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Jharkhand Health Services: झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, रिम्स को 100 करोड़ और रांची सदर अस्पताल में बोन मैरो यूनिट की सौगात

Jharkhand Health Services: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार ने खजाने का मुंह खोल दिया है। राजधानी रांची के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विकास और इलाज की आधुनिक तकनीक को धरातल पर उतारने के लिए बड़े वित्तीय अनुदानों की स्वीकृति दी गई है। इस कड़ी में सबसे बड़ा कदम रांची सदर अस्पताल के भीतर अत्याधुनिक बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट यूनिट स्थापित करने को लेकर उठाया गया है, जिस पर तेरह करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जाएगी। इस नई सुविधा के शुरू होने से राज्य के उन गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी जो रक्त कैंसर या थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और जिन्हें इलाज के लिए अक्सर दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था।

स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार, केवल सदर अस्पताल ही नहीं, बल्कि राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान यानी रिम्स और रिनपास जैसे बड़े संस्थानों को भी भारी-भरकम आर्थिक मदद पहुंचाई गई है। इसके साथ ही मैदानी स्तर पर काम करने वाली सहियाओं के प्रोत्साहन भत्ते का भी पूरा ख्याल रखा गया है, जिससे स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा।

Jharkhand Health Services: रिम्स के लिए सौ करोड़ का विशेष अनुदान

राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रिम्स को सुचारू रूप से चलाने और उसकी सेवाओं में सुधार के वास्ते एक सौ करोड़ रुपये का भारी अनुदान स्वीकृत किया गया है। इस पूरी राशि का उपयोग रिम्स के संबद्ध संस्थानों के चहुंमुखी विकास के लिए किया जाएगा। साथ ही, इस वित्तीय मदद का एक बड़ा हिस्सा मुख्यमंत्री निश्शुल्क डायग्नोस्टिक एवं रेडियोलाजी जांच योजना के साथ-साथ मुख्यमंत्री निश्शुल्क सर्वाइकल कैंसर एवं ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग योजना के संचालन में खर्च किया जाएगा।

इससे पहले भी रिम्स को सरकार की तरफ से लगभग साढ़े चार सौ करोड़ से ज्यादा का सहायता अनुदान मिल चुका है। उस राशि का इस्तेमाल अत्याधुनिक मशीनें, दवाइयां और अन्य जरूरी मेडिकल उपकरण खरीदने के साथ-साथ चिकित्सकों व अन्य कर्मचारियों के वेतन भुगतान के मद में किया गया था। सरकार का यह प्रयास है कि संस्थान में आने वाले मरीजों को जांच से लेकर इलाज तक किसी प्रकार की वित्तीय बाधा का सामना न करना पड़े।

रांची सदर अस्पताल में खुलेगा बोन मैरो ट्रांसप्लांट का रास्ता

चिकित्सा जगत में इसे एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। रांची सदर अस्पताल परिसर में बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट यूनिट की स्थापना के लिए तेरह करोड़ पैंतालीस लाख रुपये की राशि मंजूर कर ली गई है। विभाग द्वारा तय की गई रूपरेखा के मुताबिक, इस कुल बजट में से चार करोड़ रुपये अस्पताल की संबंधित मंजिल के जीर्णोद्धार, पेंटिंग और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने पर खर्च होंगे, जबकि शेष नौ करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक मशीनरी और ट्रांसप्लांट से जुड़े उच्चस्तरीय उपकरण खरीदे जाएंगे।

वर्तमान समय में सदर अस्पताल के भीतर क्लिनिकल हेमेटालाजी यूनिट पहले से ही सक्रिय है, जहां हर साल एक्यूट ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसी घातक बीमारियों से पीड़ित लगभग एक से डेढ़ सौ बच्चों और व्यस्क मरीजों का उपचार किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो इस श्रेणी के डेढ़ से दो सौ नए रोगी पंजीकरण करा चुके हैं। डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों में इस इलाज की सफलता दर पचास से साठ प्रतिशत और वयस्कों में करीब तीस प्रतिशत तक आंकी गई है।

Jharkhand Health Services: थैलेसीमिया और ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए वरदान

झारखंड जैसे क्षेत्र में थैलेसीमिया और हीमोग्लोबिनोमैथी जैसी बीमारियां काफी बड़े पैमाने पर फैली हुई हैं। इन गंभीर विकारों से जूझ रहे बच्चों और परिवारों के लिए बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट ही इकलौता और अचूक इलाज माना जाता है। सदर अस्पताल में इस यूनिट के चालू हो जाने से न सिर्फ थैलेसीमिया बल्कि ब्लड कैंसर, ए-प्लास्टिक एनीमिया और लिम्फोमा जैसी जटिल रक्त संबंधी बीमारियों का मुमुक्षु इलाज अब राजधानी में ही संभव हो सकेगा।

इसके अलावा, अस्पताल के रक्तकोष यानी ब्लड बैंक के कायाकल्प के लिए भी छत्तीस लाख से अधिक की अलग से स्वीकृति दी गई है, ताकि आपात स्थिति में रक्त की कोई कमी न पड़े। आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मरीजों के इलाज के एवज में अस्पताल को जो राशि प्राप्त होगी, उसका उपयोग मानव संसाधन को मजबूत करने में किया जाएगा, जिसमें डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की आउटसोर्सिंग सेवाएं भी शामिल हैं।

Jharkhand Health Services: रिनपास और सहियाओं के लिए भी खुला खजाना

मानसिक आरोग्य के क्षेत्र में अपनी पहचान रखने वाले केंद्रीय संस्थान रिनपास को भी सरकार ने बड़ी राहत दी है। संस्थान की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पच्चीस करोड़ रुपये का सहायता अनुदान तुरंत प्रभाव से आवंटित कर दिया गया है। इससे मानसिक रोगों के इलाज की व्यवस्था को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

दूसरी तरफ, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली करीब उनतालीस हजार सहियाओं के मानदेय और अतिरिक्त प्रोत्साहन के लिए चौवन करोड़ से अधिक की भारी-भरकम राशि विभिन्न जिलों को भेज दी गई है। इस बजट से केवल प्राथमिक सहियाओं को ही नहीं, बल्कि सहिया साथियों और स्वतंत्र साधन सेवियों को भी उनके प्रोत्साहन भत्ते का नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। स्वास्थ्य महकमे के इन तमाम फैसलों से आने वाले दिनों में राज्य की पूरी चिकित्सा तस्वीर में एक सकारात्मक बदलाव देखने की उम्मीद बंध रही है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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