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Rahul Gandhi: लोकसभा में राहुल गांधी का बड़ा हमला, कहा- आरएसएस ने हाईजैक की शिक्षा व्यवस्था और इसके दोषी हैं अमित शाह

Rahul Gandhi: संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में उस समय राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों को लेकर तीखा हमला बोला। एंटी पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस ने पूरी शिक्षा व्यवस्था को अपने कब्जे में कर लिया है और देश के हर विश्वविद्यालय के कुलपति इसी संगठन से जुड़े हुए हैं।

अपने भाषण के दौरान उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी सीधा निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा देखने को मिला। इस तीखी बहस और हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही काफी प्रभावित हुई, जहां दोनों ओर के दिग्गजों ने अपने-अपने अंदाज में सदन की गरिमा और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बातें रखीं।

Rahul Gandhi: शिक्षा व्यवस्था के निजीकरण और आरएसएस के कब्जे पर बयान

संसद में अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त की और इसके लिए सीधे तौर पर एक वैचारिक संगठन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली का बड़े पैमाने पर निजीकरण किया जा रहा है और एक विशेष संगठन यानी आरएसएस ने इस पर पूरी तरह से कब्जा जमा लिया है।

उनका यह भी कहना था कि देश के हर प्रमुख विश्वविद्यालय के कुलपति का संबंध उसी संगठन से है, जिसे एक सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया जा रहा है। विपक्ष के नेता ने दावा किया कि इस पूरी साजिश के खिलाफ देश के युवाओं और छात्रों ने जो आवाज उठाई है, वह बिल्कुल जायज है और सभी राजनीतिक दलों को इस जन-भावना का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर सत्ता पक्ष के लोग अपने घरों में बच्चों से बात करें, तो उन्हें भी युवाओं के इस दर्द और संघर्ष में सच्चाई नजर आएगी।

छात्रों के आंदोलन का समर्थन और युवा पीढ़ी की अभिव्यक्ति

एंटी पेपर लीक कानून और परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ देश भर में हुए छात्र आंदोलनों का समर्थन करते हुए राहुल गांधी ने इसे एक स्वाभाविक जन-अभिव्यक्ति करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सड़कों पर उतरा छात्रों का यह गुस्सा कोई हिंसा, नफरत या उपद्रव नहीं था, बल्कि यह देश की आने वाली पीढ़ी की एक गहरी और सच्ची अभिव्यक्ति थी। उनके अनुसार इस प्रकार की आवाज को दबाने के बजाय राजनीतिक नेतृत्व को इसे गंभीरता से सुनना चाहिए और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने सदन में विश्वास जताया कि जो कुछ भी युवा कर रहे हैं, उसमें कुछ भी गलत नहीं है और हर भारतीय नागरिक को इस युवा पीढ़ी की सजगता पर गर्व होना चाहिए। इस तरह के बयानों के जरिए विपक्ष ने युवाओं के मुद्दों को सीधे तौर पर राजनीतिक मंच पर लाकर सरकार को घेरने की एक बड़ी कोशिश की है।

गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला और सदन में हंगामा

भाषण के दौरान जब राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र किया, तो राजनीतिक पारा और अधिक गर्म हो गया। विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री, जो उस समय सदन में मौजूद नहीं थे, उन्होंने छात्रों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे और उनमें इतनी ताकत नहीं है कि वे सदन में इस बहस के दौरान सामने आकर बैठ सकें। इस तीखे बयान के आते ही सत्ता पक्ष के सांसदों ने अपनी सीटों पर खड़े होकर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया और राहुल गांधी से अपने शब्दों के लिए तुरंत माफी मांगने की मांग की।

सत्ता पक्ष की ओर से मोर्चा संभालते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि विपक्ष के एक जिम्मेदार नेता को सदन के भीतर इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना और आधारहीन टिप्पणियों से बचना चाहिए। इस आमने-सामने की टकराहट से संसद का माहौल कुछ समय के लिए काफी तनावपूर्ण हो गया था।

सत्ता पक्ष और विपक्ष की तीखी नोंकझोक के बीच रक्षा मंत्री की अपील

हंगामे और शोरगराबे के बीच जब सदन की स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हस्तक्षेप किया और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। राहुल गांधी ने अपनी बात रखते हुए यह भी शिकायत की कि जब भी वे सदन में कुछ बोलने के लिए खड़े होते हैं, तो सत्ता पक्ष के लोग तुरंत चिल्लाना शुरू कर देते हैं।

दोनों पक्षों के बीच लगातार बढ़ रही तनातनी को शांत करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेहद विनम्रता से यह बात रखी कि विपक्ष के नेता द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को असंसदीय मानते हुए रिकॉर्ड से हटा दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ट्रेजरी बेंच के सभी सदस्यों से भी आग्रह किया कि वे संयम रखें और पूरी शांति के साथ विपक्ष के नेता की बात को सुनें। इस प्रकार वरिष्ठ मंत्रियों के हस्तक्षेप से सदन के भीतर बढ़ते तनाव को कम करने और कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने का प्रयास किया गया।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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