Top 5 This Week

Related Posts

Assam Floods: असम में बाढ़ का तांडव, AASU की केंद्र से विशेष राहत पैकेज और शीर्ष नेतृत्व के दौरे की मांग

Assam Floods: असम में मानसून की दस्तक के साथ ही प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिलने लगा है, जहां ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से राज्य के कई जिले गंभीर रूप से जलमग्न हो चुके हैं। हाल ही में सिवसागर जिले समेत विभिन्न हिस्सों में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, हालांकि अब कुछ इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा है।

इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं और जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है। इस विकट परिस्थिति के बीच ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन यानी AASU ने केंद्र सरकार पर दबाव बनाते हुए एक बड़े विशेष राहत पैकेज की मांग उठाई है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से असम आएं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लें। स्थानीय लोगों का दर्द साझा करते हुए छात्र संगठन ने स्पष्ट किया है कि केवल राज्य सरकार के प्रयासों से इस पैमाने की तबाही से निपटना संभव नहीं है।

Assam Floods: असम में मानसून की तबाही और बिगड़ते हालात

असम बाढ़ की इस विभीषिका ने एक बार फिर पूर्वोत्तर के इस राज्य के बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन तंत्र की पोल खोल दी है। राज्य के भीतर सिवसागर जिला सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में से एक बनकर उभरा है, जहां न केवल रिहायशी इलाके बल्कि कृषि योग्य भूमि और पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव समीरन फुकन ने स्वयं सिवसागर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और जमीनी हालात का मुआयना किया।

इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह समय पूरे राज्य के लिए एक गंभीर संकट की घड़ी है और हजारों आम नागरिक भारी मुश्किलों के दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सिवसागर का बच्चा-बच्चा और हर एक परिवार इस आपदा से सीधे तौर पर पीड़ित है। संगठन की मांग है कि देश के शीर्ष नेतृत्व को खुद असम की इस धरती पर आकर यहां के लोगों के आंसू देखने चाहिए और उनके दर्द को महसूस करना चाहिए ताकि केंद्र स्तर पर त्वरित और बड़े नीतिगत फैसले लिए जा सकें।

केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की पुरजोर मांग

वर्तमान परिस्थितियों का आकलन करें तो असम सरकार अपनी क्षमता के अनुसार राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई है, लेकिन प्रशासनिक मशीनरी के प्रयास जमीनी जरूरतों के मुकाबले कम पड़ते नजर आ रहे हैं। इस बात को रेखांकित करते हुए AASU के नेतृत्व ने केंद्र सरकार से तत्काल प्रभाव से एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा करने की पुरजोर मांग की है। इस पैकेज का मुख्य उद्देश्य उन सभी परिवारों को पर्याप्त मुआवजा प्रदान करना होना चाहिए जिन्होंने इस कुदरती आपदा में अपने सिर की छत, जीवनभर की मेहनत की कमाई, खेत-खलिहान और मवेशी गंवा दिए हैं।

आपदा की इस मार से उबरने के लिए वित्तीय सहायता बेहद जरूरी है ताकि पीड़ित परिवार फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें और अपनी आजीविका की शुरुआत नए सिरे से कर सकें। संगठन का मानना है कि जब तक केंद्र सरकार सीधे तौर पर इस राहत अभियान में हस्तक्षेप नहीं करती, तब तक जमीनी स्तर पर पुनर्वास का यह महाअभियान अपनी गति नहीं पकड़ पाएगा।

राहत सामग्री और लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर गंभीर चुनौतियां

राहत सामग्री के वितरण और लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर भी असम बाढ़ के दौरान प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के सामने भारी चुनौतियां खड़ी हुई हैं। कई दूरदराज के इलाकों और गांवों में संपर्क मार्ग पूरी तरह से कट जाने के कारण राहत दल वहां तक पहुंचने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। समीरन फुकन ने इस बात को स्वीकार किया कि संगठन अपनी तरफ से हरसंभव कोशिश कर रहा है कि पीड़ितों तक सूखा राशन, पेयजल और दवाइयां पहुंचाई जाएं, लेकिन कई जगह न तो नावें समय पर पहुंच पा रही हैं और न ही सड़क मार्ग से कोई वाहन गुजर सकता है।

ग्रामीण इलाकों में स्थिति यह है कि प्रशासनिक सहायता पहुंचने से पहले ही स्थानीय स्वयंसेवी संगठन और जागरूक नागरिक आपसी सहयोग से लोगों की मदद कर रहे हैं। इस संकट काल में असम के भीतर आपसी भाईचारा और मानवीय संवेदनाएं मजबूती के साथ उभरकर सामने आई हैं, जहां आम लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार बाढ़ पीड़ितों की हरसंभव सहायता करने में जुटे हुए हैं।

