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Cervical Cancer: सर्वाइकल कैंसर से 95% तक बचाव संभव, एम्स विशेषज्ञ ने बताया सही उम्र में टीकाकरण और स्क्रीनिंग का महत्व

Cervical Cancer: भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के बाद जिस गंभीर बीमारी के आंकड़े सबसे तेजी से डराने वाले रूप में सामने आ रहे हैं, वह है सर्वाइकल कैंसर। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी जागरूकता और सही समय पर उठाए गए कदम से इस जानलेवा बीमारी को काफी हद तक हराया जा सकता है। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), नई दिल्ली के ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीलांचली सिंह के अनुसार, अगर सही समय पर टीकाकरण करवा लिया जाए तो सर्वाइकल कैंसर की आशंका को नब्बे से पपंचानवे प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

Cervical Cancer: आखिर क्या है सर्वाइकल कैंसर और क्यों होता है इसका संक्रमण

सर्वाइकल कैंसर केवल महिलाओं को प्रभावित करने वाली एक गंभीर बीमारी है, जिसकी शुरुआत गर्भाशय के सबसे निचले हिस्से यानी सर्विक्स से होती है। इस घातक स्थिति के पीछे मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) का संक्रमण जिम्मेदार होता है।

यह वायरस मुख्य रूप से यौन संपर्क के जरिए पुरुषों से महिलाओं के शरीर में पहुंचता है। आमतौर पर मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली महिलाओं का शरीर इस वायरस को कुछ महीनों या सालों में खुद-ब-खुद बेअसर कर देता है। लेकिन जिन महिलाओं में इम्युनिटी कमजोर होती है या एचपीवी का हाई-रिस्क संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है, उनमें यह धीरे-धीरे कैंसर का रूप धारण कर लेता है। शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाने पर इसका शत-प्रतिशत इलाज संभव है, लेकिन अंतिम चरणों में पहचान होने पर यह स्थिति जानलेवा साबित हो जाती है।

मामलों में बढ़ोतरी के पीछे की मुख्य वजहें

हाल के वर्षों में सर्वाइकल कैंसर के ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे हैं। इसके दो मुख्य पहलू हैं। पहला यह कि अब देश में जांच और डायग्नोसिस की आधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं, जिससे मामलों की समय पर पहचान हो पा रही है। दूसरा पहलू यह है कि महिलाओं के बीच एचपीवी संक्रमण का प्रसार भी पहले से अधिक देखा जा रहा है।

हालांकि, राहत की बात यह है कि एचपीवी से संक्रमित होने वाली हर महिला में यह बीमारी कैंसर में तब्दील नहीं होती। अधिकतर मामलों में शरीर की आंतरिक प्रतिरक्षा प्रणाली इसे खत्म करने में सक्षम होती है।

टीका लगवाने की सही उम्र और प्रभावशीलता

एचपीवी वैक्सीन इस वायरस के प्रभाव को खत्म करने का सबसे अचूक जरिया है। जब वायरस ही शरीर में टिक नहीं पाएगा, तो कैंसर विकसित होने का रास्ता अपने आप बंद हो जाता है।

वैक्सीनेशन की आदर्श उम्र को लेकर डॉ. सिंह का कहना है कि नौ से चौदह साल की उम्र की लड़कियों के लिए यह टीका सबसे ज्यादा असरदार माना जाता है। इसके अलावा:

  • 16 से 26 वर्ष: इस उम्र की युवतियां भी वैक्सीन लगवाकर इसका पूरा लाभ उठा सकती हैं।
  • 26 से 45 वर्ष: इस आयु वर्ग की महिलाएं भी चिकित्सकीय परामर्श के बाद टीका लगवा सकती हैं। हालांकि इस उम्र में टीके का प्रभाव थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन यह सुरक्षा कवच प्रदान करने में पूरी तरह सक्षम रहता है।
  • 45 वर्ष से कम: कुल मिलाकर पैंतालीस साल से कम उम्र की हर महिला डॉक्टर की सलाह से टीका लगवा सकती है।

दुनिया के कई देशों में व्यापक स्तर पर एचपीवी टीकाकरण अभियान चलाकर इस बीमारी के नए मामलों पर बहुत हद तक रोक लगाई जा चुकी है।

Cervical Cancer: केवल वैक्सीन ही नहीं, 30 के बाद स्क्रीनिंग भी बेहद जरूरी

केवल टीका लगवा लेना ही काफी नहीं है, बल्कि नियमित डॉक्टरी जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। तीस वर्ष की आयु पार करने के बाद हर महिला को नियमित अंतराल पर सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग करानी चाहिए।

इसके लिए मुख्य रूप से दो तरह के परीक्षण किए जाते हैं:

  • पैप स्मीयर टेस्ट (Pap Smear Test): इसके जरिए कोशिकाओं में हो रहे शुरुआती बदलावों को पकड़ा जाता है।
  • एचपीवी टेस्ट (HPV Test): यह टेस्ट शरीर में वायरस की मौजूदगी का सटीक पता लगाता है।

इन जांचों के माध्यम से बीमारी को कैंसर का रूप लेने से बहुत पहले ही पकड़ा जा सकता है, जिससे मरीज को सही और सटीक उपचार मिल पाता है।

Cervical Cancer: इन शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

शरीर में दिखने वाले छोटे-छोटे संकेतों पर समय रहते ध्यान देना किसी भी बड़े खतरे को टाल सकता है। महिलाओं को नीचे दिए गए लक्षणों को लेकर हमेशा सतर्क रहना चाहिए:

  • दो मासिक धर्म (पीरियड्स) की तारीखों के बीच असामान्य रूप से ब्लीडिंग होना।
  • पेल्विक हिस्से में लगातार या हल्का-हल्का दर्द बने रहना।
  • कमर के निचले हिस्से या पैरों में लगातार खिंचाव और दर्द रहना।
  • प्राइवेट पार्ट से असामान्य या दुर्गंधयुक्त डिस्चार्ज होना।

डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि इन लक्षणों का दिखाई देना हमेशा कैंसर ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। ये अन्य सामान्य समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं, लेकिन ऐसी स्थिति बनने पर तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर अपनी जांच करवाना ही समझदारी है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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