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Prashant Kishor: वोटिंग से ठीक एक दिन पहले जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के खिलाफ एफआईआर दर्ज, जानिए पूरा मामला

Prashant Kishor: बिहार की राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब बांकीपुर उपचुनाव की वोटिंग से ठीक एक दिन पहले जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। यह पूरा मामला पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक वायरल वीडियो को लेकर शुरू हुआ है, जिसे प्रशांत किशोर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से तैयार किया गया फर्जी वीडियो बताया था।

इस बयान के बाद जेडीयू आक्रामक हो गई और पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार ने पटना के शास्त्री नगर थाने पहुंचकर प्रशांत किशोर के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के शीर्ष नेता के खिलाफ इस तरह के झूठे दावे करना और उसे अपमानित करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इस घटना ने ऐन मतदान से पहले राज्य की राजनीति का पारा काफी बढ़ा दिया है, जिससे चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है।

Prashant Kishor: बांकीपुर उपचुनाव से पहले गरमाई बिहार की सियासत

बिहार में इन दिनों बांकीपुर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच घमासान मचा हुआ है और सभी दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इस उपचुनाव के लिए कल यानी 30 जुलाई को मतदान होना है, जिसके ठीक एक दिन पहले इस तरह का कानूनी विवाद सामने आना चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे रहा है। जन सुराज के संस्थापक और इस चुनाव में खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश कर रहे प्रशांत किशोर के खिलाफ इस कानूनी कार्रवाई से उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस छिड़ गई है।

चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में जहां सभी प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने में व्यस्त थे, वहीं अचानक थाने में शिकायत दर्ज होने से पूरा प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र सक्रिय हो गया है। चुनाव आयोग की नजर भी इस घटनाक्रम पर टिकी हुई है ताकि मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके और किसी भी तरह की अफवाहों से बचा जा सके।

जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार की थाने में कड़ी आपत्ति

जन सुराज के संस्थापक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ शास्त्री नगर थाने पहुंचे थे। थाने के बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के वीडियो को फर्जी बताना और उसे एआई जेनरेटेड करार देना सीधे तौर पर उनके नेता का अपमान है।

नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए विपक्ष इस तरह के अनर्गल और आधारहीन आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जेडीयू नेताओं का यह भी कहना है कि इस प्रकार के बयानों से न केवल राजनीतिक शुचिता को ठेस पहुंचती है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया को भी प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। इसी आधार पर पुलिस प्रशासन से यह मांग की गई है कि इस पूरे मामले में कानून के मुताबिक निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की बयानबाजी से बचा जा सके।

क्या था वह विवादित वीडियो और नीतीश कुमार का संदेश

पूरा विवाद उस वीडियो के इर्द-गिर्द घूम रहा है जिसे हाल ही में सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर साझा किया गया था। इस वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आगामी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नीरज सिन्हा के पक्ष में वोट की अपील करते हुए नजर आ रहे थे। वीडियो के संदेश में नीतीश कुमार ने कहा था कि सभी के सहयोग और विश्वास से पिछले दो दशकों के दौरान राज्य में न्याय के साथ विकास की गति को धरातल पर उतारा गया है।

इसमें आगे यह भी कहा गया था कि विकास की इस निरंतर गति को बनाए रखने और एक विकसित राज्य के संकल्प को पूरा करने के लिए जनता का एक-एक वोट बेहद महत्वपूर्ण है। एनडीए खेमे की तरफ से जारी किए गए इस प्रचार वीडियो को लेकर उस समय तक सब कुछ सामान्य चल रहा था, जब तक जन सुराज के प्रमुख ने इस पर सवालिया निशान नहीं खड़े कर दिए थे।

Prashant Kishor: प्रशांत किशोर के तीखे आरोप और फर्जी होने का दावा

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने एनडीए द्वारा जारी किए गए उस वीडियो को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से फर्जी करार दिया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया था कि सत्ता पक्ष की ओर से नीतीश कुमार का जो वीडियो अपील जारी किया गया है, उसका वास्तविकता से कोई दूर-दूर तक वास्ता नहीं है। उनका तर्क था कि इस वीडियो को आधुनिक तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दुरुपयोग करके तैयार किया गया है और वास्तव में नीतीश कुमार ने ऐसा कोई बयान कभी दिया ही नहीं है।

प्रशांत किशोर ने मीडिया के सामने यह भी कहा था कि यदि कोई व्यक्ति इस वीडियो को बहुत गौर से देखेगा तो उसे साफ तौर पर पता चल जाएगा कि इसे तकनीकी रूप से एडिट किया गया है। इस बयान के जरिए उन्होंने सीधे तौर पर सत्तारूढ़ दल पर डिजिटल धोखाधड़ी और जनता को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया था, जिससे राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया था।

Prashant Kishor: चुनावी सरगर्मी के बीच कानूनी लड़ाई का असर

वोटिंग से ठीक पहले दर्ज हुई इस एफआईआर ने चुनावी माहौल को और अधिक तीखा बना दिया है, जहां दोनों तरफ से बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। एक तरफ जहां जेडीयू नेता इसे अपने नेता के सम्मान की लड़ाई बता रहे हैं और कानूनी दायरे में कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक आरोपों को लेकर भी बहस छिड़ गई है।

इस तरह के कानूनी मामलों का असर अक्सर अंतिम समय के मतदाताओं की मानसिकता पर भी पड़ता है, जो यह तय करने की कोशिश करते हैं कि मैदान में कौन सा दल और नेता ज्यादा मजबूत स्थिति में है। पुलिस अब इस मामले की तकनीकी पहलुओं और वीडियो की प्रमाणिकता की जांच करने की तैयारी कर रही है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वीडियो असली था या वाकई इसमें किसी तकनीक का सहारा लिया गया था। आने वाले दिनों में यह कानूनी विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है, जिसका असर चुनाव परिणामों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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