक नई प्रजाति की खोज हुई है। बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया BSI ने इसे सोलन में नौणी विश्वविद्यालय के पास खोजा है। इसका नाम फिजैलिस हिमाचलेंसिस Physalis himachalensis रखा गया है।
कहां और कैसे मिली नई प्रजाति
BSI की टीम को यह पौधा सड़क किनारे घास वाले क्षेत्र में लगभग 1,327 मीटर की ऊंचाई पर मिला। करीब 50 वर्गमीटर क्षेत्र में इसके 35 से 50 पौधे देखे गए।
यह खोज पहली बार 2022 में डॉ. YS परमार विश्वविद्यालय परिसर में सर्वेक्षण के दौरान देखी गई थी।
2023-2024 में इसकी आबादी और विशेषताओं का अध्ययन किया गया। देश के हर्बेरियम और वैज्ञानिक साहित्य से तुलना के बाद पुष्टि हुई कि यह पहले वर्णित किसी भी फिजैलिस प्रजाति से मेल नहीं खाती।
शोधपत्र “A New Species of Physalis from Himachal Pradesh, India” 16 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय जर्नल Discover Plants में प्रकाशित हुआ।
लेखक: विनय रंजन, कुलदीप सिंह डोगरा, कुमार अंबरीश, रितेश कुमार सिंह – BSI
कैसा है पौधा और फल
1. ऊंचाई: 10 से 15 सेंटीमीटर
2. फूल: सरसों जैसे पीले, बीच में काला भाग
3. फल: गोलाकार, गूदेदार, पकने पर पीले – ग्राउंड चेरी जैसे दिखते हैं
4. स्वाद: शोधकर्ताओं के अनुसार फल खाने योग्य और स्वाद में अच्छे पाए गए
किसानों और बागवानों के लिए उपयोगी
बागवानी विभाग निदेशक डॉ. सतीश शर्मा ने कहा कि हिमाचल में इस नई प्रजाति का मिलना बड़ी उपलब्धि है। राज्य के बागवानों के लिए यह आय का उपयोगी विकल्प बन सकती है। BSI की रिपोर्ट देखकर इसे बागवानों तक पहुंचाने के प्रयास होंगे।
खास बात: रसभरी को घर की छत, बालकनी, आंगन में 10-20 लीटर के गमले या ग्रो बैग में भी उगाया जा सकता है।
पोषक तत्व: पके फलों में विटामिन-C, एंटीऑक्सीडेंट, कैरोटिनॉयड* पाए जाते हैं। पारंपरिक चिकित्सा में सूजन, दर्द, बुखार और पाचन समस्याओं में उपयोग होता रहा है।


