गोपालपुर, भागलपुर | भागलपुर जिले का नवगछिया अनुमंडल इन दिनों बिहार में ‘बनाना हब’ के रूप में अपनी एक विशिष्ट पहचान सुदृढ़ कर रहा है। गंगा और कोसी नदी के बीच बसे इस अनुमंडल की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, अनुकूल जलवायु और सुलभ बाजार व्यवस्था के कारण यहाँ केले की व्यावसायिक खेती किसानों के लिए समृद्धि का नया आधार बन चुकी है।
पारंपरिक खेती छोड़ केले की ओर रुख:
पारंपरिक खेती में लगातार हो रहे नुकसान के विकल्प के रूप में नवगछिया के किसान अब आधुनिक पद्धतियों से बड़े पैमाने पर केला उपजा रहे हैं, जिससे उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और इलाके के सैकड़ों किसान परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह खुशहाल हो चुके हैं।
इन 5 प्रखंडों के दियारा क्षेत्र में बढ़ा रकबा:
अनुमंडल के मुख्य रूप से पांच प्रखंडों—गोपालपुर, इस्माईलपुर, रंगरा, खरीक और बिहपुर के तटीय व दियारा इलाकों में मीलों दूर तक सिर्फ केले के बागान ही नजर आते हैं।
लीज फार्मिंग का क्रेज:
स्थानीय स्तर पर मुनाफे की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए अब बाहरी जिलों के प्रगतिशील किसान और बड़े फल व्यवसायी भी नवगछिया में आकर स्थानीय जमींदारों से लंबी अवधि की लीज पर जमीन लेकर कॉरपोरेट स्टाइल में केले की बागवानी कर रहे हैं।
लागत कम, मुनाफा ज्यादा:
किसानों के अनुसार, धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों में हर साल बुआई, जुताई और मजदूरी की बार-बार लागत आती है, जबकि केले की फसल में एक बार पौधारोपण करने के बाद लंबे समय तक फसल चक्र मिलता रहता है, जिससे शुद्ध मुनाफा बढ़ जाता है।
अन्य राज्यों में भी है नवगछिया के केले की भारी मांग:

आधुनिक कृषि तकनीकों और टिशू कल्चर पौधों के इस्तेमाल से यहाँ के फलों की गुणवत्ता में काफी सुधार आया है। क्षेत्र के किसानों ने गर्व से बताया कि नवगछिया के स्वादिष्ट और पुष्ट केलों की मांग न केवल भागलपुर या पटना के स्थानीय बाजारों में है, बल्कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों की बड़ी फल मंडियों में भी यहाँ के केले ट्रकों में भरकर हर रोज भेजे जाते हैं।
इससे किसानों को फसल की तुड़ाई के समय ही व्यापारियों से सीधे नकद और बेहतर कीमत मिल जाती है। साथ ही, पैकेजिंग और लोडिंग के काम से स्थानीय मजदूरों को बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिला हुआ है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव: बिना सरकारी मदद के बढ़ रही समृद्धि:
हालांकि, इस अपार सफलता के पीछे सिर्फ और सिर्फ किसानों का अपना कड़ा पुरुषार्थ और निजी निवेश है। कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि नवगछिया अनुमंडल में केले के उत्पादन को लेकर असीमित संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक यहाँ स्थानीय स्तर पर कोई बड़ा सरकारी शीतगृह, केला प्रसंस्करण इकाई या सुव्यवस्थित सरकारी फल मंडी स्थापित नहीं की जा सकी है।
किसानों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि यदि सरकार यहाँ फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को बढ़ावा दे, तो नवगछिया का केला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक्सपोर्ट किया जा सकता है। फिलहाल, तमाम प्रशासनिक उपेक्षाओं को दरकिनार कर यहाँ के अन्नदाता अपनी जीतोड़ मेहनत के बल पर इलाके में आर्थिक क्रांति की नई इबारत लिख रहे हैं।
स्रोत: स्थानीय किसान / कृषि विशेषज्ञ / फल मंडी व्यापारी

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