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Jammu Kashmir: जमात-ए-इस्लामी के 15 से अधिक ठिकानों पर पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी

Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर सुरक्षा बल घाटी से आतंकवाद और अलगाववाद के बचे-खुचे नेटवर्क को उखाड़ फेंकने के लिए पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुके हैं। इसी कड़ी में उत्तरी कश्मीर के सोपोर इलाके में पुलिस ने शुक्रवार को प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी से जुड़े गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए मामले में एक साथ 15 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। विशेष कानूनी प्रक्रिया और कड़े प्रशासनिक पहरे के बीच हुई इस बड़ी कार्रवाई ने सीमा पार से संचालित होने वाले देश विरोधी तत्वों और उनके स्थानीय मददगारों की कमर तोड़ दी है।

Jammu Kashmir: सोपोर के किन इलाकों में तड़के सुबह शुरू हुआ पुलिसिया एक्शन

उत्तरी कश्मीर का सोपोर शहर शुक्रवार की सुबह आम दिनों की तरह ही जाग रहा था, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के पास कुछ पुख्ता और बेहद संवेदनशील खुफिया इनपुट्स थे। भोर की पहली किरण के साथ ही सोपोर पुलिस की कई विशेष टीमें स्थानीय पुलिस थानों से भारी सुरक्षा घेरे के बीच बाहर निकलीं। पुलिस की इस अचानक हलचल से स्थानीय लोग और सड़कों पर मौजूद लोग हैरान थे। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई सोपोर पुलिस स्टेशन में पिछले वर्ष यूएपीए अधिनियम की धारा 10 और 13 के तहत दर्ज एफआईआर संख्या 42/2025 की चल रही गहन जांच के सिलसिले में की गई थी।

सुरक्षा बलों की टीमों ने बिना समय गंवाए सोपोर और उसके आसपास के 15 से अधिक संदिग्ध और संवेदनशील ठिकानों को एक साथ चारों तरफ से घेर लिया। जिन मुख्य इलाकों को इस सर्च ऑपरेशन के दायरे में लिया गया, उनमें जामिया कदीम, नसीम बाग, क्रांकशिवन, तारज़ू, अमरगढ़, वारपोरा, बोमाई और बोइटिंगू जैसे घनी आबादी वाले और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल थे। अचानक हुई इस घेराबंदी से इन इलाकों में कुछ समय के लिए आवाजाही ठप हो गई और स्थानीय बाजारों में भी इस प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कानाफूसी शुरू हो गई।

कानूनी वारंट और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई एक-एक घर की तलाशी

घाटी में अक्सर सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों को लेकर उठने वाले सवालों और कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए सोपोर पुलिस ने इस बार पूरी तैयारी की थी। यह कोई सामान्य या अचानक किया गया रैंडम सर्च ऑपरेशन नहीं था। पुलिस ने इस कार्रवाई से पहले बकायदा विशेष यूएपीए अदालत का दरवाजा खटखटाया था और वहां से सभी चिन्हित ठिकानों के लिए उचित और कानूनी तलाशी वारंट हासिल किए थे। कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद ही इस पूरे ऑपरेशन को जमीन पर उतारा गया।

इतना ही नहीं, छापेमारी के दौरान पूरी पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी तरह के प्रशासनिक विवाद से बचने के लिए हर टीम के साथ कार्यकारी मजिस्ट्रेटों (एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) की तैनाती की गई थी। तलाशी की पूरी प्रक्रिया स्थानीय स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ पूरी की गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि बंद कमरों और संदिग्ध ठिकानों की गहन छानबीन के दौरान भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है। इस सामग्री में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी से जुड़ा हुआ देश विरोधी और भड़काऊ साहित्य भी शामिल है, जिसे युवाओं को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस ने इन सभी सामग्रियों को कानूनी रूप से सील कर दिया है और आगे की फॉरेंसिक तथा कानूनी जांच के लिए अपनी हिरासत में ले लिया है।

कौन है पाकिस्तान में बैठा आतंक हैंडलर ‘बिसाती’ जिसकी संपत्ति हुई कुर्क

सोपोर पुलिस की यह छापेमारी कोई इकलौती कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह घाटी में सक्रिय टेरर इकोसिस्टम को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इसी कड़ी के तहत कुछ ही दिन पहले 10 मई को पुलिस ने आतंकवाद के खिलाफ एक और बड़ी वित्तीय चोट की थी। पुलिस ने सीमा पार बैठे एक शातिर आतंकी हैंडलर की करीब 20 लाख रुपये मूल्य की अचल संपत्ति को पूरी तरह कुर्क यानी ज़ब्त कर लिया था।

इस कुर्क की गई संपत्ति की कहानी भी सुरक्षा तंत्र की मुस्तैदी को बयां करती है। ज़ब्त की गई अचल संपत्ति बांदीपोरा जिले के केहनुसा इलाके में स्थित है, जो करीब 10 मरला जमीन का एक बड़ा टुकड़ा है। यह संपत्ति सोपोर के न्यू कॉलोनी के रहने वाले माजिद अहमद सोफी की है, जिसे स्थानीय अंडरवर्ल्ड और आतंकी हलकों में ‘बिसाती’ के नाम से जाना जाता है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ‘बिसाती’ उर्फ माजिद अहमद सोफी इस समय भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की आंख में धूल झोंककर पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (पीओके) में शरण लिए हुए है।

वहां बैठकर वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘हिजबुल मुजाहिदीन’ के लिए एक मुख्य ‘आतंक हैंडलर’ के रूप में काम कर रहा है। वह कश्मीर घाटी के स्थानीय युवाओं को हथियारों की सप्लाई, फंड ट्रांसफर और आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए रिमोट कंट्रोल की तरह इस्तेमाल करने में सक्रिय रहा है। उसके खिलाफ सोपोर पुलिस स्टेशन में यूएपीए की कई गंभीर धाराओं समेत शस्त्र अधिनियम की धारा 7/25 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4/5 के तहत मामले दर्ज हैं।

टेरर फंडिंग और लॉजिस्टिक नेटवर्क को ध्वस्त करने की चौतरफा रणनीति

जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अब यह साफ कर दिया है कि कश्मीर में आतंकवाद से निपटने का तरीका बदल चुका है। अब सिर्फ बंदूक उठाने वाले आतंकियों को ही ढेर नहीं किया जा रहा, बल्कि उनके पीछे छिपे उस पूरे तंत्र पर प्रहार हो रहा है जो उन्हें पैसा, पनाह और कानूनी मदद मुहैया कराता है। जमात-ए-इस्लामी के ठिकानों पर हुई यह कार्रवाई इसी वित्तीय और लॉजिस्टिक रीढ़ को तोड़ने की कोशिश है।

स्थानीय रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि जब तक आतंकियों के मददगारों और उनके ठिकानों को चिन्हित करके वित्तीय चोट नहीं पहुंचाई जाएगी, तब तक घाटी में स्थायी शांति संभव नहीं है। संपत्तियों को कुर्क करने और यूएपीए के तहत ताबड़तोड़ छापेमारी करने के पीछे का मुख्य उद्देश्य यही है कि आतंकवाद के लिए होने वाली फंडिंग के रास्तों को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाए। इससे न केवल सक्रिय आतंकियों को रसद मिलना बंद होगी, बल्कि आम लोगों में भी एक कड़ा संदेश जाएगा कि आतंकवाद या देश विरोधी तत्वों को किसी भी रूप में पनाह देने या मदद करने का अंजाम कितना भयानक हो सकता है।

Jammu Kashmir: पुलिस की आम जनता को सख्त हिदायत और आगे की कार्रवाई का रोडमैप

इस हाई प्रोफाइल ऑपरेशन के बाद सोपोर पुलिस प्रशासन ने एक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी कर स्थानीय जनता से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवादी संगठनों, उनके हैंडलर्स या जमात-ए-इस्लामी जैसे प्रतिबंधित संगठनों से किसी भी तरह का संपर्क रखेगा या उन्हें वित्तीय और नैतिक सहायता प्रदान करेगा, उसके खिलाफ बिना किसी ढिलाई के कानून के तहत सबसे सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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