सिवसागर और राजाबाड़ी गांव में जलभराव की मार

सिवसागर जिले के भीतर स्थिति थोड़ी बहुत सुधरने के संकेत दे रही है क्योंकि कुछ स्थानों पर बाढ़ का पानी उतरना शुरू हो गया है। इसके बावजूद कई आंतरिक इलाके ऐसे हैं जहां जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है और लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। डोरिका नदी के किनारे बसा राजाबाड़ी गांव आज भी पूरी तरह से पानी में डूबा हुआ है, जहां के निवासियों के लिए एक पल भी चैन से काटना मुश्किल हो गया है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ का पानी इतनी तेजी से और अचानक आवासीय बस्तियों में दाखिल हुआ कि किसी को भी संभलने का मौका तक नहीं मिला। लोगों को अपने घरों में रखी जरूरी घरेलू सामग्री, अनाज और दस्तावेज सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए मुश्किल से कुछ मिनटों का समय मिला, जिसके चलते अधिकांश संपत्ति पानी में डूबकर नष्ट हो गई।

राहत शिविरों में शरण लेने को विवश बेघर परिवार

राजाबाड़ी गांव के एक स्थानीय निवासी मंगल ग्वाला ने उस डरावने अनुभव को याद करते हुए बताया कि कैसे उनकी आंखों के सामने सब कुछ जलमग्न हो गया। उन्होंने बताया कि महज साठ मिनट के भीतर उफनती नदी का पानी उनके घरों के भीतर घुस आज की तारीख में भी हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। पानी का स्तर थोड़ा सा कम जरूर हुआ है, लेकिन उनके घर के कमरों के भीतर आज भी घुटनों तक गंदा पानी भरा हुआ है, जिससे वहां रहना असंभव हो गया है। मजबूरन ऐसे तमाम परिवार अपना घर छोड़कर सड़क के किनारे बनाए गए अस्थायी राहत शिविरों में शरण लेने को विवश हैं।

सिर पर छत न होने और भविष्य की अनिश्चितता के बीच इन शिविरों में रह रहे लोगों की मानसिक स्थिति पर भी गहरा असर पड़ रहा है, जिन्हें अब शासन और प्रशासन से केवल एक ही उम्मीद है कि उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित पुनर्वास मिले।

Assam Floods: किसानों और दुकानदारों के सामने आजीविका का बड़ा संकट

राहत शिविरों में जीवन बिता रहे इन बेघर नागरिकों के लिए सामाजिक संगठनों और स्थानीय दानदाताओं द्वारा उपलब्ध कराई जा रही राहत सामग्री ही जीने का एकमात्र सहारा बनी हुई है। हालांकि सरकार की तरफ से भी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन प्रभावितों की विशाल संख्या के आगे ये इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। आपदा की इस विभीषिका के बीच लोगों के भीतर इस बात का संतोष जरूर है कि समाज के विभिन्न वर्गों से आने वाले लोग उनकी सुध ले रहे हैं और समय पर भोजन तथा अन्य जरूरत का सामान पहुंचा रहे हैं। लेकिन यह स्थिति केवल कुछ हफ्तों या महीनों की राहत से संभलने वाली नहीं है, क्योंकि जिन किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और जिन दुकानदारों की दुकानें तबाह हो गई हैं, उनके सामने आने वाले दिनों में आजीविका का गंभीर संकट खड़ा होने वाला है।

Assam Floods: बाढ़ की स्थाई समस्या और दीर्घकालिक पुनर्वास की जरूरत

असम में हर साल आने वाली बाढ़ अब एक स्थाई समस्या का रूप लेती जा रही है, जिससे निपटने के लिए केवल तात्कालिक राहत उपायों से काम नहीं चलने वाला है। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने सरकार के सामने यह मांग भी रखी है कि केवल मुआवजे तक सीमित न रहकर एक दीर्घकालिक और पुख्ता पुनर्वास योजना धरातल पर उतारी जानी चाहिए। नदियों के तटबंधों की मजबूती, जल निकास की आधुनिक व्यवस्था और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए वैज्ञानिक प्लानिंग ही भविष्य में इस तरह के बड़े जान-माल के नुकसान को रोक सकती है। जब तक केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कोई ठोस दीर्घकालिक नीति नहीं बनातीं, तब तक असम के इन इलाकों के लोगों का जीवन हर साल मानसून के मौसम में इसी तरह संकट के भंवर में फंसता रहेगा।

Read MOre Here:- 

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles